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चक्रवात और भारी बारिश से निपटने प्रशासन अलर्ट, अगले आदेश तक अधिकारी-कर्मचारी नहीं ले सकेंगे छुट्टी, मुख्यालय छोड़ने पर भी प्रतिबंध

रायगढ़, 27 अक्टूबर 2026/ चक्रवात के प्रभाव से जिले में भारी बारिश की आशंका को देखते हुए कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने अधिकारियों-कर्मचारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। अगले आदेश तक कोई भी अधिकारी-कर्मचारी बिना अनुमति अवकाश पर नहीं जा सकेगा और न ही मुख्यालय छोड़ सकेगा। कलेक्टर ने सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को मोबाइल फोन चालू रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर तत्काल ड्यूटी पर उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, सभी विभागीय अधिकारियों को अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने को कहा है।

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किसानों को बड़ी सौगात: रायगढ़ में 7 नए धान खरीदी केंद्र खोलने की मिली मंजूरी, 105 से बढ़कर 112 हुई उपार्जन केंद्रों की संख्या

रायगढ़, 27 अक्टूबर 2026/ किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए राज्य शासन ने रायगढ़ जिले में 7 नवीन धान उपार्जन केंद्र खोलने की अनुमति प्रदान की है। नए केंद्र विकासखण्ड धरमजयगढ़ के मुनुंद, विकासखण्ड पुसौर के झलमला, लोहरसिंग, नंदेली ओडेकेरा एवं नावापारा-अ तथा विकासखण्ड तमनार के खुुरूषलेंगा में धान उपार्जन केन्द्र खोले जाएंगे। जिले में गत वर्ष 79 सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से 105 धान उपार्जन केंद्र संचालित था। इस वर्ष 7 नए उपार्जन केंद्र शुरू होने के बाद इनकी संख्या बढ़कर 112 हो गई। इससे आसपास के क्षेत्रों के सैकड़ों किसानों को अपने क्षेत्र के नजदीक धान विक्रय की सुविधा मिलेगी, जिससे उनके समय और परिवहन व्यय की बचत होगी।
          शासन के निर्देशानुसार नवीन उपार्जन केंद्रों में धान खरीदी के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी। केंद्रों में कंप्यूटर, प्रिंटर, यूपीएस, जनरेटर, किसानों के बायोमेट्रिक सत्यापन के लिए फिंगरप्रिंट डिवाइस, नमी मापक यंत्र और इलेक्ट्रॉनिक तौल यंत्र उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही इंटरनेट, बिजली, पेयजल, पर्याप्त भंडारण स्थान एवं सुगम पहुंच मार्ग की व्यवस्था भी की जाएगी। कलेक्टर ने सभी नवीन केंद्रों में धान बिक्री के लिए सभी आवश्यक तैयारियां समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसानों को सुचारू एवं सुविधाजनक धान विक्रय की सुविधा मिल सके।

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धान खरीदी की तैयारियों को लेकर 29 अक्टूबर को प्रशिक्षण, टोकन व्यवस्था से लेकर गुणवत्ता जांच और ऑनलाइन निगरानी तक दी जाएगी जानकारी

रायगढ़, 27 अक्टूबर 2026/ समर्थन मूल्य पर धान खरीदी वर्ष 2026-27 की तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन द्वारा 29 अक्टूबर को अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। कलेक्टर परिसर स्थित सृजन सभा कक्ष में सुबह 10.30 बजे से शुरू होने वाले इस प्रशिक्षण में धान खरीदी की प्रक्रिया, टोकन जारी करने, धान एवं चावल के उपार्जन की निगरानी और खरीदी केंद्रों में जरूरी व्यवस्थाओं से संबंधित जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण का उद्देश्य धान खरीदी कार्य को सुचारू रूप से संचालित करना और खरीदी केंद्रों में व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना है। इसमें राजस्व, सहकारिता, कृषि, खाद्य एवं विपणन विभाग सहित संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी शामिल होंगे।

*टोकन से लेकर धान की निगरानी तक की जानकारी*

प्रशिक्षण के पहले सत्र में धान खरीदी की प्रक्रिया, टोकन जारी करने के नियम और धान एवं चावल के उपार्जन की निगरानी के लिए डैशबोर्ड ट्रैकिंग सिस्टम तथा कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के उपयोग की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही कोचिया और बिचौलियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए उड़नदस्ता दल की कार्यप्रणाली पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के अगले सत्र में टोकन जारी करने की प्रक्रिया, मानक आकार के स्टैक निर्माण, कंप्यूटर रिकॉर्डिंग, नमी जांच और बारदाना व्यवस्था की जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा धान खरीदी केंद्रों के वित्तीय दायित्वों और केंद्रों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने पर भी चर्चा होगी।

*संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की उपस्थिति अनिवार्य*

प्रशिक्षण में अनुविभागीय अधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, खाद्य विभाग के अधिकारी, सहकारिता विभाग, कृषि विभाग, जिला विपणन अधिकारी, अपेक्स बैंक के प्रतिनिधि, धान उपार्जन केंद्रों के नोडल अधिकारी, समिति प्रबंधक और डाटा एंट्री ऑपरेटर सहित संबंधित अधिकारी-कर्मचारी शामिल होंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रशिक्षण में उपस्थित होकर भाग लेना अनिवार्य किया गया है।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की डिजिटल पहल से विद्यार्थियों को मिल रही सुविधा, सेवा सेतु पोर्टल के जरिए गोर्रा की तानिया का बना आय प्रमाण पत्र

रायगढ़, 27 अक्टूबर 2026/ छत्तीसगढ़ शासन की डिजिटल पहल ‘सेवा सेतु’ के माध्यम से नागरिकों को विभिन्न शासकीय सेवाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा मिल रही है। आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र जैसे जरूरी दस्तावेजों के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया उपलब्ध होने से लोगों को सहूलियत हो रही है। इस व्यवस्था का लाभ विद्यार्थियों को भी मिल रहा है। रायगढ़ जिले की पुसौर तहसील के ग्राम गोर्रा निवासी छात्रा तानिया श्रीवास के लिए सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से आय प्रमाण पत्र जारी किया गया है। यह प्रमाण पत्र उन्हें छात्रवृत्ति योजना का लाभ लेने में उपयोगी होगा।
           तानिया श्रीवास शासकीय हाई स्कूल गोर्रा में कक्षा 12वीं में जीवविज्ञान विषय की पढ़ाई कर रही हैं। छात्रवृत्ति योजना का लाभ लेने के लिए आय प्रमाण पत्र आवश्यक है। सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से उन्हें जरूरी दस्तावेज आय प्रमाण पत्र प्राप्त करने में सुविधा मिली है। तानिया और उसके परिवार ने इस प्रक्रिया को सुलभ बनाने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। परिवार ने कहा कि ऑनलाइन माध्यम से शासकीय सेवाएं उपलब्ध होने से नागरिकों को जरूरी दस्तावेज प्राप्त करने में सहूलियत मिल रही है।

*450 से अधिक शासकीय सेवाएं एक ही पोर्टल पर*

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शासकीय सेवाओं को सरल, पारदर्शी और जनसुलभ बनाने के उद्देश्य से सेवा सेतु पोर्टल संचालित किया जा रहा है। इस पोर्टल पर 450 से अधिक शासकीय सेवाएं उपलब्ध हैं। इससे पहले ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से 86 सेवाएं उपलब्ध थीं, जिन्हें विस्तारित कर सेवा सेतु के जरिए अधिक सेवाओं को एक ही मंच पर उपलब्ध कराया गया है। पोर्टल के माध्यम से आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र सहित विभिन्न विभागों की सेवाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। 

*ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच रहीं डिजिटल सेवाएं*

सेवा सेतु पोर्टल के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों तक भी डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। ऑनलाइन आवेदन और प्रमाण पत्रों की उपलब्धता से नागरिकों को शासकीय सेवाओं का लाभ लेने के लिए एक सुविधाजनक माध्यम मिल रहा है। इससे विद्यार्थियों सहित ग्रामीण परिवारों को जरूरी दस्तावेजों के लिए आवेदन करने में सहूलियत हो रही है।

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सेवा सेतु पोर्टल से आसान हुआ विवाह पंजीयन, दंतेवाड़ा के सतीश मरकाम को कम समय में मिला प्रमाण पत्र, पत्नी के आधार और मतदाता परिचय पत्र में नाम बदलवाने की प्रक्रिया हुई सरल

रायपुर, 27 अक्टूबर 2026/ छत्तीसगढ़ शासन का आधिकारिक सेवा सेतु पोर्टल प्रदेश के नागरिकों को विभिन्न सरकारी सेवाएं और योजनाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने वाला डिजिटल माध्यम है। इस पोर्टल पर आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, विवाह पंजीयन, भू-अभिलेख और राजस्व संबंधी सेवाएं उपलब्ध हैं।

          सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया सरल और सुविधाजनक हुई है। दंतेवाड़ा जिले के ग्राम पातररास निवासी श्री सतीश मरकाम को पोर्टल के माध्यम से न केवल त्वरित विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ बल्कि इससे उन्हें विवाह के बाद अपनी पत्नी के आधार कार्ड और मतदाता परिचय पत्र में नाम परिवर्तन कराने की प्रक्रिया में सहूलियत मिली।

         दंतेवाड़ा विकासखंड के ग्राम पातररास निवासी श्री सतीश मरकाम, पिता श्री रय सिंह मरकाम को अपनी पत्नी के पहचान दस्तावेजों में नाम परिवर्तन कराने के लिए विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र की आवश्यकता थी। उन्होंने सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से विवाह पंजीयन की सुविधा का लाभ लिया। सरल प्रक्रिया के माध्यम से कम समय में प्रमाण पत्र उपलब्ध होने से उन्हें आवश्यक दस्तावेजों में नाम परिवर्तन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में मदद मिली।

       सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से नागरिकों को शासकीय सेवाएं सरल, सुलभ और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रही है। सेवा सेतु पोर्टल से विवाह पंजीयन जैसी आवश्यक सेवाओं की प्रक्रियात्मक सरलता से नागरिकों को प्रमाण पत्र प्राप्त करने और उनसे जुड़े अन्य कार्यों को पूरा करने में सुविधा मिल रही है।

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वनांचल के ग्रामीणों के लिए स्वरोजगार का नया अवसर, तसर पालन से मजबूत होगी आजीविका, बीजापुर में 13 हितग्राहियों को स्वस्थ डिम्ब समूह वितरण के साथ मिली आर्थिक सहायता

रायपुर, 27 अक्टूबर 2026/ वनांचल क्षेत्रों में तसर रेशम (कोसा) पालन ग्रामीण परिवारों की आजीविका और स्वरोजगार का एक प्रमुख जरिया बनता जा रहा है। इस व्यवसाय से आदिवासियों और ग्रामीण महिलाओं को गांव में ही रोजगार मिल रहा है, जिससे उन्हें रोजगार के लिए भटकना नहीं पड़ता।

*गुणवत्तापूर्ण कोसा उत्पादन कर आय अर्जित करने का मिल रहा है अवसर*

         बीजापुर जिले में तसर रेशम पालन से जुड़े ग्रामीण परिवारों की आमदनी बढ़ाने के लिए रेशम विभाग द्वारा आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इसी कड़ी में ग्राम कोत्तापल्ली के 13 तसर पालकों को स्वस्थ डिम्ब समूह वितरण योजना के तहत 3,700 स्वस्थ डिम्ब समूह उपलब्ध कराए गए हैं। इनकी कुल कीमत 59 हजार 200 रुपए है, जिसमें शासन ने 51 हजार 800 रुपए की सब्सिडी दी है। इससे तसर पालकों को कम लागत में गुणवत्तापूर्ण कोसा उत्पादन कर अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा।

*ग्रामीणों को वैज्ञानिक पद्धति से कृमिपालन करने में मिल रही है मदद* 

        ग्राम कोत्तापल्ली स्थित शासकीय कोसा बीज केंद्र से जुड़े तसर पालकों को केंद्रीय रेशम बोर्ड की इकाई बीएसएमटीसी, बस्तर से प्राप्त पालित प्रजाति के स्वस्थ डिम्ब समूह वितरित किए गए हैं। शासन की ओर से अधिकांश लागत वहन किए जाने के कारण हितग्राहियों को कुल 7 हजार 400 रुपए का ही अंशदान करना पड़ा। इस सहायता से तसर पालन की शुरुआती लागत कम होने के साथ ग्रामीणों को वैज्ञानिक पद्धति से कृमिपालन करने में भी मदद मिलेगी। योजना से लाभान्वित हितग्राहियों में 13 तसर पालक शामिल हैं। स्वस्थ डिम्ब समूहों के उपयोग से बेहतर गुणवत्ता के कोसा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे ग्रामीण परिवारों को अपनी आजीविका मजबूत करने में सहायता मिलेगी।

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किसानों की सुविधा के लिए राज्य सरकार की डिजिटल पहल, ‘तुंहर टोकन’ एप से 24 घंटे टोकन लेने की सुविधा; शेष धान अगले टोकन में बेचने का भी मिलेगा मौका

*धान बेचने के लिए अब सोसायटियों में लंबी कतारों की जरूरत नहीं, ‘तुंहर टोकन’ एप से घर बैठे मिलेगा टोकन*

*खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में भी जारी रहेगी ऑनलाइन टोकन व्यवस्था*

*किसान ‘तुंहर टोकन’ मोबाइल एप के माध्यम से 24×7 प्राप्त कर सकेंगे टोकन*

*कम मात्रा में धान बेचने पर शेष रकबा नहीं होगा लैप्स, अगले टोकन में बेच सकेंगे शेष धान*

रायपुर 27 अक्टूबर 2026/ खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों को धान बेचने के लिए टोकन प्राप्त करने हेतु सोसायटियों में लंबी कतारों में नहीं लगना पड़ेगा। राज्य सरकार द्वारा किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी ‘तुंहर टोकन’ मोबाइल एप के माध्यम से ऑनलाइन टोकन की व्यवस्था की गई है। किसान अपनी सुविधा के अनुसार एप के माध्यम से घर बैठे धान विक्रय के लिए टोकन प्राप्त कर सकेंगे।

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा संचालित ‘तुंहर टोकन’ मोबाइल एप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। इसके माध्यम से किसान 24×7 ऑनलाइन टोकन प्राप्त कर सकते हैं। ऑनलाइन व्यवस्था से किसानों के समय और श्रम की बचत होने के साथ ही धान खरीदी की प्रक्रिया अधिक सुगम और व्यवस्थित होगी।

धान विक्रय के लिए किसानों की जोत के अनुसार टोकन की संख्या निर्धारित की गई है। दो एकड़ तक के लघु एवं सीमांत किसानों को एक टोकन मिलेगा। दो एकड़ से अधिक और 10 एकड़ तक के किसानों को अधिकतम दो टोकन तथा 10 एकड़ से अधिक रकबे वाले किसानों को अधिकतम तीन टोकन प्राप्त करने की सुविधा होगी।

किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष भी पिछले वर्ष की तरह टोकन में धान की मात्रा दर्ज करने की सुविधा रहेगी। किसान अपनी आवश्यकता और उपलब्धता के अनुसार मात्रा दर्ज कर टोकन प्राप्त कर सकेंगे। यदि किसान किसी टोकन पर अपनी पूरी पात्र मात्रा का धान नहीं बेचता है, तो उसकी शेष पात्रता समाप्त नहीं होगी। वह पात्रतानुसार शेष मात्रा का धान दूसरे अथवा तीसरे टोकन के माध्यम से बेच सकेगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को धान विक्रय के लिए अधिक सुविधा और विकल्प उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें बार-बार सोसायटियों के चक्कर न लगाने पड़ें और वे अपनी सुविधा के अनुसार टोकन प्राप्त कर सुगमता से धान का विक्रय कर सकें।

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किसानों के लिए साय सरकार की व्यापक तैयारी, 15 नवम्बर से 3100 केंद्रों पर होगी धान खरीदी, 360 नए उपार्जन केंद्रों की सौगात के साथ किसानों को मिलेगा ₹3100 प्रति क्विंटल का भाव

रायपुर 27 अक्टूबर 2026/ छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए समर्थन मूल्य पर धान खरीदी 15 नवम्बर 2026 से प्रारंभ होगी। राज्य सरकार द्वारा इस वर्ष 27.50 लाख से अधिक किसानों से ₹3100 प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल धान खरीदा जाएगा। किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी प्रकार की असुविधा न हो और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी एवं सुगम रहे, इसके लिए राज्य सरकार द्वारा व्यापक तैयारियां की गई हैं।

राज्य सरकार ने किसान हित में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए एग्रीस्टैक आईडी वाले पिछले वर्ष के सभी पंजीकृत किसानों को धान विक्रय के लिए मान्य किया है। ऐसे किसानों को अलग से पंजीयन कराने की आवश्यकता नहीं होगी। एग्रीस्टैक में पंजीयन होने के कारण किसानों को धान बेचने के लिए समिति में पृथक से ऋण पुस्तिका प्रस्तुत करने की भी आवश्यकता नहीं होगी। डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से धान के रकबे का ऑनलाइन निर्धारण सुनिश्चित किया गया है।

*3100 उपार्जन केंद्रों पर होगी खरीदी*

किसानों को धान विक्रय के लिए बेहतर और सुगम व्यवस्था उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस वर्ष 360 नए उपार्जन केंद्र प्रारंभ किए जा रहे हैं। इसके साथ ही प्रदेश में कुल 3100 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से धान खरीदी की जाएगी। सभी खरीदी केंद्रों पर किसानों की सुविधा के अनुरूप आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। धान खरीदी के लिए आवश्यकता के अनुसार नए एवं पुराने जूट बारदानों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

वास्तविक किसानों से ही धान खरीदी सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक आधारित व्यवस्था लागू रहेगी। इससे खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

भारत सरकार के खाद्य विभाग द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए छत्तीसगढ़ से केंद्रीय पूल में 73 लाख मीट्रिक टन चावल का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

*‘इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर’ से होगी प्रभावी निगरानी*


प्रदेश में धान के अवैध परिवहन, पुनर्चक्रण और खरीदी में अनियमितताओं को रोकने के लिए निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जा रहा है। इसके लिए ‘इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर’ का विस्तार करने का निर्णय लिया गया है। इसके माध्यम से धान खरीदी से संबंधित गतिविधियों की प्रभावी मॉनिटरिंग की जाएगी।

सीमावर्ती राज्यों से खरीदी केंद्रों में अवैध रूप से धान की आवक रोकने के लिए जिला स्तर पर विशेष जांच दल गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए प्रदेश में 273 चेक पोस्ट तथा 131 सीमावर्ती उपार्जन केंद्र चिन्हांकित किए गए हैं।

इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर में प्राप्त शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए भी स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की गई है। अति संवेदनशील केंद्रों से संबंधित शिकायतों का निराकरण 24 घंटे, संवेदनशील केंद्रों की शिकायतों का 48 घंटे तथा सामान्य केंद्रों की शिकायतों का 72 घंटे के भीतर किया जाएगा।

*क्यूआर कोड और लोकेशन ट्रैकिंग से रुकेगा पुनर्चक्रण*

भारत सरकार के निर्देशों के अनुरूप खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में चावल की प्रत्येक बोरी पर क्यूआर कोड आधारित स्कैनिंग एवं ट्रेसिबिलिटी सुनिश्चित की जाएगी। इससे प्रत्येक बारदाने के परिवहन की निगरानी संभव होगी और चावल के पुनर्चक्रण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।

धान परिवहन की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और मितव्ययी बनाने के लिए धान का उठाव लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस युक्त वाहनों से कराने के निर्देश दिए गए हैं। इससे धान के परिवहन की वास्तविक समय में निगरानी की जा सकेगी।

*‘तुंहर टोकन’ एप से घर बैठे मिलेगा टोकन*

धान विक्रय की प्रक्रिया को किसानों के लिए और आसान बनाने तथा उन्हें समितियों में लंबी कतारों से मुक्ति दिलाने के लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा ‘तुंहर टोकन’ मोबाइल एप का उपयोग किया जाएगा। यह एप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है और इसके माध्यम से किसान 24×7 ऑनलाइन टोकन प्राप्त कर सकेंगे।

एप पर किसान सबसे पहले ओटीपी आधारित पंजीयन कर सकेंगे। प्रत्येक समिति के लिए निर्धारित प्रतिदिन की खरीदी सीमा में से 70 प्रतिशत टोकन ‘तुंहर टोकन’ एप के माध्यम से तथा शेष 30 प्रतिशत टोकन समिति स्तर से जारी किए जाएंगे। इससे किसानों को टोकन प्राप्त करने के लिए समितियों में लंबी कतारों में लगने की आवश्यकता नहीं होगी।

एप के माध्यम से उपलब्ध 70 प्रतिशत टोकन में 80 प्रतिशत हिस्सेदारी लघु एवं सीमांत किसानों तथा 20 प्रतिशत बड़े किसानों के लिए निर्धारित की गई है। दो एकड़ तक के किसानों को एक टोकन, दो एकड़ से अधिक एवं 10 एकड़ तक के किसानों को दो टोकन तथा 10 एकड़ से अधिक रकबे वाले किसानों को तीन टोकन प्रदान किए जाएंगे।

राज्य सरकार ने धान खरीदी की पूरी व्यवस्था को किसान-केंद्रित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने पर विशेष जोर दिया है। नए उपार्जन केंद्रों, ऑनलाइन टोकन, बायोमेट्रिक सत्यापन, डिजिटल क्रॉप सर्वे, क्यूआर कोड आधारित ट्रेसिबिलिटी तथा इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से किसानों को सुगम धान विक्रय की सुविधा देने के साथ ही अवैध आवक और पुनर्चक्रण पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जाएगा।

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छत्तीसगढ़ के 12 जिलों में तूफान और भारी बारिश की चेतावनी, संवेदनशील गांवों पर रहेगी विशेष नजर, आपात सहायता के लिए 24 घंटे सक्रिय रहेगा बाढ़ नियंत्रण कक्ष

रायपुर, 27 अक्टूबर 2026/बंगाल की खाड़ी में बन रहे चक्रवाती तूफान अर्नब के संभावित प्रभाव को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने जनसुरक्षा और आपदा प्रबंधन की तैयारियां तेज कर दी हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, रायपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार 27 एवं 28 अक्टूबर को प्रदेश के सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर, कांकेर, महासमुंद, धमतरी, गरियाबंद, बालोद और रायपुर जिले में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश होने की संभावना है। संभावित परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य शासन ने संबंधित जिलों में सतर्कता बढ़ाने और आवश्यक एहतियाती उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

*नागरिकों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता*

       राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने कहा कि प्रदेश के नागरिकों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। संभावित चक्रवाती तूफान और भारी बारिश से उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशासन को पूरी सतर्कता और तत्परता के साथ कार्य करना होगा। किसी भी आपात स्थिति में प्रभावित लोगों तक तत्काल सहायता पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को आपदा प्रबंधन से जुड़ी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं तैयार रखने और संवेदनशील क्षेत्रों की विशेष निगरानी करने के निर्देश दिए।

       मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि संभावित आपदा से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए समय पर सूचना और पूर्व तैयारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी जिला कलेक्टरों को तेज हवाओं और तूफान से गिरने की आशंका वाले जर्जर एवं असुरक्षित मकानों को चिन्हित कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही जलाशयों के जलस्तर की नियमित निगरानी करने और पानी छोड़े जाने की स्थिति में संबंधित क्षेत्रों को 48 घंटे पहले सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं।

*आपदा प्रबंधन की तैयारी विशेष प्राथमिकता में*

        राज्य शासन द्वारा संभावित आपदा से प्रभावित होने वाले संवेदनशील गांवों का चिन्हांकन भी किया गया है। सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर, कांकेर, महासमुंद, धमतरी, गरियाबंद, बालोद और रायपुर सहित 12 अति संवेदनशील जिलों में 763 गांव चिन्हित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त शेष 21 जिलों में 1006 संवेदनशील गांवों की पहचान की गई है। इस प्रकार प्रदेश में कुल 1769 गांवों को चिन्हित कर आपदा प्रबंधन की तैयारियों में विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।

*आपदा संबंधी सूचनाओं के लिए टोल फ्री नंबर 1070*

        राज्य में आपदा संबंधी सूचनाओं और त्वरित सहायता के लिए बाढ़ नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे संचालित है। इसका टोल फ्री नंबर 1070 है। संभावित खतरे के प्रति नागरिकों को जागरूक करने के लिए दामिनी एवं मेघदूत मोबाइल ऐप के माध्यम से मौसम संबंधी चेतावनियां प्रसारित की जा रही हैं।

       राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने नागरिकों से मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने, अनावश्यक जोखिम से बचने तथा प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन के समन्वित प्रयासों तथा नागरिकों की सतर्कता से संभावित आपदा के प्रभाव को कम करने और जनजीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

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सशक्त नारी, युवा उड़ान’ थीम पर सजेगा छत्तीसगढ़ का राज्योत्सव, 33 जिला मुख्यालयों में होंगे विशेष आयोजन, विकास योजनाओं की प्रदर्शनी बनेगी आकर्षण का केंद्र

रायपुर, 27 अक्टूबर 2026/ छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर राज्योत्सव 2026 का आयोजन प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में 2 नवंबर को किया जाएगा। राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने जिला मुख्यालयों में आयोजित होने वाले एक दिवसीय राज्योत्सव कार्यक्रमों के लिए मुख्य अतिथियों का निर्धारण कर दिया है। इस संबंध में 27 अक्टूबर को आदेश जारी किया गया है। विभिन्न जिलों में राज्य शासन के मंत्री, सांसद और विधायक मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

राज्य शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार जांजगीर-चांपा जिले में संघ राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, बिलासपुर में उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव तथा दुर्ग में उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा मुख्य अतिथि होंगे। सरगुजा में मंत्री श्री रामविचार नेताम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में मंत्री श्री दयालदास बघेल, कांकेर में मंत्री श्री केदार कश्यप, कोरबा में मंत्री श्री लखन लाल देवांगन, जशपुर में मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, रायगढ़ में वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, सूरजपुर में मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, गरियाबंद में मंत्री श्री टंकराम वर्मा तथा राजनांदगांव में मंत्री श्री गजेन्द्र यादव मुख्य अतिथि होंगे।

इसी प्रकार कोरिया में विधायक श्री भैयालाल राजवाड़े, बीजापुर में मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब, बलौदाबाजार-भाटापारा में सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, बेमेतरा में सांसद श्री विजय बघेल, कबीरधाम में सांसद श्री संतोष पाण्डेय, बलरामपुर-रामानुजगंज में सांसद श्री चिंतामणि महाराज, महासमुंद में सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में सांसद श्री राधेश्याम राठिया, सक्ती में सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, दन्तेवाड़ा में सांसद श्री महेश कश्यप, बालोद में सांसद श्री भोजराज नाग, सुकमा में सांसद श्री देवेन्द्र प्रताप सिंह तथा मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा मुख्य अतिथि होंगी।

मुंगेली में विधायक श्री पुन्नूलाल मोहले, धमतरी में विधायक श्री अजय चन्द्राकर, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में विधायक श्रीमती रेणुका सिंह, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में विधायक श्री अमर अग्रवाल, कोण्डागांव में विधायक सुश्री लता उसेंडी, नारायणपुर में विधायक श्री विक्रम उसेंडी तथा बस्तर में विधायक श्री किरण देव मुख्य अतिथि होंगे।

*विकास योजनाओं और उपलब्धियों की प्रदर्शनी होगी आकर्षण का केंद्र*

राज्य शासन द्वारा पूर्व में जारी निर्देशों के अनुसार सभी जिला मुख्यालयों में राज्योत्सव के अवसर पर विभिन्न विकास विभागों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इनमें विभागीय उपलब्धियों, महत्वपूर्ण योजनाओं और सफल परियोजनाओं को प्रदर्शित किया जाएगा। इस वर्ष कार्यक्रमों का मुख्य थीम सशक्त नारी, युवा उड़ान' निर्धारित किया गया है।

जिला स्तर पर स्थानीय कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जाएगी। कार्यक्रमों में शालीनता और गरिमा बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। शासन की कल्याणकारी योजनाओं के हितग्राहियों को भी कार्यक्रमों में लाभान्वित किया जाएगा।

*1 से 3 नवंबर तक रोशन होंगे शासकीय भवन*

राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर 1 से 3 नवंबर तक सभी जिला मुख्यालयों में स्थित शासकीय भवनों पर आकर्षक रोशनी की जाएगी। इसके लिए संबंधित विभाग अपने बजट से आवश्यक व्यवस्थाएं करेंगे।

राज्य शासन ने सभी कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि मुख्य अतिथियों के परामर्श से कार्यक्रमों का निर्धारण करते हुए आयोजन की समुचित तैयारियां सुनिश्चित करें। जिला स्तरीय कार्यक्रमों में मंत्रीगण, सांसदों, विधायकों एवं जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 520 नवनियुक्त स्वास्थ्यकर्मियों को सौंपे नियुक्ति पत्र, बोले—जनसेवा और सेवाभाव को बनाएं अपने कार्य का आधार, मरीजों के विश्वास पर उतरें खरा

रायपुर, 27 अक्टूबर 2026/प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और प्रत्येक नागरिक तक बेहतर उपचार की पहुंच सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। स्वस्थ नागरिक ही सशक्त समाज और विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव हैं। हमारी सरकार का प्रयास है कि शहरों के साथ-साथ गांवों, जनजातीय अंचलों और दूरस्थ क्षेत्रों में भी लोगों को समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय  ने आज राजधानी रायपुर के सिविल लाइंस स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित कार्यकम में स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न संवर्गों में नवनियुक्त 520 कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र प्रदान करते हुए यह बात कही।  

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सभी नवनियुक्त कर्मचारियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए सेवाभाव, संवेदनशीलता और पूरी निष्ठा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में सेवा का अवसर मिलना अपने आप में एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। अस्पताल आने वाला प्रत्येक व्यक्ति और उसका परिवार स्वास्थ्यकर्मियों की ओर बड़ी आशा और विश्वास से देखता है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े प्रत्येक कर्मचारी की जिम्मेदारी केवल अपने शासकीय दायित्वों के निर्वहन तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार और सेवाभाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त कर्मचारियों से कहा कि रोगियों की सेवा से बढ़कर कोई कार्य नहीं है। आप अपनी ड्यूटी को केवल नौकरी न मानें, बल्कि जनसेवा और पुण्य का कार्य समझकर पूरी ईमानदारी, मनोयोग और समर्पण से कार्य करें। आपके अच्छे व्यवहार, तत्परता और सेवाभाव से मरीजों और उनके परिजनों का स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रति विश्वास और मजबूत होगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अच्छा स्वास्थ्य जीवन में आगे बढ़ने और सफलता प्राप्त करने की पहली आवश्यकता है। स्वस्थ छत्तीसगढ़ से ही विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण संभव है। जब हमारे नागरिक स्वस्थ होंगे, तभी वे अपनी पूरी क्षमता के साथ परिवार, समाज और प्रदेश की प्रगति में योगदान दे सकेंगे। इसी सोच के साथ राज्य सरकार स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के साथ मानव संसाधन की उपलब्धता बढ़ाने पर भी लगातार कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद बीते 25 वर्षों में स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। राज्य सरकार इस यात्रा को और गति देते हुए नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना, अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विकास, आवश्यक उपकरणों और संसाधनों की उपलब्धता तथा स्वास्थ्य अमले को मजबूत करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। हमारा लक्ष्य ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को आवश्यकता के समय सुलभ और गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सके।

*14 जिलों में सेवाएं देंगे 520 नवनियुक्त स्वास्थ्यकर्मी*

स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न संवर्गों के कुल 520 पदों पर चयनित अभ्यर्थियों में स्टाफ नर्स के 208, ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक पुरुष के 95, ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक महिला के 94, फार्मासिस्ट के 25, वार्ड बॉय के 50 तथा वार्ड आया के 48 पद शामिल हैं। नवनियुक्त कर्मचारी प्रदेश के 14 जिलों में अपनी सेवाएं देंगे। इन नियुक्तियों से संबंधित जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन के लिए आवश्यक मानव संसाधन की उपलब्धता बढ़ेगी और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जिन 14 जिलों में नवनियुक्त कर्मचारियों को सेवाएं देनी हैं, उनमें अधिकांश जिले जनजातीय बहुल हैं। इसलिए उनकी जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के निरंतर विस्तार से सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहे हैं। राज्य सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि भौगोलिक दूरी किसी भी नागरिक के लिए बेहतर इलाज प्राप्त करने में बाधा न बने।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में सेवा देने वाले स्वास्थ्यकर्मी सरकार और आम जनता के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इन क्षेत्रों में सेवाभाव और संवेदनशीलता के साथ किया गया कार्य अनेक परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है। उन्होंने नवनियुक्त कर्मचारियों से कहा कि जहां भी उनकी पदस्थापना हो, वहां लोगों के विश्वास पर खरा उतरते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।

*पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया से युवाओं को मिल रहे अवसर : स्वास्थ्य मंत्री श्री जायसवाल*

स्वास्थ्य मंत्री श्री श्यामबिहारी जायसवाल ने नवनियुक्त कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि आज का दिन प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सभी 520 कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया पूर्ण पारदर्शिता के साथ निर्धारित समयसीमा में पूरी की गई है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आवश्यक मानव संसाधन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। डॉक्टर, नर्स सहित स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न पदों पर आवश्यकता के अनुरूप आगे भी भर्तियां की जाएंगी। उन्होंने नवनियुक्त कर्मचारियों से पूरी निष्ठा, अनुशासन और सेवाभाव के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, खाद्य मंत्री श्री दयाल दास बघेल, उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन, राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, स्वास्थ्य सचिव श्री अमित कटारिया, आयुक्त सह संचालक स्वास्थ्य सेवाएं श्री संजीव झा सहित स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित थे।

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सीएम विष्णुदेव साय की कैबिनेट के 19 बड़े फैसले: 15 नवंबर से 3100 रुपये क्विंटल में होगी धान खरीदी, बिजली बिल में राहत जारी, कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सौगात

*दिनांक : 27 अक्टूबर 2026*

*मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां सिविल लाईन स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित कैबिनेट की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए -*

1. मंत्रिपरिषद ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में छत्तीसगढ़ प्रदेश के किसानों से दिनांक 15 नवम्बर 2026 से धान खरीदी करने का निर्णय लिया है। उक्त अवधि में 27.50 लाख से अधिक किसानों से 3100 रूपये प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान की खरीदी की जावेगी। किसान हित में बड़ा फैसला लेते हुए एग्रीस्टेक आईडी युक्त विगत वर्ष के पंजीकृत सभी कृषकों को धान विक्रय हेतु मान्य किया है, इन किसानों को पृथक से पंजीयन की कोई आवश्यकता नहीं होगी। 

एग्रीस्टेक में पंजीयन होने के कारण किसानों को धान विक्रय हेतु पृथक से ऋण पुस्तिका समिति में लाने की आवश्यकता नहीं होगी। डिजिटल क्राप सर्वे के माध्यम धान के रकबे का ऑनलाईन निर्धारण डिजिटल रूप से सुनिश्चित हुआ है। वास्तविक किसानों से धान खरीदी सुनिश्चित करने हेतु बायोमैट्रिक आधारित धान की खरीदी की जावेगी। किसानों को बेहतर एवं सुगम व्यवस्था प्रदान किये जाने हेतु 360 नये उपार्जन केन्द्र प्रारंभ किये जा रहे हैं, फलस्वरूप इस वर्ष 3100 उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से धान खरीदी सुश्चित की जायेगी। धान खरीदी हेतु समितियों में समुचित व्यवस्था किये जाने के निर्देश दिये गये है। 

मंत्रिपरिषद ने खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 एवं वर्ष 2025-26 में अतिशेष धान की धान की नीलामी के माध्यम से निराकरण करने के संबंध में मंत्रिमण्डलीय उपसमिति की बैठक के निर्णय का अनुसमर्थन किया है। 

2. मंत्रिपरिषद ने मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान (एम-ऊर्जा) योजना के अंतर्गत घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक बिजली बिल में दी जा रही रियायत को पूर्ववत जारी रखने का निर्णय लिया है। साथ ही, योजना का लाभ लेने के लिए 400 यूनिट तक मासिक विद्युत खपत की पात्रता अवधि को 30 सितंबर 2026 से बढ़ाकर 31 मार्च 2027 तक कर दिया गया है। इस निर्णय से लगभग 7.25 लाख घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को योजना के तहत बिजली बिल में मिल रही रियायत का लाभ निरंतर प्राप्त होता रहेगा।

3. छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद् ने बिटुमिन (डामर) की कीमतों में हुई असाधारण वृद्धि को देखते हुए छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के अंतर्गत संचालित तथा लोक निर्माण विभाग अंतर्गत राज्य वित्त पोषित सड़क निर्माण, नवीनीकरण एवं संधारण कार्यों के अनुबंधकों को मूल्य राहत (क्षतिपूर्ति) प्रदान करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

इसके तहत 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक की अवधि में अनुबंधकों द्वारा वास्तव में क्रय एवं उपयोग की गई बिटुमिन की मात्रा पर छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के अंतर्गत संचालित कार्यों के लिए कुल 130.88 करोड़ रुपये की राहत राज्य शासन द्वारा बजट से अनुदान के रूप में दी जाएगी। वहीं, राज्य वित्त पोषित सड़क निर्माण, नवीनीकरण एवं संधारण कार्यों के ऐसे अनुबंध, जिनकी निविदाएं 1 अप्रैल 2026 से पूर्व प्राप्त हुई हैं, उनमें 15 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक क्रय कर उपयोग किए गए बिटुमिन पर भी मूल्य राहत प्रदान की जाएगी। इस पर लगभग 70 करोड़ से 100 करोड़ रुपये तक अतिरिक्त व्यय का अनुमान है।

इस निर्णय से डामरीकरण से संबंधित लंबित सड़क निर्माण कार्यों को गति मिलेगी और उन्हें निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने में सहायता मिलेगी। साथ ही, भारत सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।

4. मंत्रिपरिषद ने राज्य के शासकीय सेवकों एवं उनके आश्रित परिवारजनों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने के महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी है। नई व्यवस्था के तहत शासकीय सेवकों को उपचार के समय अस्पताल में चिकित्सा व्यय का भुगतान स्वयं करने और बाद में प्रतिपूर्ति के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरने की आवश्यकता नहीं होगी। सूचीबद्ध अस्पतालों में उन्हें कैशलेस उपचार की सुविधा मिलेगी तथा पूर्व-अनुमोदन और दावों की प्रक्रिया ऑनलाइन एवं डिजिटल माध्यम से की जाएगी। इस निर्णय से विशेष रूप से गंभीर बीमारी और आपातकाल की स्थिति में शासकीय सेवकों एवं उनके परिवारों को तत्काल उपचार के साथ बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी।

5. मंत्रिपरिषद ने प्रदेश में अधोसंरचना विकास की योजना, परियोजना तैयारी, गुणवत्ता, निगरानी और संधारण की व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं आधुनिक बनाने के लिए ‘मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन-2026’ के प्रारूप (मिशन गाइडलाइन्स) को मंजूरी प्रदान की है। मिशन वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए संचालित होगा, जिसके लिए कुल 500 करोड़ रूपए, अर्थात 100 करोड़ रूपए प्रतिवर्ष का प्रावधान प्रस्तावित है। 

लोक निर्माण विभाग इसका नोडल विभाग तथा छत्तीसगढ़ रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पाेरेशन लिमिटेड (CGRIDCL) क्रियान्वयन एजेंसी होगी।

मिशन के तहत प्रदेश का सड़क नेटवर्क मास्टर प्लान तैयार करने, अधोसंरचना की आवश्यकताओं का डेटा आधारित आकलन, परियोजनाओं के सर्वेक्षण एवं DPR की अग्रिम तैयारी, WAMISऔर ई-माप पुस्तिका के माध्यम से कार्यों का डिजिटलीकरण, GIS आधारित समेकित नियोजन, गुणवत्ता एवं सड़क सुरक्षा ऑडिट तथा PPP और नवीन वित्तीय मॉडल को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे परियोजनाओं की प्राथमिकता वस्तुनिष्ठ आधार पर तय होगी, निविदा से पहले आवश्यक तैयारियां पूरी होने से समय और लागत में होने वाली वृद्धि को कम करने, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुधारने तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिलेगी। मिशन को लागू करने से संबंधित आवश्यक कार्यवाही के लिए लोक निर्माण विभाग को अधिकृत किया गया है।

6. मंत्रिपरिषद ने प्रदेश में पर्यटन के समग्र विकास के लिए ‘मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन’ को मंजूरी प्रदान की है। ‘पर्यटन से समृद्धि’ के ध्येय के साथ मिशन का संचालन अगले 5 वर्षों तक किया जाएगा, जिसके लिए लगभग 500 करोड़ रूपए का प्रावधान प्रस्तावित है। मिशन के माध्यम से पर्यटन स्थलों पर बेहतर अधोसंरचना, कनेक्टिविटी, सुविधाएं, सुरक्षा एवं स्वच्छता विकसित करने के साथ होमस्टे, निजी निवेश और पर्यटन उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे जहां स्थानीय युवाओं, महिलाओं और स्व-सहायता समूहों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे वहीं छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी।

7. मंत्रिपरिषद् ने विशुद्ध रूप से राजनीतिक आंदोलनों से संबंधित 9 प्रकरणों को जनहित में न्यायालय से वापस लिये जाने के लिए उपसमिति की 30 सितंबर 2026 की बैठक में की गई अनुशंसा के अनुसार आगामी कार्यवाही की अनुमति प्रदान की है।

8. मंत्रिपरिषद् ने रायपुर जिले की नगर पंचायत कूंरा का नाम बदलकर कुंवरगढ़ करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। छत्तीसगढ़ के 36 गढ़ों में शामिल कुंवरगढ़ अपने प्राचीन मंदिरों, ऐतिहासिक धरोहरों और तालाबों के लिए जाना जाता है। समय के साथ इसका नाम कूंरा प्रचलित हो गया था। स्थानीय नागरिक लंबे समय से नगर पंचायत को उसकी ऐतिहासिक पहचान कुंवरगढ़ के नाम से पुनः पहचान दिलाने की मांग कर रहे थे, जिस पर मंत्रिपरिषद द्वारा यह निर्णय लिया गया है। 

9. मंत्रिपरिषद ने औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में संशोधन को मंजूरी प्रदान की है। इसके तहत राज्य के विशाल कोयला भंडार के मूल्यवर्धित उपयोग और आयात प्रतिस्थापन को बढ़ावा देने के लिए 1,000 करोड़ रूपए अथवा उससे अधिक निवेश वाली कोल गैसीफिकेशन परियोजनाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज का प्रावधान किया गया है। 

10. मंत्रिपरिषद ने 295 किलोमीटर लंबी कटघोरा-तखतपुर-मुंगेली-कवर्धा-खैरागढ़-डोंगरगढ़ रेल परियोजना के त्वरित क्रियान्वयन के लिए शत-प्रतिशत इक्विटी निवेश छत्तीसगढ़ रेलवे कॉर्पाेरेशन लिमिटेड (CRCL) के माध्यम से किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। 

लगभग 8,000 करोड़ रूपए की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना में 25 प्रतिशत, यानी करीब 2,000 करोड़ रूपए की अंशपूंजी होगी, जिसमें छत्तीसगढ़ शासन और रेल मंत्रालय द्वारा लगभग 1,000-1,000 करोड़ रूपए का योगदान दिया जाएगा। राज्य शासन की हिस्सेदारी मिनरल डेवलपमेंट फंड/डीएमएफ/राज्य बजट के माध्यम से वहन की जाएगी। इस रेल परियोजना से रेल सुविधा से वंचित क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी तथा उद्योग, पर्यटन, रोजगार और कृषि उपज के लिए नए बाजारों तक पहुंच का विस्तार होगा।

11. मंत्रिपरिषद ने रिडेवलपमेंट योजना के द्वितीय चरण में 5 परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान की है। इसके अंतर्गत शासकीय पोल्ट्री फार्म-दुर्ग, वेटनरी हॉस्पिटल कैम्पस रामानुजगंज, जशपुर में पुलिस लाइन एवं रणजीता स्टेडियम के पीछे की भूमि, सक्ती के बुधवारी बाजार तथा धमतरी के रुद्री चौक की शासकीय भूमि एवं जर्जर परिसंपत्तियों का सुनियोजित पुनर्विकास किया जाएगा। परियोजनाओं का क्रियान्वयन पीपीपी मॉडल पर निजी क्षेत्र की भागीदारी से किया जाएगा, जिससे राज्य शासन पर अतिरिक्त वित्तीय भार डाले बिना नई शासकीय परिसंपत्तियों का निर्माण, भूमि का बेहतर उपयोग, राजस्व में वृद्धि तथा रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

12. मंत्रिपरिषद ने राजनांदगांव जिले में भंडारण सुविधा के विकास के लिए केंद्रीय भंडारण निगम (CWC) को ग्राम खपरीकला में 10 एकड़ भूमि आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है। यह भूमि निर्धारित गाइडलाइन दर के अनुसार बाजार मूल्य के 75 प्रतिशत प्रब्याजि, वार्षिक भू-भाटक तथा निर्धारित अधोसंरचना एवं पर्यावरण उपकर लेकर आवंटित की जाएगी। इस निर्णय से जिले में भंडारण अधोसंरचना का विस्तार होगा और कृषि उपज सहित अन्य वस्तुओं के सुरक्षित भंडारण की क्षमता बढ़ेगी।

13. मंत्रिपरिषद ने राजनांदगांव जिले के ग्राम सोमनी में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के माध्यम से मल्टी फ्रूट प्रोसेसिंग फैसिलिटी की स्थापना के लिए कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग को राजगामी संपदा की 31.55 एकड़ भूमि आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है। लगभग 400 करोड़ रूपए के प्रस्तावित निवेश वाली इस परियोजना में किसानों से सीधे उपज की खरीदी की व्यवस्था विकसित की जाएगी। परियोजना से 1,000 से अधिक प्रत्यक्ष और 5,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे तथा फल उत्पादक किसानों को उनकी उपज के प्रसंस्करण और विपणन के लिए बेहतर सुविधाएं एवं बाजार उपलब्ध हो सकेगा।

14. मंत्रिपरिषद ने सुशासन एवं अभिसरण विभाग के विभागाध्यक्ष कार्यालय के लिए 3 नए पदों के सृजन को मंजूरी प्रदान की है। इनमें आयुक्त/संचालक का एक पद, अपर संचालक का एक पद तथा विशेषज्ञ (अपर संचालक स्तर) का एक पद शामिल है। इन पदों के सृजन से विभाग को प्रभावी प्रशासनिक नेतृत्व, बेहतर समन्वय एवं पर्यवेक्षण के साथ लोक प्रशासन और विधि संबंधी विषयों में विशेषज्ञता मिलेगी तथा सुशासन से जुड़ी नीतिगत एवं सुधारात्मक पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन को गति मिलेगी।

15. मंत्रिपरिषद् ने वन मुख्यालय (विभागाध्यक्ष कार्यालय), अरण्य भवन, नवा रायपुर में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (पे-लेवल-16) का एक अस्थायी पद एक वर्ष के लिए सृजित करने की स्वीकृति दी है। इससे पीएम गति-शक्ति, प्रगति एवं परिवेश पोर्टल से जुड़े कार्यों के त्वरित निष्पादन, समन्वय और पर्यवेक्षण में मदद मिलेगी।

16. मंत्रिपरिषद ने स्वर्गीय डॉ. राकेश मोहन चंदोला, सह प्राध्यापक, चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर के 19 अक्टूबर 1987 से 7 जनवरी 2022 तक की सेवा को परिवार पेंशन के प्रयोजन के लिए नियमित सेवा मानने का निर्णय लिया है। इसके आधार पर उनके पात्र परिवारजन को परिवार पेंशन, एरियर्स तथा नियमानुसार ब्याज के भुगतान की स्वीकृति प्रदान की गई है।

17. मंत्रिपरिषद द्वारा मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के प्रारूप की स्वीकृति प्रदान की गई। मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के अंतर्गत प्रतिभा पहचान से लेकर पदक प्राप्ति तक खिलाड़ियों के विकास की क्रमबद्ध व्यवस्था प्रस्तावित है। इसके लिए वर्ष 2026-27 में 100 करोड़ रूपए का बजट प्रावधान किया गया है। विद्यालयों एवं चयन शिविरों के माध्यम से टैलेंट हंट और मुख्यमंत्री ट्रॉफी आयोजित कर प्रतिभाओं की पहचान की जाएगी तथा उन्हें AMS में पंजीकृत किया जाएगा। इसके बाद फीडर सेंटरों में बुनियादी प्रशिक्षण, राज्य खेल अकादमियों में खेल-विशिष्ट उन्नत प्रशिक्षण और उच्च प्रदर्शन केंद्रों में विशेषज्ञ कोचिंग, स्पोर्ट्स साइंस एवं प्रदर्शन विश्लेषण की सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी। 10 मुख्य खेल विधाओं में कोर एवं डेवलपमेंट समूह बनाकर पदक संभावित खिलाड़ियों को लक्षित सहायता और एक्सपोज़र दिया जाएगा। प्रतियोगिता परिणाम एवं निर्धारित प्रदर्शन मानकों के आधार पर खिलाड़ियों की प्रगति और सहायता की नियमित समीक्षा होगी। प्रथम चरण में अंबिकापुर, बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, जगदलपुर और जशपुर में फीडर सेंटर की स्थापना की जाएगी। नीति के तहत विभिन्न घटकों के एकीकृत क्रियान्वयन से सुदृढ़ खेल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित होगा और खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए तैयार किया जा सकेगा।

18. मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम, 2015 में संशोधन किया गया है। इससे भूमि उपयोग सरलीकरण एवं भू-खण्ड सुगमता की पूर्ति होगी। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को प्रोत्साहन मिलेगा। औद्योगिक भूमि एवं भवन संबंधी विवादों में कमी आएगी और रिक्त अथवा अतिशेष भूमि का उत्पादक उपयोग एवं पारदर्शी ई-नीलामी से आबंटन सुनिश्चित होगा।

19. मंत्रिपरिषद् ने खरीफ-2026 में “कृषक उन्नति योजना” के संशोधन संबंधी कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रस्ताव का अनुमोदन किया। किसानों से 3100 रूपए प्रति क्विंटल की दर से धान की खरीदी की जाएगी।

कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत धान फसल पर आदान सहायता राशि प्रति क्विंटल के स्थान पर प्रति एकड़ के मान से प्रदान करने का निर्णय लिया गया। इससे किसानों को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे फसल विविधीकरण, किसानों की आय तथा उनके सामाजिक-आर्थिक स्तर में सुधार होगा। साथ ही उन्नत बीज, उर्वरक, कीटनाशक, कृषि यंत्रीकरण और नवीन कृषि तकनीकों में निवेश को बढ़ावा मिलेगा। 

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वन उपज संग्राहकों और महिला समूहों के उत्पाद अब बनेंगे दिवाली की खास पहचान, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने लॉन्च किए ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के आकर्षक गिफ्ट पैक

रायपुर, 27 अक्टूबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास में ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के दिवाली गिफ्ट पैक का लोकार्पण किया। वन धन विकास केंद्रों से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित स्थानीय एवं हर्बल उत्पादों को आकर्षक गिफ्ट पैक के रूप में तैयार किया गया है। इस पहल से जहां छत्तीसगढ़ के गुणवत्तापूर्ण स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार मिलेगा, वहीं लघु वनोपज संग्राहकों और महिला स्व-सहायता समूहों की आजीविका को भी मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अभिनव पहल की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध वन संपदा हमारे लाखों वनवासी परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। हमारी सरकार का प्रयास है कि वनों से प्राप्त उपज का अधिक से अधिक मूल्य संवर्धन प्रदेश में ही हो और इसका सीधा आर्थिक लाभ वन उपज संग्राहकों तथा इससे जुड़े महिला समूहों तक पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन धन विकास केंद्रों के माध्यम से हमारी माताएं-बहनें स्थानीय वनोपज को प्रसंस्कृत कर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों को बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़कर हम उनके परिश्रम को नई पहचान और आय के बेहतर अवसर दे रहे हैं। ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के दिवाली गिफ्ट पैक इसी दिशा में एक सार्थक पहल हैं।

उन्होंने प्रदेशवासियों से  स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने का आह्वान करते हुए कहा कि जब हम छत्तीसगढ़ में बने उत्पादों को खरीदते और उपहार में देते हैं, तो उसका लाभ सीधे हमारे वनांचल के परिवारों और महिला स्व-सहायता समूहों तक पहुंचता है। स्थानीय उत्पादों को अपनाना हमारी परंपराओं, स्थानीय उद्यमिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने में हमारी सहभागिता है।

उल्लेखनीय है कि ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के दिवाली गिफ्ट पैक दो श्रेणियों—प्रीमियम और सामान्य—में तैयार किए गए हैं। प्रीमियम गिफ्ट पैक में नौ प्रकार के चयनित उत्पाद शामिल हैं। वहीं सामान्य गिफ्ट पैक में पांच प्रकार के उत्पाद रखे गए हैं।

आम नागरिक इन गिफ्ट पैक को छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ द्वारा संचालित ‘संजीवनी’ विक्रय केंद्रों से खरीद सकेंगे। इससे दिवाली पर उपहार देने की परंपरा को छत्तीसगढ़ के स्थानीय उत्पादों, महिला उद्यमिता और जनजातीय आजीविका से जोड़ने का अवसर मिलेगा।

*वन संपदा के साथ छत्तीसगढ़ के पारंपरिक स्वाद का समावेश*

दिवाली गिफ्ट पैक में प्रदेश की वन संपदा और स्थानीय स्वाद से जुड़े विविध उत्पादों को शामिल किया गया है। इनमें जामुन जूस, जामुन स्प्रेड, आंवला कैंडी, इमली कैंडी, कोदो और महुआ से बने कुकीज़, च्यवनप्राश, वाइल्ड फॉरेस्ट हनी, बस्तर के मसाला एवं नमकीन काजू, जशपुर की ग्रीन टी तथा एलोवेरा जेल जैसे उत्पाद शामिल हैं।

इन उत्पादों में छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा, पारंपरिक खाद्य संस्कृति और महिला समूहों के उद्यम कौशल का सुंदर समावेश दिखाई देता है। स्थानीय वनोपज से तैयार इन उत्पादों की बेहतर पैकेजिंग और विपणन से ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ ब्रांड को भी नई पहचान मिल रही है।

*वन धन विकास केंद्रों में तैयार हो रहे उत्पाद*

गिफ्ट पैक में शामिल उत्पाद प्रदेश के विभिन्न वन धन विकास केंद्रों और प्रसंस्करण इकाइयों में तैयार किए जा रहे हैं। इनमें वन धन विकास केंद्र कौरीनभाटा (राजनांदगांव), बोड़ला (कवर्धा), पंचक्की (जशपुर), आसना (जगदलपुर), दुगली (धमतरी), डोंगानाला (कटघोरा) तथा केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई जामगांव (एम), दुर्ग शामिल हैं।

इन वन धन विकास केंद्रों का वार्षिक कारोबार लगभग 60 से 70 लाख रुपए है। यहां वनोपज के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आय के अवसर सृजित किए जा रहे हैं। विशेष रूप से महिला स्व-सहायता समूह उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और अन्य गतिविधियों से जुड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

वन धन उत्पादों के प्रसंस्करण, निर्माण और विपणन का प्रत्यक्ष लाभ वन उपज संग्राहकों और महिला स्व-सहायता समूहों को मिलता है। दिवाली गिफ्ट पैक के माध्यम से इन उत्पादों की मांग और बिक्री बढ़ने से वनांचल की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ महिला समूहों के आर्थिक सशक्तीकरण को भी नया बल मिलेगा।

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राज्योत्सव की तैयारियों को लेकर कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू सख्त, उत्साह और गरिमा के साथ आयोजन कराने अधिकारियों को सौंपी जिम्मेदारी

सारंगढ़–बिलाईगढ़, 27 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर सारंगढ़–बिलाईगढ़ जिला मुख्यालय में 2 नवंबर को “सशक्त नारी, युवा उड़ान” थीम पर राज्योत्सव का आयोजन किया जाएगा। सारंगढ़ के गढ़ चौक स्थित खेलभाठा मैदान में होने वाले एक दिवसीय समारोह की तैयारियों की कलेक्टर श्रीमती पद्मिनी भोई साहू ने मंगलवार को समय-सीमा की बैठक में समीक्षा की। उन्होंने राज्योत्सव को उत्साह, उमंग और गरिमा के साथ आयोजित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और विभागों को अलग-अलग दायित्व सौंपे।
कलेक्टर ने आयोजन से संबंधित तैयारियों की प्रगति की जानकारी ली। बैठक में मंच और पंडाल, सुरक्षा एवं यातायात, विद्युत, पेयजल, साफ-सफाई और स्वास्थ्य सुविधाओं सहित समारोह से जुड़ी व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। राज्योत्सव के सफल संचालन के लिए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को नोडल अधिकारी और अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सारंगढ़ को सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
राज्योत्सव में “सशक्त नारी, युवा उड़ान” थीम पर विभागीय स्टॉल लगाए जाएंगे। इनके माध्यम से विभिन्न शासकीय योजनाओं और विभागीय कार्यों की जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। स्टॉलों में प्रधानमंत्री आवास योजना, राष्ट्रीय आजीविका मिशन, आयुष्मान कार्ड, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, पीएम श्री और धरती आबा सहित अन्य योजनाओं तथा वन विभाग द्वारा गोमर्डा अभयारण्य से संबंधित जानकारी शामिल रहेगी।
विभागीय स्टॉलों की व्यवस्था और संबंधित विभागों से समन्वय के लिए डिप्टी कलेक्टर श्री शंकर लाल सिन्हा को नोडल अधिकारी तथा डिप्टी कलेक्टर डॉ. वर्षा बंसल को सहायक नोडल अधिकारी का दायित्व सौंपा गया है। स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों के चयन और आयोजन के लिए आदिवासी विकास, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग को जिम्मेदारी दी गई है।
समारोह में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था की जिम्मेदारी पुलिस विभाग को तथा मंच एवं पंडाल की व्यवस्था लोक निर्माण विभाग को दी गई है। संबंधित विभाग विद्युत, जनरेटर, माइक और साउंड की व्यवस्था करेंगे। कार्यक्रम स्थल पर पेयजल, साफ-सफाई, चलित शौचालय और डस्टबिन की व्यवस्था की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग को एंबुलेंस, आकस्मिक चिकित्सा सुविधा, प्राथमिक चिकित्सा किट और आवश्यक दवाइयों की व्यवस्था का दायित्व सौंपा गया है। समारोह स्थल पर फायर ब्रिगेड भी उपलब्ध कराई जाएगी।
समय-सीमा की बैठक में कलेक्टर ने सेवा संकल्प अभियान, सुशासन तिहार के लंबित आवेदनों, पारस एवं अटल मॉनिटरिंग पोर्टल के साथ ग्रामीण और नगरीय योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, पेयजल, धान खरीदी की तैयारियों, भिखमपुरा से संबंधित कार्यों तथा सड़क दुर्घटना संभावित स्थलों की मरम्मत की स्थिति की जानकारी ली।
बैठक में पुलिस अधीक्षक श्री सुनील शर्मा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री ऋषिकेश तिवारी, अपर कलेक्टर एवं सारंगढ़ एसडीएम श्री दशरथ सिंह राजपूत, डिप्टी कलेक्टर वर्षा बंसल, सुश्री शिक्षा शर्मा और श्री शंकर लाल सिन्हा सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

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किसानों के लिए बड़ी खबर! 30 अक्टूबर को जारी होगी पीएम किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त, सारंगढ़-बिलाईगढ़ के हजारों किसानों को मिलेगा लाभ

सारंगढ़–बिलाईगढ़, 26 अक्टूबर 2026। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त का अंतरण 30 अक्टूबर को किया जाएगा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी गुजरात के बनासकांठा से देशभर के पात्र किसानों के बैंक खातों में राशि हस्तांतरित करेंगे। जारी लॉट के अंतर्गत सारंगढ़–बिलाईगढ़ जिले के 72 हजार 874 किसान इस किस्त से लाभान्वित होंगे।
उप संचालक कृषि से प्राप्त जानकारी के अनुसार लाभान्वित होने वाले किसानों में विकासखंड बरमकेला के 18 हजार 167, सारंगढ़ के 24 हजार 706 और बिलाईगढ़ के 30 हजार एक किसान शामिल हैं। किस्त अंतरण के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का वेबकास्ट के माध्यम से सीधा प्रसारण किया जाएगा। इस दिन को “पीएम किसान उत्सव दिवस” के रूप में मनाया जाएगा।
कलेक्टर श्रीमती पद्मिनी भोई साहू ने जिला स्तर पर आयोजित होने वाले सभी आयोजनों को भव्यता के साथ आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। भारत सरकार के निर्देशानुसार पीएम किसान उत्सव दिवस पर जिला स्तर पर कृषि विज्ञान केंद्र तथा विकासखंड स्तर पर विकासखंड कार्यालयों, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों और पंचायत मुख्यालयों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें जनप्रतिनिधियों, संबंधित विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों और किसानों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।
कार्यक्रमों में किसानों को पीएम-किसान योजना की पात्रता, ई-केवाईसी, आधार सीडिंग और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं की जानकारी दी जाएगी। योजना के प्रचार-प्रसार के लिए पोस्टर, बैनर, सोशल मीडिया सहित सूचना, शिक्षा एवं संचार संबंधी गतिविधियां भी संचालित की जाएंगी।
कृषि विभाग ने किसानों से अपनी ई-केवाईसी और आधार सीडिंग की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने की अपील की है, ताकि सम्मान निधि की राशि प्राप्त करने में बाधा न आए। योजना के अंतर्गत पात्र किसानों के बैंक खातों में राशि सीधे हस्तांतरित की जाती है।
किसान कार्यक्रम का सीधा प्रसारण अपने मोबाइल फोन, लैपटॉप या अन्य इंटरनेट-सक्षम उपकरणों पर वेबकास्ट लिंक http://pmindiawebcast.nic.in/ के माध्यम से देख सकेंगे। इसके जरिए वे प्रधानमंत्री के संबोधन और कृषि एवं कृषक कल्याण से संबंधित संदेशों को सुन सकेंगे।

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महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को लेकर सखी वन स्टॉप सेंटर की पहल, महिला महाविद्यालय में छात्राओं को दहेज प्रथा, घरेलू हिंसा और प्रताड़ना के खिलाफ किया जागरूक

सारंगढ़–बिलाईगढ़, 27 अक्टूबर 2026। कलेक्टर श्रीमती पद्मिनी भोई साहू के निर्देशानुसार और महिला संरक्षण अधिकारी श्रीमती विभा बख्शी के नेतृत्व में महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर द्वारा 26 अक्टूबर को श्री राम आदर्श महिला महाविद्यालय, सारंगढ़ में जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। शिविर में छात्राओं को दहेज प्रथा, महिला अधिकारों, सुरक्षा, घरेलू हिंसा और विभिन्न प्रकार की प्रताड़ना से संबंधित जानकारी दी गई।

शिविर में सखी वन स्टॉप सेंटर की काउंसलर और केस वर्कर ने छात्राओं को दहेज प्रथा के दुष्परिणामों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि दहेज प्रथा महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और समानता से जुड़ा गंभीर सामाजिक मुद्दा है। इसके उन्मूलन के लिए सामाजिक जागरूकता बढ़ाने और महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति सजग करने की आवश्यकता है।

छात्राओं को महिलाओं के संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों की जानकारी देते हुए बताया गया कि दहेज की मांग, घरेलू हिंसा, मानसिक या शारीरिक प्रताड़ना अथवा अन्य उत्पीड़न की स्थिति में महिलाएं सहायता और कानूनी संरक्षण प्राप्त कर सकती हैं। इस दौरान महिलाओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने में समाज की भूमिका पर भी चर्चा की गई।

शिविर में सखी वन स्टॉप सेंटर की भूमिका और वहां उपलब्ध सहायता सेवाओं की जानकारी दी गई। छात्राओं को बताया गया कि हिंसा, उत्पीड़न या संकट का सामना कर रही महिलाएं सेंटर के माध्यम से आवश्यक सहायता प्राप्त कर सकती हैं। उन्हें टोल-फ्री महिला हेल्पलाइन नंबर 181 के बारे में भी बताया गया और जरूरत पड़ने पर समय पर मदद लेने के लिए जागरूक किया गया।

कार्यक्रम में सखी वन स्टॉप सेंटर की काउंसलर सुश्री इंदु अजय तथा केस वर्कर श्रीमती रश्मि सिंगसर्वा और श्रीमती मंजू रात्रे उपस्थित रहीं। उन्होंने छात्राओं को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने और जरूरतमंद महिलाओं को सहायता के उपलब्ध माध्यमों की जानकारी देने के लिए प्रेरित किया।

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कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू के निर्देश पर खनिज विभाग की कार्रवाई तेज, अवैध परिवहन करते 2 हाइवा सहित 5 वाहन जब्त

सारंगढ़-बिलाईगढ़, 27 अक्टूबर 2026। कलेक्टर श्रीमती पद्मिनी भोई साहू के निर्देशानुसार जिले में अवैध खनिज उत्खनन एवं परिवहन पर अंकुश लगाने खनिज विभाग द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में मंगलवार को सारसीवां और भटगांव तहसील क्षेत्र में औचक निरीक्षण कर अवैध खनिज परिवहन करते हुए 5 वाहनों पर कार्रवाई की गई।

निरीक्षण के दौरान सारसीवां क्षेत्र में साधारण रेत का अवैध परिवहन करते दो ट्रैक्टर पकड़े गए। वहीं भटगांव क्षेत्र में चूनापत्थर का अवैध परिवहन करते दो हाइवा तथा साधारण रेत का परिवहन करते एक ट्रैक्टर पर कार्रवाई की गई। संबंधित वाहनों को थाना सारसीवां एवं थाना भटगांव की अभिरक्षा में रखा गया है।

खनिज विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 2015 एवं खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21 के तहत कार्रवाई की जा रही है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध  खनिज उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध अभियान लगातार जारी रहेगा।

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सारंगढ़–बिलाईगढ़ में मुर्गी पालन से स्वरोजगार को बढ़ावा, 191 इकाइयों के लक्ष्य में 150 का वितरण पूरा, 4 नवंबर तक शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने की तैयारी

सारंगढ़–बिलाईगढ़, 27 अक्टूबर 2026। ग्रामीण परिवारों को स्वरोजगार से जोड़ने, उनकी आय बढ़ाने और पोषण सुरक्षा को प्रोत्साहित करने की दिशा में बैकयार्ड कुक्कुट इकाई वितरण योजना संचालित की जा रही है। राज्य शासन की इस योजना के माध्यम से ग्रामीण हितग्राहियों को रियायती दर पर कुक्कुट इकाई उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वे कम लागत में मुर्गी पालन शुरू कर अंडे और मांस के उत्पादन से अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें।

जिला प्रशासन के अंतर्गत पशुधन विकास विभाग द्वारा जिले में योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। कलेक्टर श्रीमती पद्मिनी भोई साहू के नेतृत्व में जिले में संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से पात्र परिवारों तक आजीविका के अवसर पहुंचाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं से प्राप्त जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026–27 में जिले को 191 बैकयार्ड कुक्कुट इकाइयों के वितरण का लक्ष्य मिला है। इसके विरुद्ध अब तक 150 इकाइयों का वितरण किया जा चुका है, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 78.5 प्रतिशत है। विभाग द्वारा शेष 41 इकाइयों का वितरण पूर्ण कर 4 नवंबर 2026 तक शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है।

योजना के अंतर्गत एक कुक्कुट इकाई की लागत 3 हजार रुपए निर्धारित है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को 90 प्रतिशत अर्थात 2 हजार 700 रुपए का शासकीय अनुदान दिया जाता है। इस वर्ग के हितग्राहियों को 300 रुपए का अंशदान देना होता है। सामान्य वर्ग के हितग्राहियों को 75 प्रतिशत अर्थात 2 हजार 250 रुपए का अनुदान मिलता है तथा उनका अंशदान 750 रुपए निर्धारित है।

प्रत्येक इकाई में हितग्राही को वनराज नस्ल के 28 दिवसीय 45 चूजे और 10 किलोग्राम कुक्कुट आहार प्रदान किया जाता है। उचित आहार, स्वच्छ पेयजल, सुरक्षित आवास और नियमित टीकाकरण से इन पक्षियों का बेहतर पालन किया जा सकता है। वनराज नस्ल के रंगीन कुक्कुट ग्रामीण परिवेश में पालन तथा स्थानीय बाजार में अंडे और मांस की बिक्री के लिए उपयोगी हैं।

विभाग के अनुसार उचित पोषण और अनुकूल पालन प्रबंधन में वनराज नस्ल की मुर्गियां सालाना लगभग 280 से 300 अंडे देने की क्षमता रखती हैं। यदि हितग्राही लगभग 20 अंडे देने वाली मुर्गियों का पालन करता है, तो उत्पादन अवधि में औसतन प्रतिदिन लगभग 15 से 20 अंडे प्राप्त हो सकते हैं। इन अंडों की स्थानीय बाजार में बिक्री से नियमित आय का अवसर मिलता है। इसके अतिरिक्त नर पक्षियों की बिक्री से एकमुश्त आय प्राप्त की जा सकती है।

उचित नर-मादा अनुपात और अंडों को सेने की व्यवस्था होने पर निषेचित अंडों से चूजे तैयार कर कुक्कुट इकाई का विस्तार भी किया जा सकता है। इस प्रकार अंडा उत्पादन, पक्षियों की बिक्री और चूजों के माध्यम से हितग्राही अपनी आय के विभिन्न स्रोत विकसित कर सकते हैं। अंडे और कुक्कुट मांस परिवार के पोषण स्तर में सुधार के लिए भी सहायक हैं।

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