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रायपुर साहित्य उत्सव में समाज और सिनेमा पर गंभीर विमर्श, अनुराग बसु बोले– रिस्क लेकर सामाजिक सरोकार से जुड़ा सिनेमा बनता है, चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने कहा– सिनेमा देखने का मापदंड बदला

रायपुर, 26 जनवरी 2026/ रायपुर साहित्य उत्सव के अंतर्गत समाज और सिनेमा विषय पर केंद्रित परिचर्चा को सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रोता अनिरुद्ध नीरव मंडप में पहुंचे, जिसमें हिंदी सिनेमाजगत के प्रसिद्ध लेखक-निर्देशक श्री अनुराग बसु, इतिहासकार-पटकथा लेखक एवं निर्माता डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी और सिनेमा लेखक श्री अनंत विजय ने हिस्सा लिया। परिचर्चा के सूत्रधार छत्तीसगढ़ के जाने-माने लेखक-निर्देशक श्री मनोज वर्मा रहे।

हिंदी सिनेमाजगत के निर्देशक श्री अनुराग बसु ने परिचर्चा में भाग लेते हुए सिनेमा को एक ऐसा औजार बताया, जो बिगड़े हुए समाज को शेप दे सकता है। उन्होंने कहा कि लोग रिस्क लेकर ऐसे सिनेमा बनाते हैं। अगर हम सिनेमा से सामाजिक सरोकार की अपेक्षा करते हैं, तो बहुत से लेखक-निर्देशक आज भी इस दायित्व को निभाते आ रहे हैं।

श्री बसु ने कहा कि 90 के दशक में जितने सिनेमा बनते थे, आज भी उतने ही बनते हैं, बल्कि फिल्मों की संख्या और अधिक है। आज सिनेमा के पास ज्यादा टेक्नोलॉजी है, लेकिन कहानियां भी वही हैं। अब नई कहानियां सामने आ रही हैं, नए विषयों पर फिल्में बन रही हैं। हम यदि किसी लेखक-निर्देशक की बनाई किसी फ़िल्म को अच्छा या बुरा कहते हैं, तो यह हमारा व्यक्तिगत विचार है, क्योंकि उसने पूरी ईमानदारी से फ़िल्म बनाई है और उसके हिसाब से वह फ़िल्म अच्छी बनी है। श्री बसु ने आगे कहा कि हम जब भी फ़िल्मों की बात करते हैं, तो पसंद-नापसंद की बात अपने आप ही सामने आ जाती है। उन्होंने फ़िल्मों को समाज का जरूरी हिस्सा बताया।

परिचर्चा में अपने संबोधन के दौरान डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने कहा कि आज फ़िल्म के हिट और फ्लॉप होने की बात अधिक होती है। सिनेमा को देखने का मापदंड बदल गया है। सिनेमा का सामाजिक सरोकार नहीं रहा। सिनेमा आपके प्रश्नों को तभी उठाएगा, जब उससे सिनेमा को बड़ा लाभ होगा। सिनेमा का दौर बदल रहा है।
श्री द्विवेदी ने कहा कि आज के समय में आप चाणक्य नहीं बना सकते। हिंदी सिनेमा में हिंदी का स्तर कहां तक पहुंचा है, यह एक बड़ी चुनौती है। सभी सिनेमा को सरल करने की बात करते हैं, हिंदी में अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग होता है। उन्होंने अपने अनुभव से जोड़ते हुए बताया कि बायोग्राफी भी उन्हीं पर बन रही हैं, जिनसे बड़े फायदे हों। उन्होंने उपनिषद गंगा सीरियल का उल्लेख करते हुए बताया कि उपनिषद गंगा में बहुत गंभीर काम है, जबकि चाणक्य में उस समय की सच्चाई दिखाई देती है।

इस सत्र पर सिनेमा लेखक श्री अनंत विजय ने कहा कि सिनेमा कोई एलाइट माध्यम नहीं है। जब तक हम फ़िल्म नहीं देखते, तब तक चर्चा नहीं होती। आजकल लोग फ़िल्म देखते नहीं, सिर्फ चर्चा करते हैं। प्रेम में वैज्ञानिकता नहीं ढूंढी जाती। फ़िल्मों की कहानी और पात्रों से लोग भावनात्मक जुड़ाव रखते हैं। यही जुड़ाव फ़िल्मों की कॉमर्शियल और सोशल वैल्यू तय करता है।

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डिजिटल युग में भी प्रिंट और साहित्य की प्रासंगिकता अटूट — रायपुर साहित्य उत्सव के समापन पर राज्यपाल रमेन डेका का उद्बोधन

रायपुर, 26 जनवरी 2026/राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा है कि  इंटरनेट से भरी इस दुनिया और न्यू जनरेशन वाले इस दौर में भी प्रिंट और साहित्य का महत्व हमेशा बना रहेगा। राज्यपाल श्री डेका ने आज नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन परिसर में तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव ‘आदि से अनादि‘ के समापन समारोह के अवसर पर उक्त विचार व्यक्त किए। राज्यपाल ने कहा कि साहित्य और कविता में हमेशा एक संदेश होना चाहिए। जिस तरह संगीत के सात स्वर हमें जोड़े रखते है उसी तरह साहित्य का आदान-प्रदान नई बातों का सीखने का अवसर  प्रदान करता है। 

 समापन समारोह में मुख्य अतिथि की आसंदी से राज्यपाल ने कहा कि पिछले तीन दिनों में इस मंच पर बहुत अच्छी और सार्थक चर्चाएं हुईं। विचारों का खुलकर आदान-प्रदान हुआ। सबने मिलकर साहित्य, समाज और जीवन से जुड़े कई विषयों पर बात की। यह उत्सव सभी साहित्य प्रेमियों के लिए एक यादगार और सीखने वाला अनुभव रहा है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी हुआ। देश भर से आए नामी प्रकाशकों ने यहां किताबों का बहुत सुंदर संग्रह प्रस्तुत किया। पाठकों को नई-नई किताबें देखने और पढ़ने का अच्छा मौका मिला। यह देखकर अच्छा लगता है कि आज भी लोगों में किताबों के प्रति गहरी रुचि है।

श्री डेका ने कहा साहित्य और संगीत का आदान प्रदान जरूरी है और ऐसे साहित्य का उत्सव हमेशा होना चाहिए। उन्होंने तीन दिवसीय सफल आयोजन के लिए सभी को बधाई देते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन राज्य के अन्य शहरों एवं गांवांे के स्तर तक भी किया जाना चाहिए और यह आयोजन सरकारी न होकर समुदाय की भागीदारी वाले होने चाहिए। 

श्री डेका ने कहा कि आज की पीढ़ी छत्तीसगढ़ के रामायण कालीन संस्कृति एवं साहित्य को भूल गयी है। हमारा राज्य बहुत सुंदर है और यहां की संस्कृति भी बहुत समृद्ध है। इसका प्रचार प्रसार होना चाहिए ताकि राज्य के बाहर के लोग यहां के बारे में जान सकें। श्री डेका ने कहा कि शब्दों में बहुत शक्ति होती है। शब्द का रूप ब्रह्म है। उन्हांेने बंकिमचंद्र चटर्जी के वंदे मातरम गीत का उल्लेख किया और कहा कि सारे देश को इन दो शब्दों ने जागृत कर दिया था। उन्होंने कहा कि साहित्य हमें जोड़ता है, हमें सोचने की नई दिशा देता है और हमें बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है।  हम सभी साहित्य को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं, संवाद की परंपरा को आगे बढ़ाएं और विचारों की यह रोशनी लगातार जलाए रखें। उन्होंने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में कम से कम एक ऐसा कार्य अवश्य करें, जो बिना किसी लेन-देन या व्यक्तिगत स्वार्थ के हो। ऐसे कार्य देश और समाज के समग्र विकास को मजबूती प्रदान करते हैं। 

समापन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में साहित्य की अविरल धारा बहती रही है। कालीदास, रविन्द्रनाथ टैगोर जैसे कवि एवं साहित्यकारों का इतिहास भी छत्तीसगढ़ से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी इस तरह के आयोजन अनवरत किए जाते रहेंगे।  

समापन समारोह की अध्यक्षता प्रख्यात रंगकर्मी, नाट्य लेखक डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने की। इस अवसर पर फिल्म अभिनेता एवं निर्देशक डॉ. चंद्र प्रकाश द्विवेदी, फिल्म निर्माता-निर्देशक श्री अनुराग बसु विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री आर कृष्णा दास, मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा , राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, राज्यपाल के विधिक सलाहकार श्री भीष्म प्रसाद पाण्डेय, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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रायपुर साहित्य उत्सव में ‘नाट्यशास्त्र और कला परंपरा’ पर परिचर्चा, भारतीय सांस्कृतिक विरासत पर हुआ विमर्श


रायपुर, 26 जनवरी 2026/रायपुर साहित्य उत्सव के अंतर्गत श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में रविवार को द्वितीय सत्र के दौरान “नाट्यशास्त्र और कला परंपरा” विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई।

 यह सत्र महान कला संरक्षक राजा चक्रधर सिंह को समर्पित रहा। कार्यक्रम के सूत्रधार राजेश गानोदवाले रहे। परिचर्चा में इंदिरा कला विश्वविद्यालय, खैरागढ़ की कुलपति डॉ. लवली शर्मा तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र से संबद्ध डॉ. सच्चिदानंद जोशी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने नाट्यशास्त्र की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नाट्यशास्त्र अपने आप में एक संपूर्ण शास्त्र है और जहां भी सृजनात्मकता है, वहां नाट्यशास्त्र की उपस्थिति दिखाई देती है। उन्होंने बताया कि तानपुरा निर्माण की परंपरा पर आधारित एक वृत्तचित्र का निर्माण किया गया है, जिससे पारंपरिक वाद्य निर्माण की प्रक्रिया को प्रलेखित किया जा सके।
उन्होंने कहा कि यूनेस्को के ‘मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर’ में नाट्यशास्त्र तथा भगवद्गीता की पांडुलिपियों को सम्मिलित किया जाना भारतीय ज्ञान परंपरा की वैश्विक मान्यता का प्रमाण है।

डॉ. जोशी ने गुरु–शिष्य परंपरा पर बल देते हुए कहा कि यह परंपरा केवल आधारभूत संरचना का विषय नहीं, बल्कि भाव और संस्कार का विषय है। उन्होंने बताया कि दीक्षा प्रणाली के अंतर्गत गुरु–शिष्य परंपरा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। डॉ. जोशी ने कहा कि वाद्य यंत्र बनाने वाले कारीगर प्रायः गांवों में रहते हैं और वे पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ इस परंपरा को आगे बढ़ाते हैं।

डॉ. लवली शर्मा ने कहा कि इंदिरा कला विश्वविद्यालय द्वारा दुर्लभ वाद्य यंत्रों के संरक्षण की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर स्थित बावड़ी का जीर्णोद्धार कर उसका संरक्षण किया गया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में वाद्य यंत्रों की देखरेख और अनुरक्षण से संबंधित पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, ताकि परंपरागत वाद्य संस्कृति को तकनीकी दृष्टि से भी संरक्षित किया जा सके। वाद्य यंत्र निर्माण से जुड़े शिल्पकारों को सम्मानित करने की परंपरा भी निभाई जा रही है।
उन्होंने इंदिरा कला विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित संस्थान के रूप में स्थापित करने तथा गुरु–शिष्य परंपरा को सशक्त रूप से लागू करने के अपने संकल्प को भी व्यक्त किया।

परिचर्चा में वक्ताओं ने कहा कि नाट्यशास्त्र और भारतीय कला परंपरा न केवल सांस्कृतिक विरासत हैं, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत भी हैं। इनके संरक्षण और संवर्धन हेतु शैक्षणिक संस्थानों तथा समाज की संयुक्त भूमिका आवश्यक है।

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रायपुर साहित्य उत्सव में बाल साहित्य की प्रासंगिकता पर गंभीर संवाद, डॉ. गोपाल दवे ने विज्ञानसम्मत लेखन को बताया अनिवार्य

रायपुर, 26 जनवरी 2026/ रायपुर साहित्य उत्सव के तीसरे दिन कवि-कथाकार अनिरुद्ध नीरव मंडप में बाल साहित्य की प्रासंगिकता का सत्र ख्यातिलब्ध साहित्यकार नारायण लाल परमार को समर्पित रहा। जिसमें साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश के अध्यक्ष डॉ. गोपाल दवे, बाल साहित्यकार श्री बलदाऊ राम साहू बतौर वक्ता परिचर्चा में शामिल हुए, जिसके सूत्रधार श्री एस के बिसेन रहे। इस अवसर पर देवभोग के कृष्ण कुमार अजनबी द्वारा लिखित बाल कविता संग्रह आंखों का तारा, श्री ओमप्रकाश जैन की पुस्तक जीवन चक्र और श्री संतोष कुमार मिरी की पुस्तक जीवन बोध का विमोचन किया गया। 

परिचर्चा में अपने संबोधन में डॉ. गोपाल दवे ने कहा कि बाल साहित्य का पाठक एकमात्र ऐसा पाठक है जो स्वयं क्रेता नहीं होता, न ही निर्णायक होता है। एक समय था जब बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों में बच्चे अपने पालकों से बाल साहित्य खरीदने की जिद करते थे। डॉ. दवे ने कहा कि हमें बच्चों को सरल साहित्य सिखाना होगा। अंग्रेजी के नाम पर हम कितने सारे उपक्रम कर रहे हैं। उन्होंने पालकों से अपील की कि बच्चों को बाल साहित्य लेकर दें साथ ही एक हिंदी शब्दकोश भी दें ताकि जब कोई शब्द समझ न आए वह शब्दकोश में ढूंढ सके।उन्होंने आज के समय में विज्ञानसम्मत बाल साहित्य के लेखन को अनिवार्य बताया। 

श्री बलदाऊ राम साहू ने कहा कि बाल साहित्य बच्चों को गढ़ता है, उन्हें विचार देता है। बाल साहित्य के बिना शिक्षा की कल्पना नहीं की जा सकती। बाल साहित्य को यदि हम पाठ्यपुस्तक से निकाल दें तो कुछ नहीं बचता। बाल साहित्य बच्चों को प्रेरित करता है। बच्चों को प्रोत्साहित करता है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि बच्चों में पढ़ने की परंपरा कम हो रही है, बाल पत्रिकाएं बंद होती जा रही हैं। 

श्री साहू ने कहा कि शिक्षक बच्चों का मूल्यांकन सही ढंग से नहीं कर पाते। लोग बाल साहित्य को मनोरंजन का साधन नहीं, सद्विचारों का विचारों का संग्रह है। बच्चों को संवेदनशील मनुष्य बनाने में बाल साहित्य का बड़ा महत्व है। श्री साहू ने बाल साहित्य को जीवन के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बाल साहित्य बच्चों के लिए भाषा संस्कार की पाठशाला है। उन्होंने कहा कि हमें बच्चों को बाल साहित्य पढ़ने के लिए प्रेरित करना होगा।

परिचर्चा के सूत्रधार श्री एस के बिसेन ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि धीरे-धीरे पुस्तकों से पंचतंत्र और हितोपदेश की कहानियां गायब हो रही हैं। उन्होंने नैतिक शिक्षा के पाठ में बाल साहित्य को बहुत जरूरी बताया और कहा कि बाल साहित्य संस्कार और व्यवहार का मूल आधार है।

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नवयुग में भारत बोध की अवधारणा पर रायपुर साहित्य उत्सव में मंथन, भारतीय शिक्षा नीति और मीडिया की भूमिका पर हुआ सार्थक संवाद

रायपुर, 26 जनवरी 2026/रायपुर साहित्य उत्सव के अंतर्गत श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में रविवार को “नवयुग में भारत बोध” विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। यह कार्यक्रम मावली प्रसाद श्रीवास्तव को समर्पित रहा। परिचर्चा के सूत्रधार श्री प्रभात मिश्रा थे। कार्यक्रम में डॉ. संजीव शर्मा एवं डॉ. संजय द्विवेदी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।

डॉ. संजीव शर्मा ने शिक्षा में भारत बोध की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति में भारतीय दृष्टि को समुचित स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति केवल आत्मकल्याण तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्व कल्याण की भावना से जुड़ी हुई है। हमारी दृष्टि सभी को अपने जैसा बनाने की नहीं, बल्कि विविधता में एकता की है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा की भूमिका सामान्य से कहीं अधिक व्यापक है और उसका उद्देश्य व्यक्ति को जाति-पाति तथा संकीर्ण बंधनों से मुक्त कर मानवीय मूल्यों से जोड़ना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में ईश्वर की अनुभूति मानव, जीव-जंतु और प्रकृति सभी में की जाती है। हमारी सांस्कृतिक शब्दावली को पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जाना चाहिए।


डॉ. शर्मा ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा स्तर पर भारत बोध से जुड़ी पाठ्यवस्तु में परिवर्तन आवश्यक है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि मुगलों के आक्रमण भौतिक थे, जबकि अंग्रेजों ने मानसिक आक्रमण कर भारतीयों में हीनभावना उत्पन्न की, जिससे बाहर निकलना आज की आवश्यकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि पाठ्यवस्तु और मानसिकता—दोनों में परिवर्तन जरूरी है, किंतु यह परिवर्तन भारतीय परिप्रेक्ष्य में होना चाहिए, न कि पश्चिमी पद्धति के अनुकरण से। उन्होंने उच्च शिक्षा की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि संस्थानों को केवल मान्यता और प्रतिष्ठा की संरचना से बाहर निकलकर विश्वस्तरीय शिक्षा के साथ उसका भारतीयकरण भी करना होगा। पंचतंत्र जैसी कथाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़कर प्रस्तुत करने की आवश्यकता भी उन्होंने रेखांकित की।

डॉ. संजय द्विवेदी ने कहा कि भारतीय भाषाओं में ज्ञान और विज्ञान दोनों समाहित हैं। आज का भारतीय युवा देश की विशिष्ट परंपरा और ज्ञान को विश्व स्तर तक पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने कभी अपने विचार दूसरों पर थोपे नहीं, बल्कि अपने श्रेष्ठ विचार विश्व के सामने प्रस्तुत किए, जैसा कि स्वामी विवेकानंद ने किया था।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति, पर्वत और नदियों तक को देवत्व के रूप में देखा जाता है। रामराज्य का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि राजतंत्र होते हुए भी वहां अंतिम व्यक्ति की बात सुनी जाती थी, जो लोकतांत्रिक चेतना का प्रतीक है।

डॉ. द्विवेदी ने कहा कि भारतीय पत्रकारिता को भी भारतीय मूल्यों के अनुरूप ढालने की आवश्यकता है। पश्चिमी मानकों पर आधारित पत्रकारिता भारत की सामाजिक-सांस्कृतिक आवश्यकताओं के अनुकूल नहीं है। उन्होंने वैचारिक साम्राज्यवाद को गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि भारत बोध का विस्तार सोशल मीडिया सहित सभी माध्यमों से होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि “भारत को जानो, भारत को मानो” ही भारत बोध का मूल सूत्र है। भारतीयता ही सही अर्थों में राष्ट्रभाव की अभिव्यक्ति है। भारत की नीतियां उसकी अपनी भूमि और परंपरा पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने आत्मविश्वास के अभाव को भारत बोध के मार्ग में बाधा बताते हुए कहा कि समाज में इसे स्थायी रूप देने के लिए शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

परिचर्चा में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही भारत बोध का सशक्त प्रसार संभव है और यही प्रक्रिया भारत की सांस्कृतिक चेतना को पुनर्स्थापित करने का आधार बनेगी।

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नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में साहित्य का महाकुंभ, रायपुर साहित्य उत्सव-2026 के तीसरे दिन भी उमड़ा साहित्यप्रेमियों का सैलाब

रायपुर, 26 जनवरी 2026/ नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में आयोजित तीन दिवसीय ‘रायपुर साहित्य उत्सव-2026’ में साहित्यप्रेमियों का उत्साह देखते ही बन रहा है। उत्सव के तीसरे दिन भी परिसर में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति रही। विभिन्न आयु-वर्ग के नागरिकों, छात्रों, साहित्यकारों और शोधार्थियों ने उत्सव में पहुँचकर सक्रिय रूप से सहभागिता की।
साहित्य उत्सव में आयोजित विविध सत्रों, गोष्ठियों और परिचर्चाओं को सुनने के लिए सुबह से ही लोगों का आना शुरू हो गया था। पंजीयन काउंटरों में लोगों की लंबी कतारें दिखाई दीं। अब तक उत्सव में अत्यधिक संख्या में नागरिकों ने पंजीयन कराया है, जो साहित्यिक गतिविधियों के प्रति लोगों की गहरी रुचि को दर्शाता है।

गौरतलब है कि पुरखौती मुक्तांगन प्रांगण पर आयोजित साहित्य उत्सव में विभिन्न विषयों पर आधारित सत्रों में साहित्य, संस्कृति, कला, मीडिया, समाज और तकनीक से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। प्रख्यात वक्ताओं, लेखकों और विशिष्ट अतिथियों ने अपनी उपस्थिति से उत्सव को और भी समृद्ध बनाया।
रायपुर साहित्य उत्सव राज्य की साहित्यिक और सांस्कृतिक धरोहर को नई दिशा देने का प्रयास है। उत्सव में प्रतिदिन बड़ी संख्या में सहभागी पहुंचे, जिससे यह आयोजन प्रदेश में साहित्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और जनता के जुड़ाव का प्रतीक बन गया है।

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युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और एकता का संदेश लेकर केरसई में शुरू हुई स्वामी विवेकानंद स्मृति नॉकआउट फुटबॉल प्रतियोगिता

केरसई में खेल भावना का महाकुंभ: स्वामी विवेकानंद स्मृति नॉकआउट फुटबॉल प्रतियोगिता 2026 का भव्य शुभारंभ

जशपुर/केरसई 25 जनवरी 2026
खेल केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि युवाओं के सर्वांगीण विकास, अनुशासन, आत्मविश्वास और सामाजिक एकता का सशक्त जरिया है। इसी भावना को साकार करते हुए केरसई में स्वामी विवेकानंद स्मृति नॉकआउट फुटबॉल प्रतियोगिता 2026 का भव्य शुभारंभ अस्पताल के पीछे स्थित खेल मैदान में उत्साह और जोश के साथ किया गया। यह प्रतिष्ठित प्रतियोगिता पिछले वर्ष 2008 से लगातार प्रतिवर्ष आयोजित की जा रही है और आज क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बन चुकी है।
इस आयोजन के मुख्य अतिथि वरिष्ठ नागरिक अर्जुन प्रसाद साव रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि श्रीमती संगीता तिग्गा ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। दोनों अतिथियों ने खिलाड़ियों से खेल को खेल भावना के साथ खेलने, हार-जीत को समान भाव से स्वीकार करने और अनुशासन के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि खेल युवाओं को नशे, अपराध और भटकाव से दूर रखकर एक सकारात्मक दिशा प्रदान करता है।
कार्यक्रम में जनपद सदस्य एवं भाजपा नेता गोपाल कश्यप ने भी खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि खेल जीवन में टीमवर्क, नेतृत्व और संघर्ष की भावना विकसित करता है। उन्होंने कहा कि मैदान में उतरने वाला हर खिलाड़ी पहले से ही विजेता होता है, क्योंकि वह अपने भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानने का साहस करता है।
प्रतियोगिता का उद्घाटन मैच धरमजयगढ़ और मेंडरबहार की टीमों के बीच खेला गया, जो अत्यंत रोमांचक रहा। मुकाबले में धरमजयगढ़ ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए 2 गोल किए, जबकि मेंडरबहार ने 1 गोल दागा। अंततः धरमजयगढ़ ने यह मुकाबला जीतकर टूर्नामेंट में मजबूत शुरुआत की।
यह प्रतियोगिता तीन दिवसीय है, जिसमें क्षेत्र की कई टीमों ने भाग लिया है। विजेता टीम को 51 हजार रुपये नकद एवं चमचमाती ट्रॉफी, जबकि उपविजेता टीम को 25 हजार रुपये नकद एवं ट्रॉफी प्रदान की जाएगी। इसके अलावा बेस्ट गोलकीपर, बेस्ट प्लेयर, टॉप स्कोरर सहित कई अन्य श्रेणियों में दर्जनों पुरस्कार खिलाड़ियों को दिए जाएंगे, जिससे उनका मनोबल और उत्साह और बढ़ेगा।
कार्यक्रम के दौरान भाजपा मंडल उपाध्यक्ष सीताराम गुप्ता, लक्ष्मी प्रसाद साव, दीपक वर्मा (सरपंच पति), अशोक गुप्ता, गोपाल यादव, दुधेश्वर साय पैकरा सहित अनेक गणमान्य नागरिक और सैकड़ों खेल प्रेमी मौजूद रहे। दर्शकों ने तालियों और उत्साह से खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया।
आयोजकों ने बताया कि यह प्रतियोगिता केवल खेल आयोजन नहीं, बल्कि युवाओं को एक मंच देने का प्रयास है, जहां वे अपनी प्रतिभा को निखार सकें। स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरित यह टूर्नामेंट युवाओं में आत्मविश्वास, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करता है।
केरसई में आयोजित यह प्रतियोगिता एक बार फिर साबित करती है कि खेल समाज को जोड़ने, नई ऊर्जा भरने और भविष्य की मजबूत नींव रखने का सशक्त माध्यम है।

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सेवा और संस्कार की मिसाल बना बाबा भगवान राम ट्रस्ट, जशपुर के बालक छात्रावास लुईकोना में बच्चों को मिला ठंड से राहत का संबल

ठंड में बच्चों के चेहरे पर लौटी मुस्कान

बाबा भगवान राम ट्रस्ट ने बालक छात्रावास लुईकोना के बच्चों को बांटे गर्म कपड़े

जशपुर 25 जनवरी 2026 : 
सेवा, संस्कार और सामाजिक दायित्व की भावना के साथ बाबा भगवान राम ट्रस्ट सोगड़ा, जशपुर द्वारा जरूरतमंद बच्चों के लिए लगातार जनसेवा के कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में रविवार 25 जनवरी 2026 को विकासखंड जशपुर अंतर्गत बालक छात्रावास लुईकोना में अध्ययनरत बच्चों को ठंड से बचाव हेतु गर्म कपड़ों का वितरण किया गया।

यह कार्यक्रम बाबा भगवान राम ट्रस्ट सोगड़ा, जशपुर एवं श्री सर्वेश्वरी समूह महिला संगठन, जशपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम ट्रस्ट के वर्तमान अध्यक्ष पूज्यपाद बाबा गुरूपद संभव राम जी के निर्देशन में संपन्न हुआ। प्रातः 11:30 बजे छात्रावास परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग 42 बच्चों को ऊनी टोपी, स्वेटर, मोजे एवं बिस्किट वितरित किए गए।

जानकारी के अनुसार इससे पूर्व भी ट्रस्ट द्वारा इसी प्रकार के सेवा कार्य किए जा चुके हैं। 14 दिसंबर 2025 को बालक प्राथमिक शाला आश्रम, नीमगांव में 69 बच्चों को तथा 18 जनवरी 2026 को बालक प्राथमिक शाला गिरला में 41 बच्चों को गर्म कपड़े वितरित किए गए थे। इस प्रकार अब तक ट्रस्ट द्वारा आश्रम एवं छात्रावासों के कुल 153 बच्चों को ठंड से बचाव हेतु सामग्री उपलब्ध कराई जा चुकी है।

कार्यक्रम का शुभारंभ बाबा भगवान राम ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष परम पूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी के चित्र पर विधिवत पूजन-अर्चन के साथ किया गया। इसके पश्चात ट्रस्ट के ट्रस्टी श्री कृष्ण कुमार (टप्पू जी) द्वारा बच्चों को गर्म कपड़े वितरित कर कार्यक्रम का विधिवत आरंभ किया गया। वितरण कार्य में श्री सर्वेश्वरी समूह महिला संगठन, जशपुर की सदस्यों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित बच्चों, छात्रावास अधीक्षक, संकुल समन्वयक एवं ट्रस्ट के सदस्यों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगान गाया तथा “भारत माता की जय” के उद्घोष के साथ वातावरण देशभक्ति से गूंज उठा।

प्रारंभिक सत्र में श्री कमल दूबे ने ट्रस्ट अध्यक्ष पूज्यपाद बाबा गुरूपद संभव राम जी के नेतृत्व में संचालित सेवा अभियानों के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य एवं नैतिक विकास के प्रति ट्रस्ट की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

कार्यक्रम के अंत में बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने, अनुशासन का पालन करने एवं जीवन में लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी गई। बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।

इस अवसर पर श्री सर्वेश्वरी समूह महिला संगठन की वरिष्ठ सदस्याएं सरिता श्रीवास्तव, कविता सिंह, सरिता अखौरी, हेमलता सिंह, रंजिता सांरगी, शालिनी श्रीवास्तव, पूनम दूबे, सीमा सिंह, अंजू सिन्हा, अनुपमा सिंह, अनिमा मिश्रा, अनामिका सिन्हा, स्नेहा उपाध्याय, बबीता सिन्हा, लक्ष्मीप्रिया सिंह, निशा सिंह, पम्मी सिंह एवं सौम्या सुरभि सहित बाबा भगवान राम ट्रस्ट के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

सम्पूर्ण कार्यक्रम श्री नरेन्द्र सिन्हा, जिला मिशन समन्वयक, समग्र शिक्षा जशपुर के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम को सफल बनाने में श्री कमल दूबे, श्री प्रवीण सिन्हा, संकुल समन्वयक श्री सत्यम सिंह नायक एवं छात्रावास अधीक्षक श्री कालेश्वर राम का सराहनीय सहयोग रहा।

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पठन की आदत व्यक्तित्व विकास की महत्वपूर्ण कड़ी-लोकसभा सांसद,शासकीय जिला ग्रंथालय, रायगढ़ में “पठन की आदतों का विकास” पर व्याख्यान आयोजित

रायगढ़, 25 जनवरी 2026/ शासकीय जिला ग्रंथालय, रायगढ़ में आज “पठन की आदतों का विकास” विषय पर सारगर्भित एवं प्रेरक व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलन और पुष्प अर्पण के साथ हुआ। यह आयोजन नेशनल लाइब्रेरी मिशन के अंतर्गत विद्यार्थियों में नियमित अध्ययन और पठन संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया। कार्यक्रम में लोकसभा सांसद श्री राधेश्याम राठिया ने कहा कि पुस्तकालय ज्ञान का सशक्त केंद्र है और पढ़ने की आदत बच्चों के व्यक्तित्व विकास की मजबूत नींव तैयार करती है। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि पठन को जीवन शैली का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए, क्योंकि यही भविष्य निर्माण की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
            विषय-विशेषज्ञों ने पठन संस्कृति के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। नागपुर विश्वविद्यालय से प्रोफेसर शालिनी लिहितकर ने पुस्तकालय और सूचना विज्ञान के संदर्भ में अध्ययन पद्धति समझाई। राष्ट्रीय पुस्तकालय मिशन, कोलकाता से प्रोजेक्ट ऑफिसर श्री दीपांजन चटर्जी ने मिशन की गतिविधियों की जानकारी दी। शासकीय किशोरी मोहन त्रिपाठी कन्या महाविद्यालय से सहायक प्राध्यापक श्री रंजीत बारीक और करियर मार्गदर्शक श्री अबरार हुसैन ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में पढ़ाई की भूमिका पर मार्गदर्शन दिया।      जिला शिक्षा अधिकारी डॉ.के.वी.राव ने कहा कि डिजिटल युग में भी पुस्तकों का महत्व कम नहीं हुआ है। उन्होंने विद्यार्थियों में पढ़ने की घटती प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए पठन को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। कार्यक्रम का संचालन सेजेस नोडल अधिकारी व्याख्याता श्री बीर सिंह ने किया। जिला ग्रंथालय प्रभारी श्री अशोक पटेल ने आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम में शिक्षकों, अधिकारियों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया।

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शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी स्टेडियम में गणतंत्र दिवस समारोह की फुल ड्रेस रिहर्सल संपन्नसोमवार को प्रातः 9 बजे आयोजित होगा जिला स्तरीय मुख्य समारोह

रायगढ़, 25जनवरी 2026/ शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी स्टेडियम रायगढ़ में 26 जनवरी 2026 को आयोजित होने वाले जिला स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारियों के तहत आज फुल ड्रेस रिहर्सल संपन्न हुई। रिहर्सल के दौरान समारोह में शामिल सभी कार्यक्रमों का क्रमबद्ध एवं व्यवस्थित अभ्यास किया गया।
               इस अवसर पर कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी, पुलिस अधीक्षक श्री दिव्यांग पटेल, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिजीत बबन पठारे, सहायक कलेक्टर श्री अक्षय डोसी, नगर निगम आयुक्त श्री बृजेश सिंह क्षत्रिय, अपर कलेक्टर श्री अपूर्व प्रियेश टोप्पो एवं श्री रवि राही, संयुक्त कलेक्टर श्रीमती पूजा बंसल सहित प्रशासनिक एवं जिला स्तरीय अधिकारी तथा बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
              रिहर्सल के दौरान सहायक कलेक्टर श्री अक्षय डोसी ने मुख्य अतिथि की भूमिका निभाते हुए राष्ट्रीय ध्वज फहराया तथा परेड की सलामी ली। इसके पश्चात परेड निरीक्षण, मार्च पास्ट एवं स्कूली बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी गईं। फुल ड्रेस रिहर्सल के दौरान कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने समारोह स्थल का निरीक्षण कर मंच एवं बैठक व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, विद्युत आपूर्ति, पेयजल सहित अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी ली और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
            उल्लेखनीय है कि 26 जनवरी को शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी स्टेडियम रायगढ़ में आयोजित जिला स्तरीय मुख्य समारोह में आदिम जाति विकास, अनुसूचित जाति विकास, पिछड़ा वर्ग विकास, अल्पसंख्यक विकास विभाग, कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री श्री रामविचार नेताम द्वारा प्रातः 9 बजे राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा। मुख्य समारोह में छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल 6वीं वाहिनी, जिला पुलिस बल, महिला पुलिस बल, नगर सेना (महिला एवं पुरुष), एनसीसी कैडेट एवं स्काउट-गाइड की टुकड़ियों द्वारा भव्य मार्च पास्ट किया जाएगा। साथ ही शहीदों के परिजनों का सम्मान, दिव्यांग विद्यार्थियों को टैब एवं स्मार्ट वॉच वितरण, झांकियों की प्रस्तुति, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों का सम्मान किया जाएगा।

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गणतंत्र दिवस के अवसर पर जशपुर जिले में 26 जनवरी को रहेगा शुष्क दिवस, जिले में समस्त दुकानों पर मदिरा बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध

जशपुर 25 जनवरी 2026 
गणतंत्र दिवस के अवसर पर जशपुर जिले में 26 जनवरी 2026 को शुष्क दिवस घोषित किया गया है। कलेक्टर रोहित व्यास ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं।

जारी आदेश के अनुसार आबकारी आयुक्त, छत्तीसगढ़, नवा रायपुर अटल नगर के निर्देशों के तहत 26 जनवरी को जिले की समस्त देशी-विदेशी मदिरा दुकानें पूर्णतः बंद रहेंगे। इस दिन मदिरा का क्रय-विक्रय एवं किसी भी प्रकार का संव्यवहार पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।

कलेक्टर ने संबंधित विभागों को आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। उल्लंघन की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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रसोईया भी स्कूल परिवार का अभिन्न हिस्सा” –गरम भोजन देने वाले हाथों को भी चाहिए सम्मान: रसोईया संघ की हड़ताल पर शिक्षक साझा मंच का समर्थन

रायपुर //- 24 जनवरी2026 : 
        छत्तीसगढ़ प्रदेश में विगत 20 दिनों से अधिक समय से प्रदेश के प्राथमिक एवं मिडिल स्कूलों में बच्चों को मध्याह्न भोजन पका कर खिलाने वाले रसोइयों का हड़ताल चल रहा है। उक्त हड़ताल से प्रदेश के 50 प्रतिशत से अधिक प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में मध्यान्ह भोजन की योजना पर काफी असर पड़ा है।
         हालांकि मध्याह्न भोजन के संचालन का कार्य संबंधित विद्यालय ग्रामों के महिला स्वयं सहायता समूहो द्वारा किया जाता है। खाद्य सामग्रियों की पूर्ति सब्जी एवं सब्जी बनाने के विभिन्न सामग्रियों की पूर्ति मध्याह्न भोजन संचालन समूह द्वारा किया जाता है।
         रसोइयों को तनख्वाह सरकार देती है। अब रसोइयों के हड़ताल में चले जाने से सरकार ने संबंधित महिला स्वयं सहायता समूहों को मध्याह्न भोजन बनाने के लिए कहा है। इसके बाद भी प्रदेश के अधिकांश स्कूलों में एमडीएम नहीं बनने की स्थिति निर्मित हो रही है। यह बात उल्लेखनीय की मध्याह्न भोजन रसोईया विगत 1995-98 से स्कूलों में कार्यरत हैं।
        उक्त रसोईया सुबह 10:00 बजे स्कूलों में खाना बनाने आते हैं। स्कूल आकर आग जालना, गैस चलाना, बर्तन साफ करना, सब्जी काटना, पानी भरना एवं पूरे खाना बनाना। खाना बनाकर बच्चों को परोसने सहित मध्याह्न भोजन संचालन का पूरा काम रसोइयों के द्वारा किया जाता है।
        पूरे कार्य को करते हुए रसोइयों को दिनभर लग जाता है। सुबह 10 - 11 बजे स्कूल गए उन्हें 2:00 से 3:00 बज जाता है। इस प्रकार दिनभर का समय उनको लगता है।
      इसके बदले उन्हें मात्र ₹ 2000 /- महीने का भुगतान होता है।अर्थात एक दिन में लगभग 66 रुपए का ही भुगतान होता है। अब सवाल यह उठता है कि मध्याह्न भोजन रसोईया भी एक मजदूर हैं और उन्हें दिन भर का मजदूरी भी नहीं मिलता।
       केंद्र सरकार के विभिन्न एजेंसीयो द्वारा भी यह कहा जाता है कि किसी भी क्षेत्र के मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी दर कम से कम 220 रुपए प्रतिदिन के आधार पर भुगतान तो होने ही चाहिए। केंद्र सरकार ने न्यूनतम मजदूरी दर रोजगार गारंटी का रखा है। जिसके आधार पर रोजगार गारंटी के मजदूरों को प्रतिदिन ₹ 220 रुपए रोजी मिलता है। जबकि रोजगार गारंटी के अंतर्गत मिट्टी संबंधित खेती कार्य में तीन से चार घंटे में मजदूर अपना काम कर लेते हैं। जबकि इससे ज्यादा समय का काम तो रसोइयों द्वारा किया जाता है।
          छत्तीसगढ़ शिक्षक साझा मंच के तहत विभिन्न संगठनों ने मध्याह्न भोजन रसोईया संघ के हड़ताल का समर्थन दिया है। साझा मंच के विभिन्न प्रदेश अध्यक्षगण रविन्द्र राठौर प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन, विरेंद्र दुबे प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ, कृष्ण कुमार नवरंग प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ गवर्नमेंट एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन, राजनारायण द्विवेदी प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक महासंघ, भूपेंद्र सिंह बनाफर प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ सर्व शिक्षक कल्याण संघ, धरमदास बंजारे प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ प्रदेश विद्यालयीन शिक्षक संघ, जाकेश साहू प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ जागरूक शिक्षक संघ......
           ..........कमल दास मुरचले प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ संयुक्त प्रधान पाठक संघ, शंकर साहू प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ शासकीय शिक्षक फेडरेशन, विष्णु प्रसाद साहू छत्तीसगढ़ व्याख्याता वाणिज्य विकास संघ, प्रदीप लहरे प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ आम शिक्षक संघ, प्रीतम कोसले प्रदेश अध्यक्ष ट्राइबल एजुकेशन एकीकृत शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ एवं अनिल कुमार टोप्पो प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय शिक्षक संघ आदि ने अपना बयान जारी करते हुए राज्य सरकार से मांग की है कि राज्य सरकार द्वारा मध्याह्न भोजन रसोईया संघ के आंदोलन पर सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाए तथा सरकार द्वारा मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए इनको न्यूनतम मजदूरी भुगतान किया जाना चाहिए।
        क्योंकि प्रदेश के रसोईया भाई बहन लोग भी हमारे स्कूल परिवार के ही एक हिस्से है। स्कूल संचालक के लिए स्कूलों के शिक्षक, मध्याह्न भोजन रसोईया एवं स्कूलों के सफाई कर्मी अर्थात तीनों महत्वपूर्ण कड़ी है। क्योंकि एक ओर जहां स्कूल सफाई कर्मी स्कूल आकर स्कूलों की साफ सफाई करना, स्कूल खोलना बंद करना आदि काम करते हैं। वहीं दूसरी ओर स्कूली बच्चों को शिक्षा देने का काम शिक्षक करते हैं। 
      लेकिन स्कूली बच्चों को गरमा गरम भोजन बनाकर खिलाने का सबसे महत्वपूर्ण कार्य रसोइयों द्वारा किया जाता हैं। उन्हें भी जीवन यापन के लिए मूलभूत सुविधाए चाहिए।जिसके अंतर्गत उन्हें रोटी, कपड़ा और मकान की आवश्यकता होती है। उनके भी छोटे-छोटे बाल बच्चे हैं।उनको भी पढ़ाई लिखाई से लेकर सब्जी भाजी, राशन आदि की जरूरत होती है।
        ऐसे में न्यूनतम मजदूरी भुगतान अथवा कलेक्टर दर पर उनका वेतन भुगतान किए जाने की मांग छत्तीसगढ़ शिक्षक साझा मंच से संबद्ध विभिन्न संगठनों ने सरकार से किया है।

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शैक्षणिक जीवन की नई शुरुआत: जशपुर में सरस्वती शिशु मंदिर द्वारा बसंत पंचमी पर 30 बच्चों का विद्यारंभ संस्कार आयोजित

जशपुरनगर 23 जनवरी 26 :  सरस्वती शिशु मंदिर जशपुर में बसंत पंचमी का पर्व श्रद्धा, उत्साह और सांस्कृतिक गरिमा के साथ धूमधाम से मनाया गया। यह पर्व माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है, जिसे बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक माना जाता है। बसंत पंचमी केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि यह ज्ञान, प्रकृति और नए आरंभ का उत्सव है, जो जीवन में सीखने, सृजन करने और उत्साह बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

इस पावन अवसर पर भारतीय परंपरा के 16 संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण विद्यारंभ संस्कार वैदिक मंत्रोच्चार एवं हवन के साथ संपन्न कराया गया। कार्यक्रम में कुल 30 बच्चों का विद्यारंभ संस्कार विधिवत रूप से कराया गया, जिससे उनके शैक्षणिक जीवन की शुभ शुरुआत हुई। माता-पिता अपने बच्चों को लेकर विद्यालय पहुंचे और पूरे विधि-विधान के साथ विद्या आरंभ संस्कार कराया। कई बच्चों को पहली बार स्लेट और पेंसिल पकड़ाकर शिक्षा की शुरुआत कराई गई।

कार्यक्रम का संचालन पुजारी आशीष सतपति द्वारा वैदिक विधि-विधान से किया गया। विद्यालय परिसर को पीले वस्त्रों, पुष्पों और आकर्षक सजावट से सजाया गया था। पीला रंग ज्ञान, ऊर्जा और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, जिसे बसंत पंचमी पर विशेष महत्व दिया जाता है, जिससे संपूर्ण वातावरण उल्लासपूर्ण और भक्तिमय बना रहा।

इस गरिमामय अवसर पर विद्यालय समिति के व्यवस्थापक रामनिवास अग्रवाल, अध्यक्ष जनार्दन सिन्हा, विकासखंड अधिकारी श्रीमती कल्पना टोप्पो, प्राचार्य संजय कुमार यादव, प्रधानाचार्य रामानंद राम, समस्त आचार्यगण, दीदीजी, अभिभावक, माताएं, कर्मचारी बंधु-भगिनियां एवं बड़ी संख्या में बच्चे उपस्थित रहे।

विद्यालय की प्रार्थना सभा में यह आयोजन अत्यंत हर्षोल्लास, वात्सल्यमयी, स्नेहिल और प्रेरणादायक वातावरण में संपन्न हुआ। उपस्थित अतिथियों ने बच्चों को आशीर्वाद देते हुए शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करने से ज्ञान, बुद्धि और सफलता की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के साथ विद्यालय परिवार ने इस पर्व को संस्कार, शिक्षा और सांस्कृतिक चेतना के संदेश के साथ मनाया। कार्यक्रम ने न केवल धार्मिक परंपराओं को सशक्त किया, बल्कि बच्चों और अभिभावकों में शिक्षा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और संस्कारों के प्रति सम्मान की भावना को भी प्रोत्साहित किया।

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रायगढ़ में 17 महाविद्यालयों के प्राचार्यों को जारी नोटिस, आंतरिक शिकायत समिति न बनाने पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लागू

आंतरिक शिकायत समिति गठित नहीं करने वाले 17 महाविद्यालय के प्राचार्यों को नोटिस

सी-बॉक्स पोर्टल पर पंजीयन अनिवार्य, समिति नहीं बनाने पर 50 हजार रुपए का जुर्माना

रायगढ़, 23 जनवरी 2026/ कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न की रोकथाम को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। ऐसे सभी कार्यालय एवं शैक्षणिक संस्थान, जहाँ 10 या उससे अधिक अधिकारी/कर्मचारी कार्यरत हैं, वहाँ आंतरिक शिकायत समिति का गठन अनिवार्य है। इसके बावजूद जिले के 17 महाविद्यालयों में समिति का गठन नहीं किए जाने पर संबंधित प्राचार्यों को नोटिस जारी किया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि कलेक्टर द्वारा प्रकरणों की समीक्षा के पश्चात सभी प्राचार्यों को 03 दिवस के भीतर आवश्यक कार्रवाई पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।
              उल्लेखनीय है कि कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न रोकने के लिए प्रत्येक कार्यालय जहां 10 या 10 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां पर आंतरिक शिकायत  समिति का गठन किया जाना अनिवार्य है। समिति का गठन नहीं करने या असफल रहने पर अधिनियम की धारा 26 के अंतर्गत 50 हजार रुपए जुर्माने का प्रावधान है। इस संबंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय में पारित आदेश पिटिशन  क्रमांक 1244/2017 के निर्देश दिनांक 13.12.2024 तथा छ.ग.महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रत्येक संस्थान में जहां 10 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत हैं। लैंगिक उत्पीड़न 2023 के प्रावधान अनुसार सी-बॉक्स पोर्टल पर ऑनलाईन पंजीयन तथा पोर्टल पर ON Bord पश्चात् आंतरिक शिकायत समिति की पोर्टल पर एन्ट्री करना अनिवार्य है।

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हाथी प्रभावित क्षेत्रों में जानमाल की सुरक्षा के लिए जन जागरूकता जरूरी-कलेक्टर

रायगढ़, 23 जनवरी 2026/ जिले में जंगली हाथियों की सुरक्षा तथा मानव-हाथी द्वंद्व के कारण होने वाली जन-धन की क्षति को रोकने के उद्देश्य से वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा जिला स्तरीय समन्वय समिति बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने की। बैठक में रायगढ़ वनमण्डलाधिकारी श्री अरविंद पी.एम., धरमजयगढ़ वनमण्डलाधिकारी श्री जितेन्द्र उपाध्याय, उप मंडलाधिकारी रायगढ़ श्री तन्मय कौशिक, डिप्टी कलेक्टर श्री धनराज मरकाम सहित वन, राजस्व, पुलिस, विद्युत, कृषि एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
            कलेक्टर ने कहा कि हाथी प्रभावित क्षेत्रों में जनहानि की रोकथाम जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने इस दिशा में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने, ग्रामीण स्तर पर कोटवारों को सतर्क रखने तथा सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ सतत रूप से कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक में हाथी प्रभावित वन एवं ग्रामीण क्षेत्रों से गुजरने वाली विद्युत लाइनों को मानक ऊंचाई पर संधारित रखने, नीचे झूल रहे तारों को दुरुस्त करने तथा नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। कलेक्टर ने विद्युत सुरक्षा से संबंधित कार्यों में सतर्कता बरतने एवं आवश्यक सुधार समय पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
             कलेक्टर ने फसल, संपत्ति एवं अन्य क्षति के मामलों में त्वरित सर्वेक्षण, आकलन एवं समयबद्ध मुआवजा भुगतान सुनिश्चित करने, राजस्व अमलों को मौके पर निरीक्षण कर आवश्यक दस्तावेज समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए। मृत्यु प्रकरणों में मुआवजा भुगतान में विलंब न हो, इसके लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट की स्पष्टता एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु चिकित्सकों को आवश्यक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर भी चर्चा की गई। बैठक में हाथी मूवमेंट वाले मार्गों एवं सड़कों पर ट्रैफिक नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन तथा सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराने के लिए पुलिस विभाग की सक्रिय भूमिका पर विचार किया गया। इसके साथ ही अवैध शिकार एवं वन उपज के अवैध परिवहन पर निगरानी रखते हुए नियमित पेट्रोलिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में कृषि कार्य के दौरान विद्युत सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई। 
            बैठक में कृषकों को सुरक्षित एवं स्थायी विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराने, विद्युत विभाग को प्राप्त आवेदनों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करने तथा किसानों को विद्युत सुरक्षा संबंधी सावधानियों के प्रति जागरूक करने पर सहमति व्यक्त की गई, जिससे संभावित दुर्घटनाओं को रोका जा सके। इसके साथ ही हाथी गतिविधियों की निगरानी हेतु टेक्नोलॉजी आधारित उपाय अपनाने, समय पर सूचना तंत्र को सुदृढ़ करने तथा मुआवजा प्रकरणों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की व्यवस्था पर भी चर्चा की गई। बैठक में हाथी प्रभावित क्षेत्रों के उपार्जन केंद्रों से धान का त्वरित उठाव सुनिश्चित करने तथा समन्वित प्रयासों से मानव-हाथी द्वंद्व की घटनाओं को न्यूनतम करने पर सहमति व्यक्त की गई।

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रायगढ़ के मास्टर राकेश मिंज और आर्यन खेस ने अदम्य साहस और सूझबूझ दिखाते हुए डूबते पांच साल के बालक की जान बचाई, अब राज्य वीरता पुरस्कार से होंगे सम्मानित

रायगढ़, 23 जनवरी 2026/ जिले के दो होनहार बालक मास्टर राकेश मिंज एवं आर्यन खेस ने अदम्य साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए एक मासूम की जान बचाकर पूरे जिले को गौरवान्वित किया है। कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर दोनों बच्चों का नाम राज्य वीरता पुरस्कार के लिए प्रस्तावित किया गया था, जिसे शासन द्वारा स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। अब दोनों वीर बालकों को 26 जनवरी को राज्य स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह में राज्य वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। दोनों को 25 हजार रुपए की राशि, प्रशस्ति पत्र एवं मेडल प्रदान किया जाएगा। कलेक्टर ने दोनों बच्चों को उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं।
          महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री एल.आर.कच्छप ने बताया  कि 24 सितंबर 2025 को एक 05 वर्षीय बालक दादू मिंज पानी में डूब रहा था। समय रहते राकेश और आर्यन ने साहस दिखाते हुए उसे पानी से बाहर निकाला। बालक के पेट में पानी भर जाने के कारण उसकी हालत गंभीर थी, लेकिन दोनों ने सूझबूझ से पेट दबाकर पानी निकाला और उसकी जान बचाई।

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रायगढ़ की जीवनदायिनी केलो परियोजना से समृद्धि की नई धारा, कृषि विकास और जल सुरक्षा की बनी मजबूत आधारशिला,कलेक्टर ने समीक्षा बैठक में सकारात्मक चर्चा,  कर  विकास की श्रृंखला को आगे बढ़ाया

रायगढ़, 23 जनवरी 2026। रायगढ़ जिले की जीवनदायिनी केलो वृहद सिंचाई परियोजना आज जिले के कृषि आधारित विकास, जल सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि की मजबूत रीढ़ के रूप में स्थापित हो चुकी है। इसी क्रम में कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने आज जिला कलेक्टोरेट स्थित सभाकक्ष में केलो परियोजना की समीक्षा बैठक लेकर प्रभावित ग्रामों के प्रमुखों से सकारात्मक संवाद किया तथा परियोजना की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की।

बैठक के दौरान कलेक्टर श्री चतुर्वेदी ने भू-अर्जन एवं पुनर्वास से संबंधित मुआवजा वितरण को मिशन मोड में शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने प्रभावित ग्रामों के प्रतिनिधियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनके त्वरित निराकरण के लिए संबंधित विभागीय अधिकारियों को  आवश्यक दिशा-निर्देश  दिए।  साथ ही, उन्होंने परियोजना से जुड़े सभी प्रगतिरत कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने पर विशेष जोर दिया।
विभागीय अधिकारियों द्वारा जानकारी दी गई कि केलो वृहद सिंचाई परियोजना को शासन से तृतीय पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। परियोजना की वर्तमान स्वीकृत लागत 1182.90 करोड़ रुपए है, जिससे शेष कार्यों को तीव्र गति मिली है। परियोजना अंतर्गत बांध, नहर एवं पुनर्वास के लिए कुल 2548 हेक्टेयर भूमि में से 2517 हेक्टेयर भूमि का अर्जन पूर्ण कर लिया गया है, जो लगभग 99 प्रतिशत है। अर्जित भूमि के बदले अधिकांश प्रभावित हितग्राहियों को मुआवजा राशि का भुगतान किया जा चुका है।
केलो बांध के डूबान क्षेत्र से विस्थापित सभी परिवारों को पुनर्वास ग्रामों में निःशुल्क आवासीय भू-खंड, सड़क, बिजली एवं पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के साथ सुव्यवस्थित रूप से बसाया गया है। 01 जनवरी 2014 के बाद पारित भू-अर्जन प्रकरणों में लगभग 90 प्रतिशत पुनर्वास अनुदान का भुगतान पूर्ण किया जा चुका है तथा शेष राशि का वितरण निरंतर जारी है।

निर्माण कार्यों की प्रगति पर नजर डालें तो परियोजना अंतर्गत 1295 मीटर लंबा एवं 24.22 मीटर ऊँचा स्पील-वे बांध, 142.90 मीटर तथा शेडल-2 बांध का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। कुल 311.945 किलोमीटर नहरों में से 252.36 किलोमीटर नहरों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। 85 लघु नहरों में से 29 का कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण कर लिया गया है, जबकि शेष नहरों का निर्माण कार्य तेज गति से प्रगति पर है।
केलो वृहद सिंचाई परियोजना के माध्यम से रायगढ़, खरसिया एवं चंद्रपुर विधानसभा क्षेत्र के कुल 164 ग्रामों की 21225 हेक्टेयर कृषि भूमि को खरीफ फसल हेतु सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। वर्तमान में 18515 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित की जा चुकी है, जिससे किसानों की उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है।
केलो बांध से रायगढ़ शहर एवं आसपास के क्षेत्रों को पेयजल एवं निस्तार हेतु सतत जल प्रदाय किया जा रहा है। इसके लिए बांध में 4.44 मि.घ.मी. जल का प्रावधान रखा गया है। साथ ही क्षेत्र के औद्योगिक संस्थानों को भी जल आबंटन किया गया है, जिससे औद्योगिक विकास को भी बल मिला है।
बांध निर्माण के बाद क्षेत्र में भू-जल स्तर में निरंतर सुधार दर्ज किया गया है। इसके अतिरिक्त, रायगढ़ जिला मुख्यालय से मात्र 8 किलोमीटर की दूरी पर पर्यटन सह पर्यावरणीय उद्यान का विकास किया गया है, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिला है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं। वर्ष 2015 से केलो बांध में प्रारंभ मत्स्य उत्पादन के माध्यम से अब तक 214 परिवारों को आजीविका का स्थायी साधन प्राप्त हुआ है।

इस प्रकार, केलो वृहद सिंचाई परियोजना रायगढ़ जिले के लिए केवल एक सिंचाई योजना नहीं, बल्कि कृषि समृद्धि, जल सुरक्षा, रोजगार और सतत विकास की जीवनरेखा बनकर उभर रही है।

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प्राथमिक शाला बेलटोली में मापन मेला: लंबाई मापन, मुद्रा लेन-देन और अनुमान के जरिए बच्चों ने बढ़ाई गणितीय दक्षता


 मनोरा 23 जनवरी2026 : गणितीय अवधारणाओं को स्पष्ट करने के लिए विकासखंड मनोरा संकुल डूमरटोली के प्राथमिक शाला बेलटोली में विकासखंड शिक्षा अधिकारी तरुण पटेल के मार्गदर्शन में आयोजित मापन मेला का उद्घाटन विकासखंड स्त्रोत केंद्र समन्वयक श्री आशुतोष शर्मा ने किया इस अवसर पर उन्होंने कहा की ऐसी गतिविधियों से बच्चों की गणितीय अवधारणाएं स्पष्ट होती हैं मापन मेला अजीम प्रेमजी फाउंडेशन मनोरा के नीलाभ्र घोष संकुल डूमरटोली के शिक्षकों व छात्रों के परस्पर सहयोग से आयोजित हुआ जिसमें बच्चों  के द्वारा विभिन्न गतिविधियों पर आधारित स्टाल के माध्यम से बच्चे धारिता मापन मुद्रा खरीद बिक्री करना बिल बनाना मापन लंबाई अनुमान लगाना मापन करना  मेरी ऊंचाई अनुमान खेल मापन  करना आदि रोचक गणितीय गतिविधियों से बच्चे खेल-खेल में सीख रहे थे। कार्यक्रम में श्री सत्यदीप प्रसाद सीएसी डूमरटोली अजीत सिदार सीएसी सोगडा श्रीमती इंदु पटेल सीएसी टेम्पो एवं विकासखंड मनोरा उल्लास परियोजना  समन्वयक विपिन विकास खरे प्रवीण पाठक प्रधान पाठक माध्यमिक शाला डुमरटोली व संकुल डूमरटोली के शिक्षक एवं बच्चे उपस्थित रहे।
        कार्यक्रम को व्यवस्थित करने हेतू आवश्यक सामग्री निर्माण करने एवं व्यवस्थित संचालन करने में  रजनी बिंझवार जेम्माग्रेस प्राथमिक शाला जरिया श्रीमती बसंती भगत अनास्तासिया एक्का रंजनी भगत सुकांत आदिले बेर्नार्ड केरकेट्टा एवं प्रधान पाठक खैटू राम महतो का विशेष योगदान रहा।

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