सरयू तट पर गूंजा “हरे राम हरे कृष्ण” — जशपुर के श्रद्धालुओं ने अयोध्या में रचा 24 घंटे के अखंड कीर्तन से भक्ति, श्रद्धा और सनातन संकल्प का इतिहास
रामनगरी अयोध्या में जशपुर की आध्यात्मिक उपस्थिति, सरयू घाट बना भक्ति महोत्सव का केंद्र
जशपुर/नारायणपुर : 12 जनवरी 2026
रामनगरी अयोध्या में आज प्रातः 6:30 बजे सरयू नदी के पावन नया घाट तट पर एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां उपस्थित हर श्रद्धालु के हृदय को भक्ति से भर दिया। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के कुनकुरी ग्रामीण मंडल के सनातन धर्म बंधुओं द्वारा आयोजित 24 घंटे का “हरे राम हरे कृष्ण” महामंत्र अखंड कीर्तन पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ आरंभ हुआ। यह अखंड कीर्तन कल प्रातः 6:30 बजे तक निरंतर चलेगा।
सरयू घाट कोने कोने में गूंजा प्रभु नाम
जैसे ही कीर्तन का शुभारंभ हुआ, ढोलक, मृदंग और करताल की मधुर ध्वनियों के साथ “हरे राम हरे कृष्ण” और “जय श्रीराम” के जयकारों ने पूरे सरयू घाट को भक्तिरस में डुबो दिया। नदी की पवित्र लहरों के बीच गूंजता महामंत्र ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं सरयू माता भी प्रभु नाम के संग प्रवाहित हो रही हों।श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर हाथ जोड़कर, नेत्र मूंदकर और कई जगह अश्रुपूरित आंखों से प्रभु श्रीराम और श्रीकृष्ण का स्मरण करते नजर आए। घाट पर उपस्थित हर व्यक्ति उस क्षण को अपने जीवन का सौभाग्यपूर्ण क्षण मान रहा था।
दर्जनों गांवों से उमड़ा आस्था का सैलाब
इस पावन आयोजन में जशपुर जिले के नारायणपुर, कुदमुरा, बासंताला, सुतरी, बथानीडाँड़ सहित दर्जनों गांवों से आए श्रद्धालु शामिल हुए हैं। ग्रामीण अंचलों से आए पुरुष, महिलाएं, बुजुर्ग और युवा बड़ी संख्या में इस अखंड कीर्तन में सहभागिता कर रहे हैं।कई श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में, हाथों में माला और मुख पर प्रभु नाम के साथ सरयू तट पर नजर आए। श्रद्धालुओं का कहना है कि अयोध्या में सरयू तट पर प्रभु नाम का जाप करना जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है।
लोककल्याण, मानवता की भलाई, सुख-समृद्धि और सनातन संस्कृति के लिए अखंड संकल्प
श्रद्धालुओं ने बताया कि यह अखंड कीर्तन केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि विश्व शांति, लोककल्याण, मानवता की भलाई, सुख-समृद्धि और सनातन संस्कृति के संरक्षण का संकल्प है। प्रभु नाम का निरंतर जाप मन को शुद्ध करता है और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।श्रद्धालुओं का मानना है कि जब प्रभु का नाम सामूहिक रूप से लिया जाता है, तब उसका प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे विश्व तक पहुंचता है।
सेवा, अनुशासन और सामूहिक साधना की अद्भुत मिसाल
अखंड कीर्तन के दौरान सेवा, अनुशासन और समर्पण की अनूठी झलक देखने को मिल रही है। श्रद्धालु बारी-बारी से कीर्तन मंडली में शामिल हो रहे हैं, ताकि 24 घंटे तक प्रभु नाम का प्रवाह अविराम बना रहे।वहीं, आयोजन से जुड़े सेवाभावी लोग श्रद्धालुओं के लिए जल, प्रसाद, बैठने की व्यवस्था, स्वच्छता और अनुशासन बनाए रखने में लगातार जुटे हुए हैं। कोई भी श्रद्धालु असुविधा महसूस न करे, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
मोक्षदायिनी सरयू तट पर बढ़ा आयोजन का पुण्य प्रभाव
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सरयू नदी को मोक्षदायिनी कहा जाता है और इसका उल्लेख अनेक प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। ऐसे पवित्र स्थल पर अखंड कीर्तन और आरती का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। श्रद्धालु मानते हैं कि सरयू तट पर प्रभु नाम का जाप सीधे आत्मा को शांति और मोक्ष की ओर ले जाता है।
अयोध्या में जशपुर की भक्ति ने छोड़ी विशेष छाप
अयोध्या में सरयू नदी के किनारे जशपुर के ग्रामीण अंचलों से पहुंचे श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा है। हर कोई इस आयोजन को अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बता रहा है। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सनातन आस्था, भक्ति और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत परिचय बन गया है।सरयू तट पर जारी अखंड कीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो चुका है। रामनगरी अयोध्या में यह दृश्य यह संदेश दे रहा है कि सनातन परंपरा आज भी उतनी ही जीवंत, सशक्त और प्रभावशाली है, जितनी प्राचीन काल में थी।
देखिए क्या कहतें है श्रद्धालु