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लोकभवन पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया आत्मीय स्वागत

रायपुर, 22 अक्टूबर 2026/ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के दो दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान लोकभवन आगमन पर राज्यपाल श्री रमेन डेका एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने उनका आत्मीय स्वागत किया। राज्य की प्रथम महिला श्रीमती रानी डेका काकोटी ने भी उनका स्वागत किया।

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पूज्य माता हासी देवी जी की 200वीं जयंती पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जारी किया स्मारक सिक्का, राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रहे मौजूद

रायपुर, 22 अक्टूबर 2026/ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम में पूज्य माता हासी देवी जी के सम्मान में 200 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया। इस अवसर पर राज्यपाल श्री रमेन डेका और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय उपस्थित थे।

      पूज्य शदाणी दरबार रायपुर की 5 वीं पीठाधीश माता साहिब हासी देवी की 200 वीं जयंती पर भारत सरकार वित्त मंत्रालय द्वारा 200 रुपए का स्मारक सिक्का जारी किया गया है। सिंधी विभूति के सम्मान में स्मारक सिक्का जारी होना समाज के लिए ऐतिहासिक मौका था। यह देश-विदेश में रहने वाले करोड़ों सिंधी लोगों के लिए गर्व का विषय है।  स्मारक सिक्के का अनावरण होने के बाद श्रद्धालु और सिक्का संग्राहक इसे शदाणी दरबार की अलग-अलग इकाइयों के माध्यम से बुक कर सकेंगे।
     उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा जारी इस विशेष सिक्के पर पूज्य माता हासी देवी जी की छवि अंकित है। सिक्के के एक ओर अशोक स्तंभ का सिंह शीर्ष और 200 रुपये का मूल्यवर्ग दर्शाया गया है। इस स्मारक सिक्के के माध्यम से उनके जीवन, विचारों और आध्यात्मिक योगदान को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।

      कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन पूज्य शदाणी दरबार रायपुर के पीठाधीश संत डॉ. युधिष्ठिर लाल जी ने दिया।

 इस अवसर पर राज्य की प्रथम महिला श्रीमती रानी डेका काकोटी, सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, श्री सुनील सोनी, श्री मोतीलाल साहू, मुख्य सचिव श्री विकासशील, पुलिस महानिदेशक श्री अरूण देव गौतम, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना सहित वरिष्ठ अधिकारी, पूज्य शदाणी दरबार के सदस्य सहित देशभर से आए हुए जनप्रतिनिधि और सिंधी समाज के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के आगमन से छत्तीसगढ़ में उत्साह का माहौल, राज्यपाल रमेन डेका ने किया आत्मीय अभिनंदन

रायपुर, 22 अक्टूबर 2026/राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु आज दो दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास पर रायपुर पहुंची। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने स्वामी विवेकानंद विमानतल पर पुष्प गुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भी उनका स्वागत किया।  इस अवसर पर जनप्रतिनिधि सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

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प्रभु श्रीराम के ननिहाल और माता कौशल्या की पावन धरा पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का आत्मीय अभिनंदन, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों की ओर से किया स्वागत

रायपुर 22 अक्टूबर 2026/ राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के आज रायपुर आगमन पर स्वामी विवेकानंद विमानतल में राज्यपाल श्री रमेन डेका और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आत्मीय स्वागत किया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रभु श्रीराम के ननिहाल और माता कौशल्या की पावन धरा छत्तीसगढ़ में राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु का समस्त प्रदेशवासियों की ओर से हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐतिहासिक बस्तर दशहरा एवं मुरिया दरबार में राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु की सहभागिता छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का अवसर है। उनकी उपस्थिति से प्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं का मान बढ़ेगा तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को नई ऊर्जा मिलेगी।

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की मुलाकात, मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में हुई सौजन्य भेंट

रायपुर 22 अक्टूबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री श्री साय ने श्री देवनानी का आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर इंदौर लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री शंकर लालवानी और श्री अमित चिमनानी उपस्थित थे।

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छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक विरासत को मिलेगी वैश्विक पहचान, यूनेस्को की संभावित सूची में सिरपुर का शामिल होना प्रदेश के लिए गौरव का विषय : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर, 22 अक्टूबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सिरपुर को यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सिरपुर हमारी समृद्ध सभ्यता, कला, आध्यात्मिकता और ज्ञान परंपरा की अनमोल धरोहर है। प्राचीन काल से ही सिरपुर शिक्षा, संस्कृति, धर्म और स्थापत्य कला का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां की ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक विरासत छत्तीसगढ़ के गौरवशाली अतीत और समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा की जीवंत पहचान है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में ‘विरासत भी, विकास भी’ के संकल्प के साथ देश की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन और उन्हें वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में निरंतर कार्य हो रहा है। इसी भावना के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार भी प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए पर्यटन की नई संभावनाओं से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यूनेस्को की संभावित सूची में सिरपुर का शामिल होना हमारी गौरवशाली विरासत को विश्व पटल पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे सिरपुर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने के साथ पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार सिरपुर सहित छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी गौरवशाली विरासत से परिचित हों और छत्तीसगढ़ की संस्कृति की कीर्ति विश्वभर में और अधिक विस्तारित हो।

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छत्तीसगढ़ में संत रविदास सम्मान के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित, साहित्यकारों और समाज में समरसता का संदेश फैलाने वाली प्रतिभाओं के पास 26 अक्टूबर तक मौका

रायपुर, 22 अक्टूबर 2026/ छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग द्वारा सामाजिक समरसता, साहित्य और काव्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को प्रोत्साहित एवं सम्मानित करने के उद्देश्य से राज्य स्तरीय 'संत रविदास सम्मान' के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित की गई हैं। इच्छुक व्यक्ति निर्धारित प्रारूप में 26 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।

संस्कृति विभाग द्वारा संत रविदास जी के सामाजिक समानता, समरसता और मानव कल्याण के आदर्शों को आगे बढ़ाने तथा साहित्य एवं काव्य के क्षेत्र में दीर्घकालीन साधना और विशिष्ट उपलब्धियां अर्जित करने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करने के उद्देश्य से इस राज्य स्तरीय सम्मान की स्थापना की गई है। इस पहल के माध्यम से सामाजिक समानता, साहित्यिक सृजन और समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए कार्य करने वाली प्रतिभाओं को पहचान एवं प्रोत्साहन मिलेगा।

*26 अक्टूबर तक जमा कर सकेंगे आवेदन*

संस्कृति विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार संत रविदास सम्मान के लिए निर्धारित प्रारूप में प्रविष्टियां 26 अक्टूबर 2026 को शाम 5:30 बजे तक जमा की जा सकेंगी। आवेदक अपनी प्रविष्टियां संचालनालय संस्कृति एवं राजभाषा, द्वितीय तल, व्यावसायिक परिसर, सेक्टर-27, अटल नगर, नवा रायपुर में ऑफलाइन जमा कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

सम्मान के लिए आवेदन की निर्धारित प्रक्रिया, प्रारूप एवं अन्य विस्तृत जानकारी संस्कृति विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.cgculture.in पर उपलब्ध है। विभाग ने सामाजिक समरसता तथा साहित्य एवं काव्य के क्षेत्र में कार्यरत पात्र व्यक्तियों से निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपनी प्रविष्टियां प्रस्तुत करने का आग्रह किया है।

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‘मनखे-मनखे एक समान’ के संदेश से सामाजिक समरसता और विकास का संकल्प, गुरु दर्शन एवं संत समागम मेले में शामिल हुए मुख्यमंत्री साय, सतनामी समाज के सम्मान, सशक्तीकरण और चहुंमुखी विकास का दोहराया संकल्प

रायपुर, 22 अक्टूबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज आरंग विकासखंड स्थित सतनाम पंथ की आस्था के प्रमुख केंद्र भण्डारपुरी धाम में आयोजित गुरु दर्शन एवं संत समागम मेले में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने गुरुगद्दी आसन के दर्शन कर नमन किया और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर उन्होंने लगभग 29 करोड़ रुपए की लागत के तीन महत्वपूर्ण सड़क विकास कार्यों का भूमिपूजन भी किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी ने सत्य, अहिंसा, करुणा, समानता और सामाजिक समरसता का जो संदेश दिया, वह संपूर्ण मानव समाज के लिए सदैव पथ-प्रदर्शक रहेगा। बाबा गुरु घासीदास जी का अमर संदेश ‘मनखे-मनखे एक समान’ हमें भेदभाव से ऊपर उठकर प्रेम, सद्भाव और सामाजिक समरसता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा गुरु घासीदास जी की पावन कर्मभूमि भण्डारपुरी धाम सतनाम पंथ की आस्था के साथ ही छत्तीसगढ़ की समृद्ध सामाजिक-सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। गुरु दर्शन एवं संत समागम मेला हमारी आस्था, सामाजिक एकता और सद्भाव की गौरवशाली परंपरा का जीवंत प्रतीक है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार बाबा गुरु घासीदास जी के बताए सत्य, करुणा, समानता और सामाजिक न्याय के मार्ग पर चलते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। विकास की यात्रा में कोई भी समाज, वर्ग अथवा क्षेत्र पीछे न रहे, इसी भावना के साथ योजनाओं को धरातल पर उतारा जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सतनामी समाज की शिक्षा, सामाजिक और आर्थिक प्रगति के लिए राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है। समाज के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी का अवसर उपलब्ध कराने के लिए दिल्ली स्थित कोचिंग संस्था में सीटों की संख्या 100 से बढ़ाकर 200 की गई है। उन्होंने भण्डारपुरी में मोती महल के भूमिपूजन का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार समाज की आस्था, संस्कृति और गौरव से जुड़े स्थलों के विकास एवं संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। विकसित भारत के इस संकल्प को साकार करने के लिए विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण हमारा लक्ष्य है। उन्होंने सभी से बाबा गुरु घासीदास जी के आदर्शों को आत्मसात करते हुए सामाजिक सद्भाव और समरसता को मजबूत करने तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहभागी बनने का आह्वान किया।

*लगभग 29 करोड़ रुपए के तीन सड़क विकास कार्यों का भूमिपूजन*

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कुल 28 करोड़ 96 लाख 82 हजार रुपए की लागत के तीन सड़क विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। इनमें 8 करोड़ 31 लाख 5 हजार रुपए की लागत से मोहंदी-अड़सेना मार्ग के 4 किलोमीटर हिस्से का चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण और 3 करोड़ 30 लाख 78 हजार रुपए की लागत से नरदहा में 2 किलोमीटर लंबे आंतरिक मार्ग का निर्माण शामिल है।

इसी प्रकार मुख्यमंत्री ने 17 करोड़ 34 लाख 99 हजार रुपए की लागत से 29 किलोमीटर लंबे छतौना-दरबा-कूटेसर-बड़गांव-कुंडा-नारा-लखौली मार्ग के डामर नवीनीकरण कार्य का भूमिपूजन किया। इन कार्यों के पूर्ण होने से क्षेत्र में आवागमन सुगम होने के साथ गांवों के बीच सड़क संपर्क और मजबूत होगा।

*चार विकास कार्यों की घोषणा, 40 स्थानों पर बनेंगे लकड़ी के जैतखाम*

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब की मांग पर चार महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों की घोषणा की। उन्होंने ग्राम पंचायत खमतराई में हाई स्कूल भवन निर्माण के लिए 75 लाख रुपए, नगर पंचायत आरंग के ओड़का में नवीन प्राथमिक शाला भवन के लिए 30 लाख रुपए, नगरपालिका परिषद मंदिर हसौद के पीएम श्री स्कूल में विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए एक करोड़ रुपए तथा चंदखुरी में नगर पंचायत कार्यालय के नवीन भवन निर्माण के लिए 85 लाख रुपए देने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इसके साथ ही अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण मद से 40 स्थानों पर लकड़ी के जैतखाम स्थापित करने की भी घोषणा की।

*मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में सतनामी समाज सतत विकास की ओर अग्रसर : मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब*

तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब ने अपने उद्बोधन में कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सतनामी समाज सतत विकास की ओर अग्रसर है। समाज की ओर से विकास से जुड़ी जितनी भी मांगें मुख्यमंत्री के समक्ष रखी गई हैं, उन्हें उन्होंने संवेदनशीलता के साथ पूरा किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में समाज आगे भी चहुंमुखी विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।

श्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि भण्डारपुरी में मोती महल का भूमिपूजन सामाजिक समरसता और समाज की सांस्कृतिक विरासत के प्रति मुख्यमंत्री की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वहीं दिल्ली में प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग के लिए सीटों की संख्या बढ़ाकर 200 किए जाने से समाज के अधिक युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

*गुरु घासीदास जी के बताए मार्ग पर चलने का आह्वान*

सतनामी समाज के धर्मगुरु श्री बालदास साहेब ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि बाबा गुरु घासीदास जी ने समानता का संदेश देकर समाज को सत्य, सद्भाव और मानवता की राह दिखाई। उन्होंने समाज के लोगों से बाबा गुरु घासीदास जी के दिखाए मार्ग पर चलते हुए उनके विचारों और आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब, अभनपुर विधायक श्री इंद्र कुमार साहू, राजिम विधायक श्री रोहित साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण,  सतनामी समाज के संतगण एवं पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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‘चलो रे संगी, हॉकी खेलबो’ की गूंज से गूंजेगा पूरा छत्तीसगढ़, उप मुख्यमंत्री अरुण साव बोले—हॉकी लीग बनेगी खेल विकास का मील का पत्थर

​रायपुर, 22 अक्टूबर 2026/ राज्य सरकार की एक अनूठी और दूरदर्शी पहल के तहत छत्तीसगढ़ की खेल संस्कृति को एक नया और पेशेवर आयाम देने वाली देश की पहली छत्तीसगढ़ हॉकी लीग का रंगारंग और भव्य शुभारंभ रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में किया गया। चलव रे संगी हॉकी खेलबो के जीवंत उद्घोष के साथ शुरू हुई इस प्रतियोगिता में राष्ट्रीय स्तर के ओलंपियनों, दिग्गज खिलाड़ियों और छत्तीसगढ़ के उभरते युवा खिलाड़ियों का एक अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। इस ऐतिहासिक आयोजन से राज्य के खेल जगत में प्रतिस्पर्धा का एक बिल्कुल नया दौर शुरू हो गया है, जो स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फलक पर चमकने का सुनहरा अवसर देगा।

         ​इस गरिमामयी उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल राज्य मंत्री डॉ.रक्षा निखिल खड़से ने की। समारोह में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू और छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव अति विशिष्ट अतिथि के रूप में विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा, समारोह में राज्य सभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष श्री विश्व विजय सिंह तोमर, बीज निगम के अध्यक्ष श्री चन्द्रहास चंद्राकर और खेल विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार, छत्तीसगढ़ हाकी लीग के ब्रांड एंबेसडर सरदार सिंह, पूर्व अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर श्री राजेश चौहान सहित कई गणमान्य नागरिक और खेलप्रेमी भारी संख्या में मौजूद रहे।

        ​समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खड़से ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ आने का यह उनका दूसरा अवसर है, इससे पहले वे बस्तर में खेलो इंडिया ट्राइबल खेल के आयोजन के दौरान यहाँ आई थीं। उन्होंने देश की खेल प्रगति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज भारत खेलों में लगातार आगे बढ़ रहा है और सरकार का मुख्य उद्देश्य खेल को देश के हर घर तक पहुँचाना है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप पूरे देश में खेलों को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर आयोजन किए जा रहे हैं और इसके लिए पर्याप्त बजट भी प्रदान किया जा रहा है। आज केवल क्रिकेट ही नहीं, बल्कि अन्य सभी खेलों को भी समान रूप से प्राथमिकता दी जा रही है। निजी संस्थान भी आगे बढ़कर युवा खिलाड़ियों को प्रोत्साहित कर रहे हैं, क्योंकि युवाओं की ऊर्जा और ताकत से ही देश का भविष्य मजबूत होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि वह दिन दूर नहीं जब छत्तीसगढ़ को देश के एक प्रमुख श्खेल गढ़श् के रूप में जाना जाएगा।

       ​समारोह के अति विशिष्ट अतिथि उप मुख्यमंत्री एवं खेल मंत्री श्री अरुण साव ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में कहा कि इस छत्तीसगढ़ हॉकी लीग की गूँज पूरे राज्य में चलो रे संगी हॉकी खेलबो के रूप में गूँजेगी और आज का यह ऐतिहासिक अवसर हम सभी के लिए अत्यंत यादगार रहेगा। उन्होंने बड़े गर्व के साथ याद दिलाया कि आज ही के दिन, ठीक 25 साल पहले भारतीय जूनियर हॉकी टीम ने विश्व कप जीता था, और उसी स्वर्णिम विजेता टीम के सम्मानित सदस्य श्री देवेश चौहान इस प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ की टीम के मुख्य कोच के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। श्री साव ने कहा कि राज्य में हॉकी के खेल को उत्कृष्ट और पेशेवर स्तर पर स्थापित करने में यह प्रतियोगिता मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने इस बात को भी रेखांकित किया कि छत्तीसगढ़ की माटी ने विन्सेंट लकड़ा, मृणाल चौबे, रेणुका यादव और सबा अंजुम जैसे महान हॉकी खिलाड़ी देश को दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय संदेश जो खेलेगा, वो खिलेगा को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि खेल का मैदान केवल एक खिलाड़ी तैयार नहीं करता, बल्कि मनुष्य के भीतर आत्मविश्वास, अनुशासन और नेतृत्व के गुणों को भी विकसित करता है।

       ​राज्य सभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा ने अपने वक्तव्य में कहा कि हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल है और छत्तीसगढ़ के प्रतिभावान खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए ऐसा उच्च-स्तरीय मंच मिलना बड़े सौभाग्य की बात है। इस लीग के आयोजन से प्रदेश के युवा खिलाड़ी अत्यधिक प्रेरित होंगे और उन्हें अपने खेल को निखारने का पूरा मौका मिलेगा। वहीं, खेल विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार ने प्रतियोगिता की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए बताया कि 22 अक्टूबर से 1 नवंबर तक चलने वाली इस लीग में कुल छह फ्रेंचाइजी टीमें पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरी हैं। प्रत्येक 22 सदस्यीय टीम में छत्तीसगढ़ के 18 स्थानीय खिलाड़ियों के साथ-साथ 4 प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय (ओलंपियन) खिलाड़ियों को शामिल किया गया है, ताकि हमारे युवाओं को देश के शीर्ष खिलाड़ियों के साथ खेलने, उनकी तकनीक सीखने और एक उत्कृष्ट खेल वातावरण का अनुभव प्राप्त करने का पूरा अवसर मिल सके।

         ​इस रोमांचक लीग में कॉरपोरेट जगत और सरकारी उपक्रमों की सक्रिय सहभागिता देखने को मिल रही है, जिसके तहत छह प्रमुख फ्रेंचाइजी टीमें खिताब के लिए आपस में भिड़ेंगी। इनमें जिंदल स्टील लिमिटेड के स्वामित्व वाली चक्रधर चौंपियंस, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की श्न्यायधानी नाइट्सश्, श्री बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड की श्राजधानी रॉयल्सश्, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की मैनपाट टाइगर्स, सारडा एनर्जी एंड मिनरल्स लिमिटेड की संस्कारधानी स्ट्राइकर्स और एनएमडीसी लिमिटेड की फ्रेंचाइजी बैलाडीला बुल्स शामिल हैं। इन टीमों के माध्यम से कॉर्पाेरेट और खेल क्षेत्र के बीच एक मजबूत तालमेल देखने को मिल रहा है।

         ​प्रतियोगिता के मुकाबलों का रोमांच 22 अक्टूबर से शुरू होकर 1 नवंबर तक लगातार जारी रहेगा। सभी मैच रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में खेले जा रहे हैं, जहाँ प्रतिदिन दो रोमांचक मुकाबले आयोजित किए जा रहे हैं। पहला मैच प्रतिदिन शाम साढ़े पाँच बजे और दूसरा मुकाबला शाम साढ़े सात बजे से शुरू होता है। लीग के पहले दिन महिला खिलाड़ियों का एक विशेष प्रदर्शनी मैच भी आयोजित किया गया, जिसने प्रदेश में महिला हॉकी को एक नई ऊर्जा और प्रोत्साहन प्रदान किया है। इन सभी मुकाबलों का विधिवत और पेशेवर संचालन हॉकी इंडिया के अधिकृत अधिकारियों एवं ऑफिशियल्स द्वारा किया जा रहा है, जिससे खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के अनुरूप नियमों और व्यवस्थाओं का व्यावहारिक अनुभव मिल रहा है।

        ​इस आयोजन को जन-जन से जोड़ने के लिए राज्य सरकार ने विशेष व्यवस्थाएँ की हैं। स्टेडियम में खेलप्रेमियों, विद्यार्थियों और नागरिकों के लिए प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क रखा गया है, ताकि अधिक से अधिक लोग पहुँचकर देश के दिग्गज खिलाड़ियों और प्रदेश की युवा प्रतिभाओं को लाइव खेलते हुए देख सकें। इसके अलावा, जो खेलप्रेमी स्टेडियम तक नहीं पहुँच पा रहे हैं, वे देश के किसी भी कोने से जियोहॉटस्टार  (JioHotstar) पर इन सभी मुकाबलों का सीधा प्रसारण देख सकते हैं।

       ​यह ऐतिहासिक छत्तीसगढ़ हॉकी लीग न केवल स्थानीय खिलाड़ियों के लिए अपनी क्षमता साबित करने का एक बेहतरीन मंच साबित हो रही है, बल्कि यह प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खेल मानचित्र पर एक मजबूत और उभरते हुए केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी एक क्रांतिकारी कदम सिद्ध हो रही है।

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बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक परंपरा से रूबरू होंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, मुरिया दरबार में शामिल होने के साथ लालबाग मैदान में आमसभा को करेंगी संबोधित

रायपुर, 21 अक्टूबर 2026/ राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु 23 अक्टूबर को एकदिवसीय प्रवास पर जगदलपुर आएंगी। इस दौरान वे बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक परंपरा से जुड़े सिरहासार भवन में आयोजित मुरिया दरबार में शामिल होंगी। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु लालबाग मैदान में आयोजित आमसभा को भी संबोधित करेंगी।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु के प्रस्तावित प्रवास को लेकर जगदलपुर में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने लालबाग मैदान पहुंचकर कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने मंच एवं बैठक व्यवस्था, विशिष्ट अतिथियों के लिए निर्धारित दीर्घा, सुरक्षा, यातायात प्रबंधन तथा आम नागरिकों की सुविधाओं का जायजा लिया। श्री कश्यप ने संबंधित अधिकारियों को सभी तैयारियां समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव, महापौर श्री संजय पाण्डे, कमिश्नर श्री डोमन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक श्री बी.एन. मीणा, कलेक्टर श्री आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक श्री शलभ सिन्हा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में बड़ा कदम, बिलासपुर में आठ जिलों के प्रतिनिधियों के साथ होगी संभाग स्तरीय परामर्श बैठक

रायगढ़, 21 अक्टूबर 2026/ छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने और इसका प्रारूप तैयार करने के संबंध में 28 अक्टूबर को दोपहर 12.30 बजे से देवकी नंदन दीक्षित सभागृह लाल बहादुर शास्त्री स्कूल बिलासपुर में संभाग स्तरीय समूह चर्चा एवं परामर्श बैठक आयोजित की गई है। राज्य शासन द्वारा गठित समान नागरिक संहिता उच्च स्तरीय समिति के सदस्यों की उपस्थिति में आयोजित इस बैठक में विभिन्न संगठनों और समाज के प्रतिनिधियों से विचार एवं सुझाव लिए जाएंगे।
            बैठक में बिलासपुर, मुंगेली, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, जांजगीर-चांपा, कोरबा, रायगढ़, सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इनमें राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और धार्मिक संगठनों के प्रमुखों के साथ शिक्षाविदों, प्रतिष्ठित नागरिकों, विशिष्ट नागरिकों, गणमान्य नागरिकों तथा निगम, मंडल एवं आयोगों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन ने 25 जून 2026 की अधिसूचना द्वारा सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति  रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समान नागरिक संहिता उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। समिति में सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी श्री शत्रुघ्न सिंह एवं श्री एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार तथा सेवानिवृत्त प्राचार्य श्रीमती ज्योति रानी सिंह सदस्य हैं।
           समिति छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता लागू करने के संबंध में वर्तमान विधिक स्थिति का अध्ययन करेगी। विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और दत्तक ग्रहण से संबंधित विषयों पर सुझाव देना भी समिति के दायित्वों में शामिल है। इसके लिए नागरिकों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से विचार एवं सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे। समिति अन्य राज्यों में प्रचलित समान नागरिक संहिता संबंधी व्यवस्थाओं का भी अध्ययन करेगी। प्राप्त सुझावों और अध्ययन के आधार पर समान नागरिक संहिता का प्रारूप तैयार कर राज्य शासन को प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही आवश्यक विधायी एवं प्रशासनिक अनुशंसाएं भी दी जाएंगी।

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धान खरीदी से पहले किसानों का एग्रीस्टैक में शत-प्रतिशत पंजीयन अनिवार्य, कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने समय-सीमा बैठक में अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

रायगढ़, 21 अक्टूबर 2026/ जिला कलेक्टोरेट स्थित सभाकक्ष में आयोजित समय-सीमा की बैठक में कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने जिले में संचालित शासकीय योजनाओं एवं विकास कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्य करने और योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समय पर पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, धान खरीदी, निर्माण कार्यों, राजस्व प्रकरणों और जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। 
    कलेक्टर ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के अंतर्गत धान खरीदी की तैयारियों की समीक्षा करते हुए किसानों एवं उनके खसरों का एग्रीस्टैक में शत-प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने डीसीएस फेस-1, फेस-2 तथा बकेट क्लेम की प्रगति की जानकारी लेते हुए कहा कि निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप कार्यों में तेजी लाए। उन्होंने डीसीएस संबंधी कार्यों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले एसडीएम एवं तहसीलदारों के प्रयासों की सराहना भी की। उन्होंने धान खरीदी शुरू होने से पहले सभी उपार्जन समितियों में सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही किसानों के खेतों के लैटीटयूड लांगीटयूड संबंधी विवरण की प्रविष्टि निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने को कहा।

*स्वास्थ्य एवं पोषण सुविधाओं में होगा सुधार*

कलेक्टर ने पोषण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिले में संचालित ‘हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान की समीक्षा की। उन्होंने प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र में मुनगा का पौधा लगाने के लिए आवश्यक पहल करने के निर्देश दिए। उन्होंने आधार में अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट के लंबित प्रकरणों के निराकरण के लिए विद्यालयों में शिविर आयोजित करने तथा दिव्यांगजनों को यूडीआईडी कार्ड का लाभ दिलाने के लिए ‘सुगम्य सवेरा’ योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया।

*स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड की मरम्मत और अतिरिक्त कक्ष निर्माण पर जोर*

बैठक में जिले के विद्यालयों में खराब पड़े स्मार्ट बोर्डों की मरम्मत एवं आवश्यक सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिल सकें। कलेक्टर ने जर्जर स्कूल भवनों की स्थिति की समीक्षा करते हुए खनन प्रभावित क्षेत्रों में चिन्हांकित विद्यालयों में अतिरिक्त कक्ष निर्माण के लिए प्राथमिकता के आधार पर कार्ययोजना तैयार करने को कहा। उन्होंने विद्यालयों एवं उनके आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने तथा आश्रमों एवं छात्रावासों का नियमित निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा करने और निरीक्षण प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

*मुख्यमंत्री की घोषणाओं और निर्माण कार्यों की समीक्षा*

मुख्यमंत्री की घोषणाओं के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने संबंधित विभागों को निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने को कहा। सड़क एवं अन्य अधूरे निर्माण कार्यों में अनावश्यक विलंब नहीं होने देने तथा गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) से संबंधित परियोजनाओं और निर्माण कार्यों की समीक्षा के दौरान निर्माण स्थलों पर कार्यों की जानकारी देने वाले उपयुक्त सूचना बोर्ड लगाने को कहा गया। इसके साथ ही स्किल गैप असेसमेंट के लिए कार्ययोजना बनाकर प्रभावी ढंग से कार्य करने के निर्देश दिए गए।

*शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे और रेत उत्खनन पर होगी कार्रवाई*

कलेक्टर ने शासकीय भूमि, सीमांकन और अवैध कब्जों से संबंधित मामलों की समीक्षा करते हुए नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए। अवैध रेत उत्खनन में संलिप्त लोगों के विरुद्ध भी प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। सीएम हेल्पलाइन में लंबित शिकायतों का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण करने के निर्देश देते हुए उन्होंने अधिकारियों से शिकायतों के निराकरण में गंभीरता बरतने को कहा। श्रमिक परिवारों को विभिन्न शासकीय योजनाओं का समग्र लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से संचालित श्रमिक परिवार समग्र उत्थान मिशन की प्रगति की भी समीक्षा की गई।

*31 दिसंबर तक चलेगा वित्तीय समावेशन योजनाओं का संतृप्ति अभियान*

जिले में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने और केंद्र सरकार की प्रमुख वित्तीय एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने के लिए 21 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक संतृप्ति अभियान संचालित किया जा रहा है। कलेक्टर ने कहा कि अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र व्यक्ति वित्तीय एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को अभियान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाने के निर्देश दिए। सभी जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को अभियान की नियमित मॉनिटरिंग करने और प्रगति पर विशेष ध्यान देने को कहा।

*जनगणना प्रशिक्षण की तैयारियों की समीक्षा*

आगामी जनगणना से संबंधित प्रशिक्षण की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने प्रशिक्षण को व्यवस्थित एवं प्रभावी ढंग से आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आवश्यक प्रक्रियाओं और दायित्वों की स्पष्ट जानकारी दी जाए, ताकि कार्यों का सुचारु संचालन सुनिश्चित हो सके। कलेक्टर ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए लंबित प्रकरणों का समय-सीमा में निराकरण करने तथा शासकीय योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने के निर्देश दिए। बैठक में सीईओ जिला पंचायत श्री अभिजीत बबन पठारे, अपर कलेक्टर डॉ.प्रियंका वर्मा, संयुक्त कलेक्टर श्रीमती पूजा बंसल, डिप्टी कलेक्टर श्री धनराज मरकाम एवं सुश्री शिल्पा भगत सहित जिला स्तरीय विभागीय उपस्थित थे।

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बिलाईगढ़ को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पांच बड़ी सौगातें, खुलेगा अपर कलेक्टर कार्यालय, 3 करोड़ से बनेगा गौरव पथ

रायपुर 21 अक्टूबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज सारंगढ़ - बिलाईगढ़ जिले के नगर पंचायत बिलाईगढ़ के रैनीभाठा में आयोजित ऐतिहासिक राजशाही दशहरा उत्सव में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्रवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए बिलाईगढ़ के विकास और नागरिक सुविधाओं के विस्तार के लिए पांच महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने बिलाईगढ़ में अपर कलेक्टर कार्यालय खोलने, बस स्टैंड से हायर सेकेंडरी स्कूल तक तीन करोड़ रुपए की लागत से गौरव पथ निर्माण, राजमहल जाने वाले मार्ग पर पुल निर्माण, नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 15 में मुक्तिधाम तथा मां समलाई माता मंदिर के समीप डोम शेड निर्माण की घोषणा की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इन विकास कार्यों से बिलाईगढ़ में प्रशासनिक सुविधाओं के विस्तार के साथ नगरीय अधोसंरचना और जनसुविधाएं सुदृढ़ होंगी। अपर कलेक्टर कार्यालय खुलने से क्षेत्रवासियों को अपने प्रशासनिक कार्यों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा और स्थानीय स्तर पर समस्याओं के त्वरित निराकरण में सुविधा होगी। तीन करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला गौरव पथ नगर की सुंदरता बढ़ाने के साथ आवागमन को बेहतर बनाएगा। इसी तरह राजमहल मार्ग पर पुल, मुक्तिधाम और डोम शेड का निर्माण स्थानीय आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण होगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने भगवान श्रीराम, माता सीता, पवनपुत्र हनुमान, मां जगदंबा, भारत माता और छत्तीसगढ़ महतारी के जयकारों के साथ अपने संबोधन की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि बिलाईगढ़ का ऐतिहासिक राजशाही दशहरा केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता की जीवंत अभिव्यक्ति है। राजपरिवार ने पीढ़ियों से इस गौरवशाली परंपरा को सहेजकर रखा है और आज भी क्षेत्रवासी उसी श्रद्धा और उत्साह के साथ इसमें सहभागी होते हैं। उन्होंने इस परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए राजपरिवार, आयोजन समिति और बिलाईगढ़वासियों को बधाई दी तथा आत्मीय स्वागत के लिए आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विजयादशमी अधर्म पर धर्म, अन्याय पर न्याय और असत्य पर सत्य की विजय का शाश्वत संदेश देती है। भगवान श्रीराम ने इसी दिन अहंकारी और अत्याचारी रावण का अंत कर धर्म की स्थापना की थी। हम हर वर्ष रावण के पुतले का दहन करते हैं, लेकिन विजयादशमी की वास्तविक सार्थकता तब है, जब हम अपने भीतर के काम, क्रोध, मद, लोभ और अहंकार रूपी रावण का भी अंत करें। प्रभु श्रीराम के आदर्श हमें मर्यादा, कर्तव्य, न्याय और लोककल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। समाज में प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करना ही इस महापर्व का सच्चा संदेश है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भगवान श्रीराम और छत्तीसगढ़ का संबंध अत्यंत आत्मीय और प्राचीन है। छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की जन्मभूमि और प्रभु श्रीराम का ननिहाल है। वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम ने लंबा समय छत्तीसगढ़ के दंडकारण्य क्षेत्र में व्यतीत किया। शिवरीनारायण में माता शबरी की भक्ति और राजिम का पवित्र त्रिवेणी संगम हमारी इसी समृद्ध आध्यात्मिक विरासत के प्रतीक हैं। छत्तीसगढ़ में भगवान श्रीराम को भांजे के रूप में पूजने की अनूठी परंपरा आज भी हमारी संस्कृति में जीवंत है।

उन्होंने कहा कि अयोध्या धाम में लगभग पांच शताब्दियों की प्रतीक्षा के बाद प्रभु श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा पूरे देश के साथ छत्तीसगढ़ के लिए भी अपार हर्ष और गौरव का अवसर रही। प्रदेशवासियों की इसी आस्था को ध्यान में रखते हुए हमारी सरकार ने श्रीरामलला दर्शन योजना प्रारंभ की है। इसके माध्यम से अब तक लगभग 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को शासकीय खर्च पर अयोध्या धाम जाकर प्रभु श्रीरामलला के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आज विकास और सुशासन की नई यात्रा पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमारी सरकार का संकल्प है कि विकास का लाभ प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र और प्रत्येक परिवार तक पहुंचे। मोदी की गारंटी के तहत प्रदेशवासियों से किए गए वादों को तेजी से पूरा किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार गठन के अगले ही दिन आयोजित  मंत्रिपरिषद की पहली बैठक में 18 लाख गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया। केंद्र सरकार से लगातार मिल रहे सहयोग से प्रदेश में प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण तेज गति से हो रहा है और प्रतिदिन लगभग 1600 आवास बनाए जा रहे हैं। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है और किसानों की खुशहाली हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। गांव, गरीब, किसान, युवा और मातृशक्ति को केंद्र में रखकर सरकार योजनाओं और विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है। हमारा लक्ष्य केवल अधोसंरचना का निर्माण नहीं, बल्कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बस्तर में नक्सलवाद के विरुद्ध मिली ऐतिहासिक सफलताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य और अपार वन एवं खनिज संपदा से समृद्ध बस्तर लंबे समय तक नक्सल हिंसा के कारण अपनी पूरी विकास क्षमता का उपयोग नहीं कर सका। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन, हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और बस्तर की जनता के सहयोग से परिस्थितियां तेजी से बदली हैं। आज बस्तर में भय की जगह विश्वास, हिंसा की जगह शांति और निराशा की जगह विकास की नई उम्मीद ने ली है। शांति और सुरक्षा स्थापित होने के साथ ही बस्तर में सड़क, रेल, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाओं के विस्तार के नए द्वार खुल रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में रेल कनेक्टिविटी के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ में आधुनिक रेल अधोसंरचना के विकास को अभूतपूर्व गति मिली है। विजयादशमी के अवसर पर प्रदेश को नई रेल परियोजनाओं और यात्री सेवाओं की सौगात मिली है। रावघाट तक रेल सेवा पहुंचने तथा रायपुर–कुरूद क्षेत्र में रेल संपर्क के विस्तार से दूरस्थ क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे लोगों का आवागमन सुगम होने के साथ व्यापार, उद्योग, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार विरासत और विकास को साथ लेकर आगे बढ़ रही है। एक ओर हम अपनी गौरवशाली संस्कृति, परंपराओं और आस्था के केंद्रों को सहेज रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सड़क, रेल, आवास और प्रशासनिक अधोसंरचना का विस्तार कर विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव रख रहे हैं। उन्होंने क्षेत्रवासियों से भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने और प्रेम, एकता एवं सद्भाव के साथ प्रदेश के विकास में सहभागी बनने का आह्वान किया।

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मुख्यमंत्री साय का नगरीय निकायों को स्पष्ट संदेश—आज की समस्याओं के साथ आने वाली पीढ़ियों की जरूरतों को भी ध्यान में रखकर बनाएं विकास योजनाएं, जलभराव से लेकर बिजली के तारों तक समस्याओं का हो स्थायी समाधान

रायपुर, 21 अक्टूबर 2026/विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में हमारे शहरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शहर केवल आवास और नागरिक सुविधाओं के केंद्र नहीं हैं, बल्कि आर्थिक गतिविधियों, उद्योग, व्यापार, रोजगार और नवाचार के प्रमुख आधार भी हैं। इसलिए छत्तीसगढ़ के शहरों का विकास वर्तमान आवश्यकताओं तक सीमित न रहकर आने वाले दशकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सुनियोजित, समावेशी, टिकाऊ और आर्थिक रूप से सक्षम होना चाहिए। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज नवा रायपुर स्थित मेफेयर लेक रिजॉर्ट में आवास एवं शहरी विकास निगम (हुडको) और छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अर्बन चैलेंज फंड (UCF) एवं अर्बन इन्वेस्ट विंडो (UiWIN) विषयक प्रथम क्षेत्रीय कार्यशाला का शुभारंभ कर संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में शहरी विकास को नई सोच और नई गति मिली है। अर्बन चैलेंज फंड जैसे अभिनव प्रयास शहरों को आधुनिक, सुविधासंपन्न, आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने का बड़ा अवसर हैं। छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों को इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाते हुए ऐसी गुणवत्तापूर्ण परियोजनाएं तैयार करनी होंगी, जो नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के साथ शहरों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करें।

*नगरीय विकास को मजबूती देने दो महत्वपूर्ण एमओयू*

कार्यशाला के दौरान प्रदेश के नगरीय विकास, वित्तीय संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और नगरीय निकायों की तकनीकी एवं संस्थागत क्षमता को मजबूत करने की दिशा में दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। पहला एमओयू हुडको और छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के बीच तथा दूसरा एमओयू नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग और सेप्ट विश्वविद्यालय के बीच संपन्न हुआ।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इन समझौतों को प्रदेश के नगरीय विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि इनके माध्यम से नगरीय निकायों को विकास परियोजनाओं की बेहतर योजना तैयार करने, वित्तीय संसाधन जुटाने, तकनीकी विशेषज्ञता प्राप्त करने, प्रशिक्षण और संस्थागत क्षमता विकास में सहयोग मिलेगा। इससे शहरों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण परियोजनाओं के निर्माण और उनके प्रभावी क्रियान्वयन को गति मिलेगी।

उन्होंने कहा कि शहरी विकास में विशेषज्ञ संस्थाओं, वित्तीय संस्थानों और शासन के बीच मजबूत साझेदारी समय की आवश्यकता है। इस प्रकार का संस्थागत सहयोग छत्तीसगढ़ के शहरों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

*विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य में नगरीय अर्थव्यवस्था की बड़ी भूमिका*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लिया है। इसी के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार ने भी विकसित छत्तीसगढ़ का विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया है और इसे धरातल पर उतारने के लिए मिशन मोड में कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमें ऐसे शहर विकसित करने हैं जो निवेश को आकर्षित करें, उद्योग और व्यापार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करें, रोजगार के नए अवसर सृजित करें और साथ ही नागरिकों को उच्च गुणवत्ता की मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराएं। सुनियोजित शहरीकरण विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव बनेगा।

*शहरों की समस्याओं का हो स्थायी समाधान*

मुख्यमंत्री श्री साय ने नगरीय निकायों से कहा कि विकास की योजनाएं केवल आज की समस्याओं के समाधान को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि अगले कई दशकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच पेयजल, जल निकासी, सड़क, बिजली, स्वच्छता, परिवहन और अन्य नागरिक सुविधाओं की दीर्घकालिक योजना आवश्यक है।

उन्होंने शहरों में जलभराव की समस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि बरसात के दिनों में नागरिकों को होने वाली परेशानी का स्थायी समाधान होना चाहिए। इसके लिए प्रभावी और दीर्घकालिक जल निकासी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने बिजली एवं अन्य सेवाओं के अव्यवस्थित तारों की समस्या पर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर जुलूस या बड़े वाहनों के आवागमन के दौरान बिजली के तारों को ऊपर उठाने जैसी स्थिति बनती है। यह न तो नागरिक सुरक्षा की दृष्टि से उचित है और न ही आधुनिक शहरी व्यवस्था के अनुरूप। जहां संभव हो, वहां बिजली एवं अन्य सेवाओं के तारों को भूमिगत करने की योजनाएं तैयार की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि शहरों के विकास में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय भी आवश्यक है। पेयजल, सड़क, बिजली, जल निकासी और स्वच्छता जैसे कार्य अलग-अलग न होकर समग्र शहरी नियोजन का हिस्सा होने चाहिए।

*अपने शहरों के भविष्य की योजना बनाएं जनप्रतिनिधि*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यशाला में उपस्थित महापौरों, नगर पालिका एवं नगर पंचायत अध्यक्षों तथा अधिकारियों से कहा कि जनता ने उन्हें अपने शहरों के विकास की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। इसलिए अपने शहर की वास्तविक आवश्यकताओं और समस्याओं को समझकर उनका स्थायी समाधान तलाशना उनकी प्राथमिकता होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि अर्बन चैलेंज फंड नगरीय निकायों के लिए बड़ा अवसर है। सभी निकाय इसके प्रावधानों का गंभीरता से अध्ययन करें, विशेषज्ञों से संवाद करें और ऐसी परियोजनाएं तैयार करें जो तकनीकी रूप से मजबूत, नागरिकों के लिए उपयोगी और आर्थिक रूप से व्यवहार्य हों।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस कार्यशाला से मिलने वाला तकनीकी मार्गदर्शन और विशेषज्ञों के सुझाव प्रदेश के नगरीय विकास को नई दिशा देंगे। शासन, जनप्रतिनिधियों, नगरीय निकायों और विशेषज्ञ संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ के शहरों को स्वच्छ, सुंदर, सुव्यवस्थित, सुविधासंपन्न और आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।

*अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा विकास का लाभ*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' के मूल मंत्र के साथ समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने के लिए कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि पीएम जनमन योजना के माध्यम से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों की बसाहटों तक सड़क, बिजली, आवास और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान से भी जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास को नई गति मिली है।

प्रदेश में रेल अधोसंरचना के विस्तार का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ को रेलवे के क्षेत्र में लगातार बड़ी सौगातें मिल रही हैं। बस्तर के रावघाट क्षेत्र तक रेल संपर्क का विस्तार तथा रायपुर से कुरुद तक रेल सेवा का शुभारंभ प्रदेश के विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक और खनिज संपदा से समृद्ध प्रदेश है। यहां की उर्वर भूमि, प्रचुर संसाधन और परिश्रमी नागरिक हमारी सबसे बड़ी शक्ति हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से नक्सलवाद के विरुद्ध मिली सफलताओं ने प्रदेश में विकास और निवेश की नई संभावनाओं को मजबूत किया है।

उन्होंने कहा कि 'छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया' की पहचान को और सशक्त करते हुए हम सभी को मिलकर ऐसा छत्तीसगढ़ बनाना है, जो वर्ष 2047 के विकसित भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाए।

*एक लाख करोड़ रुपए का अर्बन चैलेंज फंड शहरों के लिए बड़ा अवसर : श्री अरुण साव*

उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि भारत सरकार द्वारा अर्बन चैलेंज फंड के लिए एक लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। यह छत्तीसगढ़ के शहरों के विकास के लिए बड़ा अवसर है। अब चुनौती यह है कि प्रदेश के नगरीय निकाय कितनी गुणवत्तापूर्ण और व्यवहार्य परियोजनाएं तैयार कर इस फंड से अधिकतम संसाधन प्राप्त कर पाते हैं।

उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और तकनीक के साथ नागरिकों की अपेक्षाएं भी बदल रही हैं। ऐसे में नगरीय विकास की कार्यशैली में भी बदलाव आवश्यक है। केवल परंपरागत तरीके से कार्य करके भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा नहीं किया जा सकता। नगरीय निकायों को नवाचार और आधुनिक तकनीक को अपनाना होगा।

श्री साव ने जनप्रतिनिधियों से कहा कि जिस शहर ने हमें पहचान, शिक्षा, संस्कार और आगे बढ़ने का अवसर दिया है, आज उसी शहर ने हमें नेतृत्व की जिम्मेदारी दी है। यह अपने शहर को कुछ लौटाने का अवसर है। प्रत्येक जनप्रतिनिधि को अपने कार्यकाल में ऐसे कार्य करने का संकल्प लेना चाहिए, जिनका लाभ आने वाली पीढ़ियों को भी मिले।

उन्होंने कहा कि किसी परियोजना की सफलता केवल उसके निर्माण से तय नहीं होती। उसकी उपयोगिता, संचालन, रखरखाव और वित्तीय व्यवहार्यता की योजना भी शुरुआत से ही स्पष्ट होनी चाहिए। जनता के एक-एक रुपए का सदुपयोग सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है।

*अर्बन चैलेंज फंड से शहरों को मिलेगा विकास का नया आधार : श्री तोखन साहू*

केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के शहरी विकास को नई दिशा मिली है। प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी, स्वच्छ भारत मिशन और अमृत मिशन जैसी योजनाओं से नागरिक सुविधाओं का विस्तार हुआ है और लोगों के जीवन स्तर में महत्वपूर्ण बदलाव आया है।

उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण आवास, पेयजल, सड़क, परिवहन और स्वच्छता सहित नागरिक सुविधाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। इसके लिए नगरीय निकायों को वित्तीय रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना आवश्यक है। अर्बन चैलेंज फंड इस दिशा में महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध कराता है।

श्री साहू ने कहा कि विकास परियोजनाएं नागरिकों के लिए उपयोगी होने के साथ आर्थिक रूप से व्यवहार्य भी होनी चाहिए। सरकारी सहायता के अतिरिक्त बैंक वित्तपोषण, बाजार आधारित संसाधन और सार्वजनिक-निजी भागीदारी जैसे विकल्पों का भी प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए।

उन्होंने जबलपुर में कचरे से ऊर्जा उत्पादन तथा हैदराबाद में जल प्रबंधन और तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था जैसे नवाचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों को देश के सफल प्रयोगों का अध्ययन कर स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उन्हें अपनाना चाहिए।

*विशेषज्ञता, वित्त और क्षमता विकास का मिलेगा सहयोग*

कार्यशाला में अर्बन चैलेंज फंड और अर्बन इन्वेस्ट विंडो के विभिन्न पहलुओं, नगरीय विकास के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने, परियोजनाओं की व्यवहार्यता, आधुनिक शहरी नियोजन तथा प्रभावी क्रियान्वयन जैसे विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, हुडको और सेप्ट विश्वविद्यालय के बीच हुए समझौतों से प्रदेश के नगरीय निकायों को परियोजना निर्माण, वित्तीय प्रबंधन, तकनीकी विशेषज्ञता, प्रशिक्षण और संस्थागत क्षमता विकास में सहयोग मिलेगा।

इस अवसर पर प्रदेश के सभी 14 नगर निगमों के महापौर, नगर पालिकाओं के अध्यक्ष, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, हुडको के सीएमडी श्री संजय कुलश्रेष्ठ, तेलंगाना नगरीय प्रशासन विकास विभाग की सचिव डॉ. टी. के. श्री देवी, सेप्ट विश्वविद्यालय के प्रेसिडेंट श्री बरजोर मेहता, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक श्री नीलेश महादेव क्षीरसागर, सुडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुमित अग्रवाल सहित जनप्रतिनिधि, विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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छत्तीसगढ़ की शांति और सुरक्षा के लिए वीर जवानों का बलिदान अविस्मरणीय, वन मंत्री केदार कश्यप ने अमर शहीद वाटिका में अर्पित की श्रद्धांजलि

रायपुर, 21 अक्टूबर 2026/ वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ में शांति और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पुलिस के वीर जवानों का अविस्मरणीय योगदान रहा है। विषम परिस्थितियों में कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले जवानों की शहादत को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनके साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा से आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरणा मिलती रहेगी।

        वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता, संसदीय कार्य  मंत्री श्री कश्यप ने पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर जगदलपुर स्थित अमर शहीद वाटिका में शहीद पुलिस जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने शहीद जवानों के परिजनों से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना और उनके प्रति सम्मान एवं संवेदना व्यक्त की। श्री कश्यप ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने, नागरिकों की सुरक्षा और समाज में शांति स्थापित करने के लिए पुलिस के जवान कठिन परिस्थितियों में भी पूरी निष्ठा से अपने दायित्वों का निर्वहन करते हैं। राष्ट्र और समाज की रक्षा के लिए उनका सर्वाेच्च बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

        वन मंत्री ने कहा कि किसी परिवार के लिए अपने प्रियजन को खोने की पीड़ा अपूरणीय होती है। शहीद जवानों के परिजनों का धैर्य और साहस भी प्रेरणादायी है। शहीदों की स्मृतियों को संजोना और उनके परिवारों के प्रति सम्मान एवं संवेदनशीलता बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि शहीद जवानों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि उनके आदर्शों पर चलते हुए राष्ट्रसेवा और जनकल्याण के लिए समर्पित भाव से कार्य करना है। इस अवसर पर बस्तर सांसद श्री महेश कश्यप, जगदलपुर नगर पालिक निगम के महापौर श्री संजय पाण्डे सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्यजन उपस्थित थे।

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कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में पर्यटकों के लिए खुशखबरी, 12 दिन पहले शुरू हुआ सफारी सत्र; कोटमसर गुफा, तीरथगढ़ जलप्रपात और बम्बू राफ्टिंग बने आकर्षण का केंद्र

रायपुर, 21 अक्टूबर 2026/ बस्तर के प्रसिद्ध कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में इस वर्ष पर्यटकों के लिए सफारी सत्र निर्धारित समय से 12 दिन पहले शुरू कर दिया गया है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। नए सत्र की शुरुआत के साथ ही पर्यटक राष्ट्रीय उद्यान की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जैव विविधता और विभिन्न साहसिक पर्यटन गतिविधियों का आनंद ले सकेंगे।

मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) श्री उत्तम गुप्ता ने मंगलवार को सत्र का पहला टिकट जारी कर जिप्सी सफारी का शुभारंभ किया। मानसून के बाद शुरू हुए इस सत्र में पर्यटक कोटमसर गुफा, कांगेर धारा और प्रसिद्ध तीरथगढ़ जलप्रपात का भ्रमण कर सकेंगे। इसके साथ ही मांझीपाल में बम्बू राफ्टिंग और कयाकिंग जैसी साहसिक गतिविधियों का भी आनंद ले सकेंगे।

सफारी सत्र के समय से पहले शुरू होने से पर्यटकों को बस्तर की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखने का अतिरिक्त अवसर मिलेगा। इससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों और स्थानीय आजीविका को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

*धुरवा जनजातीय नृत्य होगा विशेष आकर्षण*
पर्यटकों को बस्तर की जनजातीय संस्कृति से परिचित कराने के लिए कोटमसर बैरियर पर इको विकास समिति द्वारा धुरवा जनजातीय नृत्य का आयोजन किया जा रहा है। इस पहल से स्थानीय संस्कृति को प्रोत्साहन मिलने के साथ समुदाय के लिए आजीविका के अवसर भी बढ़ेंगे।

*प्लास्टिक मुक्त सफारी पर जोर*
राष्ट्रीय उद्यान में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए इस बार प्लास्टिक मुक्त सफारी पर विशेष जोर दिया गया है। उद्यान के निदेशक श्री गौतम नारायण पडिभार के निर्देशानुसार उद्यान क्षेत्र में प्लास्टिक के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। पर्यटकों से प्लास्टिक की बोतलें और पॉलीथिन साथ नहीं लाने तथा उद्यान की स्वच्छता बनाए रखने की अपील की गई है।

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान, विश्व धरोहर बनने की दिशा में सिरपुर ने बढ़ाया ऐतिहासिक कदम

रायपुर, 21 अक्टूबर 2026/ छत्तीसगढ़ की गौरवशाली ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। महासमुंद जिले में पुण्य सलिला महानदी के तट पर स्थित प्राचीन नगरी सिरपुर को संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची (Tentative List) में शामिल किया गया है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। प्राचीन मंदिरों, बौद्ध विहारों, दुर्लभ मूर्तिकला, स्थापत्य वैभव और धार्मिक सहिष्णुता की अनूठी परंपरा के लिए प्रसिद्ध सिरपुर अब विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन और उन्हें राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में प्रदेश के महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों को वैश्विक पहचान दिलाने तथा सांस्कृतिक पर्यटन की संभावनाओं को विस्तार देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सिरपुर का यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल होना इसी दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। इस उपलब्धि से सिरपुर की ऐतिहासिक महत्ता को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने तथा भविष्य में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं मजबूत होंगी।

*केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने किया था सिरपुर का निरीक्षण*

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने 1 जनवरी 2026 को सिरपुर के ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्थलों का अवलोकन किया था। इस दौरान उन्होंने सिरपुर की समृद्ध विरासत, प्राचीन स्मारकों और स्थापत्य कला की सराहना करते हुए इनके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए आवश्यक कार्य किए जाने तथा सिरपुर को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए प्राथमिकता से प्रयास करने की बात कही थी।

*दक्षिण कोसल की राजधानी रहा सिरपुर, धर्म और संस्कृति का प्राचीन केंद्र*

सिरपुर का इतिहास भारतीय सभ्यता, धार्मिक सहिष्णुता, सांस्कृतिक समन्वय और स्थापत्य कला की अद्भुत विरासत को समेटे हुए है। प्राचीन काल में श्रीपुर के नाम से विख्यात यह नगर पाण्डुवंशी शासकों के शासनकाल में दक्षिण कोसल की राजधानी रहा। महानदी के तट पर स्थित यह नगर राजनीतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था।

सिरपुर की प्राचीनता के महत्वपूर्ण प्रमाण शरभपुरीय शासकों प्रवरराज और महासुदेवराज के ताम्रपत्रों से प्राप्त होते हैं। पाण्डुवंशी शासक महाशिवगुप्त बालार्जुन के लगभग 57 वर्षों के दीर्घ शासनकाल में सिरपुर ने सांस्कृतिक और स्थापत्य विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त किया। इस काल में अनेक मंदिरों, बौद्ध विहारों, सरोवरों तथा उद्यानों का निर्माण हुआ।

सातवीं शताब्दी में प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी इस क्षेत्र की यात्रा की थी। उनके यात्रा विवरणों में यहां बौद्ध धर्म की समृद्ध परंपरा का उल्लेख मिलता है। उस काल में इस क्षेत्र में लगभग 100 बौद्ध संघाराम तथा महायान परंपरा के लगभग 10 हजार भिक्षुओं की उपस्थिति का वर्णन मिलता है।

सिरपुर की सबसे बड़ी विशेषता यहां शैव, वैष्णव, बौद्ध और जैन धार्मिक परंपराओं का सहअस्तित्व है। स्वयं शैव मत के अनुयायी होने के बावजूद महाशिवगुप्त बालार्जुन ने बौद्ध विहारों को उदारतापूर्वक दान देकर संरक्षण प्रदान किया। यह तथ्य सिरपुर को प्राचीन भारत में धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक समन्वय के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करता है।

*लक्ष्मण मंदिर : प्राचीन भारतीय ईंट स्थापत्य कला का अनुपम उदाहरण*

सिरपुर का विश्वप्रसिद्ध लक्ष्मण मंदिर भारतीय स्थापत्य कला की उत्कृष्ट उपलब्धियों में गिना जाता है। लगभग सातवीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर ईंटों से बने प्राचीन भारतीय मंदिरों के सर्वश्रेष्ठ उदाहरणों में से एक है। मंदिर की भव्यता, कलात्मक अलंकरण, सूक्ष्म शिल्पांकन और निर्माण तकनीक तत्कालीन शिल्पकारों की अद्भुत प्रतिभा को प्रदर्शित करती है।

लगभग सात फुट ऊंची पाषाण निर्मित जगती पर स्थित यह पंचरथ शैली का मंदिर गर्भगृह, अंतराल और मंडप से युक्त है। मंदिर की बाहरी दीवारों पर चैत्य गवाक्ष, गज, कीर्तिमुख, भारवाहक गण तथा विभिन्न अलंकरणात्मक आकृतियां अंकित हैं।

मंदिर का प्रवेश द्वार विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र है। इसके शीर्ष भाग में शेषशायी भगवान विष्णु की प्रतिमा तथा द्वार शाखाओं पर भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों, कृष्ण लीला और अन्य पौराणिक प्रसंगों का सुंदर अंकन किया गया है। गर्भगृह में नागराज शेष की प्रतिमा स्थापित है।

ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार लक्ष्मण मंदिर का निर्माण महाशिवगुप्त बालार्जुन की माता रानी वासटा ने अपने दिवंगत पति हर्षगुप्त की स्मृति में कराया था। रानी वासटा मगध के राजा सूर्यवर्मन की पुत्री थीं। इस मंदिर का निर्माणकाल लगभग 650 ईस्वी माना जाता है। यह मंदिर आज भी सिरपुर की स्थापत्य प्रतिभा और सांस्कृतिक समृद्धि का जीवंत प्रतीक है।

*गंधेश्वर महादेव मंदिर : महानदी के तट पर आस्था और इतिहास का संगम*

महानदी के पवित्र तट पर स्थित गंधेश्वर महादेव मंदिर सिरपुर की धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र है। प्राचीन काल में गंधर्वेश्वर के नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख स्थल बना हुआ है।

इस मंदिर के निर्माण में प्राचीन मंदिरों एवं बौद्ध विहारों से प्राप्त स्थापत्य खंडों का उपयोग किया गया है। मंदिर परिसर में अनेक कलात्मक प्रतिमाएं और पुरातात्विक अवशेष संरक्षित हैं। यहां उपलब्ध शिल्पांकन तत्कालीन कला परंपरा, पौराणिक कथाओं और धार्मिक जीवन की महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं।

*बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र रहा सिरपुर, विहारों में दिखाई देती है अद्भुत निर्माण कला*

सिरपुर प्राचीन भारत में महायान बौद्ध धर्म का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां किए गए पुरातात्विक उत्खनन में अनेक बौद्ध विहारों के अवशेष प्राप्त हुए हैं। इन विहारों में ध्यान, अध्ययन, अध्यापन और भिक्षुओं के निवास की सुव्यवस्थित व्यवस्था थी।

सिरपुर के प्रमुख बौद्ध विहारों में आनंदप्रभु कुटी विहार और स्वास्तिक विहार विशेष उल्लेखनीय हैं। आनंदप्रभु कुटी विहार का निर्माण महाशिवगुप्त बालार्जुन के शासनकाल में आनंदप्रभु नामक बौद्ध भिक्षु द्वारा कराया गया था। अभिलेखीय साक्ष्यों के आधार पर इस विहार की पहचान की गई है।

इस विहार में भिक्षुओं के निवास के लिए 14 कक्ष थे तथा यह दो मंजिला संरचना थी। विहार के मुख्य कक्ष में भगवान बुद्ध की भूमिस्पर्श मुद्रा में लगभग साढ़े छह फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित है। यहां अवलोकितेश्वर सहित अन्य बौद्ध प्रतिमाएं भी प्राप्त हुई हैं।

इसके समीप स्थित स्वास्तिक विहार अपनी विशिष्ट तल योजना के कारण प्रसिद्ध है। यहां भी भूमिस्पर्श मुद्रा में भगवान बुद्ध की प्रतिमा प्राप्त हुई है। इन विहारों के अवशेष प्राचीन सिरपुर की धार्मिक, शैक्षणिक और आध्यात्मिक समृद्धि का प्रमाण प्रस्तुत करते हैं।

*तीवरदेव महाविहार : प्राचीन दक्षिण कोसल की बौद्ध स्थापत्य विरासत का भव्य प्रमाण*

सिरपुर में वर्ष 2002-03 के दौरान डॉ. अरुण कुमार शर्मा के निर्देशन में किए गए उत्खनन में विशाल तीवरदेव महाविहार के अवशेष प्राप्त हुए। लगभग 902 वर्गमीटर क्षेत्र में निर्मित यह महाविहार दक्षिण कोसल के प्रमुख बौद्ध स्थापत्य स्थलों में शामिल है।

लक्ष्मण मंदिर से लगभग एक किलोमीटर पूर्व कसडोल मार्ग पर स्थित यह महाविहार अपनी विशालता, अलंकृत प्रवेश द्वार और अद्भुत शिल्पकला के लिए विशेष महत्व रखता है।

महाविहार के प्रवेश द्वार पर पशु आकृतियों, पंचतंत्र की कथाओं, तत्कालीन सामाजिक जीवन और विभिन्न कलात्मक प्रसंगों का सूक्ष्म अंकन मिलता है। यहां मगरमच्छ और वानर की प्रसिद्ध कथा, पशुओं से संबंधित दृश्य तथा अन्य अलंकरण तत्कालीन कलाकारों की कल्पनाशीलता और शिल्प दक्षता को प्रदर्शित करते हैं।

विहार परिसर में जल निकासी के लिए भूमिगत पत्थर की नालियों तथा सुव्यवस्थित कक्षों के अवशेष भी मिले हैं। यह प्राचीन काल की विकसित निर्माण तकनीक और नगर नियोजन की जानकारी प्रदान करता है।

*सुरंग टीला और राम मंदिर : स्थापत्य वैभव के महत्वपूर्ण साक्ष्य*

सिरपुर का सुरंग टीला भी अपनी विशिष्ट संरचना और प्राचीन मंदिर स्थापत्य के कारण महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है। यहां प्राप्त मंदिर अवशेष, सीढ़ियां और शिल्पांकन तत्कालीन धार्मिक एवं स्थापत्य परंपराओं की जानकारी प्रदान करते हैं।

इसी प्रकार लक्ष्मण मंदिर के पूर्व दिशा में स्थित प्राचीन राम मंदिर भी ईंटों से निर्मित एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संरचना है। वर्तमान में इसका शिखर नष्ट हो चुका है तथा मंदिर की दीवारों के अवशेष शेष हैं। इसकी ताराकृति योजना और विशिष्ट निर्माण शैली इसे पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती है। लक्ष्मण मंदिर और राम मंदिर के निर्माणकाल में कुछ दशकों का अंतर माना जाता है।

*दो हजार से अधिक पुरावशेषों ने खोले सिरपुर के गौरवशाली अतीत के रहस्य*

सिरपुर में विभिन्न चरणों में किए गए पुरातात्विक उत्खननों ने इस प्राचीन नगरी के समृद्ध इतिहास की अनेक परतों को उजागर किया है। उत्खनन के दौरान दो हजार से अधिक पुरावशेष प्राप्त हुए हैं।

इनमें धातु प्रतिमाएं, प्रतिमा फलक, आभूषण निर्माण के उपकरण, लोहे के बर्तन, ताले, जंजीर, दीपक, पूजा पात्र, मिट्टी के घड़े, कांच की चूड़ियां, पकी मिट्टी की मुहरें, खिलौने और प्राचीन सिक्के शामिल हैं।

विशेष रूप से यहां प्राप्त एक चीनी सिक्का ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसे चीनी सम्राट काई युवान के काल से संबंधित माना गया है। इसके अतिरिक्त शरभपुरीय शासक प्रसन्नमात्र तथा कलचुरी शासक रत्नदेव के काल से संबंधित सिक्के भी प्राप्त हुए हैं। ये पुरावशेष सिरपुर के प्राचीन व्यापारिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संपर्कों की महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं।

*सातवीं-आठवीं शताब्दी में धातु मूर्तिकला का प्रसिद्ध केंद्र था सिरपुर*

सिरपुर सातवीं और आठवीं शताब्दी के दौरान उत्कृष्ट धातु प्रतिमाओं के निर्माण के लिए प्रसिद्ध रहा है। यहां निर्मित प्रतिमाएं भारतीय धातु मूर्तिकला की उच्च परंपरा का प्रतिनिधित्व करती हैं।

वर्ष 1939 में सिरपुर से धातु प्रतिमाओं का महत्वपूर्ण भंडार प्राप्त हुआ था। इनमें भगवान बुद्ध, अवलोकितेश्वर, पद्मपाणि, वज्रपाणि, मंजुश्री, तारा, ऋषभनाथ और भगवान विष्णु की प्रतिमाएं प्रमुख हैं।

इन प्रतिमाओं की मुखाकृति, नेत्रों की भावभंगिमा, हस्त मुद्राएं, वस्त्रों की तरंगवत सिलवटें और सूक्ष्म अलंकरण अद्भुत कलात्मक कौशल के परिचायक हैं।

सिरपुर से प्राप्त अनेक धातु प्रतिमाएं रायपुर, नागपुर, नई दिल्ली और मुंबई के संग्रहालयों एवं संस्थानों में संरक्षित हैं। इन कलाकृतियों का प्रदर्शन इंग्लैंड, जर्मनी और अमेरिका जैसे देशों में भी किया जा चुका है। यह सिरपुर की कला परंपरा की अंतरराष्ट्रीय महत्ता को रेखांकित करता है।

*पुरातात्विक संग्रहालय में संरक्षित है सिरपुर की अमूल्य विरासत*

लक्ष्मण मंदिर परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा स्थापित संग्रहालय सिरपुर की प्राचीन कला और संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां उत्खनन से प्राप्त शैव, वैष्णव, बौद्ध और जैन परंपराओं से संबंधित दुर्लभ प्रतिमाएं एवं स्थापत्य खंड संरक्षित हैं।

संग्रहालय में चतुर्मुख शिवलिंग, महिषासुरमर्दिनी, नृसिंह, अंबिका, चामुंडा, विष्णु, सूर्य, मातृका, जैन तीर्थंकर और भगवान बुद्ध की प्रतिमाएं विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

इनके अतिरिक्त केशीवध का दृश्य प्रदर्शित करने वाली प्रतिमा तथा नायिका की कलात्मक मूर्ति तत्कालीन शिल्पकला की उत्कृष्टता को दर्शाती हैं। इन प्रतिमाओं में सौंदर्य, आध्यात्मिकता और शिल्प कौशल का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है।

*राजमहल के अवशेषों से सामने आई प्राचीन नगरी की भव्यता*

सिरपुर में महानदी के तट के समीप वर्ष 2000-01 के दौरान डॉ. अरुण कुमार शर्मा के निर्देशन में किए गए उत्खनन में एक विशाल परिसर के अवशेष प्राप्त हुए थे, जिन्हें राजमहल के अवशेषों के रूप में पहचाना गया।

यहां भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की महत्वपूर्ण प्रतिमाएं भी प्राप्त हुई हैं। इन अवशेषों से प्राचीन सिरपुर की राजनीतिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक समृद्धि की जानकारी मिलती है।

वर्ष 2001 से 2004 के बीच हुए विभिन्न उत्खननों में अनेक मंदिरों, बौद्ध विहारों और अन्य संरचनाओं के अवशेष सामने आए, जिन्होंने सिरपुर के ऐतिहासिक महत्व को और अधिक स्थापित किया।

*वैश्विक पहचान से सांस्कृतिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति*

सिरपुर को यूनेस्को की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में स्थान मिलने से छत्तीसगढ़ में सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, धार्मिक और पुरातात्विक पर्यटन की संभावनाओं को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

सिरपुर की वैश्विक पहचान मजबूत होने से देश-विदेश के पर्यटकों, इतिहासकारों, पुरातत्वविदों, शोधकर्ताओं और बौद्ध धर्म के अनुयायियों का आकर्षण बढ़ सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर पर्यटन सेवाओं, होटल, होमस्टे, परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय व्यंजन और अन्य रोजगारमूलक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

विशेष रूप से सिरपुर की बौद्ध विरासत अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन परिपथ से जुड़ने की महत्वपूर्ण क्षमता रखती है। यहां शैव, वैष्णव, बौद्ध और जैन परंपराओं का ऐतिहासिक संगम धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को विशिष्ट पहचान प्रदान कर सकता है।

*विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव*

यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल होना किसी ऐतिहासिक स्थल को विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण प्रारंभिक चरण है। इसके बाद निर्धारित मानकों के अनुरूप विस्तृत नामांकन दस्तावेज, संरक्षण प्रबंधन व्यवस्था और मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

सिरपुर की समृद्ध पुरातात्विक विरासत, अद्वितीय ईंट स्थापत्य कला, प्राचीन बौद्ध विहार, दुर्लभ मूर्तियां तथा विभिन्न धार्मिक परंपराओं के ऐतिहासिक सहअस्तित्व की विशेषताएं इसे वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण सांस्कृतिक स्थल के रूप में प्रस्तुत करती हैं।

सिरपुर की यह उपलब्धि केवल एक पुरातात्विक स्थल की पहचान का विषय नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की हजारों वर्षों से विकसित होती सांस्कृतिक चेतना, कलात्मक प्रतिभा, धार्मिक सद्भाव और ऐतिहासिक गौरव को विश्व मंच पर प्रतिष्ठित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

महानदी के तट पर सदियों से इतिहास की अमूल्य धरोहरों को संजोए सिरपुर अब अपनी प्राचीन सांस्कृतिक आभा के साथ वैश्विक पहचान की नई यात्रा पर अग्रसर है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के गौरवशाली अतीत को विश्व के सामने प्रस्तुत करने के साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए इस अमूल्य विरासत के संरक्षण का संदेश भी देती है।

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‘विकास और विरासत’ की थीम पर अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में चमकेगा छत्तीसगढ़, भारत मंडपम में हस्तशिल्प, हर्बल उत्पादों, मिलेट और लोक संस्कृति की दिखेगी अनूठी झलक

रायपुर, 21 अक्टूबर 2026/ नई दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में आगामी 14 से 27 नवंबर 2026 तक आयोजित होने वाले 45 वें ‘भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले’ में छत्तीसगढ़ की भागीदारी को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। इसे लेकर आज मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई।

        बैठक में मुख्य सचिव ने व्यापार मेले के दौरान छत्तीसगढ़ पवेलियन के निर्माण, सुरक्षा, ब्रांडिंग और अन्य व्यवस्थाओं को समय-सीमा के भीतर पूरी गुणवत्ता के साथ पूरा करने के कड़े निर्देश दिए हैं। इस वर्ष इस प्रतिष्ठित मेले की थीम ‘विकास और विरासत’ रखी गई है, जो देश की आधुनिक प्रगति और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के सुंदर तालमेल को प्रदर्शित करती है।

*इन प्रमुख बिंदुओं पर रहेगा विशेष फोकस*

         हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को मंच मुख्य सचिव ने कहा कि यह व्यापार मेला छत्तीसगढ़ के हस्तशिल्पियों, स्व-सहायता समूहों और उद्यमियों के लिए अपनी कला और उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का एक बड़ा मंच है।

        मुख्य सचिव ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में छत्तीसगढ़ पवेलियन में कृषि, मिलेट और वनोपज का प्रदर्शन  कृषि एवं किसान कल्याण तथा उद्यानिकी विभाग को छत्तीसगढ़ के प्रमुख मिलेट उत्पादों-कोदो, कुटकी, रागी और अन्य विशिष्ट उत्पादों को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को लघु वनोपज संघ के माध्यम से छत्तीसगढ़ हर्बल उत्पादों के प्रदर्शन एवं विक्रय की पुख्ता व्यवस्था करने को कहा गया है।
  
*औद्योगिक नीतियों और पर्यटन का प्रचार*

      वाणिज्य एवं उद्योग विभाग (जो इस पवेलियन का नोडल विभाग है) को ‘नवीन औद्योगिक विकास नीति 2024-2030’ एवं विभिन्न निवेश योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, पर्यटन विभाग को राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों की जानकारी और संस्कृति विभाग को सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। 

*ग्रामोद्योग और हथकरघा*

         ग्रामोद्योग विभाग के अंतर्गत हथकरघा बुनकर सहकारी संघ और ‘शबरी’ के माध्यम से हस्तशिल्प उत्पादों के प्रदर्शन व बिक्री की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने ग्रामोद्योग विभाग के अधिकारियों को हथकरघा बुनकर सहकारी संघ एवं शबरी के माध्यम से उत्पाद प्रदर्शन एवं विक्रय हेतु हस्तशिल्पियों द्वारा प्रदर्शन किए जाने के लिए विभागीय तैयारियों की जानकारी ली।

*सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और राज्य दिवस का आयोजन*

        मेले के दौरान छत्तीसगढ़ पवेलियन में आयोजित होने वाले ‘राज्य दिवस’ के अवसर पर भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रदेश के लोक कलाकारों द्वारा जीवंत प्रदर्शन की तैयारियाँ अभी से शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि मेले में छत्तीसगढ़ की उत्कृष्ट कला, संस्कृति, हस्तशिल्प और औद्योगिक विकास की झलक अत्यंत प्रभावी ढंग से प्रस्तुत हो।

*मेले की तिथियां और समय*

         14 नवंबर से 27 नवंबर 2026 तक मेला का आयोजन किया जाएगा, जिसमें 14 नवंबर से 18 नवंबर 2026 विशेष रूप से व्यापारिक एवं व्यावसायिक आगंतुकों के लिए आरक्षित है।  आम जनता के लिए यह मेला 27 नवंबर 2026 तक खुला रहेगा। 

                समीक्षा बैठक में प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री अरुण पाण्डेय, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, वित्त एवं जनसंपर्क विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, संचालक जनसंपर्क श्री आशीष टिकरिया, सीएसआईडीसी के प्रबंध संचालक श्री विश्वेश कुमार सहित वाणिज्य एवं उद्योग तथा अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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