डिजिटल अरेस्ट का खौफ दिखाकर लाखों की ठगी करने वाला हाईटेक गैंग ध्वस्त — रायगढ़ पुलिस की सटीक कार्रवाई में बैंक कर्मचारी मास्टरमाइंड समेत 5 अंतर्राज्यीय आरोपी गिरफ्तार, देशभर में फैले साइबर जाल का बड़ा खुलासा
रायगढ़, 24 अप्रैल 2026। तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया में साइबर अपराधी भी नए-नए हथकंडे अपनाकर आम लोगों को निशाना बना रहे हैं, लेकिन इस बार रायगढ़ पुलिस ने ऐसे ही एक शातिर और संगठित गिरोह की कमर तोड़ दी है, जो “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर लोगों को डराकर लाखों रुपये की ठगी कर रहा था। इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने राजस्थान के भीलवाड़ा से महिला सहित पांच अंतर्राज्यीय आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है।
पूरा मामला उस समय सामने आया जब रायगढ़ के केसर परिसर निवासी और विद्युत विभाग से सेवानिवृत्त पर्यवेक्षक नरेन्द्र ठाकुर साइबर ठगी का शिकार हो गए। उन्हें एक अज्ञात महिला का फोन आया, जिसने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी से जुड़ा अधिकारी बताया और उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर मोबाइल नंबर से आपराधिक गतिविधि होने की बात कही। इसके बाद कॉल को बड़े ही सुनियोजित तरीके से तथाकथित पुलिस और सीबीआई अधिकारियों से जोड़ा गया, जिन्होंने पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर अपराध में फंसाने और तत्काल गिरफ्तारी की धमकी दी।
ठगों ने अपने खेल को और विश्वसनीय बनाने के लिए वीडियो कॉल का सहारा लिया, जिसमें एक व्यक्ति खुद को आईपीएस अधिकारी बताकर सामने आया और “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाते हुए पीड़ित को मानसिक दबाव में ले लिया। भय और घबराहट के माहौल में पीड़ित से उसके बैंक खाते, संपत्ति और पूरी वित्तीय जानकारी हासिल कर ली गई। इसके बाद जांच प्रक्रिया का हवाला देते हुए अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करने को कहा गया। लगातार दबाव और डर के कारण पीड़ित ने 30 जनवरी से 11 फरवरी 2026 के बीच कुल 36 लाख 97 हजार 117 रुपये आरोपियों द्वारा बताए गए खातों में ट्रांसफर कर दिए।
जब परिजनों को इस पूरी घटना की जानकारी हुई, तब जाकर ठगी का एहसास हुआ और पीड़ित ने 17 फरवरी को साइबर थाना रायगढ़ में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्काल सक्रियता दिखाते हुए तकनीकी जांच शुरू की और बैंक ट्रांजेक्शन, मोबाइल लोकेशन तथा साइबर इंटेलिजेंस के जरिए ठगों के नेटवर्क तक पहुंच बनाई। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के विभिन्न बैंक खातों में जमा की गई है।
एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देशन में गठित विशेष टीम ने भीलवाड़ा पहुंचकर सुनियोजित तरीके से दबिश दी और गिरोह के मास्टरमाइंड राहुल व्यास को हिरासत में लिया। पूछताछ में राहुल व्यास, जो कि बंधन बैंक का कर्मचारी है, ने पूरे गैंग का खुलासा कर दिया। इसके बाद पुलिस ने रविराज सिंह, उसकी पत्नी आरती राजपूत, संजय मीणा और गौरव व्यास को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर रायगढ़ लाया।
पूछताछ में सामने आया कि यह गिरोह पिछले कुछ वर्षों से सक्रिय था और शुरुआत में इनके खातों में विदेश नंबरों से संदिग्ध रकम आती थी। धीरे-धीरे इन लोगों ने साइबर ठगी के तरीके सीखे और खुद ही ठगी का नेटवर्क खड़ा कर लिया। आरती राजपूत, जो कि वेब डेवलपर है, तकनीकी काम संभालती थी, जबकि अन्य सदस्य बैंक खातों और पैसों के लेन-देन की जिम्मेदारी निभाते थे।
गिरोह का पूरा सिस्टम प्रतिशत आधारित था, जिसमें ठगी की रकम का हिस्सा सभी आरोपियों में बांटा जाता था। पुलिस को आरोपियों के मोबाइल फोन और लैपटॉप से कई अहम सबूत मिले हैं, जिनमें व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्डिंग और बैंक ट्रांजेक्शन की जानकारी शामिल है। जांच में यह भी सामने आया कि केवल एक आरोपी के खाते में ही करीब 60 लाख रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ है, जबकि पूरे गैंग द्वारा देशभर में करीब 1 करोड़ 40 लाख रुपये से अधिक की ठगी किए जाने की जानकारी मिली है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 7 मोबाइल और एक लैपटॉप जब्त किया है तथा सभी संदिग्ध बैंक खातों को सीज कर दिया गया है। मामले में और भी लोगों की संलिप्तता के संकेत मिले हैं, जिनकी जांच जारी है।
इस पूरी कार्रवाई में साइबर थाना रायगढ़ की टीम ने अहम भूमिका निभाई, जिसने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर इतने बड़े गिरोह तक पहुंच बनाई और उसे धर दबोचा।
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने आम नागरिकों को सतर्क करते हुए कहा है कि डिजिटल अरेस्ट, फर्जी पुलिस या सीबीआई अधिकारी बनकर आने वाले कॉल पूरी तरह ठगी का हिस्सा हो सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे ट्रांसफर नहीं कराती। ऐसे मामलों में घबराने के बजाय तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें और नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं।