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प्रदेश को मिले 8 नए साइबर पुलिस थाने, रायगढ़ को भी बड़ी सौगात,मुख्यमंत्री ने किया वर्चुअल उद्घाटन, साइबर अपराधों पर होगी प्रभावी नियंत्रण

रायगढ़, 28 जनवरी 2026/ साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण और आम नागरिकों को त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज पुलिस मुख्यालय नया रायपुर से प्रदेश के 8 नवीन साइबर पुलिस थानों का वर्चुअल उद्घाटन किया, जिसमें रायगढ़ जिला भी शामिल है। पुलिस मुख्यालय नया रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, मुख्य सचिव श्री विकास शील, एसीएस (होम) श्री मनोज पिंगुआ तथा पुलिस महानिदेषक श्री अरूण सिंह गौतम सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
           रायगढ़ जिला मुख्यालय में आयोजित स्थानीय कार्यक्रम में महापौर श्री जीवर्धन चौहान ने कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह एवं जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में रिबन काटकर साइबर थाने का औपचारिक उद्घाटन किया। इसके पश्चात वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा रोजनामचा दर्ज कर साइबर थाना संचालन का विधिवत शुभारंभ किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जिले में पूर्व से संचालित साइबर सेल का उन्नयन कर साइबर थाना स्थापित किया गया है। थाना प्रभारी निरीक्षक श्री नासिर खान की नियुक्ति के साथ 16 प्रशिक्षित स्टाफ पदस्थ किए गए हैं। आवश्यकता के अनुसार भविष्य में अधिकारियों एवं कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाएगी। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन ठगी, साइबर फ्रॉड एवं डिजिटल अपराध वर्तमान समय की गंभीर चुनौती हैं, ऐसे में साइबर थाना स्थापित होने से अपराधों की विवेचना में तेजी आएगी तथा पीड़ितों को शीघ्र राहत एवं न्याय मिल सकेगा। 
             कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों द्वारा साइबर फ्रॉड से जुड़े अनुभव साझा किए गए तथा नागरिकों को सतर्क रहने, डिजिटल लेन-देन में सावधानी बरतने एवं साइबर जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम में सभापति नगर निगम श्री डिग्री लाल साहू, पूर्व विधायक श्री विजय अग्रवाल, पार्षद श्रीमती पूनम सोलंकी, श्री सुरेश गोयल, श्री सुभाष पांडे, श्री पवन शर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अनिल सोनी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (साइबर सेल) श्री अनिल विश्वकर्मा, नगर पुलिस अधीक्षक श्री मयंक मिश्रा, डीएसपी श्री सुशांतो बनर्जी, श्री उत्तम प्रताप सिंह, श्रीमती साधना सिंह, साइबर थाना के समस्त स्टाफ एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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लैलूंगा सीएचसी बना एनक्यूएएस प्रमाणित पहला स्वास्थ्य संस्थान,टीमवर्क और मजबूत नेतृत्व से संभव हुई उपलब्धि, मरीजों को मिलेगा सीधा लाभ

रायगढ़, 28 जनवरी 2026/ राज्य शासन के दिशा-निर्देशानुसार कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के नेतृत्व एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल जगत के मार्गदर्शन में रायगढ़ जिले के लैलूंगा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ने नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (एनक्यूएएस) प्रमाणन प्राप्त कर जिले का पहला संस्थान बनने का गौरव हासिल किया है। यह उपलब्धि केवल लैलूंगा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरे रायगढ़ जिले के लिए गर्व, विश्वास और उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं का प्रतीक बनकर सामने आई है।
            डीपीएम सुश्री रंजना पैंकरा, जिला स्तरीय स्वास्थ्य टीम तथा लैलूंगा बीएमओ डॉ. धरम साय पैंकरा के निरंतर प्रयासों और समर्पण ने इस लक्ष्य को साकार करने में अहम भूमिका निभाई। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा लागू एनक्यूएएस एक राष्ट्रीय गुणवत्ता ढांचा है, जिसका उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में दी जा रही सेवाओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना है। इसके अंतर्गत संक्रमण नियंत्रण, मरीजों की सुरक्षा, नैदानिक सेवाओं की गुणवत्ता, दवा प्रबंधन, स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन और मरीज संतुष्टि जैसे अनेक बिंदुओं पर सख्त मूल्यांकन किया जाता है।
          इस बड़ी सफलता के पीछे मजबूत नेतृत्व, स्पष्ट मार्गदर्शन और उत्कृष्ट टीमवर्क की अहम भूमिका रही। लैलूंगा चिकित्सा विभाग के वरिष्ठ सलाहकार एवं मार्गदर्शक डॉ.एस.एन. उपाध्याय के मार्गदर्शन में अस्पताल की कार्यप्रणाली को एनक्यूएएस मानकों के अनुरूप ढाला गया। इस दौरान बीपीएम अश्वनी कुमार साय सहित अस्पताल के सभी डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मियों, सफाई कर्मियों और प्रशासनिक कर्मचारियों ने कंधे से कंधा मिलाकर कार्य किया। महीनों की सतत मेहनत के बाद लैलूंगा सीएचसी में सुव्यवस्थित पंजीयन प्रणाली, स्वच्छ वार्ड व शौचालय, संक्रमण नियंत्रण के लिए एसओपी का सख्त पालन, दवाओं व उपकरणों का वैज्ञानिक प्रबंधन, प्रसव कक्ष, ओपीडी और आपातकालीन सेवाओं का उन्नयन किया गया। इसके पश्चात राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र के मूल्यांकनकर्ताओं ने गहन निरीक्षण कर सभी मानकों पर संतुष्टि व्यक्त करते हुए एनक्यूएएस प्रमाणन प्रदान किया।
         इस प्रमाणन का सबसे बड़ा लाभ आम नागरिकों को मिलेगा। अब लैलूंगा एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बेहतर, सुरक्षित और भरोसेमंद इलाज, स्वच्छ वातावरण, समयबद्ध जांच एवं मरीज-केंद्रित सेवाएं स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध होंगी, जिससे जिला अस्पताल या निजी संस्थानों पर निर्भरता कम होगी। लैलूंगा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की यह सफलता रायगढ़ जिले के अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है। यह प्रमाण है कि सही नेतृत्व, ईमानदार प्रयास और टीम भावना से सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं भी गुणवत्ता और भरोसे की पहचान बन सकती हैं। एनक्यूएएस प्रमाणन केवल एक प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि यह जनता के विश्वास और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूती का सशक्त प्रमाण है।

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पेंशनरों को बड़ी राहत: रायगढ़ में पेंशन निराकरण एवं वेतन निर्धारण शिविर, 63 प्रकरणों का त्वरित समाधान


रायगढ़, 28 जनवरी 2026। कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में संयुक्त संचालक कोष लेखा एवं पेंशन कार्यालय तथा जिला प्रशासन रायगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में कलेक्ट्रेट स्थित सृजन सभा कक्ष में पेंशन निराकरण एवं वेतन निर्धारण संबंधी शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य विभिन्न विभागों के लंबित पेंशन प्रकरणों एवं कर्मचारियों के वेतन निर्धारण से जुड़े मामलों का शीघ्र, सरल एवं नियमानुसार निराकरण करना था।
शिविर में संयुक्त संचालक कोष लेखा एवं पेंशन कार्यालय से श्री सिद्धार्थ गौराहा, श्रीमती सरिता दुबे एवं श्री अरिमर्दन मिश्रा द्वारा विभिन्न विभागों से प्राप्त लंबित पेंशन एवं वेतन निर्धारण प्रकरणों की गहन समीक्षा कर समाधान किया गया। इस दौरान कुल 72 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 63 प्रकरणों का मौके पर ही त्वरित निराकरण किया गया, जिससे पेंशनरों एवं कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली।
कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के निर्देशानुसार जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर इस प्रकार के समाधान शिविरों का आयोजन किया जा रहा है, ताकि पेंशनरों को समय पर पेंशन भुगतान सुनिश्चित किया जा सके तथा कर्मचारियों के वेतन निर्धारण से संबंधित लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण हो सके। इस पहल से हितग्राहियों को कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर लगाने से भी राहत मिल रही है।
शिविर में जिला कोषालय अधिकारी श्री चंद्रपाल सिंह ठाकुर, सहायक कोषालय अधिकारी श्री पुष्पेंद्र चंद्रा एवं श्री राजीव बरेठ की भी उपस्थिति रही। अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में भी कलेक्टर के मार्गदर्शन में इस प्रकार के शिविर आयोजित कर लंबित प्रकरणों का त्वरित एवं प्रभावी निराकरण किया जाएगा।

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रायगढ़ - किसानों को मिली बड़ी राहत, मांग के अनुरूप जिले के 53, 9 और 31 उपार्जन केन्द्रों में दैनिक खरीदी की लिमिट बढ़ाई गई

रायगढ़, 28 जनवरी 2026/ खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत रायगढ़ जिले में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन का कार्य कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन एवं सतत निगरानी में सुचारू रूप से जारी है। जिले में कुल 83 हजार 641 पंजीकृत किसानों के विरुद्ध अब तक 70 हजार 544 किसानों द्वारा धान विक्रय किया जा चुका है, जिससे उपार्जन प्रक्रिया की गति और पारदर्शिता स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रही है। जिले में किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए धान विक्रय हेतु प्राप्त आवेदनों के अनुसार समय-समय पर उपार्जन केंद्रों की दैनिक खरीदी सीमा में वृद्धि की गई है। इसके तहत 53 उपार्जन केंद्रों, 9 उपार्जन केंद्रों एवं 31 धान उपार्जन केंद्रों की दैनिक खरीदी लिमिट बढ़ाई गई है, जिससे किसानों को समय पर टोकन और त्वरित धान विक्रय की सुविधा मिल रही है। 
           जिले में धान के अवैध परिवहन एवं कोचिया-बिचौलियों पर प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। सर्वाधिक 193 प्रकरण दर्ज, राज्य में 1 लाख 36 हजार 545.20 क्विंटल धान जब्त तथा 38 परिवहन वाहनों की जब्ती की गई है। साथ ही 225 कोचिया-बिचौलियों के विरुद्ध प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई है, जो प्रशासन की सख्ती और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वहीं, 5 हजार 449 किसानों द्वारा मैनुअल टोकन जारी करने के लिए प्राप्त आवेदनों में से 5 हजार 12 किसानों का भौतिक सत्यापन पूर्ण कर टोकन जारी कर धान क्रय किया जा रहा है। शेष 437 आवेदनों का सत्यापन कार्य सतत रूप से जारी है, जिनका धान क्रय आगामी तिथियों में सुनिश्चित किया जाएगा।
         कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के निर्देशन में जिले में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और किसान-हितैषी बनाई गई है। किसानों की समस्याओं का तत्काल निराकरण करते हुए सभी पंजीकृत कृषकों का धान समितियों के माध्यम से सफलतापूर्वक क्रय किया जा रहा है।

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पाँच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग को लेकर बैंककर्मियों की एकदिवसीय हड़ताल, जशपुर जिलेभर में स्टेट बैंक सहित राष्ट्रीयकृत व निजी बैंकों का कामकाज रहा ठप, उपभोक्ताओं को हुई भारी परेशानी

 

जशपुरनगर 27 जनवरी 2026 : 
5-दिवसीय बैंकिंग सप्ताह सहित अन्य लंबित एवं न्यायोचित मांगों के समर्थन में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) के आह्वान पर मंगलवार, 27 जनवरी को जशपुर जिलेभर के बैंककर्मी एकदिवसीय हड़ताल पर रहे। हड़ताल के कारण जिले की स्टेट बैंक ऑफ इंडिया सहित सभी राष्ट्रीयकृत एवं निजी बैंकों का कामकाज पूरी तरह अथवा आंशिक रूप से प्रभावित रहा। बैंक बंद रहने से उपभोक्ताओं को नकद निकासी, जमा, चेक क्लीयरेंस एवं अन्य बैंकिंग कार्यों में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

हड़ताल पर बैठे बैंककर्मियों ने बताया कि बैंकिंग क्षेत्र में लगातार बढ़ते कार्यदबाव, स्टाफ की कमी तथा अतिरिक्त दायित्वों के कारण कर्मचारियों का कार्य–जीवन संतुलन लगातार बिगड़ता जा रहा है। इसका सीधा असर कर्मचारियों के शारीरिक, मानसिक एवं पारिवारिक जीवन पर पड़ रहा है। बैंककर्मियों का कहना है कि 5-दिवसीय बैंकिंग सप्ताह कोई विलासिता नहीं, बल्कि एक स्वस्थ कार्य वातावरण, गरिमापूर्ण सेवा व्यवस्था तथा ग्राहकों को बेहतर सेवाएं देने के लिए आवश्यक है।

हड़ताल के दौरान जिले की विभिन्न बैंक शाखाओं के समक्ष बैंककर्मियों ने एकजुट होकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। इस दौरान यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि यह आंदोलन केवल कर्मचारियों के हितों से जुड़ा नहीं है, बल्कि भविष्य में एक सुरक्षित, संतुलित और प्रभावी बैंकिंग व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।

यूनियन ने चेतावनी दी कि यदि बैंककर्मियों की मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। वहीं, हड़ताल के कारण जिलेभर में बैंकिंग सेवाएं बाधित रहने से आम नागरिकों, व्यापारियों एवं ग्रामीण उपभोक्ताओं को वैकल्पिक व्यवस्था के लिए भटकना पड़ा।

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सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया गणतंत्र दिवस समारोह,जिला स्तरीय परेड प्रतियोगिता में विद्यालय को द्वितीय स्थान

जशपुरनगर 27 जनवरी 2026


सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, जशपुर में 76वां गणतंत्र दिवस समारोह देशभक्ति, अनुशासन और उत्साह के वातावरण में गरिमामय रूप से संपन्न हुआ। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनी भगत रहीं। इस अवसर पर विद्यालय समिति के अध्यक्ष जनार्दन प्रसाद सिन्हा, व्यवस्थापक रामनिवास अग्रवाल, सह-व्यवस्थापक देव मोहन प्रसाद सिंह, कोषाध्यक्ष प्रदीप जैन, विशिष्ट अतिथि विद्याधर सिंह एवं समिति सदस्य गोपाल प्रसाद सोनी की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से ध्वजारोहण किया गया।

ध्वजारोहण पश्चात विद्यालय के भैया-बहनों ने हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत एवं छत्तीसगढ़ी भाषाओं में अपने विचार व्यक्त कर भारतीय संविधान, राष्ट्र की एकता-अखंडता एवं नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। विद्यार्थियों की प्रभावशाली प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की।

इसके पश्चात विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। देशभक्ति गीतों, नृत्य एवं नाट्य प्रस्तुतियों को दर्शकों से खूब सराहना मिली।

विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने रणजीता स्टेडियम में आयोजित जिला स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह में भी भाग लेते हुए अनुशासित एवं आकर्षक परेड का प्रदर्शन किया। जूनियर ग्रुप की परेड प्रतियोगिता में सरस्वती शिशु मंदिर को द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ, जिससे विद्यालय परिवार में हर्ष एवं गौरव का वातावरण निर्मित हुआ। इस उपलब्धि पर विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।

मुख्य अतिथि श्रीमती रायमुनी भगत ने विद्यार्थियों के अनुशासन, देशभक्ति एवं प्रतिभा की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से बच्चों में राष्ट्रप्रेम की भावना प्रबल होती है। उन्होंने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए विद्यालय परिवार को इस सफलता के लिए बधाई दी।

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उल्लास मेला का हुआ आयोजन : निरक्षरों को योजना से जोड़ने घर-घर किया गया सर्वे, मार्च में होगी मूल्यांकन परीक्षा

रायगढ़, 27 जनवरी 2026/ नई शिक्षा नीति 2020 के तहत संचालित उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन जिले में कलेक्टर एवं अध्यक्ष जिला साक्षरता मिशन प्राधिकरण, रायगढ़ श्री मयंक चतुर्वेदी के कुशल मार्गदर्शन में किया जा रहा है। राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण, रायपुर के निर्देशानुसार 26 जनवरी को जिले के प्रत्येक ग्राम एवं शहरी वार्ड में उल्लास मेले का आयोजन किया गया।
             उल्लास मेले का मुख्य उद्देश्य योजना से लाभान्वित नवसाक्षरों एवं वर्तमान में अध्ययनरत शिक्षार्थियों को अपनी प्रतिभा, कौशल और आत्मविश्वास को विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करना था। इस अवसर पर प्रत्येक गांव और वार्ड में विविध गतिविधियों के स्टॉल लगाए गए, जिनका संचालन स्वयं नवसाक्षरों एवं शिक्षार्थियों द्वारा किया गया। गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित इस मेले में ग्रामीणों एवं नागरिकों ने बड़े उत्साह के साथ सहभागिता की।
             उल्लास मेले के आयोजन के साथ-साथ जिले के सभी ग्रामों और वार्डों में घर-घर जाकर सर्वेक्षण कार्य भी किया गया, ताकि शेष बचे निरक्षरों को चिन्हित कर उन्हें उल्लास योजना से जोड़ा जा सके। इस संबंध में जिला, विकासखंड एवं संकुल स्तर पर पूर्व में प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया था। शासन की मंशा वर्तमान सत्र 2025-26 में पूरे राज्य को साक्षर घोषित करने की है। इसी क्रम में जिले के समस्त विकासखंडों में सर्वे कर चिन्हित असाक्षरों को उल्लास केंद्रों में अध्यापन कराया जा रहा है, ताकि वे आगामी मार्च 2026 में आयोजित बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान मूल्यांकन परीक्षा में सम्मिलित हो सकें।

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गणतंत्र दिवस समारोह में जिला पंचायत रायगढ़ की झांकी ने दर्शाया ग्रामीण विकास का सशक्त मॉडल,लखपति दीदी योजना एवं आदर्श ग्रामसभा मॉडल बने झांकी के मुख्य आकर्षण

रायगढ़, 27 जनवरी 2026/ 77वें गणतंत्र दिवस के गरिमामयी अवसर पर जिला मुख्यालय में आयोजित मुख्य समारोह में जिला पंचायत रायगढ़ द्वारा प्रस्तुत विकासपरक झांकी को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि कृषि मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री रामविचार नेताम ने जिला पंचायत की टीम को शील्ड एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शिखा रविन्द्र गबेल, सीईओ जिला पंचायत श्री अभिजीत बबन पठारे सहित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। 
            निर्णायक मंडल ने झांकी को कलात्मक उत्कृष्टता, विषय की स्पष्टता और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी प्रदर्शन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना। झांकी ने ग्रामीण विकास की संकल्पना को जीवंत रूप में प्रस्तुत करते हुए आम नागरिकों को गहराई से प्रभावित किया। झांकी का मुख्य आकर्षण ‘लखपति दीदी’ का अष्टभुजी मॉडल रहा, जिसमें यह प्रदर्शित किया गया कि किस प्रकार स्व-सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं आजीविका संवर्धन के माध्यम से वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक अर्जित कर रही हैं। यह मॉडल महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक प्रभावी पहल के रूप में सराहा गया।
           झांकी के केंद्र में वीबी जी राम जी के अंतर्गत संचालित आदर्श ग्राम सभा का दृश्य प्रस्तुत किया गया, जिसमें ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी को दर्शाया गया। इसके साथ ही आदर्श आंगनबाड़ी केंद्र, अटल डिजिटल केंद्र, सामुदायिक भवन, उचित मूल्य दुकान एवं मल्टी एक्टिविटी सेंटर के माध्यम से सरकारी योजनाओं से गांवों में आ रहे सकारात्मक बदलावों को रेखांकित किया गया। जल जीवन मिशन के अंतर्गत हर घर नल, 350 किलोलीटर क्षमता की विशाल पानी टंकी, कृषि एवं जल संरक्षण के लिए निर्मित डबरी, कुआं और बाड़ी विकास को कलात्मक रूप में दर्शाया गया। विशेष रूप से ‘आजीविका डबरी’ को जल संरक्षण, सिंचाई, मत्स्य पालन एवं स्वरोजगार के संगम के रूप में प्रस्तुत किया गया, जो ग्रामीणों की आय वृद्धि का सशक्त माध्यम बन रही है।
           झांकी में कृषि सखी, पशु सखी, बैंक सखी, बिहान की दीदियों की समन्वित भूमिका को भी प्रभावी ढंग से दर्शाया गया, जो मिलकर एक आदर्श गांव के सर्वांगीण विकास हेतु आवश्यक ज्ञान, संसाधन और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती हैं। झांकी में लगाया गया क्यू आर कोड दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा, जिसे स्कैन कर वे योजनाओं से संबंधित विस्तृत डिजिटल जानकारी प्राप्त कर रहे थे।
*झांकी के अग्रभाग में अंकित प्रेरणादायी नारे*
“सुन गा किसान, सुन गा मितान, डबरी ला तैं लक्ष्मी जान के प्रेरणा दायी नारे ने स्वच्छता, आत्मनिर्भरता और समृद्धि का संदेश दिया। समापन अवसर पर निर्णायकों ने इसे शासन की कल्याणकारी योजनाओं का सबसे प्रभावशाली और प्रेरणास्पद प्रदर्शन बताते हुए प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया।

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77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर ग्राम पंचायत बनकोम्बो में पहराया गया तिरंगा, प्रभात फेरी के साथ गूंजा राष्ट्रभक्ति का संदेश

प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला परिसर में आयोजित हुआ गरिमामय समारोह, जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों की रही उल्लेखनीय उपस्थिति

नारायणपुर ।
77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर ग्राम पंचायत बनकोम्बो के प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला भवन परिसर में राष्ट्रीय ध्वज का  अत्यंत हर्षोल्लास, गरिमा एवं देशभक्ति के वातावरण में किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय परिवार, ग्राम पंचायत प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।

ध्वजारोहण उपरांत विद्यालय परिवार एवं ग्रामवासियों द्वारा अनुशासित एवं देशभक्ति से ओत-प्रोत प्रभात फेरी निकाली गई। प्रभात फेरी ग्राम के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी, जहां देशभक्ति नारों और राष्ट्रगान की गूंज से पूरा ग्राम क्षेत्र राष्ट्रप्रेम के रंग में रंगा नजर आया।

कार्यक्रम में सरपंच, जनपद प्रतिनिधि व भाजपा मंडल अध्यक्ष सहित कई गणमान्य अतिथि रहे मौजूद

इस अवसर पर ग्राम पंचायत की सरपंच महोदया श्रीमती सरीता अंगिरा, भाजपा मंडल अध्यक्ष उमेश यादव, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष बालेश्वर यादव, हिरानाथ,हीरालाल चौहान, भदेश चौहान, सत कुमार यादव, कपूर यादव सहित ग्राम के अनेक गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

प्रशासनिक निर्देशानुसार मितानिन बहनों का शॉल एवं श्रीफल से किया गया सम्मान

कार्यक्रम के दौरान प्रशासन के निर्देशों के अनुरूप ग्राम पंचायत क्षेत्र में कार्यरत मितानिन बहनों को पंचायत की ओर से शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। अतिथियों ने मितानिनों के समाजसेवा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में दिए जा रहे योगदान की सराहना करते हुए उनके कार्यों को अनुकरणीय बताया।

सरकारी योजनाओं की दी गई जानकारी, ग्रामीणों से लाभ उठाने की अपील

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भाजपा मंडल अध्यक्ष उमेश यादव ने केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी ग्रामीणों को दी। उन्होंने पात्र हितग्राहियों से योजनाओं का लाभ लेने एवं शासन की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में सहयोग करने की अपील की।

समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया। पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासन, उत्साह और देशभक्ति की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी, जिससे ग्राम पंचायत बनकोम्बो में गणतंत्र दिवस का यह आयोजन स्मरणीय बन गया।

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कलेक्टर ने फहराया तिरंगा, अधिकारी-कर्मचारियों को दी गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं

रायगढ़, 26 जनवरी 2026/ गणतंत्र दिवस के अवसर पर आज जिला कलेक्टोरेट कार्यालय परिसर में कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। 
           कलेक्टर श्री चतुर्वेदी ने उपस्थित अधिकारी-कर्मचारियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। सृजन सभाकक्ष में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर ने कहा कि भारतीय संविधान केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि देश को संचालित करने की आत्मा और शक्ति है। संविधान में निहित नियम, विधि एवं मूल्य हमें एक आदर्श नागरिक बनने की दिशा दिखाते हैं। उन्होंने सभी से संविधान की मूल भावना को समझने, उसके नियमों का पालन करने तथा अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करने का आह्वान किया। इस अवसर पर उन्होंने धान खरीदी कार्य में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के दौरान नन्ही बालिका विधि कुमारी द्वारा संविधान की प्रस्तावना का सस्वर पठन किया गया। इस अवसर पर सहायक कलेक्टर श्री अक्षय डोसी, अपर कलेक्टर श्री अपूर्व प्रियेश टोप्पो, श्री रवि राही, डॉ. प्रियंका वर्मा, संयुक्त कलेक्टर श्री राकेश गोलछा, श्रीमती पूजा बंसल सहित कलेक्टोरेट के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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रायगढ़ : 77वें गणतंत्र दिवस पर कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने फहराया तिरंगा,उत्कृष्ट कार्य करने वाले 162 अधिकारी-कर्मचारी हुए सम्मानित

रायगढ़, 26 जनवरी 2026/ जिले में 77वां गणतंत्र दिवस हर्ष, उल्लास एवं देशभक्ति वातावरण में मनाया गया। शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी स्टेडियम में आयोजित जिला स्तरीय मुख्य समारोह में आदिम जाति विकास, अनुसूचित जाति विकास, पिछड़ा वर्ग विकास, अल्पसंख्यक विकास विभाग, कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री श्री रामविचार नेताम ने प्रातः 9 बजे राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इसके पश्चात राष्ट्रगान और वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया गया तथा पुलिस बल, होमगार्ड, एनसीसी कैडेट्स एवं स्काउट गाइड की टुकड़ियों द्वारा मुख्य अतिथि को सलामी दी गई। मुख्य अतिथि ने कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह के साथ परेड का निरीक्षण किया। समारोह में 11 प्लाटूनों द्वारा अनुशासित एवं आकर्षक मार्चपास्ट प्रस्तुत किया गया, जिसके पश्चात मुख्य अतिथि ने परेड कमांडरों से परिचय प्राप्त किया। इस अवसर पर आकाश में तिरंगे गुब्बारे छोड़े गए तथा वीर शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया गया।
          मुख्य अतिथि श्री रामविचार नेताम द्वारा मुख्यमंत्री के जनता के नाम संदेश का वाचन किया गया। उन्होंने प्रदेशवासियों को 77वें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिन हमारे संविधान की शक्ति और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है तथा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं राष्ट्र के लिए बलिदान देने वाले वीर सपूतों के त्याग को स्मरण करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना का रजत जयंती वर्ष मनाया गया है तथा भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेई की जन्म शताब्दी को अटल निर्माण वर्ष के रूप में मनाया गया। साथ ही वंदे मातरम् की 150वीं जयंती एवं धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती भी प्रदेश भर में उत्साहपूर्वक मनाई गई।
           मुख्य अतिथि ने कहा कि छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है और राज्य गठन के समय जहां धान खरीदी 5 लाख मीट्रिक टन थी वहीं यह बढ़कर 149 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई है। अटल सिंचाई योजना के अंतर्गत वर्षों से लंबित 115 सिंचाई योजनाओं को पूर्ण करने 2800 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। मोदी की गारंटी के अनुरूप पहली कैबिनेट बैठक में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए और अब तक प्रदेश में 26 लाख से अधिक आवासों को स्वीकृति दी जा चुकी है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से लगभग 70 लाख महिलाओं को प्रतिमाह एक-एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की दिशा में 9 हजार स्मार्ट क्लास एवं 22 हजार कंप्यूटर लगाए जा रहे हैं। नई औद्योगिक नीति के अंतर्गत देश-विदेश से 7 लाख 83 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं तथा अटल नगर नवा रायपुर में एआई डाटा सेंटर पार्क की शुरुआत की गई है।

*सांस्कृतिक कार्यक्रम में कार्मेल गर्ल्स स्कूल रहे प्रथम*
समारोह में स्कूली बच्चों द्वारा देशभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं। सांस्कृतिक कार्यक्रम में कार्मेल गर्ल्स हायर सेकेण्डरी स्कूल रायगढ़-प्रथम, ओ.पी.जिंदल स्कूल पतरापाली-द्वितीय एवं साधुराम विद्या मंदिर कोसमनारा तृतीय स्थान पर रहे। सर्वश्रेष्ठ परेड प्रदर्शन में नगर सेना महिला बल-प्रथम, जिला महिला पुलिस बल रायगढ-द्वितीय एवं 6 वीं छ.ग.सषस्त्र बल रायगढ़ तृतीय स्थान पर रहे। इसी तरह सीनियर व जूनियर खण्ड में एनसीसी सीनियर विंग-प्रथम, एनसीसी सीनियर डिवीजन-द्वितीय एवं एनसीसी जूनियर डिविजन को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। इसके साथ ही गणतंत्र दिवस के अवसर पर शासन की योजनाओं एवं कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में उत्कृष्ट प्रदर्षन करने वाले 162 अधिकारी-कर्मचारियों को मुख्य अतिथि द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

*विभागों ने निकाली झांकी, जिला पंचायत को मिला प्रथम पुरस्कार*
गणतंत्र दिवस के अवसर पर शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी स्टेडियम में शासकीय विभागों द्वारा झांकी का प्रदर्शन किया गया। जिसमें जिला पंचायत रायगढ़ को प्रथम पुरस्कार मिला। वहीं दूसरे स्थान पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा तृतीय स्थान पर कृषि विभाग रहे। झांकी के प्रदर्शन में नगर पालिका निगम द्वारा अंतराज्यीय बस अड्डा एवं अप्पू राजा पर आधारित झांकी प्रदर्शित की गई। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान, स्वस्थ नारी-सशक्त परिवार की थीम को दर्शाया गया। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा मानव हाथी द्वंद्व की स्थिति में आवश्यक सावधानियों एवं टोल फ्री नंबर 1800-233-2631 की जानकारी दी गई। 
              परिवहन विभाग द्वारा ईवी चार्जिंग स्टेशन की जानकारी प्रस्तुत की गई। पशुधन विकास विभाग द्वारा स्वस्थ पशु-समृद्ध प्रदेश-समृद्ध देश और 25 वर्षों की प्रमुख उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा रेडी-टू-ईट यूनिट, मछली पालन विभाग द्वारा फुटकर मत्स्य विक्रय योजना, रेशम विभाग द्वारा टसर कीट पालन, आदिवासी विकास विभाग द्वारा आदि सेवा केंद्र एवं आदि कर्मयोगी अभियान, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा हर घर नल से जल, कृषि विभाग द्वारा प्राकृतिक खेती एवं सेवा सहकारी समिति, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा बैंक सखी, लखपति दीदी, कृषि सखी, अटल डिजिटल सुविधा केंद्र, विकसित भारत विकसित ग्राम एवं स्वच्छता तथा उद्यानिकी विभाग द्वारा ऑयल पाम पौधारोपण को प्रदर्शित किया गया।
              गणतंत्र दिवस समारोह में महापौर श्री जीवर्धन चौहान, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शिखा रविन्द्र गबेल, सभापति श्री डिग्रीलाल साहू, श्री अरूणधर दीवान, श्री उमेश अग्रवाल, श्री विजय अग्रवाल, श्रीमती पूनम सोलंकी, श्रीमती शीला तिवारी, सीईओ जिला पंचायत श्री अभिजीत बबन पठारे, डीएफओ रायगढ़ श्री अरविंद पीएम, डीएफओ धरमजयगढ़ श्री जितेन्द्र उपाध्याय, सहायक कलेक्टर श्री अक्षय डोसी, आयुक्त नगर निगम श्री बृजेश सिंह क्षत्रिय, अपर कलेक्टर श्री अपूर्व प्रियेश टोप्पो, श्री रवि राही, डॉ.प्रियंका वर्मा, संयुक्त कलेक्टर श्री राकेश गोलछा, श्रीमती पूजा बंसल, डिप्टी कलेक्टर श्री धनराज मरकाम सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या नागरिकगण उपस्थित थे। गणतंत्र दिवस समारोह का मंच संचालन प्राचार्य श्री राजेश डेनियल व व्याख्याता श्रीमती रंजीत कौर घई ने किया।

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जहां कभी तिरंगा फहराना था अपराध, वहां अब आज़ादी का जश्न: बस्तर संभाग के 47 नक्सल प्रभावित गांवों में पहली बार गणतंत्र दिवस समारोह

रायपुर, 26 जनवरी 2026/ छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में दशकों तक चले नक्सल हिंसा के अंधकार के बाद अब शांति, विश्वास और लोकतंत्र का उजास दिखाई देने लगा है। लंबे समय तक माओवादी उग्रवाद से प्रभावित रहे बस्तर संभाग के बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिले के 47 ऐसे गांव, जहां अब तक राष्ट्रीय पर्व मनाना संभव नहीं था, वहां इस वर्ष 26 जनवरी को पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा। यह अवसर बस्तर के इतिहास में लोकतांत्रिक पुनर्स्थापना का साक्षी होगा।

बीते दो वर्षों में केंद्र एवं राज्य सरकार की समन्वित रणनीति, सुरक्षाबलों की सतत कार्रवाई और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से बस्तर संभाग में हालात तेजी से सामान्य हो रहे हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 59 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं, जिससे उन गांवों में सुरक्षा और प्रशासन की प्रभावी उपस्थिति सुनिश्चित हुई है। इन्हीं प्रयासों के परिणामस्वरूप बस्तर के 53 गांवों में बीते वर्ष 76वां गणतंत्र दिवस समारोह धूम-धाम से मनाया गया था, अब इस कड़ी में 47 और नये ऐसे गांव जुड़ गए हैं जहां इस साल पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा।

बीजापुर जिले के जिन गांवों में पहली बार गणतंत्र पर्व मनाया जाएगा, उनमें पुजारीकांकेर, गुंजेपर्ती, भीमाराम, कस्तुरीपाड, ताड़पाला हिल्स, उलूर, चिल्लामरका, काड़पर्ती, पिल्लूर, डोडीमरका, संगमेटा, तोडका, कुप्पागुड़ा, गौतपल्ली, पल्लेवाया एवं बेलनार गांव शामिल है। इसी तरह नारायणपुर जिले के गांव एडजूम, इदवाया, आदेर, कुडमेल, कोंगे, सितराम, तोके, जटलूर, धोबे, डोडीमार्का, पदमेटा, लंका, परीयादी, काकुर, बालेबेडा, कोडेनार, कोडनार, अदिंगपार, मांदोडा, जटवार तथा वाडापेंदा गांव तथा सुकमा जिले के गांव गोगुंडा, नागाराम, बंजलवाही, वीरागंगरेल, तुमालभट्टी, माहेता, पेददाबोडकेल, उरसांगल, गुंडराजगुंडेम तथा पालीगुड़ा में पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा।
 
यह परिवर्तन उन दूरस्थ अंचलों में ऐतिहासिक बदलाव का प्रतीक है, जहां कभी नक्सली हिंसा के कारण सामान्य जनजीवन और लोकतांत्रिक गतिविधियां बाधित थीं। बस्तर क्षेत्र में 100 से अधिक सुरक्षा कैंप स्थापित किए जा चुके हैं। इन कैंपों ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया है, बल्कि विकास कार्यों का मार्ग भी प्रशस्त किया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, संचार और बैंकिंग जैसी मूलभूत सुविधाएं अब धीरे-धीरे ग्रामीणों तक पहुंच रही हैं।

सुरक्षा बलों और प्रशासन की निरंतर मौजूदगी से स्थानीय नागरिकों में सुरक्षा की भावना सुदृढ़ हुई है। जिन क्षेत्रों में पहले राष्ट्रीय पर्व मनाने पर प्रतिबंध था, वहां आज ग्रामीण स्वयं उत्साह के साथ तिरंगा फहराने और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए आगे आ रहे हैं। यह बदलाव बस्तर को माओवाद के भय से बाहर निकालने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

सुरक्षा के साथ-साथ राज्य सरकार का ध्यान अब क्षेत्र में स्थायी विकास सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। स्कूलों और आंगनबाड़ियों का संचालन, बैंकों की स्थापना, मोबाइल टावरों की स्थापना, सड़कों का निर्माण तथा विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक पहुंचाया जा रहा है। हाल ही में नक्सल प्रभावित क्षेत्र जगरगुंडा में बैंकिंग सुविधा फिर से शुरू हुई है। 

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का कहना है कि जहां कभी नक्सली हिंसा के कारण विकास अवरुद्ध था, वहीं आज सुशासन की सरकार बस्तर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर को माओवाद के भय से मुक्त कर विकास और विश्वास के नए युग की ओर ले जा रही है। गणतंत्र दिवस 2026 पर बस्तर के उक्त 47 गांवों में पहली बार फहरने वाला तिरंगा न केवल राष्ट्रीय पर्व का उत्सव होगा, बल्कि यह शांति, लोकतंत्र और विकास के विजय का सशक्त संदेश भी देगा।

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शासन व्यवस्था देता है, साहित्य संवेदना जगाता है-साहित्य सृजन कर रहे पूर्व अधिकारियों ने 'शासन और साहित्य' के अंतर्संबंधों पर रखी अपनी राय

रायपुर. 26 जनवरी 2026. रायपुर साहित्य उत्सव के तीसरे दिन आज वर्तमान में साहित्य सृजन में लगे भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारियों ने 'शासन और साहित्य' के अंतर्संबंधों पर गहरा विमर्श किया। लाला जगदलपुरी मंडप में आयोजित यह सत्र मूर्धन्य छत्तीसगढ़ी साहित्यकार और पूर्व सांसद स्वर्गीय श्री केयूर भूषण को समर्पित रहा। रायपुर के कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह इस सत्र में सूत्रधार की भूमिका में थे।

परिचर्चा में यह बात प्रमुखता से उभरी कि शासन और साहित्य एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। जहाँ शासन नीतियों के जरिए समाज को व्यवस्थित करता है, वहीं साहित्य मानवीय संवेदनाओं को जीवित रखकर शासन को आइना दिखाने का काम करता है।

परिचर्चा की शुरुआत करते हुए सूत्रधार रायपुर के कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह ने कहा कि शासन की प्राथमिकताओं में साहित्य सदैव शामिल रहता है और रायपुर साहित्य उत्सव का यह आयोजन इस बात का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि साहित्य शासन के लिए दर्पण की तरह है जो व्यवस्था को सही रास्ता दिखाने और समाज में संवेदना जगाने का काम करता है।

वरिष्ठ साहित्यकार और सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. सुशील त्रिवेदी ने शासन की भूमिका को स्पष्ट करते हुए कहा कि शासन का मूल काम स्वतंत्रता, समता और न्याय की स्थापना करना है, जबकि साहित्य आम आदमी के संघर्ष और भावनाओं की अभिव्यक्ति है। उन्होंने बेहद सारगर्भित बात कही कि जब 'स्वांत: सुखाय' के भाव से लिखा गया शब्द 'बहुजन सुखाय और बहुजन हिताय' बन जाता है, तब वह साहित्य बन जाता है। उन्होंने साहित्य को मनुष्य का 'स्थायी लोकतंत्र' करार दिया।

चर्चा को आगे बढ़ाते हुए साहित्यकार एवं सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. संजय अलंग ने वैश्विक क्रांतियों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि रूस और फ्रांस जैसी बड़ी क्रांतियां साहित्य की कोख से ही जन्मी हैं। शासन लगातार साहित्य से सीखता है और सत्ता में आने के बाद भी उसे साहित्य से ही दृष्टि मिलती है। डॉ. अलंग ने कहा कि चाहे शासन हो या साहित्य, यदि आप जनता के पक्ष में खड़े नहीं हैं, तो आप विपक्ष में खड़े हैं।

साहित्यकार एवं सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. इंदिरा मिश्रा ने परिचर्चा में शासन की व्यावहारिक चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शासन सार्वभौमिक और सशक्त होता है, जिसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कभी-कभी कड़े निर्णय लेने पड़ते हैं। कई बार ऐसी रचनाओं पर प्रतिबंध लगाना पड़ता है जो व्यवस्था के लिए चुनौती बनती हैं। 

साहित्यकार एवं सेवानिवृत्त आईएएस श्री बी.के.एस. रे ने एक अच्छे प्रशासक की परिभाषा गढ़ते हुए कहा कि वही व्यक्ति सफल शासक है जो मनुष्यता को समझता है। उन्होंने साहित्यकारों को आह्वान किया कि यदि शासन कभी रास्ता भटक जाए, तो यह साहित्य का ही दायित्व है कि वह उसे सही मार्ग पर लाए।

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रायपुर साहित्य उत्सव में समाज और सिनेमा पर गंभीर विमर्श, अनुराग बसु बोले– रिस्क लेकर सामाजिक सरोकार से जुड़ा सिनेमा बनता है, चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने कहा– सिनेमा देखने का मापदंड बदला

रायपुर, 26 जनवरी 2026/ रायपुर साहित्य उत्सव के अंतर्गत समाज और सिनेमा विषय पर केंद्रित परिचर्चा को सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रोता अनिरुद्ध नीरव मंडप में पहुंचे, जिसमें हिंदी सिनेमाजगत के प्रसिद्ध लेखक-निर्देशक श्री अनुराग बसु, इतिहासकार-पटकथा लेखक एवं निर्माता डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी और सिनेमा लेखक श्री अनंत विजय ने हिस्सा लिया। परिचर्चा के सूत्रधार छत्तीसगढ़ के जाने-माने लेखक-निर्देशक श्री मनोज वर्मा रहे।

हिंदी सिनेमाजगत के निर्देशक श्री अनुराग बसु ने परिचर्चा में भाग लेते हुए सिनेमा को एक ऐसा औजार बताया, जो बिगड़े हुए समाज को शेप दे सकता है। उन्होंने कहा कि लोग रिस्क लेकर ऐसे सिनेमा बनाते हैं। अगर हम सिनेमा से सामाजिक सरोकार की अपेक्षा करते हैं, तो बहुत से लेखक-निर्देशक आज भी इस दायित्व को निभाते आ रहे हैं।

श्री बसु ने कहा कि 90 के दशक में जितने सिनेमा बनते थे, आज भी उतने ही बनते हैं, बल्कि फिल्मों की संख्या और अधिक है। आज सिनेमा के पास ज्यादा टेक्नोलॉजी है, लेकिन कहानियां भी वही हैं। अब नई कहानियां सामने आ रही हैं, नए विषयों पर फिल्में बन रही हैं। हम यदि किसी लेखक-निर्देशक की बनाई किसी फ़िल्म को अच्छा या बुरा कहते हैं, तो यह हमारा व्यक्तिगत विचार है, क्योंकि उसने पूरी ईमानदारी से फ़िल्म बनाई है और उसके हिसाब से वह फ़िल्म अच्छी बनी है। श्री बसु ने आगे कहा कि हम जब भी फ़िल्मों की बात करते हैं, तो पसंद-नापसंद की बात अपने आप ही सामने आ जाती है। उन्होंने फ़िल्मों को समाज का जरूरी हिस्सा बताया।

परिचर्चा में अपने संबोधन के दौरान डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने कहा कि आज फ़िल्म के हिट और फ्लॉप होने की बात अधिक होती है। सिनेमा को देखने का मापदंड बदल गया है। सिनेमा का सामाजिक सरोकार नहीं रहा। सिनेमा आपके प्रश्नों को तभी उठाएगा, जब उससे सिनेमा को बड़ा लाभ होगा। सिनेमा का दौर बदल रहा है।
श्री द्विवेदी ने कहा कि आज के समय में आप चाणक्य नहीं बना सकते। हिंदी सिनेमा में हिंदी का स्तर कहां तक पहुंचा है, यह एक बड़ी चुनौती है। सभी सिनेमा को सरल करने की बात करते हैं, हिंदी में अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग होता है। उन्होंने अपने अनुभव से जोड़ते हुए बताया कि बायोग्राफी भी उन्हीं पर बन रही हैं, जिनसे बड़े फायदे हों। उन्होंने उपनिषद गंगा सीरियल का उल्लेख करते हुए बताया कि उपनिषद गंगा में बहुत गंभीर काम है, जबकि चाणक्य में उस समय की सच्चाई दिखाई देती है।

इस सत्र पर सिनेमा लेखक श्री अनंत विजय ने कहा कि सिनेमा कोई एलाइट माध्यम नहीं है। जब तक हम फ़िल्म नहीं देखते, तब तक चर्चा नहीं होती। आजकल लोग फ़िल्म देखते नहीं, सिर्फ चर्चा करते हैं। प्रेम में वैज्ञानिकता नहीं ढूंढी जाती। फ़िल्मों की कहानी और पात्रों से लोग भावनात्मक जुड़ाव रखते हैं। यही जुड़ाव फ़िल्मों की कॉमर्शियल और सोशल वैल्यू तय करता है।

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डिजिटल युग में भी प्रिंट और साहित्य की प्रासंगिकता अटूट — रायपुर साहित्य उत्सव के समापन पर राज्यपाल रमेन डेका का उद्बोधन

रायपुर, 26 जनवरी 2026/राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा है कि  इंटरनेट से भरी इस दुनिया और न्यू जनरेशन वाले इस दौर में भी प्रिंट और साहित्य का महत्व हमेशा बना रहेगा। राज्यपाल श्री डेका ने आज नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन परिसर में तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव ‘आदि से अनादि‘ के समापन समारोह के अवसर पर उक्त विचार व्यक्त किए। राज्यपाल ने कहा कि साहित्य और कविता में हमेशा एक संदेश होना चाहिए। जिस तरह संगीत के सात स्वर हमें जोड़े रखते है उसी तरह साहित्य का आदान-प्रदान नई बातों का सीखने का अवसर  प्रदान करता है। 

 समापन समारोह में मुख्य अतिथि की आसंदी से राज्यपाल ने कहा कि पिछले तीन दिनों में इस मंच पर बहुत अच्छी और सार्थक चर्चाएं हुईं। विचारों का खुलकर आदान-प्रदान हुआ। सबने मिलकर साहित्य, समाज और जीवन से जुड़े कई विषयों पर बात की। यह उत्सव सभी साहित्य प्रेमियों के लिए एक यादगार और सीखने वाला अनुभव रहा है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी हुआ। देश भर से आए नामी प्रकाशकों ने यहां किताबों का बहुत सुंदर संग्रह प्रस्तुत किया। पाठकों को नई-नई किताबें देखने और पढ़ने का अच्छा मौका मिला। यह देखकर अच्छा लगता है कि आज भी लोगों में किताबों के प्रति गहरी रुचि है।

श्री डेका ने कहा साहित्य और संगीत का आदान प्रदान जरूरी है और ऐसे साहित्य का उत्सव हमेशा होना चाहिए। उन्होंने तीन दिवसीय सफल आयोजन के लिए सभी को बधाई देते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन राज्य के अन्य शहरों एवं गांवांे के स्तर तक भी किया जाना चाहिए और यह आयोजन सरकारी न होकर समुदाय की भागीदारी वाले होने चाहिए। 

श्री डेका ने कहा कि आज की पीढ़ी छत्तीसगढ़ के रामायण कालीन संस्कृति एवं साहित्य को भूल गयी है। हमारा राज्य बहुत सुंदर है और यहां की संस्कृति भी बहुत समृद्ध है। इसका प्रचार प्रसार होना चाहिए ताकि राज्य के बाहर के लोग यहां के बारे में जान सकें। श्री डेका ने कहा कि शब्दों में बहुत शक्ति होती है। शब्द का रूप ब्रह्म है। उन्हांेने बंकिमचंद्र चटर्जी के वंदे मातरम गीत का उल्लेख किया और कहा कि सारे देश को इन दो शब्दों ने जागृत कर दिया था। उन्होंने कहा कि साहित्य हमें जोड़ता है, हमें सोचने की नई दिशा देता है और हमें बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है।  हम सभी साहित्य को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं, संवाद की परंपरा को आगे बढ़ाएं और विचारों की यह रोशनी लगातार जलाए रखें। उन्होंने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में कम से कम एक ऐसा कार्य अवश्य करें, जो बिना किसी लेन-देन या व्यक्तिगत स्वार्थ के हो। ऐसे कार्य देश और समाज के समग्र विकास को मजबूती प्रदान करते हैं। 

समापन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में साहित्य की अविरल धारा बहती रही है। कालीदास, रविन्द्रनाथ टैगोर जैसे कवि एवं साहित्यकारों का इतिहास भी छत्तीसगढ़ से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी इस तरह के आयोजन अनवरत किए जाते रहेंगे।  

समापन समारोह की अध्यक्षता प्रख्यात रंगकर्मी, नाट्य लेखक डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने की। इस अवसर पर फिल्म अभिनेता एवं निर्देशक डॉ. चंद्र प्रकाश द्विवेदी, फिल्म निर्माता-निर्देशक श्री अनुराग बसु विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री आर कृष्णा दास, मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा , राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, राज्यपाल के विधिक सलाहकार श्री भीष्म प्रसाद पाण्डेय, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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रायपुर साहित्य उत्सव में ‘नाट्यशास्त्र और कला परंपरा’ पर परिचर्चा, भारतीय सांस्कृतिक विरासत पर हुआ विमर्श


रायपुर, 26 जनवरी 2026/रायपुर साहित्य उत्सव के अंतर्गत श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में रविवार को द्वितीय सत्र के दौरान “नाट्यशास्त्र और कला परंपरा” विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई।

 यह सत्र महान कला संरक्षक राजा चक्रधर सिंह को समर्पित रहा। कार्यक्रम के सूत्रधार राजेश गानोदवाले रहे। परिचर्चा में इंदिरा कला विश्वविद्यालय, खैरागढ़ की कुलपति डॉ. लवली शर्मा तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र से संबद्ध डॉ. सच्चिदानंद जोशी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने नाट्यशास्त्र की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नाट्यशास्त्र अपने आप में एक संपूर्ण शास्त्र है और जहां भी सृजनात्मकता है, वहां नाट्यशास्त्र की उपस्थिति दिखाई देती है। उन्होंने बताया कि तानपुरा निर्माण की परंपरा पर आधारित एक वृत्तचित्र का निर्माण किया गया है, जिससे पारंपरिक वाद्य निर्माण की प्रक्रिया को प्रलेखित किया जा सके।
उन्होंने कहा कि यूनेस्को के ‘मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर’ में नाट्यशास्त्र तथा भगवद्गीता की पांडुलिपियों को सम्मिलित किया जाना भारतीय ज्ञान परंपरा की वैश्विक मान्यता का प्रमाण है।

डॉ. जोशी ने गुरु–शिष्य परंपरा पर बल देते हुए कहा कि यह परंपरा केवल आधारभूत संरचना का विषय नहीं, बल्कि भाव और संस्कार का विषय है। उन्होंने बताया कि दीक्षा प्रणाली के अंतर्गत गुरु–शिष्य परंपरा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। डॉ. जोशी ने कहा कि वाद्य यंत्र बनाने वाले कारीगर प्रायः गांवों में रहते हैं और वे पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ इस परंपरा को आगे बढ़ाते हैं।

डॉ. लवली शर्मा ने कहा कि इंदिरा कला विश्वविद्यालय द्वारा दुर्लभ वाद्य यंत्रों के संरक्षण की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर स्थित बावड़ी का जीर्णोद्धार कर उसका संरक्षण किया गया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में वाद्य यंत्रों की देखरेख और अनुरक्षण से संबंधित पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, ताकि परंपरागत वाद्य संस्कृति को तकनीकी दृष्टि से भी संरक्षित किया जा सके। वाद्य यंत्र निर्माण से जुड़े शिल्पकारों को सम्मानित करने की परंपरा भी निभाई जा रही है।
उन्होंने इंदिरा कला विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित संस्थान के रूप में स्थापित करने तथा गुरु–शिष्य परंपरा को सशक्त रूप से लागू करने के अपने संकल्प को भी व्यक्त किया।

परिचर्चा में वक्ताओं ने कहा कि नाट्यशास्त्र और भारतीय कला परंपरा न केवल सांस्कृतिक विरासत हैं, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत भी हैं। इनके संरक्षण और संवर्धन हेतु शैक्षणिक संस्थानों तथा समाज की संयुक्त भूमिका आवश्यक है।

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रायपुर साहित्य उत्सव में बाल साहित्य की प्रासंगिकता पर गंभीर संवाद, डॉ. गोपाल दवे ने विज्ञानसम्मत लेखन को बताया अनिवार्य

रायपुर, 26 जनवरी 2026/ रायपुर साहित्य उत्सव के तीसरे दिन कवि-कथाकार अनिरुद्ध नीरव मंडप में बाल साहित्य की प्रासंगिकता का सत्र ख्यातिलब्ध साहित्यकार नारायण लाल परमार को समर्पित रहा। जिसमें साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश के अध्यक्ष डॉ. गोपाल दवे, बाल साहित्यकार श्री बलदाऊ राम साहू बतौर वक्ता परिचर्चा में शामिल हुए, जिसके सूत्रधार श्री एस के बिसेन रहे। इस अवसर पर देवभोग के कृष्ण कुमार अजनबी द्वारा लिखित बाल कविता संग्रह आंखों का तारा, श्री ओमप्रकाश जैन की पुस्तक जीवन चक्र और श्री संतोष कुमार मिरी की पुस्तक जीवन बोध का विमोचन किया गया। 

परिचर्चा में अपने संबोधन में डॉ. गोपाल दवे ने कहा कि बाल साहित्य का पाठक एकमात्र ऐसा पाठक है जो स्वयं क्रेता नहीं होता, न ही निर्णायक होता है। एक समय था जब बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों में बच्चे अपने पालकों से बाल साहित्य खरीदने की जिद करते थे। डॉ. दवे ने कहा कि हमें बच्चों को सरल साहित्य सिखाना होगा। अंग्रेजी के नाम पर हम कितने सारे उपक्रम कर रहे हैं। उन्होंने पालकों से अपील की कि बच्चों को बाल साहित्य लेकर दें साथ ही एक हिंदी शब्दकोश भी दें ताकि जब कोई शब्द समझ न आए वह शब्दकोश में ढूंढ सके।उन्होंने आज के समय में विज्ञानसम्मत बाल साहित्य के लेखन को अनिवार्य बताया। 

श्री बलदाऊ राम साहू ने कहा कि बाल साहित्य बच्चों को गढ़ता है, उन्हें विचार देता है। बाल साहित्य के बिना शिक्षा की कल्पना नहीं की जा सकती। बाल साहित्य को यदि हम पाठ्यपुस्तक से निकाल दें तो कुछ नहीं बचता। बाल साहित्य बच्चों को प्रेरित करता है। बच्चों को प्रोत्साहित करता है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि बच्चों में पढ़ने की परंपरा कम हो रही है, बाल पत्रिकाएं बंद होती जा रही हैं। 

श्री साहू ने कहा कि शिक्षक बच्चों का मूल्यांकन सही ढंग से नहीं कर पाते। लोग बाल साहित्य को मनोरंजन का साधन नहीं, सद्विचारों का विचारों का संग्रह है। बच्चों को संवेदनशील मनुष्य बनाने में बाल साहित्य का बड़ा महत्व है। श्री साहू ने बाल साहित्य को जीवन के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बाल साहित्य बच्चों के लिए भाषा संस्कार की पाठशाला है। उन्होंने कहा कि हमें बच्चों को बाल साहित्य पढ़ने के लिए प्रेरित करना होगा।

परिचर्चा के सूत्रधार श्री एस के बिसेन ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि धीरे-धीरे पुस्तकों से पंचतंत्र और हितोपदेश की कहानियां गायब हो रही हैं। उन्होंने नैतिक शिक्षा के पाठ में बाल साहित्य को बहुत जरूरी बताया और कहा कि बाल साहित्य संस्कार और व्यवहार का मूल आधार है।

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नवयुग में भारत बोध की अवधारणा पर रायपुर साहित्य उत्सव में मंथन, भारतीय शिक्षा नीति और मीडिया की भूमिका पर हुआ सार्थक संवाद

रायपुर, 26 जनवरी 2026/रायपुर साहित्य उत्सव के अंतर्गत श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में रविवार को “नवयुग में भारत बोध” विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। यह कार्यक्रम मावली प्रसाद श्रीवास्तव को समर्पित रहा। परिचर्चा के सूत्रधार श्री प्रभात मिश्रा थे। कार्यक्रम में डॉ. संजीव शर्मा एवं डॉ. संजय द्विवेदी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।

डॉ. संजीव शर्मा ने शिक्षा में भारत बोध की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति में भारतीय दृष्टि को समुचित स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति केवल आत्मकल्याण तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्व कल्याण की भावना से जुड़ी हुई है। हमारी दृष्टि सभी को अपने जैसा बनाने की नहीं, बल्कि विविधता में एकता की है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा की भूमिका सामान्य से कहीं अधिक व्यापक है और उसका उद्देश्य व्यक्ति को जाति-पाति तथा संकीर्ण बंधनों से मुक्त कर मानवीय मूल्यों से जोड़ना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में ईश्वर की अनुभूति मानव, जीव-जंतु और प्रकृति सभी में की जाती है। हमारी सांस्कृतिक शब्दावली को पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जाना चाहिए।


डॉ. शर्मा ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा स्तर पर भारत बोध से जुड़ी पाठ्यवस्तु में परिवर्तन आवश्यक है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि मुगलों के आक्रमण भौतिक थे, जबकि अंग्रेजों ने मानसिक आक्रमण कर भारतीयों में हीनभावना उत्पन्न की, जिससे बाहर निकलना आज की आवश्यकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि पाठ्यवस्तु और मानसिकता—दोनों में परिवर्तन जरूरी है, किंतु यह परिवर्तन भारतीय परिप्रेक्ष्य में होना चाहिए, न कि पश्चिमी पद्धति के अनुकरण से। उन्होंने उच्च शिक्षा की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि संस्थानों को केवल मान्यता और प्रतिष्ठा की संरचना से बाहर निकलकर विश्वस्तरीय शिक्षा के साथ उसका भारतीयकरण भी करना होगा। पंचतंत्र जैसी कथाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़कर प्रस्तुत करने की आवश्यकता भी उन्होंने रेखांकित की।

डॉ. संजय द्विवेदी ने कहा कि भारतीय भाषाओं में ज्ञान और विज्ञान दोनों समाहित हैं। आज का भारतीय युवा देश की विशिष्ट परंपरा और ज्ञान को विश्व स्तर तक पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने कभी अपने विचार दूसरों पर थोपे नहीं, बल्कि अपने श्रेष्ठ विचार विश्व के सामने प्रस्तुत किए, जैसा कि स्वामी विवेकानंद ने किया था।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति, पर्वत और नदियों तक को देवत्व के रूप में देखा जाता है। रामराज्य का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि राजतंत्र होते हुए भी वहां अंतिम व्यक्ति की बात सुनी जाती थी, जो लोकतांत्रिक चेतना का प्रतीक है।

डॉ. द्विवेदी ने कहा कि भारतीय पत्रकारिता को भी भारतीय मूल्यों के अनुरूप ढालने की आवश्यकता है। पश्चिमी मानकों पर आधारित पत्रकारिता भारत की सामाजिक-सांस्कृतिक आवश्यकताओं के अनुकूल नहीं है। उन्होंने वैचारिक साम्राज्यवाद को गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि भारत बोध का विस्तार सोशल मीडिया सहित सभी माध्यमों से होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि “भारत को जानो, भारत को मानो” ही भारत बोध का मूल सूत्र है। भारतीयता ही सही अर्थों में राष्ट्रभाव की अभिव्यक्ति है। भारत की नीतियां उसकी अपनी भूमि और परंपरा पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने आत्मविश्वास के अभाव को भारत बोध के मार्ग में बाधा बताते हुए कहा कि समाज में इसे स्थायी रूप देने के लिए शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

परिचर्चा में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही भारत बोध का सशक्त प्रसार संभव है और यही प्रक्रिया भारत की सांस्कृतिक चेतना को पुनर्स्थापित करने का आधार बनेगी।

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