शैक्षणिक जीवन की नई शुरुआत: जशपुर में सरस्वती शिशु मंदिर द्वारा बसंत पंचमी पर 30 बच्चों का विद्यारंभ संस्कार आयोजित
जशपुरनगर 23 जनवरी 26 : सरस्वती शिशु मंदिर जशपुर में बसंत पंचमी का पर्व श्रद्धा, उत्साह और सांस्कृतिक गरिमा के साथ धूमधाम से मनाया गया। यह पर्व माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है, जिसे बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक माना जाता है। बसंत पंचमी केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि यह ज्ञान, प्रकृति और नए आरंभ का उत्सव है, जो जीवन में सीखने, सृजन करने और उत्साह बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
इस पावन अवसर पर भारतीय परंपरा के 16 संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण विद्यारंभ संस्कार वैदिक मंत्रोच्चार एवं हवन के साथ संपन्न कराया गया। कार्यक्रम में कुल 30 बच्चों का विद्यारंभ संस्कार विधिवत रूप से कराया गया, जिससे उनके शैक्षणिक जीवन की शुभ शुरुआत हुई। माता-पिता अपने बच्चों को लेकर विद्यालय पहुंचे और पूरे विधि-विधान के साथ विद्या आरंभ संस्कार कराया। कई बच्चों को पहली बार स्लेट और पेंसिल पकड़ाकर शिक्षा की शुरुआत कराई गई।
कार्यक्रम का संचालन पुजारी आशीष सतपति द्वारा वैदिक विधि-विधान से किया गया। विद्यालय परिसर को पीले वस्त्रों, पुष्पों और आकर्षक सजावट से सजाया गया था। पीला रंग ज्ञान, ऊर्जा और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, जिसे बसंत पंचमी पर विशेष महत्व दिया जाता है, जिससे संपूर्ण वातावरण उल्लासपूर्ण और भक्तिमय बना रहा।
इस गरिमामय अवसर पर विद्यालय समिति के व्यवस्थापक रामनिवास अग्रवाल, अध्यक्ष जनार्दन सिन्हा, विकासखंड अधिकारी श्रीमती कल्पना टोप्पो, प्राचार्य संजय कुमार यादव, प्रधानाचार्य रामानंद राम, समस्त आचार्यगण, दीदीजी, अभिभावक, माताएं, कर्मचारी बंधु-भगिनियां एवं बड़ी संख्या में बच्चे उपस्थित रहे।
विद्यालय की प्रार्थना सभा में यह आयोजन अत्यंत हर्षोल्लास, वात्सल्यमयी, स्नेहिल और प्रेरणादायक वातावरण में संपन्न हुआ। उपस्थित अतिथियों ने बच्चों को आशीर्वाद देते हुए शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करने से ज्ञान, बुद्धि और सफलता की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के साथ विद्यालय परिवार ने इस पर्व को संस्कार, शिक्षा और सांस्कृतिक चेतना के संदेश के साथ मनाया। कार्यक्रम ने न केवल धार्मिक परंपराओं को सशक्त किया, बल्कि बच्चों और अभिभावकों में शिक्षा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और संस्कारों के प्रति सम्मान की भावना को भी प्रोत्साहित किया।