प्राचार्य भर्ती से लेकर OPS-NPS विवाद तक शिक्षक फेडरेशन का बड़ा अल्टीमेटम, शिक्षा सचिव के सामने उठाए 4 अहम मुद्दे; समयमान वेतनमान और सेवानिवृत्ति लाभ पर मांगा त्वरित फैसला
जशपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह और लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक ऋतुराज रघुवंशी से मुलाकात कर शिक्षकों से जुड़े चार महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। फेडरेशन ने प्राचार्य पदों पर लंबित भर्ती, सहायक शिक्षकों को त्रिस्तरीय समयमान वेतनमान, प्रधानपाठकों के वेतन विसंगति तथा NPS-OPS से जुड़े सेवानिवृत्ति लाभों के मामलों में शीघ्र निर्णय की मांग की।
फेडरेशन के जिला अध्यक्ष विनोद गुप्ता ने बताया कि नियमों के अनुसार प्राचार्य के स्वीकृत पदों में 90 प्रतिशत पद पदोन्नति से तथा 10 प्रतिशत पद सीमित विभागीय परीक्षा के माध्यम से भरे जाने का प्रावधान है। विभाग द्वारा 90 प्रतिशत कोटे के अंतर्गत पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, लेकिन 10 प्रतिशत कोटे की भर्ती अब तक लंबित है। उन्होंने बताया कि भर्ती एवं पदोन्नति नियमों की अनुसूची-दो में अशासकीय, निजी अनुदान प्राप्त विद्यालयों और स्वायत्तशासी निकायों में कार्यरत शिक्षकों की सीमित विभागीय परीक्षा के जरिए सीधी भर्ती का प्रावधान है, जिसे लोक सेवा आयोग के माध्यम से कराया जाना है। इस विषय पर विभागीय अधिकारियों के साथ सकारात्मक चर्चा हुई।
फेडरेशन ने समयमान वेतनमान की विसंगतियों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। संगठन का कहना है कि प्राथमिक शाला के प्रधानपाठकों को प्रथम और द्वितीय उच्चतर वेतनमान का लाभ मिल चुका है, जबकि राजपत्रित पद होने के बावजूद पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानपाठकों के लिए अब तक समयमान वेतनमान स्वीकृत नहीं किया गया है। इससे ऐसी स्थिति बन गई है कि प्राथमिक शाला के प्रधानपाठकों का वेतन पूर्व माध्यमिक विद्यालय के प्रधानपाठकों से अधिक हो गया है। फेडरेशन ने इसे गंभीर वेतन विसंगति बताते हुए तत्काल समाधान की मांग की।
सहायक शिक्षक संवर्ग को त्रिस्तरीय समयमान वेतनमान देने का मामला भी बैठक में प्रमुखता से उठा। फेडरेशन का तर्क है कि राज्य शासन ने अन्य विभागों के कर्मचारियों और अधिकारियों को दो तथा तीन स्तरीय समयमान वेतनमान का लाभ प्रदान कर दिया है, लेकिन ई एवं टी संवर्ग के सहायक शिक्षक आज भी इस लाभ से वंचित हैं। संगठन का कहना है कि उन्हें अभी तक क्रमोन्नत योजना के आधार पर वेतन लाभ दिया जा रहा है, जबकि राज्य में वर्ष 2006 से समयमान वेतनमान व्यवस्था लागू है।
बैठक में राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) और पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई। फेडरेशन ने कहा कि नवंबर 2012 से कर्मचारियों और सरकार द्वारा NPS के अंतर्गत अंशदान जमा किया जाता रहा है, जबकि राज्य सरकार ने 1 अप्रैल 2022 से OPS लागू किया। संगठन की मांग है कि OPS का लाभ नवंबर 2012 से प्रभावी माना जाए, ताकि कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति लाभों को लेकर बनी अनिश्चितता समाप्त हो सके।
प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष राजेश चटर्जी, प्रमुख महामंत्री सतीश ब्यौहरे, महामंत्री आकाश राय, उपाध्यक्ष पवन सिंह सहित विभिन्न जिलों के पदाधिकारी और जिला अध्यक्ष शामिल रहे। फेडरेशन ने उम्मीद जताई है कि शिक्षा विभाग शिक्षकों की लंबे समय से लंबित मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेकर समाधान सुनिश्चित करेगा।