शहर के बीच बहने वाली बाकी नदी में खुलेआम बालू तस्करी , समाजसेवी रामप्रकाश पाण्डे ने उठाई आवाज; बोले—बालू ही नदियों की हड्डियां, खत्म हुई रेत तो नदी भी हो जाएगी खत्म
जशपुरनगर 13 मार्च 2026 : जिले में अवैध बालू उत्खनन का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। शहर के बीच बहने वाली बाकी नदी में इन दिनों खुलेआम बालू तस्करी किए जाने की खबरों ने लोगों को चिंतित कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दिन-दहाड़े नदी से रेत निकाली जा रही है, जिससे नदी के प्राकृतिक स्वरूप और उसके अस्तित्व पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है।
इस पूरे मामले को लेकर जशपुर के समाजसेवी रामप्रकाश पाण्डे ने सोशल मीडिया के माध्यम से गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मनुष्य के शरीर को खड़ा रखने और उसे मजबूती देने के लिए हड्डियों की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार किसी भी नदी को जीवित और स्वस्थ बनाए रखने के लिए बालू यानी रेत की अहम भूमिका होती है।
रामप्रकाश पाण्डे ने कहा कि नदी के तल में मौजूद रेत प्राकृतिक फिल्टर की तरह काम करती है। यह नदी के पानी को स्वच्छ बनाए रखने में मदद करती है और जल के प्राकृतिक प्रवाह को संतुलित बनाए रखती है। बालू की परतें भूजल को रिचार्ज करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जब नदी में पर्याप्त मात्रा में रेत होती है तो बारिश का पानी जमीन के भीतर तक पहुंचता है और आसपास के कुएं, तालाब और हैंडपंप भी लंबे समय तक जल से भरे रहते हैं।
उन्होंने बताया कि यदि नदियों से अंधाधुंध तरीके से रेत निकाल ली जाए तो नदी का तल कठोर हो जाता है और पानी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित होने लगता है। इससे नदी धीरे-धीरे गहरी और असंतुलित हो जाती है, जलस्तर गिरने लगता है और कई बार नदी केवल गंदे पानी का ठहरा हुआ गड्ढा बनकर रह जाती है। यही कारण है कि देश के कई हिस्सों में लगातार हो रहे अवैध बालू खनन के कारण नदियां सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं।
समाजसेवी रामप्रकाश पाण्डे ने कहा कि नदी की रेत केवल निर्माण कार्य के लिए इस्तेमाल होने वाला साधारण संसाधन नहीं है, बल्कि यह पूरी नदी की जीवनरेखा है। रेत नदी के किनारों को कटाव से बचाती है, बाढ़ के प्रभाव को नियंत्रित करती है और जलचरों तथा नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि जहां भी नदियों से अवैध बालू खनन हो रहा है, उसे रोकने के लिए प्रशासन और समाज दोनों को मिलकर प्रयास करना होगा। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई और बालू का कोई वैकल्पिक संसाधन विकसित नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में देश की कई नदियों का अस्तित्व ही समाप्त हो सकता है।
रामप्रकाश पाण्डे ने यह भी बताया कि देश के प्रसिद्ध जल पुरुष डॉक्टर राजेन्द्र सिंह ने भी बाकी नदी के अस्तित्व को लेकर चिंता जाहिर की है। उनका मानना है कि यदि नदियों के प्राकृतिक ढांचे से लगातार छेड़छाड़ होती रही तो भविष्य में जल संकट और भी गंभीर रूप ले सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बाकी नदी जशपुर शहर की पहचान और जीवनरेखा मानी जाती है। ऐसे में यदि यहां अवैध बालू उत्खनन को समय रहते नहीं रोका गया तो इसका असर केवल नदी पर ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के पर्यावरण और जल स्रोतों पर भी पड़ेगा। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बाकी नदी में हो रही बालू तस्करी पर तत्काल सख्त कार्रवाई कर नदी के अस्तित्व को बचाया जाए।