50 साल की सेवा, फिर भी न्याय नहीं: आंगनबाड़ी कार्यकर्ता–सहायिकाओं ने बजट में मांगें शामिल कराने अपर कलेक्टर के माध्यम से सरकार को सौंपा ज्ञापन
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं ने पेंशन, ग्रेच्युटी और सामाजिक सुरक्षा की मांग के साथ सौंपा ज्ञापन

जिम्मेदारी पहाड़ जैसी, अधिकार रेत जैसे: आंगनबाड़ी संघ ने बजट से पहले सरकार के सामने रखी ऐतिहासिक मांगों की सूची
जशपुर, 08 जनवरी 2026।
आगामी 09 जनवरी को प्रस्तुत होने वाले राज्य बजट में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं की लंबित मांगों को शामिल कर स्वीकृति देने की मांग को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ पंजीयन क्रमांक 409 के पदाधिकारियों ने जशपुर के अपर कलेक्टर श्री प्रदीप साहू को मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी एवं महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के नाम ज्ञापन सौंपा।
संघ की जिला अध्यक्ष श्रीमती कविता यादव के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में जिला उपाध्यक्ष एवं परियोजना अध्यक्ष जशपुर अंजना टोप्पो, जिला संरक्षक यशोमती बाई, आशा सहित अन्य पदाधिकारियों ने बुधवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर यह ज्ञापन सौंपा।
50 वर्ष बाद भी नहीं मिला न्याय
ज्ञापन में बताया गया कि महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत आईसीडीएस योजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन 02 अक्टूबर 1975 से प्रारंभ हुआ था, जो अब लगभग 50 वर्ष पूर्ण कर रहा है। इसके बावजूद देशभर में लगभग 27 लाख एवं छत्तीसगढ़ में एक लाख से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं आज भी मूलभूत अधिकारों से वंचित हैं।
संघ ने उल्लेख किया कि अन्य विभागों में कार्यरत मानसेवियों को सरकार द्वारा नीति बनाकर समय-समय पर नियमित किया गया, परंतु 50 वर्षों से सेवा दे रहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को अब तक शासकीय कर्मचारी घोषित नहीं किया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
न्यूनतम वेतन कानून का उल्लंघन
वर्तमान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को मात्र ₹4500 एवं सहायिका को ₹2250 प्रतिमाह मानदेय अनियमित रूप से प्राप्त हो रहा है, जिसे किसी भी स्थिति में जीवनयापन योग्य वेतन नहीं कहा जा सकता। यह न्यूनतम पारिश्रमिक अधिनियम का खुला उल्लंघन है।
सेवा निवृत्ति के बाद न पेंशन की व्यवस्था है, न ग्रेच्युटी, न समूह बीमा, न कैशलेस चिकित्सा सुविधा और न ही पर्याप्त अवकाश। बीमारी, दुर्घटना या पारिवारिक आवश्यकताओं में इन्हें मानदेय कटवाकर ही कार्य करना पड़ता है।
जिम्मेदारी ज्यादा, अधिकार शून्य
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं से बहुउद्देशीय कार्यकर्ता की तरह कार्य लिया जाता है, जो कई बार शासकीय कर्मचारियों से भी अधिक जिम्मेदारी वाला होता है, लेकिन पारिश्रमिक एवं सेवा सुरक्षा लगभग शून्य है। छोटी-सी त्रुटि पर सेवा से पृथक किए जाने का भय हमेशा बना रहता है।
संघ की प्रमुख मांगें —
- सेवा निवृत्त कार्यकर्ता को ₹5 लाख तथा सहायिका को ₹4 लाख एकमुश्त ग्रेच्युटी, क्रमशः ₹10,000 एवं ₹8,000 मासिक पेंशन तथा समूह बीमा योजना का लाभ दिया जाए।
- आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए। तब तक कार्यकर्ता को ₹26,000 तथा सहायिका को ₹22,100 प्रतिमाह मानदेय स्वीकृत किया जाए। (मध्यप्रदेश की तर्ज पर वार्षिक ₹1000 वृद्धि लागू की जाए।)
- रिक्त सुपरवाइजर एवं कार्यकर्ता के शत-प्रतिशत पदों पर वरिष्ठता सह योग्यता के आधार पर पदोन्नति दी जाए।
- कैशलेस चिकित्सा सुविधा एवं पर्याप्त अवकाश व्यवस्था लागू की जाए।
सहानुभूतिपूर्वक विचार की मांग
संघ ने अपर कलेक्टर के माध्यम से राज्य सरकार से विनम्र आग्रह किया कि इन मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए आगामी बजट में इन्हें सम्मिलित कर शीघ्र स्वीकृति प्रदान की जाए। साथ ही प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र प्रेषित कर केंद्र सरकार से सहयोग दिलाने की मांग की गई।
संघ ने कहा कि प्रदेश की लगभग एक लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं तथा उनके परिवारजन सरकार के इस निर्णय के लिए सदैव आभारी रहेंगे।