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जशरंग राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव के चौथे दिन कला, संस्कृति और भावनाओं का अद्भुत संगम — छात्राओं के लोकनृत्य और भरतनाट्यम ने मोहा मन, “रवि वर्मा: द अनटोल्ड बैटल” ने दर्शकों को किया भावुक

जशपुर 07 अफ़्रैल 2026 : जशरंग राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव में चौथे दिन भी खूबसूरत प्रस्तुतियां हुई. जिसमें पी एम श्री केंद्रीय विद्यालय की छात्रा पारुल ने राजस्थानी लोकनृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया वहीं श्री महावीर दिगंबर जैन विद्यालय के छात्रों के द्वारा वंदे मातरम पर भरतनाट्यम की शानदार प्रस्तुति दी जिसका निर्देशन किया छत्तीसगढ़िया क्लाउड की नृत्य प्रशिक्षक मनीषा भगत ने. सरस्वती कथक केंद्र की छात्राओं के द्वारा समूह नृत्य प्रस्तुत किया गया जिसका निर्देशन सरस्वती पाठक के द्वारा किया गया.
नाटकों की प्रस्तुति के क्रम में नाटक “रवि वर्मा: द अनटोल्ड बैटल” का प्रभावशाली मंचन किया गया। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को भारतीय कला, समाज और विचारधारा के गहरे संघर्ष से रूबरू कराया।

नाटक का निर्देशन प्रख्यात रंगकर्मी डॉ. आनंद कुमार पांडे द्वारा किया गया, जबकि इसका लेखन रोहित श्रीवास्तव और आनंद पांडे ने संयुक्त रूप से किया है। यह नाटक महान चित्रकार राजा रवि वर्मा के जीवन के उस अनछुए संघर्ष को सामने लाता है, जिसमें उन्होंने कला की स्वतंत्रता और सामाजिक बंधनों के बीच एक नई राह बनाई। उनकी कला ने देवी-देवताओं को मानवीय रूप में प्रस्तुत कर उन्हें आम जन तक पहुँचाया, जिसके कारण उन्हें विरोध, विवाद और न्यायालय तक का सामना करना पड़ा ।

मंचन में कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय से पात्रों को जीवंत कर दिया। राजा रवि वर्मा की भूमिका में रोहित श्रीवास्तव ने प्रभावशाली प्रस्तुति दी, वहीं आयिलियम तिरुनाल के रूप में अल्बर्ट श्रीवास्तव ने राजसी गरिमा को बखूबी प्रस्तुत किया। थावेंद्र रजक ने थियोडोर जेम्सन और वकील की दोहरी भूमिका निभाकर अपनी अभिनय क्षमता का परिचय दिया। आमोद श्रीवास्तव ने रामस्वामी नायकर और जज की भूमिकाओं में संतुलित अभिनय प्रस्तुत किया।

सुगंधा के रूप में दिव्या राय ने भावनात्मक दृश्यों में दर्शकों को प्रभावित किया, जबकि आचार्य चिंतामणि के रूप में मनमोहन कास्दे ने अपने प्रभावशाली संवादों से नाटक में गहराई जोड़ी। अनमोल पमनानी ने बड़ौदा महाराज और राजा वर्मा की भूमिका निभाई, वहीं गजेंद्र साहू ने राजा राज वर्मा और मोहन श्री के रूप में सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। चंद्र मोहन ने आर्मुखम पिल्लई और रंगनाथन के रूप में अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया।

नाटक की तकनीकी प्रस्तुति भी उतनी ही प्रभावशाली रही। प्रकाश व्यवस्था का दायित्व स्वप्निल हुड्डर ने संभाला, जिसने पूरे मंचन को एक अलग ही दृश्यात्मक गहराई प्रदान की। वहीं संगीत पक्ष को विकास गायकवाड़ ने सशक्त रूप से संवारा, जिसने नाटक के भावों और दृश्यों को और अधिक प्रभावी बना दिया।

पूरे मंचन के दौरान दर्शकों की गहरी सहभागिता देखने को मिली। विशेष रूप से अदालत के दृश्य और कलाकार के आंतरिक संघर्ष को दर्शाने वाले प्रसंगों ने दर्शकों को भावुक कर दिया और सोचने पर मजबूर किया।

यह नाटक केवल एक कलाकार की कहानी नहीं, बल्कि कला की स्वतंत्रता, समाज की सोच और अभिव्यक्ति की सीमाओं पर एक सशक्त प्रश्न भी उठाता है। “रवि वर्मा: द अनटोल्ड बैटल” ने जशरंग नाट्य महोत्सव में एक प्रभावशाली छाप छोड़ी और दर्शकों के बीच लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहेगा। प्रस्तुति पश्चात मंच पर शशि कुमार (IFS) को प्रतीक चिन्ह और उपहार प्रदान कर सम्मानित किया गया. मुख्य अतिथि के रूप में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की संरक्षिका कुंवररानी जया सिंह जुदेव की महोत्सव में उपस्थित रही और उन्होंने नाटक की प्रशंसा करते हुए कलाकारों को आशिर्वाद दिया.

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