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जल संकट से पहले तैयारी: रायगढ़ में शुरू हुआ ‘जलदूत’ प्री-मानसून भूजल सर्वे अभियान, गांव-गांव दर्ज हो रहा भूजल का डिजिटल रिकॉर्ड

रायगढ़, 27 मई 2026/ जिले में भू-जल संरक्षण और जल उपलब्धता की वास्तविक स्थिति का वैज्ञानिक आकलन करने के उद्देश्य से “जलदूत प्री-मानसून भूजल सर्वे अभियान” की शुरुआत की गई है। ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत यह अभियान जिले की सभी ग्राम पंचायतों में संचालित किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत प्रत्येक गांव में अधिकतम तीन खुले कुओं के जलस्तर का मापन कर “जलदूत” मोबाइल एप के माध्यम से ऑनलाइन डेटा दर्ज किया जा रहा है।
             मनरेगा एवं ग्रामीण विकास विभाग का तकनीकी अमला गांवों में पहुंचकर जल स्रोतों का सर्वे कर रहा है। इस दौरान कुओं की गहराई, भूजल स्तर और वर्तमान जल उपलब्धता की गणना कर डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। यह डेटा प्री-मानसून रिकॉर्ड के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा। जिला प्रशासन के अनुसार, जलयुक्त स्रोतों के साथ-साथ सूखे और कम जलस्तर वाले कुओं को भी सर्वे में शामिल किया जा रहा है, ताकि जिले की भूजल स्थिति का व्यापक और वास्तविक अध्ययन किया जा सके।
             अभियान का मुख्य उद्देश्य जिले में भूजल की वर्तमान स्थिति का वैज्ञानिक विश्लेषण करना है। वर्षा ऋतु समाप्त होने के बाद उन्हीं जल स्रोतों का दोबारा सर्वे कर जलस्तर में आए बदलाव का तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा। वर्ष 2022 से जारी इस पहल से भविष्य में जल संरक्षण योजनाओं, भूजल संवर्धन कार्यों और संभावित जल संकट के आकलन में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी। साथ ही जिन ग्राम पंचायतों में कुएं नहीं हैं, वहां नए कार्यों की योजना बनाकर स्वीकृति भी प्रदान की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे इस अभियान से जल संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने और भूजल निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

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