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“हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: पूर्व सेवा गणना पर शिक्षकों की बड़ी जीत, राज्य सरकार की अपील खारिज—अब हजारों एलबी संवर्ग शिक्षकों को मिलेगा पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ

जशपुर, 23 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ के एलबी संवर्ग शिक्षकों के लिए लंबे इंतजार के बाद आखिरकार बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है, जहां “पूर्व सेवा गणना” को लेकर चल रही कानूनी जंग में हाईकोर्ट ने शिक्षकों के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार की अपील को सिरे से खारिज कर दिया। इस फैसले के साथ ही अब हजारों शिक्षकों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) का रास्ता लगभग साफ हो गया है, जिससे पूरे प्रदेश के शिक्षक समुदाय में खुशी और उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।

पूरा मामला चिरमिरी नगर निगम में वर्ष 1998 से शिक्षा कर्मी के रूप में कार्यरत शिक्षक राजेंद्र प्रसाद पटेल से जुड़ा है, जिन्होंने संविलियन के बाद भी अपनी पूर्व सेवा को पेंशन गणना में शामिल नहीं किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अधिवक्ता संजीव वर्मा के माध्यम से याचिका क्रमांक WPS 777/2021 दायर करते हुए संविलियन निर्देश 01 की कंडिका 04 और 06 को चुनौती दी थी। याचिका में स्पष्ट तौर पर कहा गया था कि जब संविलियन के समय पूर्व सेवा को मान्यता दी गई है, तो पेंशन निर्धारण में उसे नकारना पूरी तरह अन्यायपूर्ण और भेदभावपूर्ण है।

इस मामले में पहले हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने शिक्षकों के पक्ष में महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह पूर्व सेवा को पुरानी पेंशन योजना में शामिल करने पर विचार करे और इसके लिए 120 दिनों की समय सीमा भी तय की गई थी। लेकिन सरकार ने इस आदेश पर अमल करने के बजाय डिवीजन बेंच में अपील दायर कर दी, जिससे मामला और लंबा खिंच गया।

23 अप्रैल 2026 को चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच में हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अपने पक्ष में यह दलील दी कि संविलियन के समय तय शर्तों के आधार पर ही पेंशन का निर्धारण किया जाना चाहिए और 30 जून 2018 तक शिक्षा कर्मी शासकीय कर्मचारी नहीं थे, इसलिए उस अवधि की सेवा को पेंशन योग्य नहीं माना जा सकता। सरकार ने यह भी तर्क रखा कि वर्ष 2012 में NPS लागू होने के बाद OPS की मांग करना देरी का मामला है, जिसे खारिज किया जाना चाहिए।

सरकार के इन तर्कों पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए तीखी टिप्पणी की और सवाल खड़ा किया कि क्या वित्त सचिव सर्वोच्च हैं कि उनके निर्णय के कारण इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारी बिना पेंशन के सेवानिवृत्त होते रहें और न्याय के लिए दर-दर भटकते रहें। कोर्ट की इस टिप्पणी से साफ संकेत मिल गया था कि न्यायालय इस मुद्दे को गंभीरता से देख रहा है।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता संजीव वर्मा ने मजबूती से पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार का रुख पूरी तरह विरोधाभासी है, क्योंकि एक तरफ संविलियन के समय वर्षों की पूर्व सेवा को जोड़कर कर्मचारियों को नियमित किया जाता है, वहीं दूसरी तरफ उसी सेवा को पेंशन के लिए अमान्य घोषित कर दिया जाता है। यह न केवल न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है, बल्कि कर्मचारियों के साथ अन्याय भी है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की रिट अपील को खारिज कर दिया और सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखा। इस फैसले के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि पूर्व सेवा को नजरअंदाज कर पेंशन निर्धारण नहीं किया जा सकता।

इस ऐतिहासिक निर्णय पर छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन, जिला जशपुर के जिलाध्यक्ष अजय कुमार गुप्ता ने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की जीत नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के एलबी संवर्ग शिक्षकों के वर्षों के संघर्ष, धैर्य और न्याय की लड़ाई की बड़ी विजय है। उन्होंने कहा कि शिक्षा कर्मियों ने कठिन परिस्थितियों में वर्षों तक शिक्षा व्यवस्था को संभाला है और उनकी सेवा को पेंशन में शामिल करना उनका अधिकार है।

उन्होंने यह भी कहा कि इस फैसले से हजारों शिक्षकों के लिए पुरानी पेंशन योजना का मार्ग प्रशस्त होगा और सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा। अजय कुमार गुप्ता ने याचिकाकर्ता राजेंद्र प्रसाद पटेल, अधिवक्ता संजीव वर्मा और इस लड़ाई में जुड़े सभी साथियों को बधाई देते हुए कहा कि यह फैसला आने वाले समय में पूरे शिक्षक समुदाय के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

अब सभी की नजरें राज्य सरकार पर टिकी हुई हैं कि वह न्यायालय के इस आदेश का शीघ्र पालन करते हुए बिना किसी देरी के सभी पात्र शिक्षकों को पूर्व सेवा गणना का लाभ प्रदान करे, ताकि वर्षों से लंबित यह मुद्दा हमेशा के लिए समाप्त हो सके और शिक्षकों को उनका हक मिल सके।

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