तीन मौतों के बाद घायलों का हाल जानने जिला अस्पताल पहुंचे नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद कुमार भगत, ड्रेसिंग रूम में वार्ड बॉय की कथित नशे की हालत देखकर भड़के, बोले—अस्पताल में ड्यूटी और कर्मचारियों की निगरानी आखिर किसके भरोसे?
जशपुर। रक्षाबंधन के पावन पर्व के दिन जशपुर जिले में अलग-अलग सड़क हादसों में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए। हादसों के बाद घायलों को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय जशपुर लाया गया, जहां उनका इलाज जारी रहा।
घायलों का हाल जानने और मृतकों के परिजनों से मुलाकात करने नगर पालिका अध्यक्ष जशपुर अरविंद कुमार भगत जिला अस्पताल पहुंचे। इस दौरान उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और घायल मरीजों से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली।
इसी दौरान अस्पताल के ड्रेसिंग रूम में एक वार्ड बॉय द्वारा घायल मरीजों की ड्रेसिंग किए जाने का मामला सामने आया। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार वार्ड बॉय की स्थिति संदिग्ध नजर आ रही थी। आरोप है कि पंकज मिंज नामक वार्ड बॉय कथित रूप से शराब के नशे की हालत में मरीजों की ड्रेसिंग कर रहा था।
इस स्थिति को देखकर अस्पताल की ड्यूटी व्यवस्था और कर्मचारियों की निगरानी को लेकर सवाल उठने लगे। मौके पर ड्यूटी पर मौजूद डॉ. विशाल मिंज मरीजों का उपचार कर रहे थे।
बताया गया कि जब ड्यूटी डॉक्टर से संबंधित वार्ड बॉय के बारे में जानकारी ली गई, तो कथित तौर पर डॉक्टर ने यह जानकारी होने से इनकार किया कि उक्त वार्ड बॉय ड्यूटी पर है या नहीं।
ड्यूटी पर था तो नशे की हालत में ड्रेसिंग कैसे?
मामले के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि संबंधित कर्मचारी ड्यूटी पर था, तो क्या कथित नशे की हालत में उसे घायल मरीजों की ड्रेसिंग करने की अनुमति दी गई थी? वहीं यदि वह ड्यूटी पर नहीं था, तो वह ड्रेसिंग रूम तक पहुंचकर मरीजों की ड्रेसिंग कैसे कर रहा था?
अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों की मौजूदगी और जिम्मेदारी की निगरानी किस स्तर पर की जा रही है, यह भी सवालों के घेरे में है।
नगर पालिका अध्यक्ष ने जताई नाराजगी
मरीजों और उनके परिजनों का हाल जानने पहुंचे नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद कुमार भगत ने मौके की स्थिति को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं और ड्यूटी सिस्टम को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
रक्षाबंधन जैसे दिन जब सड़क हादसों में घायल होकर लोग इलाज की उम्मीद में जिला अस्पताल पहुंच रहे थे, उस दौरान ड्रेसिंग रूम से जुड़ा यह मामला सामने आना अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
जांच के बाद ही साफ होगी सच्चाई
अब पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की जरूरत महसूस की जा रही है। जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित वार्ड बॉय उस समय ड्यूटी पर था या नहीं, वह किसकी अनुमति से ड्रेसिंग रूम में मौजूद था और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो मरीजों की ड्रेसिंग जैसे संवेदनशील कार्य की जिम्मेदारी उसे किस परिस्थिति में दी गई।
साथ ही यह भी तय होना चाहिए कि यदि अस्पताल की ड्यूटी व्यवस्था में लापरवाही सामने आती है, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई की जाती है।
फिलहाल मामले ने जशपुर जिला अस्पताल की ड्यूटी व्यवस्था, कर्मचारियों की निगरानी और मरीजों की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।