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पशु कृत्रिम गर्भाधान से जन्मी प्रथम पुंगनुर मादा वत्स, जिले की ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ पशु नस्ल सुधार में एक नया कदम 

जशपुर 13 नवंबर 25/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मत्स्य पालन पशुपालन,रेशम पालन, कृषि के क्षेत्र विस्तार को निरंतर बढ़ावा दे रहे है इसका साकारात्मक परिणाम भी देखने को मिल रहा है।
जशपुर जिले ने पशुपालन क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। कृत्रिम गर्भाधान पद्धति के माध्यम से जिले को पहली बार पुंगनुर नस्ल की मादा वत्स (बछिया) प्राप्त हुई है। यह उपलब्धि जिले के पशु चिकित्सालय पत्थलगांव में पदस्थ सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी श्री के.के. पटेल के अथक प्रयासों से संभव हो सकी। श्री पटेल ने ग्राम करमीटिकरा, करूमहुआ के किसान श्री खगेश्वर यादव की देशी गाय को पुंगनुर नस्ल के सांड़ के हिमकृत वीर्य से दिनांक 29 जनवरी 2025 को गर्भित किया था। लगभग 284 दिनों के गर्भकाल के बाद गाय ने 11 नवंबर 2025 को एक स्वस्थ पुंगनुर मादा वत्स को जन्म दिया जो जिले के लिए गर्व का क्षण बन गया।
पुंगनुर गाय का मूल स्थान आंध्रप्रदेश के चित्तूर जिले का पुंगनुर क्षेत्र है। यह गाय विश्व की सबसे छोटी नस्ल के रूप में जानी जाती है। इसकी औसत ऊँचाई 70 से 90 सेंटीमीटर तथा वजन 110 से 200 किलोग्राम तक होता है। यह गाय कम चारा, कम देखभाल और कठिन परिस्थितियों में भी सहज रूप से जीवित रह सकती है।
इसका दूध भले ही 1से 2 लीटर प्रतिदिन ही हो, लेकिन इसमें A2 प्रोटीन की अधिकता होने के कारण यह अत्यंत पौष्टिक और औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है।पुंगनुर गाय का स्वभाव मृदु, स्नेहिल और मित्रवत होता है, जिससे इसे पालतू सहचर पशु के रूप में भी घरों में पाला जा सकता है।
इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर डॉ. बी.पी. भगत ने सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी श्री के.के. पटेल और किसान श्री खगेश्वर यादव को शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि न केवल पत्थलगांव बल्कि पूरे जशपुर जिले के लिए गौरव की बात है। इससे पशु नस्ल सुधार की दिशा में नए रास्ते खुलेंगे।इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र में भी पशुधन संवर्धन और उच्च नस्ल प्राप्ति संभव है।

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निमोनिया के लक्षण एवं बचाव के संबंध में स्वास्थ्य विभाग ने दी जानकारी

रायगढ़, 12 नवम्बर 2025/ कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के निर्देषन एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत के मागदर्शन में विश्व निमोनिया दिवस का जिला स्तरीय शुभारंभ शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रामभांठा में महिला आरोग्य समिति की सदस्य श्रीमती गीता सारथी द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा जागरूकता अभियान के माध्यम से 0 से 5 वर्ष के अभिभावकों को निमोनिया के कारण, लक्षण एवं उसके बचाव के संबंध में जानकारी दी गई। जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ.भानू प्रताप पटेल ने बताया कि पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों में निमोनिया मृत्यु का एक प्रमुख कारण है, जबकि यह पूर्णतः रोके जाने योग्य रोग है। बच्चों में खांसी, तेज बुखार, सांस लेने में कठिनाई, पसलियों का अंदर धँसना जैसे लक्षण निमोनिया के संकेत हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत स्वास्थ्य संस्थान में जांच व उपचार कराना आवश्यक है।
          कार्यक्रम के अंतर्गत पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की विशेष जांच शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जिसमें आवश्यकता अनुसार दवाइयाँ निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। निमोनिया से बचाव हेतु टीकाकरण सबसे प्रभावी उपाय है। ’पीसीवी  (Pneumococcal Conjugate Vaccine)  की तीन खुराकें 6 सप्ताह, 14 सप्ताह और 9 माह की उम्र पर- शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क उपलब्ध हैं। सांस अभियान के अंतर्गत स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को निमोनिया की पहचान एवं बचाव संबंधी जानकारी दी जा रही है।
            जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री रंजना पैंकरा, नोडल अधिकारी डॉ केनन डेनियल, डॉ. सुमित कुमार शैलेन्द्र मंडल, डॉ. सोनाली मेश्राम की टीम के द्वारा संपूर्ण कार्यक्रम के प्रबंधन में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष रूप से ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में अभियान चलाया जा रहा है सांस अभियान के जरिये स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य न केवल बीमारी पर नियंत्रण बल्कि अभिभवकों को जागरूक कर हर बच्चे को स्वस्थ बचपन की ओर अग्रसर करना है ताकि हर माता-पिता अपने बच्चे के स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें और निमोनिया से एक भी मृत्यु न हो।
*निमोनिया के कारण एवं लक्षण*
निमोनिया फेफड़ों में संक्रमण के कारण होता है। इसके प्रमुख लक्षण हैं - खांसी-जुकाम, तेज बुखार, सांस फूलना, पसलियों का धँसना, बच्चे का खाना या दूध न पीना, सुस्ती या अत्यधिक नींद आना आदि। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सीय जांच आवश्यक है।
*बचाव के उपाय*
निमोनिया से बचाव के लिए घर में स्वच्छ व हवादार वातावरण रखें। रसोई व कमरों में धुआँ न हो, बच्चों को ठंड से बचाएँ, समय पर टीकाकरण कराएँ, स्तनपान करवाएँ तथा पौष्टिक आहार दें। बच्चे के जन्म के पहले घंटे में स्तनपान प्रारंभ कराना अत्यंत लाभदायक है।

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एसआईआर अंतर्गत गणना पत्रक वितरण कार्य पूर्णता की ओर,बीएलओ को दिया गया ऑफलाइन एवं ऑनलाइन प्रशिक्षण

रायगढ़, 13 नवम्बर 2025/ भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार रायगढ़ जिले में निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)कार्य का शुभारंभ 4 नवम्बर से किया गया है। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री मयंक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में यह कार्य जिले भर में सुव्यवस्थित ढंग से संचालित किया जा रहा है।
          अपर कलेक्टर एवं उप जिला निर्वाचन अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि निर्वाचक नामावली का विषेष गहन पुनरीक्षण कार्य अन्तर्गत गणना पत्रक वितरण कार्य पूर्ण होने के पश्चात् बूथ लेवल ऑफिसर द्वारा एकीकरण का कार्य किया जाना है, जिसमें घर-घर जाकर वितरण किए गए गणना पत्रक में की गई प्रविष्टि की पूर्ण जॉंच कर रंगीन फोटो सहित एक प्रति वापस लिया जाएगा तथा दूसरी प्रति में बूथ लेवल ऑफिसर द्वारा मतदाता को पावती दी जाएगी। इसी क्रम में आज तहसील तमनार, रायगढ़ एवं नगर निगम रायगढ़ के बूथ लेवल ऑफिसर एवं बीएलओ सुपरवाईजर को ऑफलाईन एवं ऑनलाईन प्रषिक्षित किया गया तथा सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, लैलूंगा श्री भरत कौषिक द्वारा तहसील तमनार में बीएलओ एप का प्रषिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम निर्वाचक नामावली के सटीक एवं पारदर्शी पुनरीक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रत्येक पात्र मतदाता का नाम सूची में जुड़ सके, इसके लिए बीएलओ को सतर्कता और निष्ठा से कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।

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जिला स्तरीय समन्वयक एवं एमआईएस सहायक के रिक्त पदों पर अंतिम मेरिट सूची जारी

रायगढ़, 13 नवम्बर 2025/ धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष योजना के तहत वन अधिकार अधिनियम 2006 का क्रियान्वयन अंतर्गत वन अधिकार प्रकोष्ठ में मानव संसाधन की नियुक्ति हेतु रायगढ़ जिला अंतर्गत जिला स्तरीय समन्वयक (समन्वयक-वन अधिकार अधिनियम) एवं एमआईएस सहायक (सहायक-वन अधिकार अधिनियम)की नियुक्ति हेतु आवेदन पत्र मंगाए गए थे। जिसके उपरांत 10 नवम्बर तक दावा-आपत्ति मंगाए गए थे। जिसमें कुल 6 आवेदकों द्वारा आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया। जिसका निराकरण कर अंतिम मेरिट सूची जिले के वेबसाईट www.raigarh.gov.in में प्रकाशित किया गया है।

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जिले की 1 लाख 25 हजार से अधिक दीदियों ने सुनी “दीदी के गोठ”

रायगढ़, 13 नवम्बर 2025/ छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों और महिलाओं की सफलता की कहानियों को साझा करने के उद्देश्य से “दीदी के गोठ” रेडियो कार्यक्रम का चौथा एपिसोड आज दोपहर 2 बजे से आकाशवाणी के सभी केन्द्रों से प्रसारित किया गया। राज्य के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं उप मुख्यमंत्री सह पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा की प्रेरक पहल पर प्रारंभ यह राज्य स्तरीय रेडियो कार्यक्रम ‘दीदी के गोठ’ बिहान से जुड़ी स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त करने का प्रभावी माध्यम बन गया है।
         कार्यक्रम के दौरान विभिन्न स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने अपनी प्रेरणादायी सफलता की कहानियां साझा कीं, जो अन्य समूहों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होंगी। इन कहानियों के माध्यम से बिहान से जुड़ी महिलाओं के नवाचार, आजीविका संवर्धन के प्रयास और उपलब्धियों की जानकारी पूरे प्रदेश में पहुंचाई गई। सीईओ जिला पंचायत श्री अभिजीत बबन पठारे के मार्गदर्शन में रायगढ़ जिले में “दीदी के गोठ” कार्यक्रम का प्रसारण सभी 7 ब्लाक के 28 संकुल स्तरों पर किया गया। इस दौरान समूहों की महिलाएं एकत्र होकर कार्यक्रम को सुनीं और उससे प्रेरणा प्राप्त की। जिले की लगभग 1 लाख 25 हजार से अधिक दीदियों ने 12,500 स्व-सहायता समूहों एवं 730 ग्राम संगठनों के सहयोग से इस कार्यक्रम को जिले के कोने-कोने तक पहुंचाया। ‘दीदी के गोठ’ न केवल स्व-सहायता समूहों की महिलाओं के कार्यों को मंच प्रदान कर रहा है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता, नेतृत्व और सामाजिक सहभागिता की दिशा में नई ऊर्जा दे रहा है। यह पहल ग्रामीण महिलाओं की सशक्त आवाज बनकर उभर रही है, जो छत्तीसगढ़ के समग्र विकास की कहानी में एक नया अध्याय जोड़ रही है।

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वित्त मंत्री श्री ओ.पी.चौधरी ने कहा- मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में “विकसित छत्तीसगढ़” का सपना साकार हो रहा है,सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और खेल के क्षेत्र में की कई महत्वपूर्ण घोषणाएं

रायगढ़, 13 नवम्बर 2025/ प्रदेश के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत विजन 2047” के संकल्प को साकार करने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार “विकसित छत्तीसगढ़” के विजन पर पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और विकास का नया अध्याय लिखा जा रहा है। 
          वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल शहरों तक सीमित नहीं, बल्कि गांव, कस्बों और सुदूर वनांचल क्षेत्रों तक विकास की रोशनी पहुंचाने की है। उन्होंने कहा कि “विकसित भारत का अर्थ तभी सार्थक होगा जब हर गांव समृद्ध, हर किसान आत्मनिर्भर और हर युवा सशक्त बने। इसी लक्ष्य के साथ छत्तीसगढ़ सरकार सुशासन और जनसेवा के पथ पर निरंतर अग्रसर है।
          प्रदेश के वित्त मंत्री श्री चौधरी बुधवार को रायगढ जिले के एक दिवसीय प्रवास पर थे। रायगढ़ जिले के एक दिवसीय प्रवास के दौरान वित्त मंत्री श्री चौधरी ने रायगढ सांसद श्री राधेश्याम राठिया, राज्य सभा सांसद श्री देवेंद्र प्रताप सिंह के विशेष मांग एवं क्षेत्र के जन भावनाओ को ध्यान में रखते हुए घरघोड़ा, देवगढ़ और तमनार क्षेत्रों में अनेक जनकल्याणकारी घोषणाएं कीं। घरघोड़ा क्षेत्र में उन्होंने अमलीडीह से डोकरमुड़ा तथा जिवरापानी से कुरुंजखोल तक सड़क निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा किए जाने की घोषणा की। साथ ही घरघोड़ा अस्पताल में डायलिसिस यूनिट, बर्न यूनिट और नई एम्बुलेंस की व्यवस्था किए जाने की बात कही, जिससे ग्रामीणों को अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं स्थानीय स्तर पर मिल सकेंगी।
          तमनार क्षेत्र के विकास को गति देने के लिए वित्त मंत्री श्री चौधरी ने पालीघाट से जोबारो, बरकसपाली से रेंगालपाली, कांटाझरिया से देवगांव तथा कूडूमकेला से पूरी तक पक्की सड़कों के निर्माण की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इन सड़कों के बन जाने से ग्रामीण अंचल के संपर्क मार्ग मजबूत होंगे और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी। तमनार के हाईस्कूल मैदान को आदर्श स्टेडियम के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे युवाओं को खेलकूद की बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र तमनार में एडवांस लाइफ सिस्टम एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी और विद्यार्थियों की मांग पर महाविद्यालय परिसर में बाउंड्रीवाल तथा स्नातकोत्तर कक्षाओं के लिए नए भवन का निर्माण किया जाएगा। देवगढ़ क्षेत्र में वित्त मंत्री ने डागडही से छटोरिया मार्ग पर पुल निर्माण की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह पुल क्षेत्र के विकास की धुरी बनेगा और गांवों के बीच संपर्क एवं व्यापार को सुदृढ़ करेगा।
           अपने प्रवास के दौरान वित्त मंत्री श्री चौधरी ने घरघोड़ा से तमनार तक लगभग 12 किलोमीटर लंबे “यूनिटी मार्च” में भी भाग लिया। यह मार्च भारत रत्न लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया था। वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि “सरदार पटेल जी की एकता की भावना ही विकसित भारत की आधारशिला है। जब देश एकजुट होगा, तभी विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ का लक्ष्य पूर्ण होगा।  इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, किसान, महिलाएं और बड़ी संख्या में युवाओं ने सहभागिता की। पूरे मार्ग में ग्रामीणों ने वित्त मंत्री और पदयात्रियों का अभूतपूर्व स्वागत और अभिनंदन किया गया।

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देश के 5 चमत्कारिक गणेश मंदिर, एक राजस्थान में भी है स्थित

नारायणपुर : 13 नवम्बर 2025 : भगवान गणेश हिन्दू धर्म के लोकप्रिय देवताओं में से एक हैं। कोई शुभ कार्य इनकी पूजा के बगैर नहीं होता। भगवान गणेश को गणपति एवं विनायक आदि नामों से भी जाना जाता है। भगवान गणेश, भगवान शिव एवं देवी पार्वती के पुत्र तथा भगवान कार्तिकेय के भाई हैं। भगवान गणेश को साक्षात बुद्धि का स्वरुप माना जाता है। देश में भगवान गणेश के चमत्कारिक मंदिर भी हैं। आइए जानते हैं उन Famous Ganesh Temple के बारे में।  

गणेश टेंपल (Ganesh Temple)
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, हर माह में दो चतुर्थी पड़ती है। इसमें शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है। शिव पुराण के अनुसार भगवान गणेश के दो पुत्र हैं। इनका नाम शुभ और लाभ है। शुभ व लाभ दोनों शुभता एंव आर्थिक लाभ के प्रतीक हैं। शुभ देवी रिद्धि के पुत्र हैं तथा लाभ देवी सिद्धि के पुत्र हैं।

मुद्गल पुराण के अनुसार, गणेश के आठ प्रमुख एंव महत्वपूर्ण अवतार हैं, जो कि अष्टविनायक के रूप में लोकप्रिय हैं। भगवान गणेश के अन्य 32 भिन्न-भिन्न रूप भी है जिनकी पूजा अर्चना की जाती है।  ऐसा भी कहा जाता है कि भगवान गणेश के वैवाहिक जीवन के सन्दर्भ में विद्वानों के भिन्न-भिन्न मत हैं। एक मत के अनुसार गणेश जी अविवाहित एवं ब्रम्हाचारी भी हैं। मुद्गल पुराण एवं शिव पुराण के अनुसार भगवान गणेश के वैवाहिक जीवन की प्रमाणिकता को आधार माना जाता है। कहा जाता है कि गणेश जी के देश में कई चमत्कारिक टेंपल भी है जिनके दर्शन से धर्म का लाभ मिलता है। तो आइए जानते हैं इन चमत्कारिक टेंपल के बारे में ... 

चमत्कारिक गणेश टेंपल (Miraculous Ganesh Temple)
1. सिद्धिविनायक मंदिर (Siddhi Vinayak Mandir)
यह मंदिर मुंबई में स्थित है। सिद्धिविनायक गणेश जी का लोकप्रिय रूप भी है। ऐसा कहा जाता है कि जिन प्रतिमाओं की सूड़ दाई तरह मुड़ी होती है, वे मूर्तियां सिद्धपीठ से जुड़ी होती हैं। कहा जाता है कि सिद्धि विनायक मंदिर की महिमा अपरंपार है।सिद्धिविनायक गणेश जी भक्तों की मनोकामना को तुरंत पूरा कर देते हैं। मान्यता है कि ऐसे गणेश जी बहुत जल्दी प्रसन्न भी होते हैं। 

2 दगडूशेठ हलवाई गणपती मंदिर (Dagdusheth Halwai Ganpati Temple) 
यह मांदिर पुणे में स्थित है। इस मंदिर की इतनी मान्यता है कि हर साल इस मंदिर में लाखो करोड़ों की संख्या में भक्त आते हैं। इस मंदिर में एक भावुक कर देने वाली भी कहानी जुड़ी है। ऐसा कहा जाता है कि कई साल पहले अपना इकलौता बेटा प्लेग में खोने के बाद श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई और उनकी पत्नी लक्ष्मीबाई ने इस गणेश मूर्ति की स्थापना की थी, जो अब भक्तों के लाड़ले भक्त बन चुके हैं।  

3. चिंतामण गणेश मंदिर (Chintaman Ganesh Temple)
यह मंदिर मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित सबसे बड़ा मंदिर है।  ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर में स्थापित गणेश प्रतिमा स्वयं प्रकट मानी जाती है। इस मंदिर में सभी भक्त अपनी चिंताओं को दूर करने के लिए आते है। विघ्नेश्वर, दुःख के मध्यस्थ के रूप में भी जाने वाले गणेश हमेशा हिंदू देवताओं में सबसे पहले पूजे जाते हैं, ताकि वे भक्तों के मार्ग में बाधा न डालें। 

4. उच्ची पिल्लयार मंदिर (Ucchi Pillayar Temple)
यह मंदिर 7 वी शताब्दी में बना एक हिंदू मंदिर है। जो भगवान गणेश को समर्पित है। यह मंदिर भारत के तमिलनाडू के त्रिची में रॉक फोर्ट के शीर्ष पर स्थित है।  इस मंदिर के बारे में सबसे प्रसिद्ध बात यह है कि इस मंदिर की स्थापना का कारण रावण का धर्मनिष्ठ भाई विभीषण को माना जाता है। इस मंदिर पर पहुचने के लिए 400 सीढ़ियों की चढ़ाई करनी पड़ती है

5. मोती डूंगरी गणेश मंदिर (Moti Dungri Ganesh Temple)
Ganesh Temple Jaipur: मोतीडूंगरी की तलहटी में भगवान गणेश का ये मंदिर आस्था और चमत्कार का केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि यहां स्थापित भगवान गणेश कि प्रतिमा जयपुर नरेश माधोसिंह प्रथम की पटरानी के पीहर मावली से सन् 1761 में लाई गई थी। उस समय यह प्रतिमा 500 वर्ष पुरानी थी। उस समय नगर सेठ पल्लीवाल ये मूर्ति लेकर आए थे और उन्हीं की देख-रेख में मोती डूंगरी की तलहटी में इस मंदिर को बनवाया गया था। विनायक के मंदिर में लोग अपनी नई गाड़ी की पूजा कराना बेहद शुभ मानते है और बुधवार के दिन यहां का नजारा कुछ अलग ही रहता है ऐसा माना जाता है कि मोती डूंगरी में पूजा कराने से क दुर्घटना नहीं होती है।

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