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भट्ठियों पर चला पुलिस का बुलडोजर एक्शन” — 8 अवैध ठिकाने खत्म, शराब कारोबारियों को कड़ी चेतावनी, अब नहीं बचेगा कोई भी दोषी

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    रायगढ़, 03 अप्रैल* । वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह के दिशा निर्देशन में जिले में चलाए जा रहे “ऑपरेशन आघात” के तहत अवैध शराब के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई जारी है। इसी क्रम में एडिशनल एसपी श्री अनिल सोनी एवं एसडीओपी धरमजयगढ़ श्री सिद्दांत तिवारी के मार्गदर्शन पर थाना प्रभारी घरघोड़ा निरीक्षक कुमार गौरव साहू के नेतृत्व में आज दिनांक 3 अप्रैल को ग्राम घरघोड़ी के खेतधरहा नदी किनारे अवैध शराब निर्माण की सूचना पर पुलिस टीम द्वारा सटिक रेड कार्रवाई की गई।

        मुखबिर से प्राप्त सूचना पर पुलिस टीम ने मौके पर घेराबंदी कर दबिश दी, जहां आरोपी छोटू डनसेना को अवैध रूप से महुआ शराब बनाते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। पूछताछ में आरोपी ने अवैध बिक्री के उद्देश्य से शराब निर्माण करना स्वीकार किया। पुलिस ने मौके से करीब 190 लीटर महुआ शराब, जिसकी अनुमानित कीमत ₹19,000 है, जप्त की। साथ ही शराब बनाने में प्रयुक्त सिल्वर के बड़े बर्तन, टिन टीपा सहित अन्य उपकरण भी जब्त किए गए। कार्रवाई के दौरान मौके पर संचालित 8 अवैध भट्ठियों को भी नष्ट किया गया।

        *आरोपी छोटू डनसेना पिता अनंत सिंह डनसेना उम्र 37 वर्ष निवासी घरघोड़ी थाना घरघोड़ा* के विरुद्ध आबकारी एक्ट की धारा 34(2), 59(क) के तहत अपराध दर्ज कर विधिवत कार्रवाई की गई है। थाना प्रभारी द्वारा क्षेत्र में मुनादी कर अवैध शराब निर्माण करने वालों को सख्त चेतावनी दी गई है कि ऐसे कृत्यों में लिप्त पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

          उक्त कार्रवाई में थाना प्रभारी घरघोड़ा निरीक्षक कुमार गौरव साहू, प्रधान आरक्षक अरविंद पटनायक, आरक्षक हरीश पटेल, उद्धोराम पटेल एवं महिला आरक्षक सुप्रिया सिदार की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

*एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह का सख्त संदेश* — 

           *“अवैध शराब निर्माण और बिक्री में रायगढ़ पुलिस की लगातार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, शराब के अवैध कारोबार से जुड़े तत्व समाज की मुख्यधारा से जुड़े कर जीवन यापन करें, ऐसे अपराधों पर संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा ”*

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“लैलूंगा की मिट्टी की महक से निकला ‘केलो’ जैविक जंवाफूल चावल बना देशभर में सुगंध और स्वाद का सरताज, बेंगलुरु से कारगिल तक बढ़ी मांग

रायगढ़ 03 अप्रैल 2026/रायगढ़ जिले के लैलूंगा क्षेत्र का ‘केलो’ जैविक जंवाफूल चावल आज अपनी विशिष्ट सुगंध, स्वाद और उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण एक अलग पहचान स्थापित कर चुका है। पारंपरिक रूप से उगाई जाने वाली यह धान की किस्म अब किसानों के लिए आय का मजबूत माध्यम बन रही है। प्रशासन और कृषि विभाग के सहयोग से इस उत्पाद को व्यवस्थित रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे यह स्थानीय स्तर से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। किसानों द्वारा अपनाई जा रही जैविक पद्धति और बेहतर विपणन व्यवस्था के कारण इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।
     जंवाफूल धान की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्राकृतिक सुगंध और स्वाद है, जो लैलूंगा क्षेत्र की विशिष्ट जलवायु में ही पूर्ण रूप से विकसित हो पाती है। यहां की भौगोलिक परिस्थितियां—दिन में पर्याप्त गर्मी और रात में हल्की ठंडक—इस धान की गुणवत्ता को विशेष बनाती हैं। यही कारण है कि इस क्षेत्र में उत्पादित चावल का स्वाद और खुशबू अलग पहचान रखता है और उपभोक्ताओं के बीच इसकी मांग निरंतर बढ़ रही है। ‘केलो’ जैविक जंवाफूल चावल की मांग अब छत्तीसगढ़ से बाहर भी तेजी से बढ़ रही है। बेंगलुरु, चेन्नई, तेलंगाना, लद्दाख और कारगिल जैसे क्षेत्रों में इसकी अच्छी मांग है। वर्तमान में इसका बाजार मूल्य लगभग 150 रुपये प्रति किलो है, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है। वहीं बीज भी किसानों को 70 रुपए प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे अधिक किसान इस फसल की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
     लैलूंगा के किसान चंद्रशेखर पटेल बताते हैं कि उनके परिवार में लंबे समय से जंवाफूल चावल की खेती की जा रही है, लेकिन अब इसकी मांग और पहचान में काफी वृद्धि हुई है। इस वर्ष उन्होंने 4 एकड़ में इसकी खेती की, जिसमें प्रति एकड़ लगभग 30,000 रुपए की लागत आई। वे बताते हैं कि उन्हें प्रति एकड़ 1 लाख रूपये से अधिक की आय प्राप्त हो रही है। उनका कहना है कि इस फसल से उन्हें स्थिर और संतोषजनक आय मिल रही है, जिससे वे भविष्य में इसकी खेती का रकबा और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। उनके उत्पाद की मांग राज्य के बाहर भी बढ़ रही है, जिससे उन्हें बेहतर बाजार उपलब्ध हो रहा है। ग्राम खैरबहार के किसान भवानी पंडा बताते हैं कि वे वर्ष 2015 से खेती कर रहे हैं और धीरे-धीरे जंवाफूल चावल की खेती की ओर बढ़े हैं। वे पूरी तरह जैविक पद्धति से खेती करते हैं, जिसमें रासायनिक खाद या कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता। हरी खाद का उपयोग कर वे खेत की उर्वरता बनाए रखते हैं। भवानी पंडा बताते हैं कि जंवाफूल चावल की खेती से उन्हें पारंपरिक धान की तुलना में अधिक लाभ मिल रहा है। वर्तमान में वे 2 एकड़ में इसकी खेती कर रहे हैं और आने वाले समय में इसे 20 एकड़ तक बढ़ाने का लक्ष्य रखे हुए हैं। जंवाफूल चावल की खेती पूरी तरह जैविक पद्धति से की जा रही है, जिससे इसकी गुणवत्ता और विश्वसनीयता बनी रहती है। रासायनिक मुक्त उत्पादन के कारण यह चावल स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। यही वजह है कि उपभोक्ताओं के बीच इसकी मांग लगातार बढ़ रही है और किसानों को इसका बेहतर मूल्य मिल रहा है।     
         प्रशासन और कृषि विभाग द्वारा इस फसल को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही किसान समूहों और एफपीओ के माध्यम से उत्पादन और विपणन को संगठित किया जा रहा है। पिछले वर्ष जहां लगभग 700 एकड़ में इसकी खेती की गई थी, वहीं इस वर्ष इसे बढ़ाकर 2000 एकड़ तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे अधिक से अधिक किसान इस लाभकारी फसल से जुड़ सकें। ‘केलो’ जैविक जंवाफूल चावल अब लैलूंगा की एक मजबूत पहचान बन चुका है। यह न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि क्षेत्र को एक नई पहचान भी दिला रहा है। पारंपरिक खेती, जैविक पद्धति और प्रशासनिक सहयोग के समन्वय से यह पहल किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026: परंपरा, प्रतिभा और पराक्रम का अनूठा संगम, जनजातीय युवाओं को मिला राष्ट्रीय मंच, मुख्यमंत्री श्री साय का बड़ा फैसला—हर साल होगा आयोजन, खिलाड़ियों को मिलेगा सम्मान और पहचान

रायपुर, 03 अप्रैल 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पंडित दीनदयाल आडिटोरियम रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 10 दिनों में छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर जो जोश और ऊर्जा देखने को मिली, उसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन देश की आदिवासी प्रतिभाओं को एक मंच प्रदान करने और उनकी खेल क्षमता को सामने लाने का अनूठा अवसर साबित हुआ है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने उद्बोधन में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके विजन और मार्गदर्शन के कारण छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी का गौरव प्राप्त हुआ। साथ ही केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के निरंतर सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से छत्तीसगढ़ आज देश के खेल मानचित्र में प्रमुख स्थान पर स्थापित हुआ है। उन्होंने कहा कि अब यह गेम्स प्रतिवर्ष छत्तीसगढ़ में आयोजित किए जाएंगे, जो राज्य के लिए गर्व का विषय है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जनजातीय समाज और खेल का रिश्ता सदियों पुराना है। तीरंदाजी, दौड़ और कुश्ती जैसे खेल जनजातीय जीवन का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। उन्होंने स्वयं के जनजातीय पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय समाज में अपार ऊर्जा और प्रतिभा निहित है, जिसे सही मंच मिलने पर देश-विदेश में पहचान मिल सकती है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि देश की एकता, संस्कृति और कौशल का महाकुंभ बनकर उभरा है। देशभर के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जनजातीय खिलाड़ियों ने इसमें भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। यह आयोजन आदिवासी युवाओं को सशक्त बनाने और खेलों को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि खिलाड़ियों ने केवल जीत के लिए नहीं, बल्कि साहस और उत्कृष्टता की नई कहानियां रचने के लिए प्रतिस्पर्धा की है। उन्होंने यह साबित किया है कि प्रतिभा केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं, बल्कि बस्तर, सरगुजा, झारखंड और पूर्वोत्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में भी भरपूर है।

समारोह में मुख्यमंत्री श्री साय ने पदक तालिका में शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाले कर्नाटक, द्वितीय स्थान ओडिशा और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले झारखंड के खिलाड़ियों को बधाई दी। साथ ही छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ ने कुल 19 पदक (03 स्वर्ण, 10 रजत और 06 कांस्य) हासिल किए हैं। उन्होंने खिलाड़ियों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि स्विमिंग में अनुष्का भगत ने 4 रजत पदक जीते, निखिल खलखो और न्यासा पैकरा ने भी पदक जीतकर राज्य का नाम रोशन किया। एथलेटिक्स में सिद्धार्थ नागेश ने स्वर्ण और रजत पदक जीते, वहीं अन्य खिलाड़ियों ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। वेटलिफ्टिंग में निकिता ने स्वर्ण पदक जीतकर प्रदेश की बेटियों का मान बढ़ाया। बालिका वर्ग फुटबॉल टीम ने स्वर्ण और बालक वर्ग हॉकी टीम ने कांस्य पदक जीतकर राज्य का गौरव बढ़ाया। उन्होंने सभी खिलाड़ियों को भविष्य के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि निरंतर मेहनत और समर्पण से वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने पदक विजेताओं के लिए नगद पुरस्कार की घोषणा भी की। व्यक्तिगत स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक के लिए 2 लाख रुपये, रजत के लिए 1.5 लाख रुपये और कांस्य के लिए 1 लाख रुपये प्रदान किए जाएंगे। वहीं दलीय स्पर्धाओं में स्वर्ण के लिए 1 लाख रुपये, रजत के लिए 75 हजार रुपये और कांस्य के लिए 50 हजार रुपये देने की घोषणा की गई।

मुख्यमंत्री ने अंत में सभी खिलाड़ियों, कोच, आयोजन समिति, अधिकारियों और सहयोगी संस्थाओं को इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने के लिए बधाई दी और विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ जनजातीय खेलों का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। उन्होंने सभी खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनकी मेहनत उन्हें ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक अवश्य पहुंचाएगी।

समापन समारोह में उपमुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने  सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि पूरे देश के जनजातीय खिलाड़ियों ने इस खेल महाकुंभ में उत्साह और ऊर्जा के साथ भाग लिया। उन्होंने बताया कि यह पहला अवसर है जब इस स्तर पर ट्राइबल गेम्स का आयोजन किया गया, जिससे खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने और राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का अवसर मिला। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में यह आयोजन संभव हो पाया।श्री साव ने कहा कि राज्य सरकार ने खिलाड़ियों के आगमन से लेकर प्रतियोगिता के दौरान आवास, भोजन और अन्य सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की। साथ ही छत्तीसगढ़ की संस्कृति और आतिथ्य का अनुभव कराने का भी प्रयास किया गया।  उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में यह आयोजन और अधिक भव्य रूप में आयोजित होगा। उन्होंने पदक तालिका में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली टीमों को बधाई दी तथा छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की भी सराहना की। 

इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री विकास शील ने सभी खिलाड़ियों, अधिकारियों एवं आयोजकों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने बताया कि इस आयोजन में देशभर के 2000 से अधिक जनजातीय खिलाड़ी एवं अधिकारियों ने भाग लिया, जिससे यह प्रतियोगिता एक राष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण मंच बन गई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने जनजातीय प्रतिभाओं को अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से इस आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न किया है। यह मंच खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार होने का अवसर देता है।

इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर मेरीकॉम और फुटबॉलर बाइचुंग भूटिया भी विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। साथ ही केबिनेट मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ ओलंपिक एसोसिएशन के महासचिव श्री विक्रम सिसोदिया, छत्तीसगढ़ राज्य तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री जितेन्द्र कुमार साहू, छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार, रायपुर कमिश्नर श्री संजीव शुक्ला, जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ अधिकारी कर्मचारी सहित बड़ी संख्या में देश भर से आए खिलाड़ी उपस्थित थे।

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महतारी वंदन योजना के हितग्राहियों के ई-केवाईसी हेतु प्रशिक्षण आयोजित,लैलूँगा एवं तमनार में सीएससी संचालक और आंगनबाड़ी सुपरवाइजर को दिया गया प्रशिक्षण

रायगढ़, 03 अप्रैल 2026/महतारी वंदन योजना के हितग्राहियों के द्वितीय चरण के ई-केवाईसी कार्य को सुचारू एवं प्रभावी ढंग से संपन्न कराने हेतु जनपद पंचायत लैलूँगा एवं तमनार में संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण प्रशासन के निर्देशानुसार आयोजित किया गया, जिसमें संबंधित विभागों के अधिकारी एवं मैदानी अमला उपस्थित रहा।
      प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी तथा जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की उपस्थिति में सीएससी जिला प्रबंधक रवि सिंह द्वारा दोनों विकासखंडों के सभी सीएससी सेंटर संचालकों  एवं आंगनबाड़ी सुपरवाइजरों को विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण में ई-केवाईसी प्रक्रिया, तकनीकी पहलुओं, आवश्यक दस्तावेजों एवं समय-सीमा के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
       अधिकारियों ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार महतारी वंदन योजना के सभी हितग्राहियों का ई-केवाईसी किया जाना अनिवार्य है। इसके लिए 1 अप्रैल से 30 जून 2026 तक विशेष अभियान चलाया जाएगा, ताकि प्रत्येक पात्र हितग्राही का सत्यापन सुनिश्चित किया जा सके। प्रशिक्षण के दौरान सभी सीएससी संचालकों एवं आंगनबाड़ी सुपरवाइजरों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने, हितग्राहियों को जागरूक करने एवं समय-सीमा के भीतर ई-केवाईसी पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने यह भी कहा कि इस कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाए, जिससे योजना का लाभ समय पर हितग्राहियों तक पहुंच सके।

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अतिक्रमणकारियों पर चला प्रशासन का बुलडोजर—बड़े रामपुर से सांगीतराई तक अवैध कब्जों का सफाया, छातामुड़ा में बहाल हुआ नाले का प्रवाह, शासकीय जमीन को मुक्त कराने राजस्व विभाग का सख्त अभियान जारी”

रायगढ़, 03 अप्रैल 2026। रायगढ़ शहर एवं आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते अतिक्रमण के मामलों पर कठोर रुख अपनाते हुए आज तहसील रायगढ़ एवं तहसील पुसौर में राजस्व विभाग द्वारा अतिक्रमण विरोधी अभियान संचालित किया गया। अभियान के तहत विभिन्न स्थानों पर शासकीय भूमि पर किए गए अतिक्रमणों को हटाते हुए बेदखली की कार्यवाही की गई।
     नगर निगम सीमा से लगे ग्राम बड़े रामपुर में शासकीय भूमि रकबा 07 डिसमिल पर अनाधिकृत रूप से संचालित फेब्रिकेशन दुकान को ध्वस्त किया गया तथा मुख्य सड़क मार्ग से लगी लगभग 10 डिसमिल भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। ग्राम सांगीतराई में स्थानीय नागरिकों से प्राप्त शिकायत के आधार पर खसरा नंबर 382, रकबा 0.243 हेक्टेयर शासकीय भूमि पर अनुभव बिल्डर्स द्वारा की जा रही अवैध बाउंड्रीवाल को ध्वस्त कर भूमि को कब्जामुक्त किया गया। 
     तहसील पुसौर के ग्राम छातामुड़ा में भूमिस्वामी ओंकार सिंह बग्गा द्वारा अपने भूमिस्वामी हक से लगी शासकीय भूमि पर कालोनाइजेशन के उद्देश्य से सड़क निर्माण कर अतिक्रमण किया गया था। खसरा नंबर 252 अंतर्गत लगभग 2400 वर्गफुट भूमि पर किए गए इस अतिक्रमण के कारण एक प्राकृतिक नाले का प्रवाह भी अवरुद्ध हो रहा था। जनशिकायत के आधार पर राजस्व विभाग ने उक्त अवैध सड़क को ध्वस्त कर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया तथा नाले का प्रवाह बहाल किया।
        इसी प्रकार तहसील पुसौर के ग्राम लोहरसिंग में राष्ट्रीय राजमार्ग से लगी शासकीय भूमि पर कब्जा करने के उद्देश्य से एक निजी व्यक्ति द्वारा प्रीकास्ट वॉल खड़ी की गई थी। उक्त अतिक्रमण को भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में ध्वस्त कर शासकीय भूमि पर अतिक्रमण की संभावना को समाप्त किया गया। अभियान के दौरान अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) श्री महेश शर्मा, तहसीलदार रायगढ़ श्री शिव कुमार डनसेना एवं नायब तहसीलदार रायगढ़ श्री हरनंदन बंजारे सहित राजस्व विभाग की टीम उपस्थित रही। अधिकारियों ने बताया कि शासकीय भूमि की सुरक्षा एवं अतिक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण हेतु यह अभियान आगे भी सतत रूप से जारी रहेगा।

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महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने महतारी वंदन योजना मददगार

रायपुर, 03 अप्रैल 2026/ महिलाओं के साथ असमानता को दूर करने, स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में सतत् सुधार लाने, आर्थिक स्वावलंबन तथा सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए  राज्य सरकार कृत संकल्पित है। महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन, परिवार में उनकी निर्णय लेने की भूमिका को सुदृढ़ करने, महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए राज्य शासन द्वारा महतारी वंदन योजना लागू की गई है। महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने 1000 रुपये की आर्थिक सहायता मिलने लगी, जिसे मलिाओं ने इसे एक अवसर के रूप में देखा और अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने उपयोग करने लगी। 

           गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड के छोटे से ग्राम मझगंवा की श्रीमती हेमा सिंग की कहानी आज कई महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाली हेमा सिंग ने आज अपने आत्मविश्वास और सरकारी योजना के सहयोग से अपनी जिंदगी को नई दिशा दी है।  महतारी वंदन योजना के तहत उन्हें हर महीने 1000 रुपये की आर्थिक सहायता मिलने लगी। जिसे हेमा सिंग ने इसे एक अवसर के रूप में देखा। 

         हेमा सिंग ने इस राशि को बचाकर अपने घर के पास एक छोटा सा किराना स्टोर शुरू किया। धीरे-धीरे उनकी दुकान चल निकली। गांव के लोगों की जरूरतों को पूरा करते हुए उनका व्यवसाय बढ़ने लगा और आय में भी स्थिरता आने लगी। आज उनकी दुकान न सिर्फ उनकी आर्थिक मजबूती का आधार बनी है, बल्कि उनके परिवार के जीवन स्तर में भी बड़ा बदलाव लाई है। हेमा सिंग अब अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिला पा रही हैं और भविष्य के लिए भी बचत कर रही हैं। पहले जहां रोजमर्रा के खर्चों को लेकर चिंता बनी रहती थी, वहीं अब उनके चेहरे पर आत्मविश्वास और संतोष साफ नजर आता है। 

           महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को लगातार आर्थिक मजबूती मिल रही है। महतारी वंदन योजना महिलाओं के जीवन में नई आशा और अवसर लेकर आया है। यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके जीवन स्तर को बेहतर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। अपनी सफलता का श्रेय देते हुए हेमा सिंग कहती हैं कि महतारी वंदन योजना उनके लिए एक नई शुरुआत साबित हुई है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी को आभार व्यक्त किया और कहा कि इस योजना ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी है।

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जल संरक्षण के कार्यों को और गति दें,अधिक से अधिक पेड़ लगाकर संरक्षित करें-राज्यपाल श्री डेका,राज्यपाल ने सरायपाली में विकासखंड स्तरीय अधिकारियों की बैठक ली

रायपुर, 03 अप्रैल 2026/  राज्यपाल श्री रमेन डेका ने जल संरक्षण के कार्यों की सराहना करते हुए किसानों को डबरी खनन के लिए अधिक से अधिक प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। बताया गया  कि विकासखंड में 218 डबरी स्वीकृत की गई हैं तथा बड़ी संख्या में निर्माण कार्य पूर्ण किए गए हैं,  राज्यपाल ने  और गति देने की आवश्यकता पर बल दिया। राज्यपाल श्री डेका ने आज सरायपाली प्रवास के दौरान रेस्ट हाउस में विकासखंड स्तरीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में उन्होंने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं एवं विकास कार्यों की प्रगति की विस्तृत जानकारी ली तथा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

                राज्यपाल ने वृक्षारोपण को जनआंदोलन के रूप में संचालित करने पर जोर देते हुए कहा कि “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत व्यापक स्तर पर पौधरोपण किया जाए। कैंपा एवं मनरेगा मद से वृहत वृक्षारोपण करते हुए शासकीय भवनों, रेस्ट हाउस परिसरों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में फलदार एवं छायादार पौधे लगाए जाएं। विभाग ने बताया कि क्षेत्र में लगभग 1.50 लाख पौधरोपण किया गया है तथा अमृत सरोवरों के आसपास भी हरित विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने इसमें जनभागीदारी बढ़ाने के निर्देश दिए।

              राज्यपाल ने कृषि क्षेत्र की समीक्षा करते हुए जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने तथा धान के साथ उद्यानिकी फसलों के समावेश पर बल दिया। उन्होंने  जैविक चावल के वैल्यू एडिशन के माध्यम से किसानों की आय वृद्धि के प्रयासों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। स्वच्छ भारत मिशन की समीक्षा के दौरान उन्होंने डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण को प्रभावी बनाने, हितग्राहियों से सेवा शुल्क लेने तथा सार्वजनिक शौचालयों की नियमित सफाई एवं उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

               स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा करते हुए राज्यपाल ने टीबी रोगियों की जानकारी ली और उनके उपचार की सतत निगरानी के निर्देश दिए। उन्होंने समाज के सक्षम व्यक्तियों को टीबी मरीजों को गोद लेने के लिए प्रेरित करने, रेडक्रॉस से जुड़ने तथा ब्रेस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर एवं मोतियाबिंद के उपचार हेतु जागरूकता अभियान एवं शिविर आयोजित करने पर बल दिया। उन्होंने एम्स से समन्वय स्थापित कर बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

               राज्यपाल श्री डेका ने योग को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों में प्रारंभ से ही योग की आदत विकसित की जाए तथा इसके लिए नियमित प्रशिक्षण और कक्षाएं संचालित की जाएं। उन्होंने अधिक से अधिक पुस्तकालय खोलने तथा महिला स्व-सहायता समूहों को आजीविका गतिविधियों से जोड़कर “लखपति दीदी” बनाने की दिशा में कार्य करने के निर्देश दिए।

              बैठक में सरायपाली विधायक श्रीमती चतुरी नंद भी उपस्थित रहीं। इस अवसर पर कलेक्टर श्री विनय लंगेह ने जिले में संचालित विकास कार्यों एवं प्रमुख योजनाओं की प्रगति की जानकारी प्रस्तुत की। बैठक में पुलिस अधीक्षक श्री प्रभात कुमार, जिला पंचायत सीईओ श्री हेमंत नंदनवार, अपर कलेक्टर श्री सचिन भूतड़ा, एसडीएम श्रीमती अनुपमा आनंद सहित विकासखंड स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

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खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026: कर्नाटक बना ओवरऑल चैंपियन, मेजबान छत्तीसगढ़ नौवें स्थान पर,कर्नाटक ने 23 स्वर्ण पदकों के साथ तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया


रायपुर, 3 अप्रैल 2026/ पूर्व विश्व जूनियर चैंपियन झारखंड की कोमालिका बारी ने अपने मिक्स्ड टीम खिताब के बाद महिला रिकर्व तीरंदाजी में स्वर्ण पदक जीता, जबकि ओडिशा के अर्जुन खारा ने पुरुष रिकर्व वर्ग में स्वर्ण अपने नाम किया। हालांकि, इन उपलब्धियों के बावजूद अंतिम दिन कर्नाटक को पदक तालिका के शीर्ष स्थान से हटाया नहीं जा सका और वह उद्घाटन खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में शीर्ष पर बना रहा।  मेजबान छत्तीसगढ़ ने भी जनजातीय समुदाय की खेल प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन करते हुए 3 स्वर्ण, 10 रजत और 6 कांस्य पदक जीतकर नौवां स्थान हासिल किया। छत्तीसगढ़ का आखिरी पदक पुरुष फुटबॉल में रजत के रूप में आया, जब वे फाइनल में पश्चिम बंगाल से 0-1 से हार गए।
 
                इस उद्घाटन संस्करण में 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने भाग लिया, जिसमें लगभग 3,800 खिलाड़ियों ने नौ खेल विधाओं में प्रतिस्पर्धा की। तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, भारोत्तोलन और कुश्ती में कुल 106 स्वर्ण पदक दांव पर थे, जबकि मल्लखंभ और कबड्डी जैसे पारंपरिक खेल प्रदर्शन (डेमोंस्ट्रेशन) खेलों के रूप में शामिल थे।
 
               इन 106 स्वर्ण पदकों में से कर्नाटक ने 23 स्वर्ण, 8 रजत और 7 कांस्य पदक जीतकर ओवरऑल चैंपियन का खिताब अपने नाम किया। ओडिशा 21 स्वर्ण, 15 रजत और 21 कांस्य पदकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा और 57 पदकों के साथ 50 से अधिक पदक जीतने वाला एकमात्र दल बना। झारखंड 16 स्वर्ण, 8 रजत और 11 कांस्य पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
 
               ओवरऑल चैंपियन कर्नाटक ने पहले ही दिन से पदक तालिका में बढ़त बना ली थी, खासकर तैराकी में दबदबा बनाते हुए उन्होंने 15 स्वर्ण, 5 रजत और 3 कांस्य पदक जीते। इसके अलावा एथलेटिक्स में 5 और कुश्ती में 3 स्वर्ण पदक जोड़कर उन्होंने सुनिश्चित किया कि ओडिशा और झारखंड उनसे आगे न निकल सकें।
 
                कर्नाटक के मणिकांत एल 8 स्वर्ण और 1 रजत पदक के साथ खेलों के सबसे सफल खिलाड़ी रहे, जबकि उनके साथी धोनिश एन ने तैराकी में 5 स्वर्ण और 1 रजत पदक जीते। महिला वर्ग में ओडिशा की तैराक अंजलि मुंडा ने 5 स्वर्ण पदक जीते, जबकि कर्नाटक की मेघांजलि ने 4 स्वर्ण और 2 कांस्य पदक अपने नाम किए।
 
                 ओडिशा एकमात्र ऐसा दल रहा जिसने सभी छह खेल विधाओं में कम से कम एक स्वर्ण पदक जीता, जिसमें एथलेटिक्स में 8 और तैराकी में 7 स्वर्ण शामिल हैं। दूसरी ओर, झारखंड ने एथलेटिक्स में 9, कुश्ती में 4 और तीरंदाजी में 3 स्वर्ण पदक जीते, साथ ही बाकी तीन विधाओं में भी कम से कम एक पदक हासिल किया।
 
                  फुटबॉल के अलावा, अंतिम दिन तीरंदाजी में चार स्वर्ण पदक दांव पर थे और यह स्पष्ट था कि ओडिशा, जो अंतिम से पहले दिन की प्रतियोगिताओं के बाद कर्नाटक से तीन स्वर्ण पदकों से पीछे था, अब शीर्ष स्थान हासिल नहीं कर सकता क्योंकि वह तीरंदाजी में अधिकतम दो ही स्वर्ण जीत सकता था।
 
                  अर्जुन खारा ने पुरुष रिकर्व व्यक्तिगत वर्ग में अपने ही राज्य के सोमनाथ हेम्ब्रम को फाइनल में हराकर एक स्वर्ण पदक जीता, लेकिन पुरुष टीम फाइनल में ओडिशा को झारखंड के खिलाफ 4-6 से हार का सामना करना पड़ा।
 
                 इसके बाद कोमालिका बारी ने गुजरात की भार्गवी भगोरा को व्यक्तिगत फाइनल में हराकर झारखंड के लिए एक और स्वर्ण पदक जोड़ा। नागालैंड ने महिला टीम फाइनल में झारखंड को हराकर स्वर्ण पदक जीता और 2 स्वर्ण, 2 रजत और 3 कांस्य पदकों के साथ 14वें स्थान पर रहा।
 
              कुल 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने पदक तालिका में जगह बनाई, जिनमें से 20 ने कम से कम एक स्वर्ण पदक जीता, जो देशभर में प्रतिभा के व्यापक प्रसार को दर्शाता है। महाराष्ट्र 6 स्वर्ण, 10 रजत और 4 कांस्य पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहा, जबकि अरुणाचल प्रदेश 6 स्वर्ण, 1 रजत और 4 कांस्य पदकों के साथ शीर्ष पांच में शामिल रहा।
 
*परिणाम*
 
*तीरंदाजी*
 
*महिला*
रिकर्व व्यक्तिगत: स्वर्ण – कोमालिका बारी (झारखंड); रजत – भार्गवी भगोरा (गुजरात); कांस्य – रुओविनुओ थेउनुओ (नागालैंड)
रिकर्व टीम: स्वर्ण – नागालैंड; रजत – झारखंड; कांस्य – मध्य प्रदेश
 
*पुरुष*
रिकर्व व्यक्तिगत: स्वर्ण – अर्जुन खारा (ओडिशा); रजत – सोमनाथ हेम्ब्रम (ओडिशा); कांस्य – पवन परमार (मध्य प्रदेश)
रिकर्व टीम: स्वर्ण – झारखंड; रजत – ओडिशा; कांस्य – मेघालय
 
*फुटबॉल*
पुरुष: स्वर्ण – पश्चिम बंगाल; रजत – छत्तीसगढ़; कांस्य – अरुणाचल प्रदेश, गोवा

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रात में मछुआरे का काम करने वाले अब्दुल फताह की छलांग ने लक्षद्वीप एथलेटिक्स के लिए एक नया अध्याय लिखा

रायपुर, 3 अप्रैल 2026: अब्दुल फताह ज़्यादातर रातों को समुद्र में होते हैं, जहां वे मछुआरे बनकर अपने परिवार की रोज़ी-रोटी कमाने में मदद करते हैं। जैसे ही सुबह होती है, वे सीधे ट्रेनिंग ग्राउंड की ओर निकल पड़ते हैं और एक एक अलग सपने का पीछा करते हुए लक्षद्वीप को 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स' 2026 में पहला मेडल दिलाया।

कवरत्ती और कदमत द्वीपों के बीच स्थित, दूरदराज के अमीनी द्वीप जो लगभग 2.7 किमी लंबा और 1.2 किमी चौड़ा है, और जिसका कुल भू-क्षेत्रफल 2.60 वर्ग किमी है के 18 वर्षीय लॉन्ग जम्पर ने जगदलपुर के क्रीड़ा परिसर मैदान में 7.03 मीटर की अपनी करियर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता। यह इस छोटे से केंद्र शासित प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था।
https://www.instagram.com/reel/DWqLgtcs-4M/?igsh=OGd1eGRqcW1jZ2F0
केंद्र शासित प्रदेश के खेल अधिकारी अहमद जावेद हसन ने मुस्कुराते हुए कहा, वह लक्षद्वीप के पहले ऐसे एथलीट हैं जिन्होंने 7 मीटर की दूरी पार की है और यह वाकई एक खास बात है।'' 
मछुआरे परिवार में जन्मे फताह भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं और घर की बड़ी ज़िम्मेदारी संभालते हैं। 12वीं कक्षा पूरी करने के बाद, आर्थिक तंगी के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही रोकनी पड़ी। इसके बजाय, उन्होंने अपने पिता के पारिवारिक व्यवसाय में हाथ बँटाने और खेल को अपने जुनून के तौर पर अपनाने का फ़ैसला किया।

फताह ने कहा, '' कोई और चारा नहीं है, आपको चीज़ों में संतुलन बनाना ही पड़ता है। जब मैं स्कूल में था, तभी से मैं अपने पिता की मछली पकड़ने के काम में मदद करता आ रहा हूँ। यही हमारी आमदनी का एकमात्र ज़रिया है। हमारे परिवार में छह लोग हैं। सुबह मैं अपनी ट्रेनिंग के लिए जाता हूँ; मेरे परिवार को इस बारे में पता है, भले ही वे इस खेल के बारे में बहुत कम समझते हों।'' 
https://x.com/i/status/2039945245887275352
दिलचस्प बात यह है कि एथलेटिक्स उनका पहला प्यार नहीं था। फताह शुरू में फुटबॉल खेलते थे, जैसा कि द्वीप के कई दूसरे युवा करते थे। हालांकि, कुछ साल पहले एक स्थानीय इंटर-आइलैंड प्रतियोगिता के दौरान उनकी यात्रा में एक अहम मोड़ आया। कोच मोहम्मद कासिम ने इस युवा की दौड़ने की ज़बरदस्त काबिलियत को पहचाना और उन्हें एथलेटिक्स में आने का सुझाव दिया।

तब से, फताह ने लॉन्ग जंप और 100-मीटर स्प्रिंट में ट्रेनिंग शुरू कर दी। लगभग उसी समय, अमिनी एथलेटिक्स एसोसिएशन का गठन होने लगा, जिससे इस क्षेत्र में खेलों के विकास को एक सही ढाँचा मिला।
फताह और कई अन्य युवा एथलीटों को धीरे-धीरे कोचिंग की मदद दी गई, जिससे उन्हें ज़्यादा व्यवस्थित तरीके से ट्रेनिंग करने में मदद मिली। सिर्फ़ दो सालों में, एसोसिएशन ने लगभग 384 एथलीटों को तैयार किया। इस समूह में से, 17 एथलीटों को गेम्स में लक्षद्वीप का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया।

जगदलपुर में फत्ताह की 7.03 मीटर की गोल्ड-विनिंग जंप, वहां के हालात को देखते हुए, खास तौर पर संतोषजनक थी। ट्रेनिंग के दौरान, उन्होंने बताया था कि उनकी जंप आमतौर पर 6.5 से 6.7 मीटर के आस-पास रहती है।

उन्होंने कहा. '' खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में आने से पहले, मैंने अपने लिए 7.15 मीटर तक पहुंचने का लक्ष्य तय किया था। मुझे खुशी है कि मैं सात मीटर का आँकड़ा पार कर पाया, और यह गोल्ड मेडल मुझे और बेहतर करने के लिए प्रेरित करेगा,” 
लक्षद्वीप धीरे-धीरे भारत के एथलेटिक्स के नक्शे पर अपनी जगह बना रहा है। इस केंद्र शासित प्रदेश की सबसे जानी-मानी एथलीटों में से एक हैं मुबस्सिना मोहम्मद, जो 19 साल की लॉन्ग जंपर और हेप्टाथलीट हैं। कुवैत में हुए 2022 एशियन U18 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में लॉन्ग जंप में सिल्वर मेडल जीतकर वह लक्षद्वीप की पहली इंटरनेशनल मेडलिस्ट बनीं। उन्होंने महिलाओं की लॉन्ग जंप में 6.30 मीटर के अपने पर्सनल बेस्ट के साथ जूनियर नेशनल टाइटल भी जीता।

मुबस्सिना की तरह, फताह भी बिना किसी आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधा के ट्रेनिंग करते हैं। लक्षद्वीप, जो सिर्फ़ 32 वर्ग किलोमीटर में फैला है और जिसकी आबादी 70,000 से भी कम है, वहां अभी तक कोई ठीक-ठाक सिंथेटिक ट्रैक या एथलेटिक्स स्टेडियम नहीं है। नतीजतन, कई एथलीट मिट्टी के ट्रैक पर प्रैक्टिस करते हैं, जबकि फत्ताह अक्सर अपने स्प्रिंट इवेंट्स की ट्रेनिंग के लिए पास के एक फुटबॉल मैदान का इस्तेमाल करते हैं।
 
उन्होंने आगे कहा, '' खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स और दूसरे नेशनल लेवल के मुकाबलों में हमारी सफलता को देखते हुए, हमें उम्मीद है कि हमारे लिए हालात बदलेंगे। हो सकता है कि हमें कुछ नौकरियाँ और ट्रेनिंग की सुविधाएँ मिल जाएं.''

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लैलूंगा की महिलाओं ने खड़ा किया खुद का रोजगार : दूध से घी-पनीर, वर्मी कम्पोस्ट और हाथों से टोकरी-हर हुनर बन रहा आय का जरिया

रायगढ़, 2 अप्रैल 2026/ कभी सीमित संसाधनों में जीवन यापन करने वाली लैलूंगा विकासखण्ड के ग्राम-चोरंगा की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” से जुड़कर संतोषी स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने न केवल अपने हुनर को पहचाना, बल्कि उसे आय का मजबूत साधन भी बना लिया है।
           करीब चार साल पहले समूह से जुड़ी इन महिलाओं ने छोटे स्तर से शुरुआत की थी, लेकिन आज वे विभिन्न प्रकार के उत्पाद तैयार कर बाजार में अपनी पहचान बना रही हैं। इस वर्ष से उन्होंने अपने काम को और विस्तार देते हुए गाय के दूध से घी, खोवा और पनीर बनाना शुरू किया है, जिससे उन्हें हर महीने अच्छी आमदनी हो रही है। खास बात यह है कि वे घर पर ही गाय का पालन कर स्वयं ही कच्चा माल तैयार करती हैं। यही नहीं, समूह की महिलाएं मिर्ची का स्वादिष्ट अचार भी बना रही हैं, जिसकी स्थानीय बाजार में अच्छी मांग है। साथ ही वे वर्मी कम्पोस्ट तैयार कर जैविक खेती को बढ़ावा दे रही हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय का साधन भी मिल रहा है।
           उनकी रचनात्मकता यहीं तक सीमित नहीं है। छिंद और सेवई घास जैसी पारंपरिक सामग्रियों का उपयोग कर वे सुंदर और उपयोगी टोकरी भी तैयार कर रही हैं, जो ग्रामीण कला और आत्मनिर्भरता का अनोखा उदाहरण है। इन सभी गतिविधियों को सफल बनाने में जिला प्रशासन का भरपूर सहयोग मिला है। प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और संसाधनों की उपलब्धता ने महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाया है, जिससे वे आज अपने पैरों पर मजबूती से खड़ी हैं। आज लैलूंगा में आयोजित जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर में समूह की महिलाओं ने अपने सभी उत्पादों को प्रदर्शनी के रूप में प्रस्तुत किया। इस दौरान उन्होंने न केवल अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया, बल्कि मौके पर ही उनका विक्रय कर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। उनके उत्पादों की गुणवत्ता और विविधता को देखकर लोगों ने काफी सराहना की। चोरंगा की ये महिलाएं न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि समाज में अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं।

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बाल विवाह पर प्रशासन सख्त, नाबालिग बालक की शादी रुकवाई,समझाइश के बाद दोनों पक्षों ने 21 वर्ष तक विवाह टालने का लिया संकल्प

रायगढ़, 2 अप्रैल 2026/ जिला प्रशासन और पुलिस विभाग के आपसी समन्वय से आज एक बाल विवाह को रोका गया। रायगढ़ विकासखंड के एक गांव में नाबालिग बालक के विवाह की तैयारी चल रही थी, जिसे समय रहते प्रशासन की सतर्कता से सफलतापूर्वक रूकवाया गया।
            विश्वस्त सूत्रों से जिला स्तर के अधिकारियों को जानकारी प्राप्त हुई थी कि उक्त ग्राम में बालक की आयु विवाह योग्य (21 वर्ष) न होने के बावजूद 3 अप्रैल 2026 को बारात ले जाने की तैयारी की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सूचना मिलते ही जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग के नेतृत्व में तत्काल पुलिस विभाग के सहयोग से एक संयुक्त टीम का गठन किया गया। गठित टीम आज संबंधित ग्राम पहुंची और बालक के जन्मतिथि से संबंधित शैक्षणिक एवं अन्य दस्तावेजों की गहन जांच की गई। जांच के दौरान पाया गया कि बालक की वर्तमान आयु 20 वर्ष 05 माह है, जो कि विवाह हेतु निर्धारित कानूनी आयु (21 वर्ष) से कम है। मौके पर बालक के परिजनों को बाल विवाह के कानूनी दुष्परिणामों और बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधानों के बारे में विस्तार से समझाइश दी गई। इसी दौरान बालिका पक्ष और उनके परिजन भी वहां पहुंचे, उन्हें भी कानून की जानकारी देते हुए समझाइश दी गई। 
           विभाग की समझाइश के बाद दोनों पक्षों ने अपनी गलती स्वीकार की और सहमति जताई कि जब तक बालक की आयु 21 वर्ष पूर्ण नहीं हो जाती, तब तक वे विवाह संपन्न नहीं करेंगे। मौके पर ही परिजनों से औपचारिक घोषणा पत्र एवं राजीनामा पत्र भरवाया गया। इस संयुक्त कार्यवाही में ग्राम के सरपंच सहित जिला बाल संरक्षण अधिकारी, परियोजना अधिकारी (बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी), पुलिस विभाग के प्रतिनिधि, संरक्षण अधिकारी, विधिक सह परिवीक्षा अधिकारी, सेक्टर पर्यवेक्षक एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मुख्य रूप से उपस्थित थे। जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि बाल विवाह एक सामाजिक बुराई होने के साथ-साथ कानूनी अपराध भी है। यदि कहीं भी इस प्रकार की गतिविधि की जानकारी मिले, तो तत्काल संबंधित विभाग या चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सूचना दें, ताकि समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके।

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पेनल्टी शूटआउट में गोलकीपर बनकर चमकी किरण पिस्दा: जनजातीय पृष्ठभूमि से उठकर यूरोपियन लीग तक का सफर, असफलताओं को ताकत बनाकर अब भारतीय टीम में स्थायी जगह की ओर बढ़ते कदम

रायपुर, 2 अप्रैल 2026/ जब खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के सेमीफाइनल में अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ पेनल्टी शूटआउट के दौरान किरण पिस्दा ने गोलकीपिंग के दस्ताने पहने, तब वह अपने अब तक के अनुभवों पर भरोसा कर रही थीं। उन अनुभवों पर, जिन्होंने चुनौतियों और निराशाओं के बीच उन्हें और अधिक मजबूत बनाया।

             24 साल की उम्र में किरण अपने खेल कौशल के शिखर पर नजर आती हैं। वह यूरोप में लीग फुटबॉल खेल चुकी हैं और अब बड़े अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने की दहलीज पर हैं।

         हालांकि, उनका यह सफर बिल्कुल आसान नहीं रहा, भले ही उन्हें स्कूल और परिवार से शुरुआती समर्थन मिला। उनके भाई गिरीश पिस्दा, जो खुद राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं, उनके लिए प्रेरणा बने।

         किरण ने साई मीडिया से कहा, “मुझे स्कूल में काफी सपोर्ट मिला। वहीं से मुझे राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर खेलने के मौके मिले और हर चयन के साथ मेरा आत्मविश्वास बढ़ता गया।” इसके बाद किरण शारीरिक शिक्षा में डिग्री हासिल करने के लिए रायपुर आईं। छत्तीसगढ़ महिला लीग के दौरान उन्होंने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा और उन्हें राष्ट्रीय शिविर के लिए बुलावा मिला।

            किरण बताती हैं, “उस समय मैं शारीरिक रूप से उतनी फिट नहीं थी और मेरा मानसिक स्तर भी सीनियर खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार नहीं था।”  यही कारण रहा कि उस राष्ट्रीय शिविर में उन्हें भारतीय टीम के लिए चयन नहीं मिला। वह कहती हैं, “मुझे एहसास हुआ कि वहां जो अनुभव मिला है, उस पर मुझे काम करना होगा।”

            इसके बाद उनके जीवन में आत्म-सुधार का एक कठिन दौर शुरू हुआ। उन्होंने अपनी फिटनेस पर काम किया, मैचों का विश्लेषण करना शुरू किया और अपनी पोज़िशनल समझ को बेहतर बनाया। लेकिन सबसे बड़ा बदलाव उनकी मानसिकता में आया।

         वह कहती हैं, “मैंने खुद से कहा कि चाहे कुछ भी हो जाए, मैं नकारात्मक नहीं सोचूंगी। अगर आप नकारात्मक हो जाते हैं, तो उसका सीधा असर आपके प्रदर्शन पर पड़ता है।” इस बदलाव में उनके मेंटर और कोच योगेश कुमार जांगड़ा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। किरन ने कहा,“जब भी मुझे लगता है कि मैं अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही हूं या मन खराब होता है, तो मैं उनसे बात करती हूं। वह हमेशा मुझे सकारात्मक रहने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।”

           किरण की मेहनत का असर धीरे-धीरे दिखने लगा। घरेलू स्तर पर उनके प्रदर्शन ने केरल ब्लास्टर्स जैसे क्लबों के दरवाजे खोले, जहां उन्होंने खुद को और निखारा। उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी बहुमुखी प्रतिभा बन गई। वह कहती हैं, “मैंने स्ट्राइकर के रूप में शुरुआत की, फिर मिडफील्ड में खेली और अब राष्ट्रीय टीम के लिए फुल-बैक के रूप में खेलती हूं। एक फुटबॉलर के रूप में आपको अपनी टीम के लिए कई पोज़िशन पर खेलने के लिए तैयार रहना चाहिए।”

           किरण कई बार भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वह 2022 के सैफ़ चैंपियनशिप स्क्वाड का हिस्सा रही हैं और क्रोएशियन महिला लीग में डिनामो ज़ाग्रेब के लिए भी खेल चुकी हैं। फिर भी, इस मुकाम पर भी असफलताएं उनके सफर का हिस्सा रही हैं। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में आयोजित एएफसी (AFC) महिला एशियन कप जैसे बड़े टूर्नामेंट के लिए चयन न होना उनके लिए एक और परीक्षा थी।

         किरण कहती हैं, “बड़े टूर्नामेंट के लिए चयन न होना दुख देता है। हर खिलाड़ी इसे महसूस करता है। लेकिन अब मैं इसे अलग नजरिए से देखती हूं। इसे मैं और मेहनत करने और मजबूत वापसी करने की प्रेरणा मानती हूं।” दबाव को संभालना उनकी पहचान बन चुका है। चाहे टीम में जगह के लिए प्रतिस्पर्धा हो या अहम मैचों में प्रदर्शन, उन्होंने खुद को संयमित रखना सीख लिया है। वह कहती हैं, “ऊंचे स्तर पर खेलते समय दबाव हमेशा रहता है। आपको उसे संभालना सीखना पड़ता है।”

            किरण टीम के प्रदर्शन की भूमिका को भी महत्वपूर्ण मानती हैं। उन्होंने कहा, “अगर टीम अच्छा कर रही होती है, तो हर खिलाड़ी आत्मविश्वास से भरा होता है। लेकिन जब टीम हार रही होती है, तो व्यक्तिगत प्रदर्शन भी प्रभावित होता है।” जनजातीय पृष्ठभूमि से आने वाली किरण दूर-दराज के इलाकों के खिलाड़ियों की चुनौतियों को अच्छी तरह समझती हैं। उनका मानना है कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसे मंच इस अंतर को पाटने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

           वह कहती हैं, “जनजातीय इलाकों में बहुत प्रतिभा है, लेकिन खिलाड़ियों को हमेशा मौके नहीं मिलते। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स ने उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया है। इससे उन्हें आत्मविश्वास और राज्य तथा देश के लिए खेलने का सपना देखने की प्रेरणा मिलती है।” जहां तक किरण का सवाल है, उनका फोकस फिलहाल इंडियन वुमेंस लीग जैसी घरेलू प्रतियोगिताओं में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने और राष्ट्रीय टीम में नियमित जगह बनाने पर है। लेकिन उनका लक्ष्य इससे कहीं बड़ा है।

           वह कहती हैं, “मैं लगातार खुद को बेहतर बनाना चाहती हूं, नियमित प्रदर्शन करना चाहती हूं और बड़े टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहती हूं। अगर आपका चयन नहीं होता, तो इसका मतलब यह नहीं कि आप अच्छे खिलाड़ी नहीं हैं—इसका मतलब है कि आपको और मेहनत करनी होगी।”

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रायपुर के सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल हॉकी स्टेडियम में  फाइनल मुकाबला में  ओडिशा ने झारखंड को 4-1 से हराकर  दिलाया स्वर्ण पदक

रायपुर, 02 अप्रैल 2026/ खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के अंतर्गत राजधानी स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल हॉकी स्टेडियम में खेले गए पुरुष हॉकी फाइनल मुकाबले में ओडिशा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए झारखंड को 4-1 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। मैच की शुरुआत में झारखंड ने आक्रामक खेल दिखाते हुए पहले क्वार्टर में 1-0 की बढ़त बना ली। हालांकि, दूसरे क्वार्टर में ओडिशा ने जोरदार वापसी करते हुए दो गोल दागे और 2-1 से बढ़त हासिल कर ली।

        तीसरे क्वार्टर तक मुकाबला रोमांचक बना रहा, लेकिन ओडिशा ने अपना दबदबा कायम रखते हुए स्कोर 3-1 कर लिया। अंतिम क्वार्टर में भी ओडिशा ने एक और गोल कर बढ़त मजबूत की और अंततः मैच 4-1 से जीत लिया।
पूरे मैच के दौरान दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली, लेकिन ओडिशा की सधी हुई रणनीति और बेहतर तालमेल ने उसे जीत दिलाई। इस जीत के साथ ओडिशा ने प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया, जबकि झारखंड को रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

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हिंसा छोड़कर नई दिशा, नई राह की ओर बढ़ रहे कदम, आत्मसमर्पित व नक्सल पीड़ितों को कलेक्टर ने सौंपा नियुक्ति पत्र


रायपुर , 02 अप्रैल 2026/ मानव समाज का सबसे उत्कृष्ट पहलू सकारात्मक परिवर्तन है, जिससे जीवन में नवाचार और नए विचार जन्म लेते हैं। ऐसा ही बदलाव आत्मसमर्पित माओवादियों के जीवन में दिखाई दे रहा है। जिला प्रशासन की पहल पर उन्हें पहले प्रशिक्षित किया गया और अब कुशल होने के बाद रोजगार भी मुहैया हो रहा है। आत्मसमर्पित माओवादियों को भानुप्रतापपुर के ग्राम मुल्ला (चौगेल) के कैम्प में विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें पारंगत होने के बाद प्रशासन के प्रयासों से रोजगार भी दिलाया जा रहा है। मुख्यधारा में लौटकर प्रशिक्षण के उपरांत रोजगार प्रदान करने के मामले में उत्तर बस्तर कांकेर पहला जिला है।
कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर और जिला पंचायत के सीईओ श्री हरेश मंडावी ने आज कलेक्टर कक्ष में आज सुबह 04 आत्मसमर्पित माओवादी व पीड़ितों को नियुक्ति पत्र सौंपा तथा उन्हें नई शुरूआत के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं। इनमें पुनर्वासित सगनूराम आंचला एवं नक्सल पीड़ित रोशन नेताम, बीरसिंह मंडावी और संजय नेताम शामिल थे। इन सभी को निजी फर्म का नियुक्ति पत्र प्रदाय किया गया, जहां 15 हजार रूपए प्रतिमाह मानदेय और अन्य प्रकार की वित्तीय सुविधाएं प्राप्त होंगी। श्री आंचला ने बताया कि शिक्षा और सही-गलत की जानकारी के अभाव में माओवादी संगठन से जुड़ गया था। उन्हांने कहा कि मनुष्य की अहमियत मुख्यधारा में जुड़ने के बाद ही पता चली। जीवन के अलग-अलग रंगों व वास्तविक खुशियों की पहचान अब जाकर हुई। श्री आंचला ने शासन-प्रशासन का आभार मानते हुए कहा कि जीने का असली मकसद अब मिला है।
इसी तरह माओवाद पीड़ित श्री बीरसिंह मंडावी ने कहा कि ग्राम मुल्ला (चौगेल) के कैम्प में पुनर्जीवन मिला है, जहां निःशुल्क प्रशिक्षण देकर उन्हें कुशल एवं पारंगत बनाया गया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के बाद जिला प्रशासन द्वारा रोजगार भी दिया जा रहा है। प्रदेश सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर हिंसा का मार्ग छोड़ समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। ज्ञात हो कि प्रशिक्षण देकर उन्हें नियोजित करने के मामले में कांकेर बस्तर संभाग का पहला जिला बन गया है। यह शासन की विशिष्ट पहल है, जिसके चलते उन्हें अपनी प्रतिभा निखारने व तराशने तथा उसे नई दिशा देने की कवायद हो रही है। इस प्रकार शासन की सकारात्मक पहल का प्रत्यक्ष लाभ पुनर्वासितों व पीड़ितों को मिल रहा है।

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जहां कभी एक नाले पर निर्भर था पूरा गांव, वहां आज 100 नल कनेक्शन से हर घर में बह रहा स्वच्छ पानी:- जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर

रायपुर 2 अप्रैल 2026/केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन ने सुकमा जिले के नक्सल प्रभावित ग्राम सालातोंग में बदलाव की नई इबारत लिख दी है। 15 अगस्त 2019 को शुरू किए गए इस मिशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को प्रति व्यक्ति प्रतिदिन न्यूनतम 55 लीटर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है। कलेक्टर श्री अमित कुमार के मार्गदर्शन में इसी लक्ष्य को साकार करते हुए नियद नेल्लानार योजना अंतर्गत कोंटा ब्लॉक के दूरस्थ ग्राम सालातोंग में अब हर घर तक नल से स्वच्छ पानी पहुंच रहा है।

ग्राम सालातोंग, जो कोंटा से लगभग 100 किमी तथा जिला मुख्यालय सुकमा से 90 किमी दूर स्थित है, लंबे समय तक नक्सल समस्या और पेयजल संकट से जूझता रहा। गांव के लगभग 80 घरों के लोग पीने और घरेलू उपयोग के लिए एक छोटे नाले पर निर्भर थे। गर्मी के मौसम में जब महीनों तक बारिश नहीं होती थी, तब नाले का जलस्तर इतना घट जाता था कि ग्रामीणों को बेहद सीमित मात्रा में पानी निकालना पड़ता था। कई बार पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, जिससे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को विशेष परेशानी होती थी।

अब जल जीवन मिशन के माध्यम से गांव में 100 नल कनेक्शन प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित कर कार्य तेजी से किया गया, जिससे ग्रामीणों को घर बैठे शुद्ध जल उपलब्ध होने लगा है। मिशन के लागू होने के बाद गांव में न केवल जल संकट दूर हुआ, बल्कि स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से स्वास्थ्य में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। जलजनित बीमारियों में कमी आई है और ग्रामीणों की जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन हुआ है।

जल जीवन मिशन के तहत सालातोंग में जल संरक्षण और जल सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है। गांव के जल स्रोतों सोलर आधारित सिस्टम एवं हैंडपंप का नियमित रूप से जल गुणवत्ता परीक्षण किया जा रहा है। इस कार्य में “जल बहिनियाँ” भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं, जिनमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन और गांव की शिक्षित महिलाएं शामिल हैं। इन्हें जल गुणवत्ता परीक्षण का प्रशिक्षण देकर सशक्त बनाया गया है, ताकि वे स्वयं पानी की जांच कर ग्रामीणों को सुरक्षित जल उपलब्धता सुनिश्चित कर सकें।

ग्रामीणों ने इस मिशन के लिए मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब पानी के लिए भटकना नहीं पड़ता, घर में नल से पानी मिल रहा है, जिससे हमारा जीवन आसान और सुरक्षित हुआ है। जल जीवन मिशन ने सालातोंग में स्वच्छ जल पहुंचाकर यह साबित कर दिया है कि सरकार की योजनाएं जब जमीन पर उतरती हैं, तो दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी विकास की नई रोशनी पहुंचती है।

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राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की गरिमामयी उपस्थिति में सजा राष्ट्रीय एकता का भव्य मंच—‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के तहत सात राज्यों के स्थापना दिवस पर लोकभवन में गूंजी सांस्कृतिक एकता

रायपुर, 02 अप्रैल 2026 /
राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि यह अवसर इन राज्यों की समृद्ध विरासत, ऐतिहासिक परंपराओं और विकास यात्रा को स्मरण करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की पहल पर शुरू की गई एक भारत श्रेष्ठ भारत योजना का उद्देश्य विभिन्न राज्यों की भाषा, संस्कृति और परंपराओं के माध्यम से आपसी समझ और जुड़ाव को बढ़ाना है जिससे भारत की एकता और अखंडता मजबूत होती है। 

        राज्यपाल श्री रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में आज लोकभवन में 7 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों का स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय विशेष रूप से उपस्थित थे। 

         एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित इस समारोह में राज्यपाल श्री डेका ने मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, दादरा एवं नगर हवेली एवं दमन दीव, बिहार, राजस्थान और ओडिशा राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। 


        राज्यपाल ने मिजोरम और अरूणाचल प्रदेश की प्राकृतिक संुदरता और जनजातीय संस्कृति, दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन-दीव की पर्यटन एवं औद्योगिक विशेषताओं, बिहार के लोगों का अर्थव्यवस्था एवं विकास में योगदान,  ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत, राजस्थान के लोगों के व्यापारिक उन्नति और शौर्य परंपरा तथा ओडिशा के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ओडिशा और छत्तीसगढ़ में बहुत समानताएं हैं। राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है और ऐसे आयोजन राष्ट्रीय एकता को और अधिक मजबूत बनाते हैं।

         इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि एक भारत श्रेष्ठ भारत 140 करोड़ देशवासियों को जोड़ रहा है। भाषा, वेशभूषा, खान-पान में भले ही हम अलग अलग है लेकिन अनेकता में एकता हमारी देश की विशेषता हैं। एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम इसी भावना को दर्शाता है। 

           छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच रोटी बेटी के संबंध, राजस्थान के व्यापारियों का छत्तीसगढ़ के व्यापार एवं उद्योग की उन्नति में योगदान सहित अन्य राज्यों की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत हम लोग विभिन्न राज्यों में जाकर वहां की संस्कृति से परिचित हो रहे हैं।  

            समारोह में राज्यों के प्रतिनिधियों ने अपने राज्यों की विशेषताओं, परंपरा, संस्कृति पर प्रकाश डाला। समारोह में विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने सभी राज्यों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रंगारंग प्रस्तुति दी। विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों को राज्यपाल ने राजकीय गमछा और स्मृति चिन्ह भेंट किया। राज्यों के प्रतिनिधियों ने भी राज्यपाल को अपने राज्य की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। 

          कार्यक्रम में राज्यपाल के विधिक सलाहकार श्री भीष्म प्रसाद पाण्डेय के सेवानिवृत्त होने के अवसर पर राज्यपाल ने उनका सम्मान किया। इसी तरह राज्यपाल की उप सचिव सुश्री निधि साहू ने देहदान का निर्णय लिया है, जिसकी सराहना करते हुए श्री डेका ने उन्हें भी सम्मानित किया।

            कार्यक्रम में विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, अन्य जनप्रतिनिधि, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर प्रसन्ना, अन्य अधिकारी एवं इन सभी राज्यों के युवा, महिलाएं एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर  बुजुर्ग शिक्षक से 23 लाख की ठगी का बड़ा खुलासा:  पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़ कर बैंगलूरू से दबोचे दो शातिर, दुबई कनेक्शन आया सामने

 रायगढ़ 2 अप्रैल, 2026  । वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह के दिशा निर्देशन में रायगढ़ पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी के एक बड़े मामले का सफल खुलासा करते हुए अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह के दो आरोपियों को बैंगलूरू से गिरफ्तार किया है। थाना पुसौर क्षेत्र में रिटायर्ड शिक्षक से 23 लाख 28 हजार रुपये की ठगी की गई थी, जिसमें पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों के बैंक खातों में जमा 17 लाख रुपये से अधिक की राशि होल्ड कराई है और घटना में प्रयुक्त दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं। दोनों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड बाद अब पुसौर पुलिस द्वारा ज्युडिसिल रिमांड लिया गया है।

आरोपियों ने कैसे रिटायर्ड टीचर को ठगा

       घटना के अनुसार 11 नंवबर को थाना पुसौर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम जतरी में रहने वाले गरुण सिंह पटेल पिता स्व. पदुम लाल पटेल उम्र 72 वर्ष, द्वारा आवेदन देकर साइबर फ्रॉड की रिपोर्ट दर्ज कराया गया । पीड़ित ने बताया कि वह रिटायर्ड टीचर है दिनांक 10.10.2025 को तीन अलग-अलग मोबाईल नंबरों से अनजान व्यक्ति का कॉल आया जिसने गरूण पटेल को सी.बी.आई. अधिकारी होना बताकर बोला कि मुंबई में आपके नाम से खाता खोला गया है आपके खाते का जांच होगा, सहयोग किजिए और बातों को  गोपनीय रखना है नहीं तो गिरफ्तार करके लाऐंगे। आरोपियों ने डरा धमकाकर आपके खाते की राशि की जांच होगी और राशि को सी.बी.आई. अकाउन्ट बताकर गरूण पटेल को को उसके बैंक खातों की रकम उनके बैंक खातों में डालने के लिए कहा गया और यह भरोसा दिलाये कि जांच के बाद प्रमाणित कर रकम वापस कर दिया जायेगा जिनके बातों में आकर भयवश गरूण पटेल ने यूपीआई पेटीएम और आरटीजीएस के माध्यम से 25 से 29 अक्टूर 2025 के बीच 12 किस्तों में कुल 2328770.00 रूपये आरोपियों के विभिन्न खातों में डाल दिया गया । उसके बाद भी आरोपी पीड़ित को व्हाटसअप में मनी लाउनड्रींग केश में फंसाये जाने की धमकी दे रहे थे । तब 30 अक्टूबर को पीड़ित ने अपने बेटे को घटना बताया, जिसने साइबर ठगी होना बताया और फिर पुसौर थाने में आवेदन देकर घटना की रिपोर्ट दर्ज करायी गई ।

पुसौर पुलिस की जांच और आरोपियों की घेराबंदी

       मामले में पुसौर थाने में अज्ञात मोबइल नंबर के धारकों के विरूद्ध अपराध क्रमांक 304/2025 धारा 318(4)  BNS, 66(D) IT ACT  के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया । एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह के मार्गदर्शन पर पुसौर पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की। पुलिस द्वारा पीड़ित के सेन्टल बैंक से हुये ट्रांजेक्शन, संदग्धि यूपीआई आइडी, एनईएफटी, आरटीजीएस के डिटेल, आरोपियों के मोबाईल नम्बर एवं खाता नम्बर का केवायसी डिटेल निकाला गया। गहरी जांच पड़ताल के बाद आरोपियों के बैंगलूरू (कर्नाटका) में होने की जानकारी मिली । तद्उपरांत तत्काल टीआई मोहन भारद्वाज के साथ एक विशेष टीम बैंगलूरू रवाना किया गया । पुलिस टीम ने स्स्थानीय पुलिस की मदद लेकर आरोपियों का पता तलाश किया गया जिसमें पुलिस के हाथ बड़ी सफलता लगी पुलिस दो आरोपियों- विग्नेश प्रकाश और स्टीफन थॉमस को बैंगलूरू के अलग-अलग स्थानों में धर दबोचा जिनके खातों में पीड़ित रिटायर्ड टीचर के खातों से रूपये ट्रांसफर हुये थे । पुलिस ने दोनों आरोपियों को बैंगलूरू न्यायालय में पेश ट्रांजिट रिमांड लेकर रायगढ़ लाया गया । आरोपियों से विस्तृत पूछताछ की गई ।
          
कैसे करता है गैंग ऑपरेट

         पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरफ्तार आरोपी विग्नेश पी, लेबर एजेंट है, दुबई में इसकी मुलाकात फिरोज खान उर्फ डॉम्निक से हुई । आरोपी विग्नेश पी ने बताया कि फिरोज खान उर्फ डॉम्निक पहले बैंगलूरू में रहता था पिछले काफी सालों से दुबई में रह रहा है । फरोज दुबई में वीजा का काम देखता है, भारत व अन्य देशों से दुबई आने वालों के डक्युमेंट लेकर उसका गलत इस्तेमाल करता है । विग्नेश पी, फिरोज के लिए लेबर व्यवस्था कर दुबई भेजता था पर उनका असल काम साइबर फ्रॉड से जुडा है । फिरोज खान अपने अन्य साथियों के साथ पूरे देश में गिरोह डिजिटल अरेस्ट, आधार/सिम लिंकिंग, क्रिप्टो निवेश और फर्जी लोन ऐप्स के जरिए देशभर में ठगी कर रहा था। फिरोज अपने साथी विग्नेश पी और स्टीफन थॉमस जैसे लोगों को अपने गिरोह में शामिल कर ठगी के रूपये प्राप्त करता था जिसके एवज में इन्हें कमीशन मिलता था । प्रारंभिक जांच में पीड़ित गरूण पटेल द्वारा विग्नेश पी के खाते में 4 लाख 20 हजार रूपये भेजने की जानकारी मिली है । आरोपी विग्नेश पी के बैंक खाते में 17 लाख से अधिक रूपये पाया गया जिसे होल्ड कराया गया है, वहीं आरोपी स्टीफन थॉमस ने 6 लाख रूपये ठगी का आना जिसे फिरोज के बताये अनुसार दूसरे खातों में ट्रांजेक्शन करना स्वीकार किया है । आरोपी विग्नेश पी और स्टीफन थॉमस के घटना में प्रयुक्त दो मोबाईल को जप्त कर आरोपियों को धोखाधड़ी के अपराध में गिरफ्तार कर रिमांड पर भेजा गया है ।

गिरफ्तार आरोपी-
1. विग्नेश पी. पिता ए. प्रकाश उम्र 29 वर्ष निवासी 4/1 15 कॉस 4 मेन रोड सम्पन्नगिरीनगर बैगलोर साउथ विलसन गार्डन बैंगलोर कर्नाटका वर्तमान पता श्रीनिवासा कॉलोनी 33 सुदामा नगर बैगलूरू कर्नाटका 
2. स्टीफन थॉमस पिता उम्र 54 वर्ष म.नं. 24, 3 कॉस 4 मेन, थाना सुब्रमण्यम नगर, बैंगलूरू कर्नाटका

फरार आरोपी - फिरोज खान उर्फ डॉम्निक

केस का पर्दाफाश और आरोपियों की गिरफ्तारी में शामिल टीम
           एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह के दिशा निर्देशन तथा एडिशनल एसपी अनिल सोनी, सीएसपी मयंक मिश्रा, डीएसपी साइबर श्रीमती उन्नति ठाकुर के मार्गदर्शन पर अंर्तराट्रीय साइबर गिरोह का भंडाफोड में निरीक्षक मोहन भारद्वाज थाना प्रभारी पुसौर, प्रधान आरक्षक कृष्ण कुमार गुप्ता, राजेश पटेल (थाना साइबर), आरक्षक धर्नुजय चंद बेहरा की महत्वपूर्ण भूमिका रही एवं टेक्निकल सपोर्ट में थाना साइबर टीम का विशेष सहयोग रहा । 

एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह का जागरूकता संदेश-

          एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह ने आम नागरिकों से अपील करते हुए कहा है कि डिजिटल फ्रॉड जैसी कोई कार्यवाही नहीं होती। किसी भी अज्ञात कॉल, लिंक या सरकारी अधिकारी बनकर दी जा रही धमकियों से सावधान रहें, घबरायें नहीं । किसी भी परिस्थिति में अपनी बैंकिंग जानकारी साझा न करें और संदेह होने पर तुरंत पुलिस से संपर्क करें। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पुलिस, रायगढ़ पुलिस साइबर अपराधियों के खिलाफ बेहतर संसाधन, नयी तकनीकों का उपयोग कर रही है । रायगढ़ पुलिस ने प्रभावी और प्रोफेशनल तरीके से पूरे केस को सोल्व किया है, इस केस से जुड़े सभी पहलुओं पर सूक्ष्मता से जांच की जा रही है ।

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छत्तीसगढ़ ने 3-2 से अरुणाचल को हराया, पश्चिम बंगाल ने गोवा को 5-2 से रौंदा — फाइनल में टकराएंगी दो मजबूत टीमें

रायपुर, 01 अप्रैल 2026/ राजधानी रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के अंतर्गत स्वामी विवेकानंद एथलेटिक्स स्टेडियम, कोटा में खेले गए पुरुष फुटबॉल के सेमीफाइनल मुकाबलों में छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल ने शानदार जीत दर्ज करते हुए फाइनल में प्रवेश किया।

                   खेले गए एक रोमांचक सेमीफाइनल मुकाबले में छत्तीसगढ़ ने अरुणाचल प्रदेश को 3-2 से हराया। मैच की शुरुआत से ही छत्तीसगढ़ टीम ने आक्रामक खेल दिखाया और पहले हाफ की समाप्ति तक 2-0 की बढ़त बना ली। दूसरे हाफ में अरुणाचल प्रदेश ने वापसी की कोशिश की, लेकिन छत्तीसगढ़ ने बढ़त कायम रखते हुए मैच 3-2 से अपने नाम किया।
इसी प्रकार पहले खेले गए सेमीफाइनल मैच में पश्चिम बंगाल ने गोवा को 5-2 से हराकर फाइनल में अपनी जगह सुनिश्चित की।

                    इस अवसर पर केन्द्रीय युवा कार्य एवं खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खडसे ने खिलाड़ियों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर भारतीय खेल प्राधिकरण के उप महानिदेशक श्री मयंक श्रीवास्तव एवं खेल विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार, खेल विभाग के अधिकारी, आयोजन समिति के सदस्य, बड़ी संख्या में खिलाड़ी तथा अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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