भीषण गर्मी में पक्षियों की प्यास बुझाने से शुरू हुई मुहिम, अब राष्ट्रीय स्तर पर जशपुर की गूंज — श्रीमती सरिता नायक बनीं ‘पर्यावरण सारथी स्टार कैंपेनर’, हजारों लोगों को जोड़कर रचा प्रेरणादायी इतिहास
जशपुर। भीषण गर्मी के दौर में जब इंसान के साथ-साथ पशु-पक्षी भी जल, भोजन और सुरक्षित आश्रय के लिए संघर्ष कर रहे हैं, ऐसे समय में राज्यपाल सम्मानित समाजसेवी, शिक्षिका एवं लेखिका श्रीमती सरिता नायक ने प्रकृति संरक्षण और जीवों के प्रति संवेदनशीलता की एक अनूठी मिसाल पेश की है। पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था, कृत्रिम घोंसलों का निर्माण तथा उनके संरक्षण के लिए किए गए निरंतर प्रयासों के चलते उन्हें “मैं हूं पक्षी मित्र राष्ट्रीय बर्ड फीडर अभियान 2026” के अंतर्गत सम्मानित किया गया।
श्रीमती नायक को पक्षियों के प्रति सेवा भाव, नियमित दाना-पानी उपलब्ध कराने, सुरक्षित आश्रय तैयार करने तथा समाज में जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए सम्मान पत्र प्रदान किया गया। लेकिन उनकी भूमिका केवल सम्मान प्राप्त करने तक सीमित नहीं रही। उन्होंने इस अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप देते हुए अपने परिवार, परिचितों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, युवाओं, ग्रामीणों और वरिष्ठ नागरिकों को इससे जोड़ा।
उनके अथक प्रयासों का ही परिणाम रहा कि जशपुर से शुरू हुई यह मुहिम रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, बलरामपुर, अंबिकापुर और सूरजपुर सहित प्रदेश के कई जिलों तक पहुंची। पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने और बड़ी संख्या में नागरिकों को पक्षी मित्र अभियान से जोड़ने के लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर “पर्यावरण सारथी – Our Star Campaigner” सम्मान से नवाजा गया।
इस अभियान में गरियाबंद की संयोजिका श्रीमती समीक्षा गायकवाड़ का मार्गदर्शन भी महत्वपूर्ण रहा, जिन्होंने अभियान को सफल बनाने में निरंतर सहयोग प्रदान किया।
श्रीमती सरिता नायक के मार्गदर्शन में जशपुर जिले के अनेक शिक्षक एवं शिक्षिकाएं भी पक्षियों के संरक्षण के इस अभियान में सक्रिय रूप से जुड़े और “पक्षी मित्र” बनकर दाना-पानी एवं आश्रय की व्यवस्था कर रहे हैं। इनमें श्रीमती ममता सिन्हा, सीमा गुप्ता (संकल्प शिक्षण संस्थान जशपुर), श्रीमती मीना सिन्हा (प्राथमिक शाला टीकैतगंज), अनिल कश्यप (प्राथमिक शाला पैंकू), ममता कायता (प्राथमिक शाला खारीझरिया, कुनकुरी), बिहारी राम नायक (प्राथमिक शाला आम्बाचुआं), जेन सेलेस्टीना तिर्की (शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला ढोढींडाड़), राखी गुप्ता (शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला बाबू साजबहार), आरती ओहदार (प्राथमिक शाला डीपाटोली), प्रेमलता पैकरा (प्राथमिक शाला दपकला), प्रवीण कुमार पाठक (राज्यपाल सम्मानित शिक्षक, डुमरटोली), रेणु प्रधान (प्राथमिक शाला कस्तुरा), कुसूम सोरेन (प्राथमिक शाला ढोड़ीआरा), भवेन्द्र कुमार कायता (स्वामी आत्मानंद स्कूल कांसाबेल), संतोषी डनसेना (प्राथमिक शाला छिन्दबहरी, पत्थलगांव) तथा शिल्पा मैडम (स्वामी आत्मानंद स्कूल बगीचा) प्रमुख हैं।
अभियान की विशेषता यह है कि इसमें केवल शिक्षक ही नहीं बल्कि शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिक, पालकगण और बड़ी संख्या में विद्यार्थी भी जुड़ रहे हैं। वे अपने घरों, विद्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर पक्षियों के लिए दाना-पानी रखने के साथ-साथ सुरक्षित घोंसलों की व्यवस्था कर रहे हैं।
पर्यावरण संरक्षण और जीवों के प्रति करुणा का यह संदेश आज जशपुर जिले को एक नई पहचान दिला रहा है। पक्षी संरक्षण की यह अनूठी पहल न केवल प्रकृति संतुलन बनाए रखने में सहायक बन रही है, बल्कि युवाओं में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता भी विकसित कर रही है। जशपुर से शुरू हुआ यह अभियान आज पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है और आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति से जुड़ने का संदेश दे रहा है।