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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी की पहल से रायगढ़ में डीएमएफ की सबसे बड़ी पंचवर्षीय विकास योजना तैयार, पहले ही वर्ष 255 करोड़ रुपये से शुरू होंगे 1,251 कार्य

रायगढ़, 14 जून 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व तथा वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में रायगढ़ जिले के खनन प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए एक महत्वाकांक्षी एवं दूरगामी पंचवर्षीय परिप्रेक्ष्य योजना तैयार की गई है। जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफटी) द्वारा वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक की अवधि के लिए तैयार इस व्यापक योजना के अंतर्गत 4,894 विकास कार्यों पर 75,823.45 लाख रुपये का निवेश किया जाएगा। योजना का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करने के साथ-साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका एवं सामाजिक विकास के क्षेत्र में स्थायी परिवर्तन लाना है। विस्तृत सर्वेक्षण एवं वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर तैयार इस योजना को पीएम गति शक्ति पोर्टल तथा ग्राम संपदा पोर्टल से जोड़ा गया है, जिससे कार्यों के क्रियान्वयन, निगरानी एवं मूल्यांकन में पारदर्शिता और प्रभावशीलता सुनिश्चित हो सके।
          योजना के तहत वर्ष 2026-27 में 1,251 कार्यों के लिए 25,555.55 लाख रुपये, वर्ष 2027-28 में 957 कार्यों के लिए 12,875.52 लाख रुपये, वर्ष 2028-29 में 971 कार्यों के लिए 12,444.10 लाख रुपये, वर्ष 2029-30 में 841 कार्यों के लिए 12,504.80 लाख रुपये तथा वर्ष 2030-31 में 874 कार्यों के लिए 12,443.48 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। चरणबद्ध क्रियान्वयन के माध्यम से तत्काल आवश्यकताओं की पूर्ति से लेकर दीर्घकालिक विकास एवं आर्थिक स्थायित्व तक के लक्ष्यों को हासिल किया जाएगा। पंचवर्षीय योजना में शिक्षा क्षेत्र को सर्वाधिक प्राथमिकता देते हुए 1,326 कार्यों के लिए 14,974.52 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत विद्यालय अधोसंरचना, डिजिटल शिक्षा, छात्रावास एवं छात्र सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। भौतिक अधोसंरचना के 444 कार्यों के लिए 13,368.26 लाख रुपये, स्वास्थ्य क्षेत्र के 308 कार्यों के लिए 12,773 लाख रुपये तथा पेयजल आपूर्ति के 697 कार्यों के लिए 10,639.30 लाख रुपये निर्धारित किए गए हैं। महिला एवं बाल विकास के 1,181 कार्यों पर 5,725.44 लाख रुपये व्यय किए जाएंगे। वहीं कृषि क्षेत्र के 139 कार्यों के लिए 5,555.97 लाख रुपये, पशुपालन के 279 कार्यों के लिए 4,054.68 लाख रुपये तथा कौशल विकास के 199 कार्यों के लिए 3,291.52 लाख रुपये, सिंचाई के 50 कार्यों के लिए 1640.72 लाख रुपये, पर्यावरण संरक्षण के 18 कार्य के लिए 1,419.52 लाख रुपये, स्वच्छता के 222 कार्य के लिए 1,178.90 लाख, वृद्ध एवं दिव्यांगजन कल्याण के 1 कार्य के लिए 904.00 लाख रुपये, ऊर्जा एवं वाटरशेड विकास के 29 कार्य के लिए 172.58 लाख तथा परियोजना प्रबंधन इकाई के 1 कार्य के लिए 125.00 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।
          योजना के प्रथम वर्ष 2026-27 को क्रियान्वयन का निर्णायक वर्ष माना गया है। इस दौरान 25,555.55 लाख रुपये की लागत से 1,251 विकास कार्य प्रारंभ किए जाएंगे। शिक्षा क्षेत्र में 337 कार्यों के लिए 4,891.08 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके अंतर्गत धरमजयगढ़ में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) की स्थापना के लिए 640 लाख रुपये, मॉडल पब्लिक ट्रेनिंग सेंटर के लिए 800 लाख रुपये, चार सार्वजनिक पुस्तकालयों की स्थापना, चार नवीन आदिवासी छात्रावासों के निर्माण हेतु 496.80 लाख रुपये, 99 नए स्कूल भवन एवं अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के लिए 1,000 लाख रुपये तथा 144 विद्यालयों के जीर्णोद्धार हेतु 300 लाख रुपये व्यय किए जाएंगे। भौतिक अधोसंरचना क्षेत्र में 141 कार्यों के लिए 4,338.06 लाख रुपये निर्धारित किए गए हैं। इसके अंतर्गत सुकरी से कटकलिया मार्ग का निर्माण 411.05 लाख रुपये तथा बारमूड़ा से उकसापाली मार्ग का निर्माण 342.40 लाख रुपये की लागत से किया जाएगा। साथ ही 130 पुल-पुलियों एवं सड़क संपर्क कार्यों पर 1,525 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में 56 कार्यों पर 3,505.41 लाख रुपये निवेश किए जाएंगे। धरमजयगढ़ में एक एग्रो प्रोसेसिंग क्लस्टर तथा एक औषधीय जड़ी-बूटी प्रसंस्करण इकाई की स्थापना पर क्रमशः 1,000-1,000 लाख रुपये व्यय किए जाएंगे। इसके अलावा पांच फसल भंडारण गोदामों के निर्माण हेतु 420 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।
           स्वास्थ्य क्षेत्र में 109 कार्यों पर 3,280.40 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके तहत 50 बिस्तरीय न्यूट्रिशनल रिहैबिलिटेशन सेंटर एवं नवजात शिशु देखभाल इकाई की स्थापना के लिए 768 लाख रुपये, सिविल अस्पताल धरमजयगढ़ के उन्नयन के लिए 528 लाख रुपये, एक मॉडल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए 280 लाख रुपये तथा 50 नए स्वास्थ्य भवन एवं अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के लिए 750 लाख रुपये निर्धारित किए गए हैं। पेयजल एवं स्वच्छता क्षेत्र में 262 कार्यों के लिए 3,144.20 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। कुमरता समूह जल प्रदाय योजना पर 1,982.40 लाख रुपये व्यय होंगे। इसके अतिरिक्त 104 पाइपलाइन विस्तार कार्यों के लिए 312 लाख रुपये, 54 ग्रामीण नाली निर्माण एवं जल निकासी कार्यों के लिए 430 लाख रुपये तथा 42 सार्वजनिक एवं घरेलू शौचालयों के निर्माण के लिए 77.60 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। महिला एवं बाल विकास तथा संवेदनशील वर्गों के कल्याण हेतु 185 कार्यों पर 2,204 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। सीनियर सिटीजन वेलनेस सेंटर की स्थापना के लिए 904 लाख रुपये, 51 आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण एवं जीर्णोद्धार के लिए 500 लाख रुपये, आठ रेडी-टू-ईट पूरक पोषण इकाइयों के लिए 460 लाख रुपये तथा 100 आंगनबाड़ियों में पोषण वाटिका निर्माण के लिए 240 लाख रुपये निर्धारित किए गए हैं। आजीविका, कौशल विकास और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े 160 कार्यों के लिए 4,067.40 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। खनन प्रभावित क्षेत्रों के आईटीआई संस्थानों के आधुनिकीकरण हेतु 412 लाख रुपये, 25 पशु चिकित्सा एवं कृत्रिम गर्भाधान केंद्रों के लिए 375 लाख रुपये, नगाई जलाशय के जीर्णोद्धार के लिए 360 लाख रुपये तथा तमनार में पर्यावरण संरक्षण उद्यान के निर्माण हेतु 200 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।
          योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए इसे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन तथा प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना जैसी प्रमुख राष्ट्रीय योजनाओं के साथ अभिसरित किया गया है। साथ ही 125 लाख रुपये की लागत से एक समर्पित परियोजना प्रबंधन इकाई स्थापित की जाएगी, जो जियो-टैगिंग, डिजिटल डैशबोर्ड, मुख्य प्रदर्शन संकेतकों और नियमित समीक्षा के माध्यम से सभी कार्यों की सतत निगरानी करेगी। यह पंचवर्षीय परिप्रेक्ष्य योजना खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास की नई दिशा तय करते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी सुविधाओं, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन का आधार बनेगी तथा समावेशी एवं सतत विकास के नए मानक स्थापित करेगी।

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डीएमएफ की 4.19 करोड़ की ऐतिहासिक सौगात: खरसिया-घरघोड़ा में बनेंगे 9 हजार मीट्रिक टन क्षमता के पांच आधुनिक गोदाम, किसानों को मिलेगा सुरक्षित भंडारण और बेहतर दाम का बड़ा लाभ

रायगढ़, 14 जून 2026/ खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के साथ-साथ कृषि क्षेत्र को भी नई मजबूती देने की दिशा में रायगढ़ जिले को एक और बड़ी सौगात मिली है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) रायगढ़ द्वारा कृषि अधोसंरचना के विकास के लिए 4 करोड़ 19 लाख 52 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है। इस राशि से जिले में कुल 9 हजार मीट्रिक टन क्षमता वाले पांच आधुनिक गोदामों एवं कार्यालय भवनों का निर्माण कराया जाएगा, जिससे किसानों को अपनी उपज के सुरक्षित भंडारण और बेहतर विपणन की सुविधा उपलब्ध होगी। वित्तीय वर्ष 2026-27 में कृषि एवं अन्य संबद्ध गतिविधियां सेक्टर के अंतर्गत उच्च प्राथमिकता वाले कार्य के रूप में स्वीकृत इस परियोजना के तहत पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कार्यपालन अभियंता, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग रायगढ़ को कार्य एजेंसी बनाया गया है। सभी निर्माण कार्यों को एक वर्ष अर्थात 365 दिनों में पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
         परियोजना के तहत विकासखंड खरसिया के ग्राम पंचायत टेमटेमा में 1800 मीट्रिक टन क्षमता वाले चार गोदामों का निर्माण किया जाएगा। इनमें गोदाम क्रमांक-01 एवं कार्यालय भवन निर्माण के लिए 85 लाख 17 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जबकि गोदाम क्रमांक-02, 03 और 04 के निर्माण हेतु प्रत्येक के लिए 79 लाख 15 हजार रुपये की मंजूरी प्रदान की गई है। इसी प्रकार विकासखंड घरघोड़ा में 1800 मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदाम एवं कार्यालय भवन निर्माण कार्य के लिए 96 लाख 90 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन आधुनिक भंडारण सुविधाओं के निर्माण से किसानों को अपनी उपज सुरक्षित रखने की बेहतर व्यवस्था मिलेगी। इससे फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी आएगी, भंडारण क्षमता बढ़ेगी तथा किसानों को उपज बेचने के लिए उचित समय का इंतजार करने का अवसर मिलेगा। कृषि उत्पादों के संग्रहण, संरक्षण और विपणन की सुविधाएं मजबूत होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।
          जिला प्रशासन ने परियोजनाओं के गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कार्य स्थल पर स्थायी सूचना फलक लगाना अनिवार्य किया गया है, जिसमें योजना का नाम, स्वीकृत राशि, डीएमएफ का लोगों तथा कार्य प्रारंभ और पूर्णता की जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। निर्माण कार्य की प्रत्येक अवस्था की फोटोग्राफी तथा नियमित प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करना भी अनिवार्य होगा। निर्माण गुणवत्ता पर विशेष जोर देते हुए निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी स्तर पर गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर सुधार कार्य का पूरा व्यय संबंधित कार्य एजेंसी द्वारा वहन किया जाएगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि निर्माण के लिए चयनित भूमि विवाद रहित हो तथा किसी भी प्रकार की वन भूमि या न्यायालयीन प्रतिबंध वाली भूमि का उपयोग न किया जाए। कृषि अधोसंरचना को मजबूत बनाने की यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि रायगढ़ जिले में कृषि आधारित आर्थिक गतिविधियों को भी नई दिशा प्रदान करेगी।

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ग्रामीण शिक्षा को नई उड़ानः डीएमएफ मद से लैलूंगा के तोलमा में बनेगा 77.32 लाख रुपये की लागत से हायर सेकेंडरी स्कूल भवन

रायगढ़, 14 जून 2026/ ग्रामीण और खनन प्रभावित क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर शिक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व तथा प्रदेश के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से रायगढ़ जिले के विकासखंड लैलूंगा अंतर्गत ग्राम पंचायत तोलमा में नए शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल भवन के निर्माण के लिए 77.32 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। यह परियोजना न केवल क्षेत्र के विद्यार्थियों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराएगी, बल्कि ग्रामीण अंचल में शिक्षा के स्तर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के साथ-साथ युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव भी रखेगी।
               जिला खनिज संस्थान न्यास द्वारा स्वीकृत यह परियोजना रायगढ़ जिले के शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। प्रशासनिक स्वीकृति के अनुसार विकासखंड लैलूंगा के ग्राम पंचायत तोलमा में आधुनिक सुविधाओं से युक्त शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल भवन का निर्माण कराया जाएगा। खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए गठित डीएमएफ निधि का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए किया जा रहा है। इस नए विद्यालय भवन के निर्माण से तोलमा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने के लिए बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे न केवल विद्यार्थियों की पढ़ाई का स्तर सुधरेगा, बल्कि क्षेत्र में शिक्षा के प्रति जागरूकता और अवसर भी बढ़ेंगे। 
         11 मई 2026 को आयोजित डीएमएफ ट्रस्ट की शासी परिषद की बैठक में इस परियोजना को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद 27 मई को तकनीकी स्वीकृति और 2 जून 2026 को प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई। इस परियोजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 में शिक्षा क्षेत्र के अंतर्गत उच्च प्राथमिकता वाले कार्य के रूप में शामिल किया गया है। स्वीकृत परियोजना के अनुसार विद्यालय भवन का निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग, रायगढ़ संभाग द्वारा कराया जाएगा। विभाग को कार्य प्रारंभ होने की तिथि से 365 दिनों के भीतर निर्माण पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है। 

*पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही के लिए सख्त निर्देश जारी*

डीएमएफ शासी परिषद ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कार्य एजेंसी को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। कार्यस्थल पर स्थायी सूचना फलक लगाना अनिवार्य होगा, जिसमें योजना का नाम, स्वीकृत राशि, डीएमएफ का लोगो तथा कार्य प्रारंभ एवं पूर्णता की तिथि स्पष्ट रूप से अंकित होगी। इसके अलावा निर्माण कार्य के प्रत्येक चरण में भौतिक सत्यापन और फोटोग्राफी अनिवार्य की गई है। कार्य प्रारंभ होने से पहले, निर्माण अवधि के दौरान और कार्य पूर्ण होने पर विभिन्न कोणों से फोटोग्राफ प्रस्तुत करने होंगे। कार्य प्रगति और व्यय की मासिक रिपोर्ट प्रत्येक माह की 5 तारीख तक डीएमएफ कार्यालय को भेजना भी अनिवार्य किया गया है। वित्तीय अनुशासन को लेकर भी स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। स्वीकृत राशि का उपयोग केवल इसी परियोजना के लिए किया जाएगा। किसी प्रकार की अनियमितता, राशि के दुरुपयोग या स्वीकृत लागत से अधिक व्यय होने पर संबंधित एजेंसी पूरी तरह जिम्मेदार होगी। वहीं निरीक्षण के दौरान गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर सुधार कार्य का पूरा खर्च भी एजेंसी को स्वयं वहन करना पड़ेगा। यह परियोजना छत्तीसगढ़ सरकार की उस व्यापक सोच का हिस्सा है, जिसके तहत खनन प्रभावित क्षेत्रों में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग सीधे स्थानीय समुदायों के सामाजिक और शैक्षणिक उत्थान के लिए किया जा रहा है। नए विद्यालय भवन के निर्माण से आने वाले वर्षों में हजारों विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा सुविधाओं का लाभ मिलेगा और क्षेत्र का शैक्षणिक विकास नई गति प्राप्त करेगा।

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रायगढ़ में अपराधियों पर बड़ा शिकंजा कसने की तैयारी, एसएसपी शशि मोहन सिंह की क्राइम मीटिंग में बाइक चोरों, फरार आरोपियों और अवैध कारोबारियों के खिलाफ विशेष अभियान के सख्त निर्देश

रायगढ़। जिले में बढ़ते अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण और लंबित मामलों के शीघ्र निराकरण को लेकर रायगढ़ पुलिस एक्शन मोड में नजर आ रही है। शनिवार को पुलिस नियंत्रण कक्ष में आयोजित मासिक अपराध समीक्षा बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) शशि मोहन सिंह ने जिले के सभी राजपत्रित अधिकारियों, थाना एवं चौकी प्रभारियों तथा शाखा प्रभारियों के साथ अपराधों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में प्रशिक्षणरत उप निरीक्षक भी मौजूद रहे।

बैठक की शुरुआत में एसएसपी ने बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक द्वारा प्रस्तावित जिला निरीक्षण की तैयारियों की समीक्षा करते हुए सभी अधिकारियों को समय-सीमा के भीतर आवश्यक व्यवस्थाएं पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने थाना एवं कार्यालय परिसरों की साफ-सफाई, अभिलेखों के संधारण और निरीक्षण संबंधी दस्तावेजों को अद्यतन रखने पर विशेष जोर दिया।

लंबित मामलों के शीघ्र निराकरण पर जोर

अपराध समीक्षा के दौरान एसएसपी ने पिछले माह दर्ज हुए नए मामलों के साथ-साथ लंबित प्रकरणों की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने गंभीर अपराधों की जांच में तेजी लाने तथा गुणवत्तापूर्ण विवेचना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। एसएसपी ने स्पष्ट कहा कि लंबित मामलों का समयबद्ध निराकरण पुलिस की प्राथमिकता होनी चाहिए और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

बाइक चोरी की घटनाओं पर चिंता, विशेष रणनीति बनाने के निर्देश

बैठक में जिले में सामने आ रही बाइक चोरी की घटनाओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई। एसएसपी ने इस प्रकार की घटनाओं पर चिंता जताते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, नगर पुलिस अधीक्षक, साइबर थाना एवं शहरी थाना प्रभारियों को वाहन चोर गिरोहों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने तकनीकी संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने, पुराने वाहन चोरों की गतिविधियों पर नजर रखने तथा चोरी के वाहनों की खरीद-फरोख्त से जुड़े अवैध कबाड़ कारोबारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने को कहा।

‘ऑपरेशन क्लीन हंट’ के तहत फरार आरोपियों की धरपकड़ होगी तेज

फरार आरोपियों और स्थायी वारंटियों की गिरफ्तारी को लेकर एसएसपी ने विशेष अभियान को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने थाना प्रभारियों से कहा कि पहले से रणनीति तैयार कर जरूरत पड़ने पर अन्य जिलों और राज्यों में भी पुलिस टीम भेजी जाए। "ऑपरेशन क्लीन हंट" के तहत अधिक से अधिक फरार आरोपियों और वारंटियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।

महिला अपराधों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

महिला संबंधी अपराधों की समीक्षा के दौरान एसएसपी ने महिला थाना की कार्यप्रणाली की सराहना की। उन्होंने सभी थाना प्रभारियों को निर्देशित किया कि महिला अपराधों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई की जाए और निर्धारित समय-सीमा के भीतर अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किए जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।

अवैध शराब, गांजा, जुआ-सट्टा और असामाजिक गतिविधियों पर रहेगा फोकस

बैठक में अपराध नियंत्रण के लिए माइनर एक्ट के तहत अधिक से अधिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। एसएसपी ने कहा कि बदमाशों की नियमित जांच और निगरानी से अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने "ऑपरेशन आघात" के तहत अवैध शराब, गांजा तथा अन्य नशे के कारोबार के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए। साथ ही जुआ, सट्टा और वेश्यावृत्ति जैसी अवैध गतिविधियों पर भी प्रभावी प्रहार करने को कहा।

बाजार क्षेत्रों में बढ़ेगी पुलिस निगरानी

एसएसपी ने थाना प्रभारियों को बीट आरक्षकों से नियमित फीडबैक लेने और बाजार क्षेत्रों में सशस्त्र जवानों की तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि पुलिस की सक्रिय मौजूदगी से अपराधों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और आम लोगों में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी।

नए आपराधिक कानूनों के पालन पर विशेष जोर

बैठक में भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के तहत थानों में रखे जाने वाले आवश्यक रजिस्टरों की भी समीक्षा की गई। एसएसपी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी रजिस्टरों का विधिवत संधारण सुनिश्चित किया जाए तथा समय-समय पर उनकी जांच भी की जाए। विवेचकों को नेटग्रिड और काईमैक्स पोर्टल का प्रभावी उपयोग करने तथा तकनीकी समस्याओं की स्थिति में साइबर एवं सीसीटीएनएस शाखा से सहयोग लेने को कहा गया।

प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को दिया व्यवहारिक प्रशिक्षण का मंत्र

बैठक में मौजूद प्रशिक्षणरत उप निरीक्षकों को संबोधित करते हुए एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि मैदानी अनुभव भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने प्रशिक्षुओं को थाना प्रभारियों और विवेचकों के साथ रहकर प्रत्येक कार्रवाई को नजदीक से समझने और सीखने की सलाह दी।

क्राइम मीटिंग के बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी एवं डीएसपी सुशांतो बनर्जी ने प्रशिक्षु अधिकारियों की अलग से बैठक लेकर उनके प्रशिक्षण की समीक्षा की तथा विभिन्न शाखाओं और थानों में प्रशिक्षण अवधि के दौरान सक्रिय सहभागिता के साथ कार्य सीखने के लिए प्रेरित किया।

एसएसपी का स्पष्ट संदेश

बैठक के दौरान एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि "प्रभावी पुलिसिंग का मूल आधार सक्रिय निगरानी, त्वरित कार्रवाई और प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करना है। अपराध नियंत्रण के लिए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करना होगा।"

बैठक में जिले के सभी राजपत्रित अधिकारी, थाना एवं चौकी प्रभारी तथा विभिन्न शाखाओं के प्रभारी उपस्थित रहे। रायगढ़ पुलिस की इस समीक्षा बैठक को आने वाले समय में जिले में अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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पहले खुद को बताया कुंवारा, प्रेमजाल में फंसाकर बनाया शारीरिक संबंध, गर्भवती होने पर छोड़ा साथ; सच सामने आने पर दी जान से मारने की धमकी,24 घंटे में आरोपी गिरफ्तार

रायगढ़। महिलाओं के विरुद्ध अपराधों पर सख्त कार्रवाई के तहत चलाए जा रहे “अभियान संवेदना” के अंतर्गत पूंजीपथरा पुलिस ने दुष्कर्म के एक गंभीर मामले का खुलासा करते हुए आरोपी को महज 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। आरोपी ने युवती को शादी का झांसा देकर लंबे समय तक उसका शारीरिक शोषण किया और बाद में विवाह से इनकार कर दिया।

पुलिस के अनुसार, धरमजयगढ़ क्षेत्र की 22 वर्षीय युवती ने 11 जून 2026 को थाना पूंजीपथरा में शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़िता ने बताया कि फरवरी 2025 में उसकी पहचान इंस्टाग्राम के माध्यम से सागर सारथी नामक युवक से हुई थी। आरोपी ने स्वयं को अविवाहित बताते हुए प्रेम संबंध स्थापित किया और विवाह का भरोसा देकर युवती को अपने झांसे में लिया।

शिकायत के अनुसार, 23 जुलाई 2025 को आरोपी ने युवती को तराईमाल स्थित अपने मजदूर क्वार्टर बुलाया, जहां पत्नी बनाकर रखने और शादी करने का वादा कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद आरोपी लगातार युवती को अपने साथ रखकर उसका दैहिक शोषण करता रहा।

पीड़िता ने बताया कि अगस्त 2025 में गर्भवती होने पर आरोपी ने उसका पालन-पोषण करने में असमर्थता जताते हुए उसे वापस उसके घर भेज दिया। इसके बावजूद वह युवती के संपर्क में बना रहा और विवाह का आश्वासन देता रहा। बाद में आरोपी ने खुलासा किया कि वह पहले से विवाहित है और उसकी पहली पत्नी भी गर्भवती है। इतना ही नहीं, उसने युवती को कहीं और विवाह तय होने की बात कहने के लिए दबाव बनाया तथा विरोध करने पर जान से मारने की धमकी भी दी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना पूंजीपथरा में अपराध क्रमांक 141/2026 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 69 एवं 351(3) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया। महिला पुलिस अधिकारी द्वारा पीड़िता का बयान दर्ज कर चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी एवं डीएसपी सुशांतो बनर्जी के मार्गदर्शन में गठित टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी सागर सारथी को सिंघल पावर प्लांट लेबर कॉलोनी, तराईमाल से हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने युवती के साथ प्रेम संबंध और उसे गर्भवती करने की बात स्वीकार की। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।

गिरफ्तार आरोपी सागर सारथी (25 वर्ष) ग्राम चांदागढ़ (तमता), तहसील पत्थलगांव, जिला जशपुर का निवासी है और वर्तमान में सिंघल पावर प्लांट लेबर कॉलोनी, तराईमाल में रह रहा था।

इस कार्रवाई में थाना प्रभारी पूंजीपथरा निरीक्षक रामकिंकर यादव, उप निरीक्षक दिलीप बेहरा एवं थाना स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वालों के विरुद्ध सख्त और त्वरित कार्रवाई जारी रहेगी।

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रायगढ़ में लूटपाट मचाने वाले बदमाशों पर पुलिस का बड़ा प्रहार: 2 घंटे के भीतर सुराग, जोगीडीपा के दो आरोपी गिरफ्तार, लूटी गई बाइक-मोबाइल और चाकू बरामद

रायगढ़। शहर में लगातार दो लूट की वारदातों को अंजाम देकर आम लोगों में भय का माहौल बनाने वाले दो आरोपियों को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जोगीडीपा निवासी सन्नी उर्फ प्रकाश कुमार सारथी और शाहीद सारथी ने 10 जून की रात अलग-अलग स्थानों पर एक मोटरसाइकिल चालक से नकदी और बाइक लूटने तथा दूसरे युवक से मोबाइल फोन छीनने की वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से लूटी गई मोटरसाइकिल, मोबाइल फोन और वारदात में प्रयुक्त चाकू बरामद कर लिया है।

पुलिस के अनुसार पहली घटना रात करीब 10 बजे गंगाराम तालाब जोगीडीपा के पास हुई। चांदमारी निवासी किशन साहू अपने मित्र के साथ मोटरसाइकिल से घर लौट रहा था, तभी आरोपियों ने रास्ता रोककर गाली-गलौज की, जेब से नकदी छीनी और बाइक लूटने का प्रयास किया। विरोध करने पर मारपीट की गई तथा चाकू से हमला कर मोटरसाइकिल लेकर फरार हो गए।

इसके कुछ ही देर बाद दूसरी घटना इंदिरानगर क्षेत्र में हुई, जहां अभिषेक नागराज को घर के पास रोककर आरोपियों ने चाकू दिखाते हुए पैसे मांगे। पैसे नहीं होने पर उसके साथ मारपीट कर POCO C75 5G मोबाइल फोन लूट लिया गया।

लगातार हुई इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं नगर पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन में कोतवाली पुलिस ने मुखबिर सूचना के आधार पर दोनों आरोपियों के घर दबिश देकर उन्हें हिरासत में लिया।

पूछताछ में दोनों आरोपियों ने दोनों लूट की वारदातों को स्वीकार कर लिया। आरोपी सन्नी उर्फ प्रकाश कुमार सारथी के पास से लूटी गई मोटरसाइकिल और घटना में प्रयुक्त लोहे का चाकू बरामद किया गया, जबकि शाहीद सारथी के कब्जे से लूटा गया मोबाइल फोन जब्त किया गया।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक सुखनंदन पटेल सहित कोतवाली थाना स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

एसएसपी का सख्त संदेश

"लूटपाट और आमजन में भय का वातावरण निर्मित करने वाले असामाजिक तत्वों के विरुद्ध रायगढ़ पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।"

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बड़े देवगांव में बंद पड़ा गोबर गैस संयंत्र फिर हुआ जीवंत, अब घर-घर पहुंचेगी स्वच्छ ऊर्जा; रसोई गैस खर्च में मिलेगी राहत और पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा नया बल

रायगढ़, 13 जून 2026/ जिले में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ग्राम बड़े देवगांव, जनपद पंचायत खरसिया स्थित गोबर गैस (बायोगैस) संयंत्र को पुनः क्रियाशील किया गया। मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत रायगढ़ के मार्गदर्शन में संयंत्र का विस्तृत स्थल निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान क्रेडा की तकनीकी टीम, जिला पंचायत रायगढ़ के एपीओ तथा संबंधित ग्राम पंचायत के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
           निरीक्षण के दौरान संयंत्र की वर्तमान स्थिति, तकनीकी खामियों तथा संचालन संबंधी आवश्यकताओं का परीक्षण किया गया। अधिकारियों एवं तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा संयुक्त रूप से संयंत्र की कार्यप्रणाली का मूल्यांकन कर आवश्यक सुधार कार्य किए गए, जिससे लंबे समय से प्रभावित संचालन को पुनः सुचारु बनाया जा सका। तकनीकी परीक्षण एवं आवश्यक मरम्मत कार्य पूर्ण होने के बाद गोबर गैस संयंत्र को सफलतापूर्वक पुनः चालू किया गया। संयंत्र से उत्पादित बायोगैस का उपयोग कर चूल्हे का संचालन किया गया, जिसके माध्यम से गैस आपूर्ति की वास्तविक स्थिति का परीक्षण एवं सत्यापन भी किया गया। परीक्षण के दौरान चूल्हा सुचारु रूप से संचालित हुआ, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि संयंत्र अब पूर्ण रूप से कार्यशील स्थिति में है। 
            अधिकारियों ने बताया कि बायोगैस संयंत्रों की नियमित जांच, समय-समय पर रखरखाव तथा कार्यक्षमता का सत्यापन अत्यंत आवश्यक है। इससे संयंत्रों का सतत संचालन सुनिश्चित होता है और हितग्राहियों को लंबे समय तक स्वच्छ एवं किफायती ऊर्जा का लाभ मिलता है। साथ ही यह पर्यावरण संरक्षण और जैविक अपशिष्टों के वैज्ञानिक प्रबंधन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस अवसर पर संयंत्र से जुड़े हितग्राहियों एवं ग्रामीणों को बायोगैस संयंत्र के नियमित संचालन, गोबर की निर्धारित मात्रा में आपूर्ति तथा आवश्यक रखरखाव संबंधी विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। उन्हें बताया गया कि संयंत्र के बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रतिदिन पर्याप्त मात्रा में गोबर डालना, गैस पाइपलाइन की नियमित जांच करना तथा किसी भी तकनीकी समस्या की सूचना समय पर संबंधित विभाग को देना आवश्यक है। ग्रामीणों ने संयंत्र के पुनः शुरू होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे उन्हें स्वच्छ ईंधन उपलब्ध होगा, रसोई गैस पर निर्भरता कम होगी तथा ईंधन संबंधी खर्च में भी कमी आएगी।

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से ग्रामीणों को बड़ी सौगात: छह विकासखंडों के 26 गांवों में नए पीडीएस भवनों का निर्माण, भंडारण और आपूर्ति तंत्र होगा हाईटेक

रायगढ़, 13 जून 2026/ ग्रामीण अंचलों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक मजबूत बनाने जिला खनिज संस्थान न्यास अंतर्गत जिले के छह विकासखंडों में 26 नवीन सार्वजनिक वितरण प्रणाली भवनों के निर्माण हेतु 3 करोड़ 58 लाख 84 हजार रूपए से अधिक की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है। यह स्वीकृति डी.एम.एफ. शासी परिषद की आयोजित बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुपालन में प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा ग्रामीण विकास एवं बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को लगातार प्राथमिकता दी जा रही है। इसी क्रम में वित्त मंत्री श्री ओ.पी.चौधरी के मार्गदर्शन में लैलूंगा, खरसिया, धरमजयगढ़, घरघोड़ा, रायगढ़ एवं तमनार विकासखंडों की ग्राम पंचायतों में यह निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं।
           वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंतर्गत “कृषि उत्पादों के संग्रहण, भंडारण एवं प्रसंस्करण इकाई के प्रोत्साहन” सेक्टर में स्वीकृत इन कार्यों के तहत लैलूंगा विकासखंड की 5 ग्राम पंचायतों (तोलगे, गहनाझरिया, जतरा, झगरपुर एवं लमडांड) में पी.डी.एस. भवन/गोदाम निर्माण हेतु 74.00 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। खरसिया विकासखंड की 5 ग्राम पंचायतों (भैनापारा, चोंढा, नहरपाली, जोबी एवं मीनगाँव) हेतु 62.00 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं। धरमजयगढ़ विकासखंड की 4 ग्राम पंचायतों (वैरागी, क्रिन्धा, पखनाकोट एवं तरेकेला) हेतु 50.40 लाख रुपए, घरघोड़ा विकासखंड की 4 ग्राम पंचायतों (छर्राटांगर, बड़े गुमड़ा, डेहरीडीह एवं नवागढ़) हेतु 53.24 लाख रुपए, रायगढ़ विकासखंड की 4 ग्राम पंचायतों (बंगुरसिया, कोटमार, पतरापाली एवं कुशवाबहरी) हेतु 59.20 लाख रुपए तथा तमनार विकासखंड की 4 ग्राम पंचायतों (नुनदरहा, डोलेसरा, बिजना एवं जांजगीर) हेतु 59.20 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।  
           इन सभी निर्माण कार्यों के क्रियान्वयन हेतु संबंधित जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को कार्य एजेंसी नियुक्त किया गया है। कार्यों में पारदर्शिता, गुणवत्ता एवं समयबद्धता सुनिश्चित करने हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। स्वीकृत राशि का उपयोग केवल निर्धारित कार्यों के लिए ही किया जाएगा तथा भंडार क्रय नियम 2002 का कड़ाई से पालन अनिवार्य होगा। प्रत्येक निर्माण स्थल पर योजना का नाम, स्वीकृत राशि, डी.एम.एफ. लोगो तथा कार्य प्रारंभ एवं पूर्णता तिथि सहित स्थायी सूचना फलक लगाना अनिवार्य किया गया है, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। गुणवत्ता में किसी भी स्तर पर कमी पाए जाने पर सुधार कार्य का संपूर्ण व्यय संबंधित कार्य एजेंसी द्वारा वहन किया जाएगा। साथ ही प्रत्येक कार्य की प्रगति एवं व्यय का मासिक प्रतिवेदन प्रत्येक माह की 5 तारीख तक जिला खनिज संस्थान न्यास, रायगढ़ को प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। इन 26 नवीन पी.डी.एस. भवनों के निर्माण से जिले की सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूती मिलेगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में भंडारण एवं आपूर्ति व्यवस्था अधिक प्रभावी एवं सुव्यवस्थित होगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होगा।

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ग्रामीण आजीविका को मिलेगा नया आधार, आधुनिक बकरी-मुर्गी पालन मॉडल से सशक्त होंगे ग्रामीण ,7 ग्राम पंचायतों में स्वीकृत हुए आधुनिक बकरी पालन शेड

रायगढ़, 13 जून 2026/ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने, पशुपालकों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करने तथा रोजगार के नए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा महत्वपूर्ण पहल की गई है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत जिले की 7 ग्राम पंचायतों में लगभग 3 लाख रुपये प्रति इकाई की लागत से आधुनिक बकरी पालन शेड स्वीकृत किए गए हैं। यह पहल ग्रामीण परिवारों को पारंपरिक पशुपालन से आगे बढ़ाकर वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक पशुपालन की दिशा में प्रेरित करेगी।
            बकरी पालन ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से आजीविका का एक प्रमुख साधन रहा है, लेकिन उपयुक्त आवासीय संरचना और वैज्ञानिक प्रबंधन के अभाव में पशुपालकों को अक्सर आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है। नई योजना के तहत आधुनिक सुविधाओं से युक्त शेडों का निर्माण कर पशुपालकों को सुरक्षित एवं टिकाऊ पशुपालन व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उनकी आय और उत्पादन क्षमता दोनों में वृद्धि होगी।

*वैज्ञानिक मॉडल पर होगा निर्माण, पशुओं को मिलेगी मौसम और बीमारियों से सुरक्षा*

स्वीकृत बकरी पालन शेडों का निर्माण वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप ऊंचे एवं सुरक्षित प्लेटफॉर्म पर किया जाएगा। इससे पशुओं को वर्षा, जलभराव, अत्यधिक गर्मी तथा अन्य प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों से सुरक्षा मिलेगी। शेडों में पर्याप्त वेंटिलेशन, स्वच्छ वातावरण, जल निकासी व्यवस्था और पशुओं के सुरक्षित रख-रखाव के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर आवासीय सुविधाएं मिलने से पशुओं में संक्रमण और बीमारियों की संभावना कम होगी, जिससे उनकी मृत्यु दर में कमी आएगी। साथ ही पशुओं की वृद्धि दर, प्रजनन क्षमता तथा उत्पादन में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। इससे पशुपालकों को पशुधन से अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त होगा और उनके व्यवसाय की स्थिरता बढ़ेगी।

*एक ही परिसर में बकरी और देशी मुर्गी पालन, आय के खुलेंगे कई नए रास्ते*

इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे केवल बकरी पालन तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे एकीकृत आजीविका मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। आधुनिक बकरी शेडों के नीचे देशी मुर्गी पालन की व्यवस्था भी की जाएगी, जिससे एक ही परिसर में दो अलग-अलग आजीविका गतिविधियों का संचालन संभव हो सकेगा। बकरी पालन से जहां दूध, खाद एवं पशुधन बिक्री के माध्यम से आय प्राप्त होगी, वहीं देशी मुर्गी पालन से अंडा एवं मांस उत्पादन के जरिए अतिरिक्त आमदनी के अवसर मिलेंगे। इससे ग्रामीण परिवारों को कम लागत में बहुआयामी आय स्रोत उपलब्ध होंगे। यह मॉडल विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए लाभकारी साबित होगा, क्योंकि इससे सीमित संसाधनों में अधिक उत्पादन और बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सकेगा।

*रोजगार, स्थायी परिसंपत्ति और आर्थिक सशक्तिकरण का बनेगा नया उदाहरण*

योजना के अंतर्गत केवल संरचनाओं का निर्माण ही नहीं किया जाएगा, बल्कि पशुपालकों को हरे चारे की उपलब्धता, संतुलित पूरक आहार, नियमित टीकाकरण, पशु स्वास्थ्य सेवाओं तथा वैज्ञानिक पशुपालन तकनीकों की जानकारी भी प्रदान की जाएगी। इससे पशुपालकों की दक्षता बढ़ेगी और वे अपने व्यवसाय को अधिक लाभकारी बना सकेंगे। जिला प्रशासन द्वारा संबंधित ग्राम पंचायतों में कार्यों के गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मनरेगा के माध्यम से निर्मित यह एकीकृत बकरी एवं मुर्गी पालन मॉडल ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन, स्थायी परिसंपत्ति निर्माण और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। यह पहल न केवल ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि आत्मनिर्भर गांवों के निर्माण, स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने और सतत ग्रामीण विकास के लक्ष्य को भी नई गति प्रदान करेगी।

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एसडब्ल्यूएम नियम-2026 के प्रचार हेतु ग्राम पंचायतों में वॉल पेंटिंग अभियान शुरू,ग्रामीणों को स्वच्छता, कचरा पृथक्करण एवं पर्यावरण संरक्षण का दिया जा रहा संदेश

रायगढ़, 13 जून 2026/ कलेक्टर के निर्देशानुसार एवं सीईओ जिला पंचायत रायगढ़ के मार्गदर्शन में जिले की समस्त ग्राम पंचायतों में एसडब्ल्यूएम नियम-2026 के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए वॉल पेंटिंग अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत सार्वजनिक स्थलों, पंचायत भवनों एवं प्रमुख दीवारों पर आकर्षक संदेशों और चित्रों के माध्यम से ग्रामीणों को ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता के महत्व तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

*कचरे के चार प्रकार के पृथक्करण पर विशेष जोर*

वॉल पेंटिंग के माध्यम से ग्रामीणों को कचरे के चार प्रकार के पृथक्करण, उसके वैज्ञानिक निस्तारण तथा स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण बनाए रखने के उपायों की जानकारी दी जा रही है। अभियान का उद्देश्य ग्रामीणों में स्वच्छता के प्रति सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन लाना तथा उन्हें अपने गांव को स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए प्रेरित करना है। इस पहल से ग्राम पंचायतों में स्वच्छता के प्रति जनजागरूकता बढ़ रही है तथा ग्रामीण समुदाय सक्रिय रूप से अपशिष्ट प्रबंधन गतिविधियों से जुड़ रहा है। जिला प्रशासन का यह प्रयास ग्राम पंचायतों को स्वच्छ एवं सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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रायगढ़ प्रशासन की अनूठी पहल: नया तालाब गहरीकरण स्थल बना स्वच्छता का पाठशाला, अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 की दी गई विस्तृत जानकारी

रायगढ़, 13 जून 2026/ कलेक्टर के निर्देशानुसार एवं सीईओ जिला पंचायत रायगढ़ के मार्गदर्शन में विकासखण्ड खरसिया के ग्राम पंचायत ठुसेकेला (गोरपार) स्थित नया तालाब गहरीकरण कार्य स्थल पर वीबी-जीरामजी एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के अंतर्गत व्यापक जनजागरूकता अभियान आयोजित किया गया। जिला स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), रायगढ़ तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, छत्तीसगढ़ के सहयोग से आयोजित इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीणों एवं श्रमिकों को स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाना था। 
            अभियान के दौरान कार्यस्थल पर उपस्थित ग्रामीणों, श्रमिकों एवं जनप्रतिनिधियों को स्वच्छता के महत्व, कचरे के उचित निपटान तथा ग्राम स्तर पर स्वच्छ वातावरण बनाए रखने के लिए आवश्यक उपायों की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि स्वच्छता केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभागीदारी से सफल होने वाला सामाजिक अभियान है, जिसमें प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भूमिका आवश्यक है।

*स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण एवं प्लास्टिक कचरा प्रबंधन पर दिया गया विशेष जोर*
जनजागरूकता कार्यक्रम में ग्रामीणों को घरों से निकलने वाले कचरे का स्रोत स्तर पर पृथक्करण करने के लिए प्रेरित किया गया। उन्हें बताया गया कि गीले एवं सूखे कचरे को अलग-अलग रखने से अपशिष्ट प्रबंधन अधिक प्रभावी बनता है तथा पुनर्चक्रण की प्रक्रिया को बढ़ावा मिलता है। इसके साथ ही प्लास्टिक कचरे के दुष्प्रभावों एवं उसके सुरक्षित संग्रहण तथा निस्तारण के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की गई। 
            कार्यक्रम में घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। ग्रामीणों को समझाया गया कि यदि प्रत्येक परिवार स्वच्छता संबंधी नियमों का पालन करे और कचरे को निर्धारित स्थान पर ही दे, तो गांव में गंदगी, जल प्रदूषण एवं विभिन्न संक्रामक बीमारियों की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इस अवसर पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी देते हुए लोगों को इनके पालन के लिए प्रेरित किया गया।

*स्वच्छ एवं सतत ग्राम निर्माण के लिए जनभागीदारी को बताया गया आवश्यक*
अभियान के दौरान वक्ताओं ने कहा कि स्वच्छ एवं विकसित गांव का निर्माण तभी संभव है जब ग्रामीण समुदाय स्वयं स्वच्छता गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाए। नया तालाब गहरीकरण कार्य स्थल पर आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों की स्वच्छता, प्लास्टिक मुक्त गांव तथा सतत विकास की अवधारणा से भी अवगत कराया गया। ग्रामीणों एवं श्रमिकों ने स्वच्छता संबंधी संदेशों को गंभीरता से सुना और अपने दैनिक जीवन में उन्हें अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि स्वच्छता केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि निरंतर अपनाई जाने वाली जीवनशैली है। जिला प्रशासन एवं जिला स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), रायगढ़ द्वारा संचालित इस पहल से क्षेत्र में स्वच्छता के प्रति सकारात्मक वातावरण निर्मित हो रहा है तथा ग्रामीणों में जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन की भावना को बल मिल रहा है।

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डीएमएफ के 12.14 करोड़ से रायगढ़ की बदलेगी तस्वीर: 7 नई सड़कें, आदिवासी अंचलों में पहुंचेगी सौर ऊर्जा, विकास को मिलेगी रफ्तार

रायगढ़, 13 जून 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा आदिवासी, ग्रामीण एवं खनन प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसी कड़ी में वित्त मंत्री श्री ओ.पी.चौधरी के मार्गदर्शन में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) के तहत जिले में सड़क, नवीकरणीय ऊर्जा एवं बुनियादी अधोसंरचना से जुड़ी 12 करोड़ 14 लाख 85 हजार रुपये से अधिक की महत्वपूर्ण परियोजनाओं को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं से जिले के दूरस्थ अंचलों में विकास को नई गति मिलेगी तथा हजारों ग्रामीणों को बेहतर आवागमन, ऊर्जा एवं मूलभूत सुविधाओं का लाभ प्राप्त होगा। 
           जिला खनिज संस्थान न्यास की शासी परिषद की बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुरूप इन कार्यों को स्वीकृति प्रदान की गई है। परिषद ने सभी स्वीकृत परियोजनाओं को वित्तीय वर्ष 2026-27 के भीतर पूर्ण करने को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं।

*ग्रामीण कनेक्टिविटी को मिलेगा नया आधार*

ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए जिले में सात महत्वपूर्ण सड़क निर्माण कार्यों को स्वीकृति दी गई है। धरमजयगढ़ विकासखंड अंतर्गत कटाईपाली सी से पुसल्दा पहुंच मार्ग निर्माण कार्य के लिए 1 करोड़ 48 लाख 80 हजार रुपये, औरानारा से वृन्दावन पहुंच मार्ग (भाग-1) के लिए 1 करोड़ 20 लाख 48 हजार रुपये तथा भाग-2 के लिए 1 करोड़ 86 लाख 80 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। लैलूंगा विकासखंड अंतर्गत सुबरा से कटकलिया (पार्ट-1) मार्ग निर्माण कार्य के लिए 1 करोड़ 11 लाख 53 हजार रुपये तथा राजपुर मंडी से पुटुुपारा होते हुए बथानपारा तक मार्ग निर्माण कार्य के लिए 1 करोड़ 64 लाख 40 हजार रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।
           इसी प्रकार तमनार विकासखंड में बनई से चारभांठा मार्ग निर्माण कार्य के लिए 1 करोड़ 99 लाख 89 हजार रुपये तथा चिर्रामुड़ा से बनाई मार्ग निर्माण कार्य के लिए 1 करोड़ 99 लाख 78 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन सड़क परियोजनाओं के पूर्ण होने से ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी, आवागमन में सुगमता आएगी तथा कृषि उपज, वनोपज एवं अन्य उत्पादों के परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य आवश्यक सेवाओं तक ग्रामीणों की पहुंच भी बेहतर होगी। 

*जनजातीय परिवारों तक पहुंचेगी स्वच्छ ऊर्जा*

विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) परिवारों के जीवन स्तर में सुधार के लिए धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम गिधकालो के मजराटोला ऊपर सलखेता में निवासरत पहाड़ी कोरवा एवं अन्य परिवारों के यहां 108 सोलर होम लाइट संयंत्रों की स्थापना हेतु 69 लाख 67 हजार 944 रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
         इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत धरमजयगढ़ ब्लॉक के खदान प्रभावित ग्राम कुम्हीचुआ (चिखलापानी, बिरहोर मोहल्ला) में 27 मकानों पर सोलर रूफटॉप ग्रिड सिंक्रोनाइजेशन कार्य के लिए 13 लाख 50 हजार रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं के माध्यम से दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों में स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा की पहुंच बढ़ेगी तथा परिवारों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने में सहायता मिलेगी।

*पारदर्शिता और गुणवत्ता पर रहेगा विशेष फोकस*

जिला प्रशासन ने सभी कार्य एजेंसियों को निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप कार्य करने के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक कार्यस्थल पर योजना की जानकारी प्रदर्शित करने के लिए स्थायी सूचना फलक लगाया जाएगा। कार्य प्रारंभ होने से लेकर पूर्णता तक विभिन्न चरणों में फोटोग्राफी, भौतिक सत्यापन तथा मासिक प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि स्वीकृत राशि का उपयोग केवल निर्धारित कार्यों में ही किया जाएगा। किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता, स्वीकृति से अधिक व्यय अथवा निर्माण गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर संबंधित एजेंसी को जवाबदेह ठहराया जाएगा।

*विकास की नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त*

डीएमएफ के माध्यम से स्वीकृत ये परियोजनाएं केवल निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि दूरस्थ एवं आदिवासी अंचलों के लिए विकास के नए अवसरों का द्वार खोलने वाली पहल हैं। सड़क, ऊर्जा और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार से इन क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार होगा, आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी तथा शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के प्रयासों को और मजबूती मिलेगी।

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रायगढ़ के गरीब मेधावी छात्रों के लिए खुशखबरी! DMFT की ‘खनिज ज्योति योजना’ से IIT, AIIMS, IIM समेत देश के बड़े संस्थानों में पढ़ाई का सपना होगा साकार

*रायगढ़:* छत्तीसगढ़ राज्य के सर्वांगीण विकास और शिक्षा के प्रति कटिबद्ध प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी के दूरदर्शी मार्गदर्शन तथा राज्य के वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी जी की विशेष पहल एवं उनके जन-कल्याणकारी विजन के फलस्वरूप, रायगढ़ जिले में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। शिक्षा को अंतिम छोर तक पहुँचाने के इसी ध्येय के साथ, खनन गतिविधियों से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित क्षेत्रों के आर्थिक रूप से कमजोर (BPL) तथा प्रतिभावान छात्र-छात्राओं के लिए जिला खनिज संस्थान न्यास (DMFT), रायगढ़ द्वारा "खनिज ज्योति योजना" का शुभारंभ किया गया है। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि धन के अभाव में किसी भी खनन प्रभावित प्रतिभावान छात्र की उच्च शिक्षा बाधित न हो।
इस योजना के तहत चयनित मेधावी विद्यार्थियों को देश एवं राज्य के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में नियमित स्नातक (UG), स्नातकोत्तर (PG), इंजीनियरिंग, मेडिकल (MBBS/BAMS), विधि (Law), प्रबंधन (MBA), डिप्लोमा एवं अन्य कृषि व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने पर शत-प्रतिशत वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। यह योजना वर्तमान शैक्षणिक सत्र के लिए कुल 20 स्वीकृत सीटों (सीमित) के लिए ही संचालित है।

*योजना हेतु प्रमुख पात्रता (Eligibility Criteria):*
• आवेदक अनिवार्य रूप से रायगढ़ जिले के खनन प्रभावित घोषित ग्रामों या नगरीय निकायों का स्थायी निवासी होना चाहिए।
• आवेदक के परिवार का नाम राज्य शासन की चालू बी.पी.एल. (BPL) अथवा अंत्योदय सूची में दर्ज होना चाहिए और उनके पास वैध राशन कार्ड उपलब्ध होना अनिवार्य है।
• कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में अनारक्षित एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए न्यूनतम 55% अंक होने अनिवार्य हैं। अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) एवं दिव्यांग (PwD) वर्ग के लिए न्यूनतम 50% अंक अनिवार्य हैं।
• आवेदन की तिथि को छात्र/छात्रा की अधिकतम आयु 25 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए।
• आवेदक केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य समान बड़ी छात्रवृत्ति योजना का लाभ न ले रहा हो, जिसके लिए एक शपथ पत्र प्रस्तुत करना होगा।
*पारदर्शी चयन प्रक्रिया (Selection Process):* यदि 20 स्वीकृत सीटों से अधिक आवेदन प्राप्त होते हैं, तो वरीयता सह मेरिट सूचकांक (Merit-cum-Preference Index) के आधार पर अंतिम चयन सूची तैयार की जाएगी:
• चयन में प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित (Directly Affected) क्षेत्रों के आवेदकों को पहली प्राथमिकता दी जाएगी। सीटें रिक्त रहने पर ही अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित आवेदकों पर विचार किया जाएगा।
• राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं (जैसे JEE, NEET, CLAT आदि) के माध्यम से IITs, NITs, AIIMS, IIMs या केंद्रीय विश्वविद्यालयों जैसे शीर्ष राष्ट्रीय संस्थानों में प्रवेश पाने वाले छात्रों को उच्च वरीयता दी जाएगी।
• स्थिति समान होने पर क्रमशः कक्षा 12वीं के अंकों की मेरिट, परिवार की न्यूनतम आय तथा अनाथ, एकल माता-पिता या विशेष रूप से दिव्यांग (PWD) छात्र-छात्राओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
*आवेदन की प्रक्रिया एवं अंतिम तिथि:* योग्य एवं इच्छुक छात्र निर्धारित आवेदन प्रारूप रायगढ़ जिले की आधिकारिक वेबसाइट (www.raigarh.gov.in) से डाउनलोड कर या कार्यालय से प्राप्त कर सकते हैं। पूर्ण रूप से भरे गए आवेदन पत्र सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ 30 जुलाई 2026 तक जमा किए जा सकेंगे।
आवेदन जमा करने का स्थान: कक्ष क्रमांक-93, DMFT शाखा, कलेक्ट्रेट कार्यालय, रायगढ़ (छ.ग.) है। अपूर्ण, अस्पष्ट, कूट-रचित (Fake) या नियत तिथि के बाद प्राप्त आवेदनों को निरस्त कर दिया जाएगा। योजना से संबंधित अधिक जानकारी के लिए कार्यालयीन समय पर हेल्पलाइन नंबर 9770989049 पर संपर्क किया जा सकता है।

*शिक्षित युवा - सशक्त समाज, समृद्ध एवं उन्नत रायगढ़*

जिला प्रशासन, रायगढ़ (छत्तीसगढ़)

टच फॉर पीडीएफ

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शिक्षा विभाग में डिजिटल अनुशासन का नया दौर, 16 जून से ऑनलाइन हाजिरी और ई-लीव अनिवार्य; नियम तोड़े तो जून का वेतन अटकेगा,अब कागजी छुट्टी आवेदन नहीं होंगे स्वीकार

रायपुर, 12 जून 2026/ छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में अब ढर्रे पर काम नहीं चलेगा। लोक शिक्षण संचालनालय ने अधिकारियों, कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए ऑनलाइन उपस्थिति (हाजिरी) और ऑनलाइन अवकाश (छुट्टी) आवेदन व्यवस्था का कड़ाई से पालन करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। नए आदेश के मुताबिक, आगामी 16 जून 2026 से सभी के लिए डिजिटल उपस्थिति अनिवार्य होगी। नियमों की अनदेखी करने पर जून महीने का वेतन रोक दिया जाएगा।

स्कूलों के लिए VSK App और कार्यालयों के लिए AEBAS अनिवार्य

शासन ने विभाग के हर स्तर पर पारदर्शिता लाने के लिए दो अलग-अलग डिजिटल माध्यम तय किए हैं। शासकीय विद्यालयों में कार्यरत सभी शिक्षकों और कर्मचारियों की उपस्थिति विद्या समीक्षा केंद्र (टैज्ञ) द्वारा विकसित मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से दर्ज की जाएगी। सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों के तहत कार्यालयों में पदस्थ अधिकारियों और बाबुओं को आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (AEBAS)के जरिए अपनी हाजिरी लगानी होगी।

हाजिरी नहीं तो वेतन नहीं

          यदि 16 जून से किसी भी कर्मचारी की उपस्थिति VSK App या बायोमेट्रिक प्रणाली में दर्ज नहीं पाई जाती है, तो उसकी उपस्थिति को शून्य माना जाएगा। ऐसी स्थिति में संबंधित कर्मचारी का जून माह का वेतन जारी नहीं किया जाएगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी आहरण एवं संवितरण अधिकारी (DDOs) की होगी।

ऑफलाइन छुट्टी पर पूर्ण प्रतिबंध, मनमर्जी करने वाले अफसरों पर गिरेगी गाज

        संचालनालय ने साफ किया है कि शिक्षा विभाग के कर्मियों के अवकाश आवेदन और उसकी स्वीकृति के लिए 'HRMIS पोर्टल' की व्यवस्था पहले से लागू है, लेकिन इसके बावजूद कई जगहों पर अब भी ऑफलाइन (कागज पर) आवेदन लिए जा रहे हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने अब ऑफलाइन अवकाश आवेदनों को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है। अब सभी प्रकार की छुट्टियां केवल ऑनलाइन माध्यम से ही ली और मंजूर की जा सकेंगी। यदि किसी अधिकारी ने ऑफलाइन आवेदन स्वीकार या मंजूर किया, तो उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों को प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश

         लोक शिक्षण संचालनालय ने राज्य के सभी संयुक्त संचालकों (JDs), जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) और आहरण व संवितरण अधिकारियों (DDOs) को पत्र जारी कर इन निर्देशों का जमीनी स्तर पर कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। इस नई व्यवस्था से विभाग में लेटलतीफी और बिना सूचना गायब रहने की प्रवृत्ति पर पूरी तरह से लगाम कसने की उम्मीद है।

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महादेवडांड में विधायक गोमती साय का जनसंपर्क अभियान, स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से मिलकर जानी योजनाओं की जमीनी हकीकत

नारायणपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के सेवा, सुशासन, विकास और जनकल्याण के 12 सफल वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा चलाए जा रहे विशेष जनसंपर्क अभियान के तहत महादेवडांड मंडल के ग्राम पंचायत घुघरी के डेल डब्बा में व्यापक जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान क्षेत्र की विधायक ने ग्रामीणों से सीधा संवाद कर केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न जनहितकारी योजनाओं की जानकारी साझा की तथा उनके क्रियान्वयन की जमीनी स्थिति का फीडबैक लिया।

कार्यक्रम में विधायक गोमती साय ने ग्रामीणों से आत्मीय मुलाकात करते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, पीएम किसान सम्मान निधि तथा महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं के लाभों पर चर्चा की। ग्रामीणों ने भी अपनी समस्याओं, सुझावों और आवश्यकताओं से उन्हें अवगत कराया, जिस पर उन्होंने सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया।

जनसंपर्क अभियान के दौरान ग्राम पंचायत कुर्रोग के चांदनी समूह, मिनी समूह, नेहा समूह, गांधी समूह और खुशी समूह की महिलाओं से विशेष मुलाकात की गई। समूह से जुड़ी विजय गंगा, जयंती महंत, रामपति बाई सहित अनेक महिलाओं ने शासन की योजनाओं का लाभ उठाकर स्वरोजगार के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

महिलाओं ने बताया कि सरकारी योजनाओं और समूह आधारित गतिविधियों के माध्यम से उन्हें रोजगार के नए अवसर प्राप्त हुए हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई है और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी है। उन्होंने कहा कि आज वे आत्मविश्वास के साथ समाज में अपनी अलग पहचान स्थापित कर रही हैं तथा अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं।

विधायक गोमती साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भर भारत और अंत्योदय के संकल्प को नई ऊर्जा मिली है। सरकार की योजनाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही हैं और प्रत्येक नागरिक को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने महिलाओं की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि स्व-सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तन के प्रभावी माध्यम बन रहे हैं।

जनसंपर्क अभियान के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं, स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में सरकार की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने और विकसित भारत के निर्माण में नागरिकों की सहभागिता बढ़ाने का संदेश दिया गया।

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स्वनिधि महोत्सव में गूंजा आत्मनिर्भर भारत का संकल्प, रेहड़ी-पटरी कारोबारियों को 50 हजार तक ऋण देने की योजना पर मिला जोर

जशपुरनगर। शहर के पथ विक्रेताओं, रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों और छोटे स्वरोजगारियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से नगरपालिका परिषद जशपुर द्वारा प्रधानमंत्री पीएम स्वनिधि योजना के अंतर्गत भव्य स्वनिधि महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में हितग्राहियों ने भाग लेकर योजना की जानकारी प्राप्त की और आत्मनिर्भरता की दिशा में सरकार की इस महत्वाकांक्षी पहल का लाभ उठाने का संकल्प लिया।

महोत्सव में अधिकारियों ने बताया कि पीएम स्वनिधि योजना शहरी क्षेत्रों में व्यवसाय करने वाले पथ विक्रेताओं के लिए वरदान साबित हो रही है। इस योजना के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को बिना किसी जटिल प्रक्रिया के आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे वे अपने छोटे व्यवसाय को आगे बढ़ा सकें और आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें।

अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि योजना के तहत पहले चरण में 15 हजार रुपये, दूसरे चरण में 30 हजार रुपये तथा तीसरे चरण में 50 हजार रुपये तक का ऋण दिया जाता है। समय पर ऋण चुकाने वाले लाभार्थियों को अगले चरण में अधिक राशि का ऋण प्राप्त करने का अवसर मिलता है, जिससे उनके कारोबार के विस्तार की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

डिजिटल लेन-देन से बढ़ेगी आय और साख

कार्यक्रम में हितग्राहियों को डिजिटल भुगतान प्रणाली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। अधिकारियों ने कहा कि ऑनलाइन और डिजिटल ट्रांजेक्शन करने वाले लाभार्थियों को ब्याज अनुदान सहित विभिन्न प्रोत्साहन लाभ मिलते हैं। इससे न केवल उनकी वित्तीय साख मजबूत होती है बल्कि भविष्य में ऋण प्राप्त करने की प्रक्रिया भी आसान हो जाती है।

नगरपालिका परिषद के अधिकारियों ने कहा कि केंद्र सरकार की पीएम स्वनिधि योजना छोटे व्यापारियों और पथ विक्रेताओं को आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रही है। योजना के माध्यम से हजारों परिवारों को स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिले हैं और उनकी आय में भी वृद्धि हुई है।

स्वनिधि महोत्सव के दौरान हितग्राहियों को योजना की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, ऋण वितरण एवं डिजिटल भुगतान के लाभों की विस्तार से जानकारी दी गई। नगरपालिका परिषद ने स्पष्ट किया कि अधिक से अधिक पात्र पथ विक्रेताओं तक योजना का लाभ पहुंचाने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि कोई भी पात्र हितग्राही इस महत्वपूर्ण योजना से वंचित न रहे।

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जशपुर में मुंडा समाज की बड़ी बैठक ! हजारों लोगों की  जुटान के बीच शंकर राम बरला फिर बने प्रदेश अध्यक्ष, सामाजिक भवन और बिरसा मुंडा स्टेडियम को लेकर मंच से हुई बड़ी घोषणाएं

जशपुर, 12 जून। भागलपुर स्थित बीटीआई ग्राउंड शुक्रवार को मुंडा समाज की एकजुटता, सामाजिक चेतना और संगठनात्मक ताकत का केंद्र बन गया। भारत मुंडा समाज छत्तीसगढ़ इकाई द्वारा आयोजित प्रदेश स्तरीय मुंडा समाज सम्मेलन सह युवा सम्मेलन में छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से हजारों की संख्या में समाजजन शामिल हुए। विशाल जनसमूह की उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि संख्या भले कम हो, लेकिन संगठन और एकता के मामले में मुंडा समाज किसी से पीछे नहीं है।

सम्मेलन की शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इसके बाद मुख्य अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, अध्यक्षता कर रहे नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव तथा झारखंड, पश्चिम बंगाल और जशपुर से पहुंचे समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों का पारंपरिक स्वागत किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली।

प्रदेश अध्यक्ष शंकर राम बरला ने कहा कि छत्तीसगढ़ में मुंडा समाज की आबादी अपेक्षाकृत कम है, लेकिन समाज की एकता और सामाजिक चेतना उसकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य युवाओं को शिक्षा के प्रति जागरूक करना, सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करना, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और गांव-गांव में संगठन को मजबूत करना है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में समाज का प्रदेश कार्यालय भागलपुर बरटोली चांगों बस्ती में एक छोटे खपरैल भवन से संचालित हो रहा है, जबकि समाज लंबे समय से एक स्थायी सामाजिक भवन की मांग कर रहा है।

शंकर राम बरला ने बताया कि सामाजिक भवन निर्माण के लिए जमीन आवंटन का आवेदन प्रशासन को सौंपा जा चुका है, जो अंतिम प्रक्रिया में है। उन्होंने कहा कि जमीन उपलब्ध होने पर सांसद द्वारा 11 लाख रुपए और विधायक रायमुनि भगत द्वारा 10 लाख रुपए भवन निर्माण के लिए देने की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। उन्होंने उपस्थित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से इस महत्वपूर्ण मांग को शीघ्र पूरा कराने में सहयोग की अपील की।

बिरसा मुंडा स्टेडियम बनाने की घोषणा ,सामाजिक भवन की मांग को भी मिला समर्थन

सम्मेलन को संबोधित करते हुए यश प्रताप सिंह जूदेव ने कहा कि राजपरिवार और मुंडा समाज का संबंध कई पीढ़ियों पुराना है। समाज की समस्याओं के समाधान और उसके विकास के लिए वे हमेशा सहयोग करते रहेंगे। वहीं भारत मुंडा समाज झारखंड की राष्ट्रीय महासचिव नूतन पहान ने समाज की महिलाओं से शिक्षा, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व में आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी के बिना किसी भी समाज का समग्र विकास संभव नहीं है।

मुख्य अतिथि अरविंद भगत ने अपने संबोधन में मुंडा समाज की सामाजिक भवन की मांग को जायज बताते हुए कहा कि भूमि आवंटन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए संबंधित अधिकारियों से चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि बीटीआई ग्राउंड के आसपास बड़ी संख्या में मुंडा जनजाति के लोग निवास करते हैं, इसलिए वे इस मैदान का नामकरण "भगवान बिरसा मुंडा स्टेडियम" के रूप में कराने का प्रयास करेंगे। उनकी इस घोषणा के बाद पूरे पंडाल में तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी और समाजजनों ने खड़े होकर स्वागत किया।

सम्मेलन के दौरान राष्ट्रीय पदाधिकारियों की उपस्थिति में भारत मुंडा समाज छत्तीसगढ़ इकाई की गतिविधियों और संगठनात्मक कार्यों की समीक्षा भी की गई। समीक्षा में पाया गया कि संगठन सामाजिक एकता और समाजहित के मुद्दों पर सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। जमीन आवंटन सहित विभिन्न मांगों को लेकर किए गए प्रयासों की सराहना की गई। इसके बाद सर्वसम्मति से वर्तमान प्रदेश कार्यकारिणी का नवीनीकरण करने का प्रस्ताव पारित किया गया।

पुरानी टीम पर फिर भरोसा, शंकर राम बरला को दोबारा मिली कमान

सम्मेलन के महत्वपूर्ण निर्णयों में भारत मुंडा समाज छत्तीसगढ़ इकाई की नई कार्यकारिणी का गठन प्रमुख रहा। सर्वसम्मति से शंकर राम बरला को पुनः प्रदेश अध्यक्ष चुना गया। इसके अलावा मुनेश्वर बघेल को महासचिव, मुक्तेश्वर इंदवार एवं अरविंद मुंडा को उपाध्यक्ष, किसुन बरला को संगठन सचिव, महेंद्र बरला को कोषाध्यक्ष तथा प्रकाश मुंडा को कार्यालय सचिव नियुक्त किया गया। युवा समिति के अध्यक्ष के रूप में लेलेंद्र प्रधान तथा महिला समिति की अध्यक्ष के रूप में अनीता बरला को जिम्मेदारी सौंपी गई।

दिनभर चले इस सम्मेलन में सामाजिक एकता, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, युवाओं की भागीदारी और संगठन विस्तार जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। चार राज्यों से पहुंचे हजारों समाजजनों की मौजूदगी, सामाजिक भवन और बिरसा मुंडा स्टेडियम को लेकर हुई महत्वपूर्ण घोषणाओं तथा संगठन के पुनर्गठन के साथ यह सम्मेलन जशपुर जिले में मुंडा समाज के सबसे बड़े और प्रभावशाली आयोजनों में दर्ज हो गया। समाज के लोगों का मानना है कि सम्मेलन में लिए गए निर्णय आने वाले वर्षों में मुंडा समाज को नई दिशा और नई पहचान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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दो साल से फरार ‘सन्नी सरदार’ आखिरकार पुलिस के शिकंजे में, हत्या के प्रयास के चर्चित मामले में ऑपरेशन क्लीन हंट की बड़ी कामयाबी, साथी पहले ही पा चुके हैं 10-10 साल की सजा

रायगढ़, 12 जून 2026। रायगढ़ पुलिस के विशेष अभियान “ऑपरेशन क्लीन हंट” के तहत सिटी कोतवाली पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। हत्या के प्रयास के चर्चित मामले में लगभग दो वर्षों से फरार चल रहे आरोपी संदीप सिंह उर्फ सन्नी सरदार को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसके मेमोरेंडम कथन के आधार पर घटना में प्रयुक्त बांस का डंडा भी बरामद किया है।

पुलिस के अनुसार आरोपी संदीप सिंह उर्फ सन्नी सरदार, मूलतः पंजाब के अमृतसर जिले का निवासी है और रायगढ़ में रेलवे कॉलोनी क्षेत्र में रह रहा था। मामले में उसके अन्य साथियों के खिलाफ पूर्व में कार्रवाई हो चुकी है तथा सह-आरोपियों को न्यायालय द्वारा सजा भी सुनाई जा चुकी है। फरार रहने के कारण उसके विरुद्ध अलग से फरारी का चालान भी प्रस्तुत किया गया था।

आग ताप रहे युवकों पर हुआ था जानलेवा हमला

घटना 7 दिसंबर 2024 की रात की है, जब साहिल ठाकुर अपने मित्रों अनुज गुप्ता, आकिब खान और संगम देहरी के साथ पोस्ट ऑफिस के पीछे स्थित जिम के सामने आग ताप रहा था। इसी दौरान स्विफ्ट डिजायर कार में पहुंचे आरोपियों ने गाली-गलौज करते हुए साहिल ठाकुर पर लोहे की रॉड और डंडों से हमला कर दिया।

हमले में साहिल ठाकुर के सिर, चेहरे, जबड़े, हाथ और पैरों में गंभीर चोटें आईं। उसका दांत टूट गया और जबड़ा भी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया। हमलावर उसे मृत समझकर मौके से फरार हो गए। बीच-बचाव करने पहुंचे अमन सिंह ठाकुर को भी लोहे की रॉड से पीटकर घायल कर दिया गया।

गंभीर रूप से घायल साहिल ठाकुर को रायगढ़ जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, जिंदल अस्पताल और अपेक्स अस्पताल से होते हुए रायपुर के बालाजी अस्पताल रेफर किया गया, जहां उसका उपचार किया गया।

पुलिस जांच में जुटे अहम सबूत

मामले की शिकायत मिलने पर सिटी कोतवाली थाना में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की गई। जांच के दौरान घटनास्थल से रक्तरंजित मिट्टी, सादी मिट्टी तथा घायल का खून से सना फटा हुआ हुडी जब्त किया गया। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के मेमोरेंडम के आधार पर घटना में प्रयुक्त लोहे की रॉड, लकड़ी एवं बांस के डंडे तथा स्विफ्ट डिजायर कार भी बरामद की थी।

सह-आरोपियों को मिल चुकी है सजा

मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने 30 अक्टूबर 2025 को आरोपी राज बरेठ को हत्या के प्रयास के अपराध में 10 वर्ष के सश्रम कारावास तथा अर्थदंड से दंडित किया था। वहीं एक अन्य आरोपी को बलवा के अपराध में चार वर्ष की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद से संदीप सिंह उर्फ सन्नी सरदार गिरफ्तारी के डर से लगातार फरार चल रहा था।

मुखबिर की सूचना पर दबोचा गया आरोपी

कोतवाली पुलिस ने ऑपरेशन क्लीन हंट के तहत आरोपी की तलाश तेज कर दी थी। थाना प्रभारी के निर्देशन में सक्रिय किए गए मुखबिर तंत्र से मिली सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने आरोपी को पकड़ लिया। पूछताछ में उसने अपराध में अपनी भूमिका स्वीकार की, जिसके बाद उसकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त बांस का डंडा बरामद किया गया।

एसएसपी का सख्त संदेश

रायगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने कहा कि हत्या के प्रयास जैसे गंभीर अपराधों में फरार आरोपियों की गिरफ्तारी पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। कानून से बचने का हर प्रयास विफल किया जाएगा और ऑपरेशन क्लीन हंट के तहत ऐसी कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।

पुलिस ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी में थाना प्रभारी निरीक्षक सुखनंदन पटेल, सहायक उप निरीक्षक गौतम ठाकुर और कोतवाली पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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