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बेहरामार कृषि फार्म बना जैविक खेती का नया केंद्र—नील-हरित काई उत्पादन से किसानों को मिलेगा सस्ता और असरदार उर्वरक, धान की पैदावार में होगा जबरदस्त इजाफा

रायगढ़, 8 अप्रैल 2026/ जिले के शासकीय कृषि प्रक्षेत्र बेहरामार में नील-हरित शैवाल का उत्पादन आज से प्रारंभ कर दिया गया है। यह पहल किसानों को सस्ता एवं जैविक उर्वरक उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
            नील-हरित शैवाल, जिसे सायनोबैक्टीरिया भी कहा जाता है, प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन स्थिरीकरण की प्रक्रिया के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में सहायक होता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से धान की फसलों में जैव उर्वरक के रूप में किया जाता है, जिससे प्रति हेक्टेयर 25 से 30 किलोग्राम तक नाइट्रोजन की पूर्ति होती है। यह जैव उर्वरक विशेष रूप से उन खेतों में तेजी से विकसित होता है जहां पानी भरा रहता है, जिससे धान उत्पादन में बेहतर परिणाम मिलते हैं। साथ ही यह क्षारीय एवं बंजर भूमि को भी उपजाऊ बनाने में मददगार साबित होता है। कृषि विभाग ने बताया कि, इस उत्पादन को किसानों को उचित मूल्य पर उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे उनकी रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी और वे जैविक खेती की ओर प्रोत्साहित होंगे।

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