ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे के हाईटेक नेटवर्क पर रायगढ़ पुलिस का बड़ा प्रहार, 5 सेकेंड पहले मैच अपडेट देने वाला सॉफ्टवेयर इंजीनियर गिरफ्तार
रायगढ़, 7 जून। रायगढ़ पुलिस द्वारा ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा नेटवर्क के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘ऑपरेशन अंकुश’ के तहत एक बड़ी कार्रवाई करते हुए साइबर थाना पुलिस ने एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को गिरफ्तार किया है, जो क्रिकेट सट्टेबाजों को विशेष सट्टा आईडी उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें तकनीकी सहायता भी प्रदान कर रहा था। आरोपी द्वारा ऐसी वेबसाइट तैयार की गई थी, जिसमें क्रिकेट मैच की लाइव जानकारी सामान्य टेलीविजन प्रसारण से लगभग पांच सेकेंड पहले दिखाई देती थी। इस तकनीकी बढ़त का फायदा उठाकर सटोरिये बॉल-टू-बॉल सट्टेबाजी में अनुचित लाभ प्राप्त कर रहे थे।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी और नगर पुलिस अधीक्षक मयंक मिश्रा के मार्गदर्शन में साइबर थाना रायगढ़ द्वारा ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि न्यू शंकरनगर क्षेत्र में रहने वाला एक युवक अपने घर से ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा संचालन के लिए आईडी तैयार कर बेच रहा है तथा तकनीकी सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। सूचना मिलने पर साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक विजय चेलक के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मौके पर दबिश दी।
पुलिस को देखकर एक युवक भागने का प्रयास करने लगा, लेकिन पुलिस टीम ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। पूछताछ में उसने अपना नाम आदर्श कुमार केशरी (28 वर्ष) निवासी न्यू शंकरनगर, रायगढ़ बताया। जांच के दौरान उसके कब्जे से ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा संचालन और आईडी निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मिले। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने अपराध स्वीकार करते हुए पूरे नेटवर्क के संबंध में कई अहम जानकारियां दीं।
जांच में सामने आया कि आदर्श कुमार केशरी बी.टेक इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुका है और वर्तमान में दिल्ली की एक आईटी कंपनी में कार्यरत है। अक्टूबर 2025 में उसकी मुलाकात रायपुर और बिहार के दो युवकों से हुई, जो नोएडा की आईटी कंपनियों में नौकरी करते हैं। इन्हीं के माध्यम से वह ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा नेटवर्क से जुड़ा और ‘विनबिगप्रो’ नामक प्लेटफॉर्म के तकनीकी संचालन एवं प्रबंधन का कार्य संभालने लगा। इसके बदले उसे नेटवर्क से होने वाली आय का लगभग 20 प्रतिशत कमीशन प्राप्त होता था।
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने और उसके साथियों ने क्रिकेट मैचों के प्रसारण में आने वाले तकनीकी विलंब का अध्ययन कर ऐसी वेबसाइट विकसित की थी, जिसमें लाइव मैच की जानकारी सामान्य टीवी प्रसारण से लगभग पांच सेकेंड पहले उपलब्ध हो जाती थी। यही तकनीकी बढ़त सटोरियों के लिए सबसे बड़ा हथियार थी, जिससे वे बॉल-टू-बॉल सट्टेबाजी में अन्य लोगों से पहले निर्णय लेकर लाभ कमा रहे थे।
आरोपी और उसके साथी देशभर में संचालित विभिन्न क्रिकेट सट्टा वेबसाइटों और डोमेन का अध्ययन कर उनसे मिलते-जुलते नए प्लेटफॉर्म तैयार करते थे। इन प्लेटफॉर्मों के माध्यम से रायपुर, भिलाई, बिलासपुर सहित देश के कई बड़े शहरों के सटोरियों को आईडी उपलब्ध कराई जाती थी। पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए समय-समय पर वेबसाइटों के नाम, यूजर आईडी और पासवर्ड भी बदल दिए जाते थे। पूरे सिंडिकेट में अलग-अलग लोगों को सोशल मीडिया प्रचार, आईडी बिक्री और वेबसाइट निर्माण जैसे कार्य सौंपे गए थे।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी केवल सट्टा आईडी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं था, बल्कि सटोरियों के भुगतान और विड्रॉल संबंधी कार्यों में भी सहयोग करता था। पुलिस को जानकारी मिली है कि आरोपी का एक एचपी कंपनी का लैपटॉप दिल्ली स्थित उसके ठिकाने पर रखा हुआ है, जिसका उपयोग वेबसाइट डेवलपमेंट और ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा संचालन के लिए किया जाता था। पुलिस अब उस लैपटॉप और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है।
साइबर थाना पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक सैमसंग एस-23 और एक वनप्लस मोबाइल फोन जब्त किया है। जांच में आरोपी का कृत्य छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम 2022 की धारा 4 एवं 7 तथा आईटी एक्ट की धारा 66(डी) के तहत अपराध पाए जाने पर साइबर थाना रायगढ़ में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया गया। आरोपी को न्यायालय में प्रस्तुत कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। मामले की विवेचना जारी है और पुलिस पूरे सट्टा सिंडिकेट से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है।
इस कार्रवाई में निरीक्षक विजय चेलक के नेतृत्व में सहायक उप निरीक्षक नंदकुमार सारथी, ज्योत्सना शर्मा, प्रधान आरक्षक रूपराम पटेल, दुर्गेश सिंह तथा आरक्षक रविन्द्र गुप्ता, विकास प्रधान और मनोज पटनायक की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा कि ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा जैसे अवैध नेटवर्क पर रायगढ़ पुलिस की लगातार नजर है। तकनीकी विशेषज्ञता का दुरुपयोग कर अपराध को बढ़ावा देने वालों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। पुलिस का उद्देश्य केवल सटोरियों को पकड़ना नहीं, बल्कि उनके पूरे तकनीकी और आर्थिक नेटवर्क को ध्वस्त करना है।