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बादलखोल अभ्यारण्य के इस बिट में वन सीमा का मुनारा वर्षों से मरम्मत के इंतज़ार में ,नाकेदार ओर दरोगा की लापरवाही बेनकाब,बढ़ सकता है अतिक्रमण का खतरा

जशपुर/नारायणपुर 05 जनवरी 2026 : जंगल की सीमाओं को स्पष्ट रूप से चिन्हित करने तथा वन भूमि को अवैध कब्जे और अतिक्रमण से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से वन विभाग द्वारा मुनारों (सीमा स्तंभों) का निर्माण कराया जाता है। ये मुनारे वन क्षेत्र की निश्चित सीमा को दर्शाते हैं, ताकि स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ विभागीय अधिकारियों को भी यह स्पष्ट जानकारी रहे कि वन भूमि कहाँ तक फैली हुई है और कहाँ समाप्त होती है।
लेकिन बादलखोल अभ्यारण्य के नारायणपुर सर्किल अंतर्गत जाताकोना बिट की सीमा पर स्थित एक महत्वपूर्ण मुनारा पिछले कई वर्षों से जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पड़ा हुआ है। यह मुनारा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है और इसकी मरम्मत की ओर वन विभाग के जिम्मेदार दरोगा ओर नाकेदार ने अब तक कोई ध्यान नहीं दिया है।
         सूत्रों के अनुसार, यह स्थिति वन दरोगा एवं नाकेदार की गंभीर लापरवाही को उजागर करती है। वर्षों से यह मुनारा उसी हालत में पड़ा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इसकी मरम्मत कराना संबंधित अधिकारियों की प्राथमिकता में नहीं है। आश्चर्य की बात यह है कि थोड़ी-सी मरम्मत कराकर भी इस मुनारे को सुरक्षित किया जा सकता है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई पहल नहीं की गई।यदि यही लापरवाही आगे भी जारी रही, तो आने वाले समय में यह मुनारा पूरी तरह नष्ट हो सकता है। इससे न केवल वन सीमा अस्पष्ट हो जाएगी, बल्कि भविष्य में वन भूमि पर अतिक्रमण की संभावनाएँ भी बढ़ सकती है। 
      गौरतलब है कि बादलखोल अभ्यारण्य में वन दरोगा और नाकेदार के साथ-साथ समय समय पर स्थानीय फायर वाचर भी कार्यरत रहते हैं। यदि जिम्मेदार विभागीय कर्मचारियों में इच्छाशक्ति होती, तो फायर वाचरों की सहायता से मुनारे की मरम्मत कराई जा सकती थी। लेकिन इतने वर्षों बाद भी मुनारे का न सुधार पाना जिम्मेदारों की उदासीनता को दर्शाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बादलखोल अभ्यारण्य क्षेत्र में समय-समय पर विभिन्न निर्माण कार्य होते रहते हैं। यदि विभाग चाहता, तो इन निर्माण कार्यों के साथ ही मुनारे की मरम्मत भी कराई जा सकती थी। अगर सूत्रों की माने तो विभाग की ओर से मुनारा रिपेयरिंग के लिए बीच बीच मे बजट राशि उपलब्ध कराई जाती है उसके बावजूद भी मरम्मत न होना नाकेदार और दरोगा की कार्यशैली पर सवाल खड़ा होना स्वाभाविक है।
वन भूमि की सुरक्षा के लिए मुनारों का मजबूत और सुरक्षित होना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे में वन विभाग के उच्च अधिकारियों को इस मामले में संज्ञान लेते हुए जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए तथा शीघ्र मुनारे की मरम्मत कराकर वन सीमा को सुरक्षित किया जाना चाहिए।

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